इश्क में बरबाद होते जा रहे हैं
इश्क में बरबाद होते जा रहे हैं
अन सुनी फ़रियाद होते जा रहे हैं
प्यार करने का सलीका ही न आया
हम दिले-नाशाद होते जा रहे हैं
जख्म गहरे जो छुपाये हंस रहे हम
लोग कहते शाद होते जा रहे हैं
जुल्फ में उनकी परिंदे कैद हो…
Added by SANDEEP KUMAR PATEL on June 2, 2012 at 12:16pm — 1 Comment
दो साल पहले मैं बेरोज़गार था, बेरोज़गार था
फ़िल्म : सी आई डी
तर्ज़ : सौ साल पहले......
दो साल पहले मैं बेरोज़गार था, बेरोज़गार था,
आज भी हूँ और कल भी रहूँगा
दोस्तों-पड़ोसियों का कल…
Added by Albela Khatri on June 2, 2012 at 7:59am — 8 Comments
खून के उफान को ....
टूटते हैं टूटने दो, अब ह्रदय के तार को
छूटते हैं छूटने दो, खून के उफान को
हटो छोडो रास्ता अब, कफ़न सर पर लिये हैं
मौत से अब डर किसे है, मौत से लगते गले हैं
सह चुके अब ना सहेंगे, इस देश के अपमान को
टूटते हैं टूटने दो, अब ह्रदय के तार को
विश्व में उपहास के, कारण बनाये जाते हैं
खद्दरों के भेष में, दीमक हजम कर जाते हैं
इस देश की संपत्ति और, इस देश के सम्मान को
छूटते हैं छूटने दो, खून के उफान को
आम आदमी यहाँ, हाशिए में होता है
जिंदगी कि दौड…
Added by UMASHANKER MISHRA on June 2, 2012 at 12:30am — 3 Comments
गहरा है ये सागर बहुत साहिल ही नही है
ये दिल मेरा अब इश्क के काबिल ही नहीं है
बिखरा है जो अब टूट के वो दिल ही नहीं है
हम जीते थे जिस शान से यारों के साथ में
वो छूटे हैं पीछे सभी महफ़िल ही नहीं है
गम हैं मेरा जो जान से मारेगा एक दिन
जो गम को डाले मार वो कातिल ही नहीं…
Added by SANDEEP KUMAR PATEL on June 1, 2012 at 5:00pm — 7 Comments
बेटी न होती
जीवन और मृत्यु
आत्मा परमात्मा
सत्य और असत्य
शाश्वत मूल्यों का सत्य
धूप और छाँव
साथ नहीं होती
गमछा संग धोती
बिना सीप मोती
बगैर दीप ज्योति
स्त्री स्त्री देख रोती
पोता हो या पोती
कैसे मिलता जीवन का
अनुपम सुन्दर उपहार
किसी घर में बेटी न होती
Added by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 1, 2012 at 4:30pm — 5 Comments
व्यंग रचना- अर्थ-तंत्र पर भारी
Added by Laxman Prasad Ladiwala on June 1, 2012 at 3:00pm — 11 Comments
ग़ज़ल
फिर से गुजरे वो पल याद आने लगे
भूल जाने में जिनको ज़माने लगे
हैं वही शोखियाँ है वही बांकपन
जितने मंज़र हैं सारे पुराने लगे
कोनसी शै हे जिसपर भरोसा करें
अब तो साए भी अपने डराने लगे
उनको खुशियाँ मिलीं हे ख़ुदा का करम
हाथ अपने ग़मों के खजाने लगे
अपनी हसरत बताने जिन्हें आये थे
वो तो अपना ही मुज़्दा सुनाने लगे
Added by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on June 1, 2012 at 2:55pm — 8 Comments
खुशखबरी (कहानी)
हैलो हैलो !! हैलो बेटा बोल ! माँ खुशखबरी है आपको पोता हुआ है, इतना कहकर रोहित ने फ़ोन रख दिया | रेखा के पाँव तो ख़ुशी के मारे जमीन पर नहीं पड़ रहे थे, उसी समय बहुत सारी मिठाई लाकर पूरी कालोनी में बाँट दी | फिर तैयार होकर हॉस्पिटल पंहुच गई और सारे कर्मचारियों को मिठाई बांटी, आयाओं को सौ- सौ के नोट भी दिए और फिर बहु के पास पोते को देखने पहुंची वहां पर डॉक्टर भी राउंड पर आई हुई थी देखते ही रेखा एक पूरा मिठाई का डिब्बा डॉक्टर की तरफ देते हुए बोली आप भी मेरे पोते के होने की मिठाई खाओ |…
ContinueAdded by rajesh kumari on June 1, 2012 at 10:30am — 13 Comments
ये सिर्फ अपनों के लिये ही बहते हैं
कदम उनसे दूर जाने लगे
Added by ajay singh on June 1, 2012 at 9:36am — 4 Comments
भारत बन्द महोत्सव.........
पप्पू ने पूछा पापा,
ये भारत बन्द क्या होता है ?
