For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गनेश जी "बागी")

All Blog Posts (9,716)

पहचान का संकट

(अविजित राय की हत्या जैसे कायरतापूर्ण कृत्य ने दहला दिया...दुनिया भर के अल्पसंख्यकों को समर्पित कविता)

चेहरे-मोहरे

चाल-ढाल से जब 

पहचाना न जा सका 

तब पूछने लगा वो नाम 

और मैं बचना चाह रहा बताने से नाम 

फिर यूँ ही टालने के लिए 

लिया ऐसा नाम 

जो मिलता-जुलता हो उससे कुछ-कुछ 

जिसे कहने से

बचा जा सके पहचान लिए जाने से

लेकिन ये क्या 

अब पूछा जा…

Continue

Added by anwar suhail on March 6, 2015 at 10:03pm — No Comments

सपना--

एक बार फिर शर्माजी ने जेब में हाँथ डाल कर चेक किया , गुलाल की पुड़िया पड़ी हुई थी | चटख लाल रंग का गुलाल ख़रीदा था उन्होंने ऑफिस आते हुए और सोच रखा था कि आज तो लगा के ही रहेंगे | उम्र तो खैर उनकी ५५ पार कर चुकी थी लेकिन पता नहीं क्यों इस बार होली खेलने की इच्छा प्रबल हो गयी थी उनकी |

५ महीना पहले ही ट्रांसफर होकर आये थे इस ऑफिस में | आते ही देखा कई नयी उम्र की लड़कियां थीं यहाँ | कहाँ पिछला ऑफिस , जहाँ सिर्फ पुरुष ही थे और वो भी काफी खडूस किस्म के | लेकिन यहाँ , एक तो उनके विभाग में भी थी |…

Continue

Added by vinaya kumar singh on March 6, 2015 at 1:26pm — 3 Comments

ये नाम-करण कैसे हुआ -- डॉo विजय शंकर

नाम , नाम , नाम ,

नाम से तो यश है,

गौरव है , शान है,

व्यक्ति यशस्वी है,

जीते जी महान है ,

तदोपरांत पूज्य है,

वंदन है , गान है |

कितने नाम हमने दिए ,

कितने महान पैदा किये ,

देव है, पिता है, चाचा है,

भाई जी,ताऊ ,अम्मायें हैं

देवता कितने संख्य हैं,

नेता कितने असंख्य हैं ,

हम सर्वत्र नतमस्तक हैं ,

पर कितने नगणय हैं ,

सब नाम हमारे अपने हैं ,

नामकरण सब अपने हैं ,

मदर इंडिया फिल्म बनी ,

इंडियाज़ डॉटर कौन बनी… Continue

Added by Dr. Vijai Shanker on March 6, 2015 at 1:09pm — 2 Comments

अभिव्यक्तियाँ

अभिव्यक्तियाँ

किस्से कहानी कविताएँ 

सब अभिव्यक्तियाँ जीवन की 

कहाँ तक साधू अपेक्षायें 

गुरुजन गुणीजन की ?

मन की बेकली है 

लिखने का प्रथम उदेश्शय 

हो जाऊ सफल जो मानकों

पर चलूँ /दूँ गहन संदेश |

बिन पथों से डिगे 

होंगी कैसे राहे प्रशस्त 

नव सृजन की ?

अलंकारों से छंदों को साधना 

क्या संकुचित बस यहीं तक 

साहित्य की आराधना 

अर्थ क्या रह जाएगा 

जो ना हो इनमें 

जीवन-तत्व अवशिष्ट…

Continue

Added by somesh kumar on March 6, 2015 at 8:54am — 2 Comments

होली है

आओ होली मिलन कर लें
जला बुराईयों को
अच्छाईयों को दिल में भर लें
मगर देखो तुम
होली की हुड़दंग में
रंग मुहब्बत का
ना इस तरहां लगाया करो
खेलो होली रंगों से
मगर दिल तक
ना आया करो
भांग का नशा है
थोड़ा संभल जाया करो
होली तो भूल जाओगे
अगले दिन
मगर दिल पे लगे रंगों को
जन्म भर ना भुला पाओगे
और हमें यूँ हीं ताउम्र
बे-वजह तड़पाओगे !!

मौलिक व अप्रकाशित

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 6, 2015 at 4:48am — No Comments

सुन् री सखी ....

सुन री सखी फिर फागुन आयो

याद पिया की बहुत रुलायो

इत उत डोलूँ, भेद ना खोलूँ

बैरन नैना भरि-भरि आयो

सुन री सखी फिर ........



