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भोजपुरी साहित्य

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Comment by Manan Kumar singh on February 27, 2016 at 9:03pm
#गजल#
***
अइसन मौसम आइल बा
मनवा अब फगुआइल बा।1

खिल रहल बा कली गुलाबी
भौंरा खूब अगराइल बा।2

टहले के मिलल तब निमन
नाहीं तब गभुआइल बा।3

कर रहल मनुहार गुनगुन
कली अबहीं अलसाइल बा।4

पाठ पढवलख जब पुरवाई
कलिया खुल मुसुकाइल बा।5

रंग-बिरंगी छटा फिजा में
पलभर में छितराइल बा।6

चुनरी उड़ल जात हवा में
बड़गद के हिया जुराइल बा।7

बहुते उपर उड़ते-उड़ते
गमछा जाके अझुराइल बा।8

कह रहल सब लोग चहक के
अबहिंए फगुआ आइल बा।9
मौलिक व प्रकाशित@मनन
Comment by Manan Kumar singh on February 27, 2016 at 9:03pm
#गजल#
***
अइसन मौसम आइल बा
मनवा अब फगुआइल बा।1

खिल रहल बा कली गुलाबी
भौंरा खूब अगराइल बा।2

टहले के मिलल तब निमन
नाहीं तब गभुआइल बा।3

कर रहल मनुहार गुनगुन
कली अबहीं अलसाइल बा।4

पाठ पढवलख जब पुरवाई
कलिया खुल मुसुकाइल बा।5

रंग-बिरंगी छटा फिजा में
पलभर में छितराइल बा।6

चुनरी उड़ल जात हवा में
बड़गद के हिया जुराइल बा।7

बहुते उपर उड़ते-उड़ते
गमछा जाके अझुराइल बा।8

कह रहल सब लोग चहक के
अबहिंए फगुआ आइल बा।9
मौलिक व प्रकाशित@मनन
Comment by Manan Kumar singh on October 10, 2015 at 11:38pm
वोटर के उद्गार
भउजी कहली समझावल जाई,
चलीं फेर वोट गिरावल जाई।
बात बनउअल भइल बहुत अब
एकनी के आज बतावल जाई।
बहुते नाच नचवलख इ सब
एकनी के आज नचावल जाई।
बे पगहा के बैल बनल सब
पगहा आज लगावल जाई।
बेच बेच केतना खैलन सन
चलीं आज बतावल जाई।
बाँट देलख सब घर-समाज इ
एकनी के धूल चटावल जाई।
भइया-भउजी भइल बहुत
अब बढ़नी पीठ बजावल जाई
बिना किये कुछ काम अइलन सब
एकनी के दूर भगावल जाई।
घूम रहल बेलज मुँहझौंसा सब
अब दाढ़ी में आग लगावल जाई।
मौलिक व अप्रकाशित@मनन
Comment by Manan Kumar singh on October 10, 2015 at 11:37pm
वोटर के उद्गार
भउजी कहली समझावल जाई,
चलीं फेर वोट गिरावल जाई।
बात बनउअल भइल बहुत अब
एकनी के आज बतावल जाई।
बहुते नाच नचवलख इ सब
एकनी के आज नचावल जाई।
बे पगहा के बैल बनल सब
पगहा आज लगावल जाई।
बेच बेच केतना खैलन सन
चलीं आज बतावल जाई।
बाँट देलख सब घर-समाज इ
एकनी के धूल चटावल जाई।
भइया-भउजी भइल बहुत
अब बढ़नी पीठ बजावल जाई
बिना किये कुछ काम अइलन सब
एकनी के दूर भगावल जाई।
घूम रहल बेलज मुँहझौंसा सब
अब दाढ़ी में आग लगावल जाई।
@मनन
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on September 19, 2015 at 1:25pm
जिनगी जइसे कि छापल, समचार भईल बा।
पन्ना पन्ना निहारल, अख़बार भईल बा।।

केहू कुल्टा कहेला, केहू ताना सुनावे।
कउनो रहिया चलत के, गन्दा गाना सुनावे।

अब त बेहया जवानी, दुशवार भईल बा।
पन्ना पन्ना निहारल, अख़बार भईल बा।।1।।

पियवा गइलें परदेश, ना लवटलें ये देस।
जियरा पीरा से भरल, तेज लागल बा ठेस।

घर क खर्चा सम्हारल, एक पहार भइल बा।
पन्ना पन्ना निहारल, अख़बार भईल बा।।2।।

जूठ बरतन औ पोंछा, इनके ओनके घरे।
रुपिया कम परि गइल बा, पेटवा कइसे भरे।

दूध छोटका क साहिब, जुठार भइल बा।
पन्ना पन्ना निहारल, अख़बार भईल बा।।3।।

कुछ न कहेला न पूछे, बस मनवै में खीसे।
बंद कोठरी क पल्ला, देखि देखि दांत पीसे।।

बड़का बाबू लजाला, होशियार भईल बा।।
पन्ना पन्ना निहारल, अख़बार भईल बा।।4।।

ओके कइसे बताईं, आँख कइसे मिलाईं।
मजबूरी क ई पन्ना, कहा कइसे पढ़ाईं।

बिटिया बिहये क लायक, तइयार भईल बा।
पन्ना पन्ना निहारल अख़बार भईल बा।।5।।


मौलिक अप्रकाशित
Comment by Jitendra Upadhyay on May 5, 2015 at 10:47am

bahute nik ba e pagwa ta 

Comment by shwetank gupta on April 30, 2015 at 11:37am
एगो कहानी पोस्ट कइले बानी वेटिंग मे बा
Comment by Manan Kumar singh on April 14, 2015 at 11:04pm
आदरणीय बागीजी,धन्यवाद

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 14, 2015 at 9:56pm

आदरणीय मनन कुमार जी, आप अपनी रचना सामान्य टिप्पणी बॉक्स में पोस्ट कर दिए हैं जबकि आपको अपनी रचना ऊपर में +Add a Discussion विकल्प को क्लिक कर पोस्ट करनी चाहिए, वहां आपको एडिट ऑप्शन भी मिलेगा. एक बात और ध्यान रखें कि रचना के नीचे "मौलिक एवं अप्रकाशित" अवश्य लिखें. सादर.

Comment by Manan Kumar singh on April 14, 2015 at 7:13pm
एडिट कैसे करें यह पता नहीं चल रहा है।
 
 
 

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