पापा मुस्कुराया
पप्पू को बताया -
बेटा,
मेरा भारत महान में लोकतान्त्रिक सरकार है
और भारत बन्द हमारा राजनैतिक त्यौहार है
जो विपक्ष द्वारा मनाया…
Added by Albela Khatri on June 1, 2012 at 9:30am — 5 Comments
ऐ मन निराश तुम मत होना
ऐ मन निराश तुम मत होना, मंज़िल तुझको मिल जायेगी
अपना न कभी धीरज खोना, फिर तो दुनिया हिल जायेगी।।…
Added by आशीष यादव on June 1, 2012 at 8:30am — 3 Comments
“हूँ, कुछ कहा”. “कुछ भी तो नहीं”.”मुझे लगा शायद तुम कुछ बोले”. अक्सर ऐसा होता है जब किसी से बात करने का मन हो किन्तु जुबान खामोश हो.एक आवाज कान में गूंजने का आभास होता है.खामोशी में भी ये आवाज कहाँ से आती है? ये आभास कैसे होता है? कभी नहीं जान सका. कई बार घर में अकेले बैठे हों और बाहर से दरवाजा खटखटाने की आवाज आती है जब हम वहाँ जाकर देखते हैं तो पता चलता है वहाँ तो कोई भी नहीं है.…
Added by Ashok Kumar Raktale on June 1, 2012 at 7:30am — 5 Comments
एक सैनिक की चिट्ठी/कविता
है प्रिय तुम्हारा पत्र देख,झंकृत मन का हर तार तार
लगता है जैसे स्वयं तुम्ही सम्मुख हो कर सोलह सिंगार
स्मृतियों के प्रकाश से तम एकाकीपन का क्षीण हुआ
पा प्रीत ऊष्मा शब्दों की हिम का भी शीत विदीर्ण हुआ
हाँ माह कई हैं बीत गए पर शायद और प्रतीक्षा है
मिलने हेतु व्याकुल मन मे तुम सम ही घोर तितिक्षा है
तुम कहती हो घर आऊँ तो उस रोज़ ही दीवाली…
ContinueAdded by Seema agrawal on June 1, 2012 at 1:30am — 7 Comments
जिंदगी का सफ़र
कभी कभी सोचता हूँ
यह जिंदगी मुझे कहाँ ले कर चल पड़ी
क्या सोचा था क्या हुआ था
क्या खोया था क्या रोया था
न जाने कितनी थी मजबूरियां इतनी
किस मोड़ पे ले आई है ये जिंदगी
में कहाँ आ खड़ा हूँ
होश आई तो पता चला में किस मोड़ पे खड़ा पाया
जिंदगी तेरे संग जीना सीख लिया
तेरे गीत गुनगुनाता हूँ
तेरे संग चलता हूँ
खूबसूरत सफ़र है तू
हरदम हर पल कुछ नया है
कुछ कर गुजरने की तमन्ना है तू
खुशियाँ की बौछार है
हर दिन एक नया…
Added by Rohit Singh Rajput on May 31, 2012 at 6:30pm — 4 Comments
धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई
आज 31 मई विश्व तम्बाकू विरोधी दिवस पर एक विशेष रचना
सुट्टों ने सोखा जिस्म, सेहतमन्दगी गई
धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई
छुप छुप के पीना छोड़, खुल्लेआम पी रहे
माँ की लिहाज़, बाप से शरमिन्दगी गई
गुटखा चबाने वाले की…
Added by Albela Khatri on May 31, 2012 at 4:30pm — 34 Comments
तेरे प्रेम में मैंने प्रेम गीत गाया
तेरे प्रेम में मैंने प्रेम गीत गाया
मैंने प्रेम गीत गाया
मैंने प्रेम गीत गाया
मन में छुपाया है प्रेम तेरा
तन में बसाया है प्रेम तेरा
आँखों की प्यास है प्रेम तेरा
जीवन की आश है प्रेम तेरा
मेरे मन को,…
Added by SANDEEP KUMAR PATEL on May 31, 2012 at 1:40pm — 17 Comments
तेरी निगाह की जादूगरी मैं कैसे लिखूं
तेरी निगाह की जादूगरी मैं कैसे लिखूं
दिखी तराश जो हुश्ने-परी मैं कैसे लिखूं
यहाँ 'न' दिल बिका पामाल का चाहत के लिये
दिवानगी लगी सौदागरी मैं कैसे लिखूं
न कायनात सी दिलकश यहाँ पे शै है कोई
खुदा बता तेरी कारीगरी मैं कैसे लिखूं
न तोड़ आइना झूठा कभी ये होगा नहीं
बड़ी कमाल है…
Added by SANDEEP KUMAR PATEL on May 30, 2012 at 10:30pm — 14 Comments
जीवन तुझसे एक वर माँगू
जीवन तुझसे एक वर माँगू
पाप पुण्य से दूर
जीवन की समझ माँगू
एकाकी अगर सत्य हो तो
तथागत बनने का वर माँगू
आवेश ही एक मात्र मार्ग हो तो
दुर्योधन का आवेश पाऊँ
क्षमा ही ध्येय हो तो
युधिष्ठिर का मन पाऊँ
समर्पण ही अगर सत्य हो तो
समर्पण की धुरी पर जो कर्ण पिसा
मैं भी समर्पित हूँ
उपेक्षा अगर सत्य हो तो
एकलव्य सा ध्यान…
ContinueAdded by arunendra mishra on May 30, 2012 at 9:30pm — 16 Comments
कोशिशों के समंदर
कोशिशों के समंदर से कामयाबी के मोती ढून्ढ लायेंगे
Added by Rohit Dubey "योद्धा " on May 30, 2012 at 8:00pm — 14 Comments
साहित्य साधना इष्ट आराधना
पवित्रतम ह्रदय निस्सृत पूजा है,
निर्मल निर्झर भाव सरिता ये
उद्गम अन्तः मन जिसका है,…
Added by Dr.Prachi Singh on May 30, 2012 at 7:30pm — 22 Comments
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कुछ आवश्यक लिंक्स
| 2-ग़ज़ल तक्तीह प्रणाली पर एक चर्चा | 3-ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) -1, | 4-ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) -2 |
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