जब से गये परदेश पिया जी

भेजे न इक संदेश जिया की

इक-इक पलछिन गिन के बितायो

सुन री सखी फिर ........

ननदी हँसती जिठनी हँसती

दे ताली देवरनियो हँसती

सौतनिया संग पिया भरमायो

सुन री सखी फिर .....



खूब अबीर गुलाल उड़ायें

प्रेम रंग, सब रंग इतराएँ

बिरहा की अगनी ने मोहे जलायो

का पिया ने मोहे,…

Continue

Added by Meena Pathak on March 5, 2015 at 11:42pm — 1 Comment

रंगों के पर्व होली पर

रंगों के पर्व होली पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनायें -जगदीश पंकज

उड़ने लगा गुलाल,

अबीर हवाओं में

रंगों का त्यौहार

रंगीली होली है

मस्त हवा के

झोंकों ने अंगड़ाई ले

अंगों पर कैसी

मदिरा बरसाई है

मौसम की रंगीन

फुहारों से खिलकर

बजी बावरे मन में

अब शहनाई है

लगा नाचने रोम-रोम

तरुणाई का

मौसम ने मस्ती की

गठरी खोली है

रंगों की बौछारों ने

संकेत किया

रिश्तों की अनुकूल

चुहल अंगनाई में

जीजा-साली ,कहीं…

Continue

Added by JAGDISH PRASAD JEND PANKAJ on March 5, 2015 at 11:20pm — No Comments

होली.....(गंगा धर शर्मा 'हिंदुस्तान')

......होली......



होली है त्यौहार रंगों का , 

आओ तन मन रंग लें .

हो खुशियों की बौछार , 

आओ तन मन रंग लें.



सबका हो हर अरमान पूरा 

ना सपना रहे अधूरा



जिसकी जितनी चाहत हो

उतना उसको मिल जाये

बस खुशियों की बारिस हो

और तन मन खिल जाये



प्यार प्यार बस प्यार रहे 

सारी दुनिया के भीतर

और किसी भी भाव का 

हो ना पाए असर



इस होली पर इसी भाव को

बस अपने मन में पालें 

प्यार छोड़ कर…

Continue

Added by Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' on March 5, 2015 at 10:30pm — No Comments

होली आई होली आई.....

मधुशाले भी बोल रहे.... होली आई होली आई

भंग घुटेगी रस गन्ने में होली आई होली आई

है सरकारी फ़रमान ....

प्यारे बन्द रहेगी दुकान

साकी अकेली प्याले अकेले

हथ जोड़ करें आह्वान

आजा ..आ जाओ श्रीमान 

बोतल... अद्दी पउआ ले जा

रम भिस्की ए दउआ ले जा

भर लो... सारो मकान

ओ बन्द रहेगी दुकान

मयखाने भी बोल रहे होली आई होली आई

रंग घुलेंगे दंग रहेंगे होली आई होली आई

इक दिन पहले प्यारे ले जा

ज़ाम जहां के न्यारे ले जा

बम भोले का प्रसाद…

Continue

Added by anand murthy on March 5, 2015 at 10:08pm — 1 Comment

होली है

आया फ़ाग का मौैसम मुझे सपने सजाने दो

दिल के पास जो रहता उसी के पास जाने दो

तू मेरे रंग में रंग जा मैं तेरे रंग को पा लूँ

प्रियतम ने प्रिया से आज मन की बात खोली है

अधूरा श्याम राधा बिन ,राधा श्याम की हो ली

दिलों में प्यार भरने को आयी आज फिर होली

होली की असीम शुभकामनायें

तन से तन मिला लो अब मन से मन भी मिल जाये

प्रियतम ने प्रिया से आज मन की बात खोली है

ले के हाथ हाथों में, दिल से दिल मिला लो आज

यारों कब मिले मौका अब छोड़ों ना कि होली…

Continue

Added by Madan Mohan saxena on March 5, 2015 at 5:27pm — 1 Comment

मनहरण घनाक्षरी - "होली"

रंग की उमंग देखो होली हुडदंग देखो ,
लाल लाल रंग डाल सखी सारी लाल हैं |

राग फाग छेड़ कर भाभी आई झूम झूम
पल में ही रंगी सखी मुख पे गुलाल हैं |

पीली पीली पिचकारी रंग हरा खूब डारी
भागी सखी घूम घूम हमको मलाल है |

अब नहीं दिख रही होली वह भोली भाली
मन मेरे बार बार उठता सवाल है |

(मौलिक अप्रकाशित)

Added by Chhaya Shukla on March 5, 2015 at 1:27pm — 1 Comment

सर्वश्रेष्ठ कविता : लघुकथा –हरि प्रकाश दुबे

“ कवि सम्मलेन का भव्य आयोजन हो रहा था, सभागार श्रोताओं से खचाखच भरा हुआ था , देश के कई बड़े कवि मंच पर उपस्तिथ थे, मंच संचालक महोदय बार –बार निवेदन कर रहे थे की अपनी सर्वश्रेष्ठ रचना का पाठ करें, इसी श्रृंखला में उन्होंने कहा, अब मैं आमंत्रित करता हूँ, आप के ही शहर से आये हुए श्रधेय कवि विद्यालंकार जी का, तालियों से सभागार गूँज उठा !”

“तभी मंच संचालक महोदय ने उनके कान में कहा ‘सर कृपया १५ मिनट से ज्यादा समय मत लीजियेगा’ !”

“विद्यालंकार जी ने मंच पर आसीन कवियों एवम् श्रोताओं से…

Continue

Added by Hari Prakash Dubey on March 5, 2015 at 12:49pm — 4 Comments

अचानक याद आया --- डॉo विजय शंकर

कहते हैं गुलाब के साथ

कांटे जरूर होते हैं ,

पर कुदरत ने जीता जागता एक गुलाब ,

ऐसा भी बनाया है कि बनाने वाले की माया

कोई समझ नहीं पाया है,

उसको काँटों से बिलकुल मुक्त बनाया है,

इसे कुदरत की मेहरबानी कहें या नाइंसाफी ,

जो जिंदगी देती हैं उसकी ही जिंदगी को

इस कदर कमजोर बनाया है,

हद हो गयी आदमी ने इसी का

हर तरह से बस फायदा ही उठाया है ,

मर्द होने की अपनी जिम्मेदारियों को

बस यह कह कर निभा दिया है ,

कि हमने मेमने को बता दिया ,

घर… Continue

Added by Dr. Vijai Shanker on March 5, 2015 at 11:09am — 10 Comments


AMOM
तरही ग़ज़ल -- "फानी है ये जहान यहाँ कुछ न लाजवाल"

221-2121-1221-212



चेहरे सभी ड़रे ड़रे आवाज़ पुर-मलाल

दहशत में आया शह्र ये, जब से हुआ बवाल



दुनिया की इस बिसात पे सपनों का दांव है

हर आदमी के ख़ू में छुपी इक अजीब चाल



मौला हो पादरी हो कोई संत हो यहाँ

दिखता न मुझको एक भी महबूब-ए-ज़ुल-जलाल



लीडर हमारे देश के बहरूपिये हुए

अन्दर से सारे भेड़िये, बाहर कोई हो खाल



रस्मो रिवाज़ ही रहे रिश्तों के दरमियाँ

अब कौन पूछता है यहाँ दिल से हाल-चाल



हर 'आम' ज़िन्दगी का लगे बोझ ढ़ो… Continue

Added by दिनेश कुमार on March 5, 2015 at 10:00am — 1 Comment

ग़ज़ल - पाँव में जंजीर है.... (मिथिलेश वामनकर)

2212 / 2212 / 2212 / 2212----- (इस्लाही ग़ज़ल)

 

दिल खोल के हँस ले कभी,  ऐसी कहाँ तस्वीर है

यारो चमन की आजकल इतनी कहाँ तकदीर…

Continue

Added by मिथिलेश वामनकर on March 5, 2015 at 9:30am — 8 Comments

ग़ज़ल .........;;;गुमनाम पिथौरागढ़ी

२२ २२ २२ २२

जाने क्या क्या सोचा होगा
घर पे घर जब तन्हा होगा

खुद में खुद को ढूँढा होगा
थोडा मुझको पाया होगा

मेरे बिन रह के घर,गम
मुझको भी तो तरसा होगा

घर से जब भी निकली लड़की
माँ ने रोका टोका होगा

डांट बुजुर्गों की चुभती है
स्वाद दवा क्या मीठा होगा

खिड़की और न दरवाजा है
अंतिम कमरा ऐसा होगा

मौलिक व अप्रकाशित

गुमनाम पिथौरागढ़ी

Added by gumnaam pithoragarhi on March 4, 2015 at 6:18pm — 5 Comments

दोहे भाग 3

घूँघट पट क्यों ओढ़ती,तुम पर मैं बलिहार

घट मेरे बसती सदा,तुम पर जान निसार ॥

गोरी तुम मैं सांमला,प्रीत घनेरी होय

राधा वर मैं बन गया,जो होए सो होय ॥

बंशी मेरी टेरती , तुम को सुबहो शाम

दर्शन श्यामा के बिना ,हमें कहाँ आराम॥

बहुत हुआ अब चुप रहो,नटवर नागर नन्द

मदन माधुरी डालते, भरते दिल आनन्द ॥

पुष्प लता हुई बाबरी ,प्रेमातुर संसार

कंठ कंठ में रम रहे,दामोदर करतार॥

मौलिक व अप्रकाशित 

कल्पना…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on March 4, 2015 at 3:08pm — 4 Comments

गीतिका ... ८+८+६ २२-२२-२२-२२-२२-२.....आ जायें

इस होली पर रंग लगाने आ जायें

बचपन के कुछ यार पुराने आ जायें

 

होली-फागुन बरखा-सावन या जाड़ा

यादें तेरी ढूंढ बहाने आ जायें

 

दीवाने हो झूमा करते थे जिन पर

होठों पर वे मस्त तराने आ जायें

 

होली सुलगे भस्म न हो प्रहलाद कभी

सब नेकी का साथ निभाने आ जायें

 

सतरंगी थे इनके वादे कल यारों

लोग सियासी आज निभाने आ जायें

 

जीवन में हो पागलपन भी थोड़ा सा

दीवानों के संग सयाने आ…

Continue

Added by khursheed khairadi on March 4, 2015 at 1:40pm — 6 Comments

'जिन्दगी'

१२१ २२ १२२

अजीब है ये जिन्दगी

सलीब है ये जिन्दगी

न जान तू किस खता की

नसीब है ये जिन्दगी

इश्क जिसे है,उसी की

रकीब है ये जिन्दगी

गिने जु सांसे, बहुत ही

गरीब है ये जिन्दगी

निकाह मौत तुझसे औ

हबीब है ये जिन्दगी

‘मौलिक व अप्रकाशित’

Added by krishna mishra 'jaan'gorakhpuri on March 4, 2015 at 11:00am — 7 Comments

शादी की दावत -2

शादी की दावत-2

द्वार पर चुनमुनिया थी |

“भईया आप लोग बारात नहीं चलेंगे |उहाँ सब लोग तैयार हो गए हैं |बैंड-बाजा वाले भी आ गए हैं |सभी औरत लोग लावा लेने जा रही हैं |”

कितना बोलती है तू !क्या तू भी बारात चेलेगी ?मैंने कहा

“और क्या ?उहाँ चलकर फुलकी ,रसगुल्ला ,टिकिया खाने वाला भी तो चाहिए ना |”

“अच्छा तू चल ,हम लोग नया कपड़ा पहनकर आते हैं |”महेश भईया बोले

उसके मुड़ते ही महेश भईया ने कहा - “चलों जवानों ,कूच करते हैं |”

“मैं विद्रोह पर हूँ !शादी में…

Continue

Added by somesh kumar on March 3, 2015 at 11:30pm — 4 Comments

Monthly Archives

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dr.Vijay Prakash Sharma replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53
"धन्यवाद गिरिराज भाई"
2 hours ago
Dr.Vijay Prakash Sharma replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53
"बहुत आभार बागी जी"
2 hours ago
Ashok Sharma replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53
""होली" आया होली का त्यौहार लेकर खुशियाँ अपार। दिल खोलकर मनाओ रंगरेली खेलो प्रेम भरे…"
2 hours ago
Ashok Sharma replied to Admin's discussion खुशिया और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"Happy Birthday"
2 hours ago
kanta roy commented on Dr. Vijai Shanker's blog post ये नाम-करण कैसे हुआ -- डॉo विजय शंकर
"कितने नाम हमने दिए , कितने महान पैदा किये ,.....बहुत सुंदर रचना । बधाई"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
arun kumar nigam replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53
"आदरणीय रमेश जी, सुन्दर मालती सवैया के लिये बधाइयाँ...."
3 hours ago
kanta roy replied to Admin's discussion खुशिया और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"वाह !! बहुत सुंदर पहल है यह । सदस्यों में आत्मीयता का एहसास लिए एक भावपूर्ण पहल । बधाई"
3 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
arun kumar nigam replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53
"होली पर्व की शुभकामनाओं के साथ आप सब के प्रति आभार."
3 hours ago
Satyanarayan Singh replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53
"सादर धन्यवाद आ. मिथिलेश जी "
3 hours ago
Satyanarayan Singh replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53
"सादर धन्यवाद परम आदरणीय सौरभ जी  "
3 hours ago
krishna mishra 'jaan'gorakhpuri replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53
"शुक्रिया आ० मिथिलेश जी!"
3 hours ago
krishna mishra 'jaan'gorakhpuri replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53
"शुक्रिया सर!"
3 hours ago

© 2015   Created by Admin.

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service