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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव
  • 69, Male
  • धमतरी , छत्तीसगढ़
  • India
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 77 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया सुनंदाजी इस अति सुंदर भावपूर्ण छंद के लिए हार्दिक बधाई।"
Sep 16
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"आदरणीया सुनंदाजी इस अति सुंदर भावपूर्ण छंद के लिए हार्दिक बधाई।"
Sep 16
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"आदरणीय अरुण भाईजी आपकी रचना हम पाठकों के लिए सीखने का एक जरिया है। आल्हा छंद बारीकियाँ और खूबियाँ दोनो इसमें है। हार्दिक बधाई।"
Sep 16
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"आदरणीय  मिथिलेश भाईजी उत्साहवर्धन और प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार।"
Sep 16
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"आदरणीया सुनंदाजी उत्साहवर्धन और प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार।"
Sep 16
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"आदरणीय आरिफ भाई उत्साहवर्धन और प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार।"
Sep 16
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"आदरणीय अरुण भाईजी छंद बद्ध प्रतिक्रिया उत्साहवर्धन और प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार। आपकी सलाह उचित है संकलन में प्रयास करूँगा।  "
Sep 16
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"आदरणीय सत्यनारायण भाईजी उत्साहवर्धन और प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार।"
Sep 16
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"आदरणीय अशोक भाईजी सच है , यह शाम का ही दृश्य है । देश प्रेम का भाव  जगाती, दुश्मनों को ललकारती आपकी यह रचना आल्हा छंद और चित्र के अनुरूप है। हार्दिक बधाई। सकल विश्व में होती है अब, भारत की ही जय-जयकार || ....सकल विश्व में होती है अब, भारत माँ…"
Sep 15
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"आदरणीया प्रतिभाजी उत्साहवर्धन और प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार।"
Sep 15
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"धन्यवाद आदरणीय सौरभ भाईजी"
Sep 15
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"आदरणीय समर कबीर भाईजी उत्साहवर्धन और प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार।"
Sep 15
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"आदरणीय समर कबीर भाईजी आपकी रचनायें इतनी अच्छी और साथ ही विधा और विषय के अनुरूप होती हैं कि आपका प्रथम प्रयास भी प्रथम नहीं लगता। इस सुंदर प्रस्तुति  पर मेरी हार्दिक बधाई।"
Sep 15
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"आदरणीय सुरेश भाईजी बहुत विस्तार से आल्हा छंद में रचना प्रस्तुत की है। शब्द , भाव , प्रवाह सभी सुंदर और चित्र के अनुरूप। हृदय से बधाई। बदल गया फिजा संग मौसम,सुन शमशीरों की टंकार। ... बदल गया  मौसम भी देखो ,सुन शमशीरों की झंकार। महकी धरती चढ़ता…"
Sep 15
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"आदरणीया प्रतिभाजी डर कर जीना भी क्या जीना, डर है सारे दुख का मूल I  सपनों के पथ पर ये बैरी,  बो देता है अक्सर शूल II ...  वाह  ! संत वाणी चित्र को केन्द्रित कर आल्हा छंद में आम जन को अच्छी और उपयोगी सीख दी है। हार्दिक बधाई"
Sep 15
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"आदरणीय सुरेश भाईजी उत्साहवर्धन और प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार। अच्छा है  आप सदा इसी तरह सक्रिय रहिए।"
Sep 15

Profile Information

Gender
Male
City State
छत्तीसगढ़
Native Place
धमतरी
Profession
सेवा निवृत्त
About me
कविता / सामयिक हास्य व्यंग्य / भजन/ आदि लेखन कार्य

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव's Blog

बीते बरस का लेखा जोखा [अखिलेश कृष्ण ]

प्याज सब्जियाँ आलू दाल, किया हमें सब ने बेहाल।

खट्टी मीठी कड़वी यादें, देकर बीता पिछला साल॥

चारों तरफ से कर्जा उस पर, सभी फसल बर्बाद हुए।

आत्महत्या किसानों ने की, बात दुखद गंभीर सवाल॥

दस राज्य केंद्र में शासन है, पर बढ़ा मांस निर्यात।

चौंकाने वाली ये खबर है, गौ माता भी हुई हलाल॥

करोड़ों खर्च हुए संसद पर, काम के नाम पे ठेंगा है।

बस नारेबाजी बहिर्गमन, पुतलों का दहन, हड़ताल॥

आरोप और प्रत्यारोप हुए, मंत्री विधायक…

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Posted on January 1, 2016 at 7:37pm — 4 Comments

साहित्यकार कलाकार या गिरगिट के अवतार [व्यंग्य]. अखिलेश कृष्ण

अजी सुनते हो ..... पप्पू के पापा ।

 

धीरे बोलो भागवान, पड़ोसी क्या सोचेंगे।

 

मैंने कहा छोटे बड़े मँझले साहित्यकारों और पुरस्कृत कुछ लोग लुगाइयों में सम्मान लौटाने की होड़ लगी है। इन सब के थोपड़े हर चैनल्स में बार बार दिखाया जा रहा है। आप भी अपना सम्मान लौटा दीजिये।

 

कौन सा सम्मान ?

 

ये लो, ऐसे पूछ रहे हो जैसे 10–20  पुरस्कार और सम्मान प्राप्त कर चुके हो और सिर्फ नोबेल पुरस्कार ही लेना बाकी है। अरे जीवन में एक ही बार तो सम्मानित…

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Posted on November 20, 2015 at 2:19pm — 9 Comments

भारत की कुण्डली में तीन अमंगल ग्रह ( आल्हा छंद ) अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव

आल्हा छंद 

बरसों पहले बंधु बनाकर, चाउ -माउ चीनी मुस्काय।                                       

और उसे हम बड़े प्यार से,  भैया कहकर गले लगाय।।                            

 

हर आतंकी पाकिस्तानी, चाल चीन की समझ न आय ।                                                             

दो मुँह वाला अमरीका है, विकिलीक्स दुनिया को बताय।।                       

 

एक ओर है  पाक समस्या , और कहीं चीनी घुस जाय ।                           

*राम -…

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Posted on October 1, 2014 at 3:30pm — 12 Comments

हिन्दी - अपने ही घर में दासी (अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव)

अपने ही घर में दासी हिंदी                           

   हिंदी धीरे- धीरे समृद्ध हुई और फली फूली है। संस्कृत के सरल शब्दों, क्षेत्रीय बोलियाँ / भाषाओं को लेकर आगे बढ़ी, पवित्र गंगा की तरह लगातार कठिनाईयों को पार करते हुए । उर्दू , अरबी, फारसी आदि भी छोटी नदियों की तरह इसमें शामिल होती गईं जिससे हिंदी और मधुर हो गई। आज हिंदी के पास विश्व की किसी भी भाषा से अधिक शब्द हैं। लेकिन आजादी के बाद से सरकार की नीति से हिंदी निरंतर उपेक्षित होती गई। हिंदी के शब्द कोष में…

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Posted on September 3, 2014 at 8:30pm — 10 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 7:03pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:15pm on September 19, 2015, Dr. (Mrs) Niraj Sharma said…
माफ करें गलत जगह कमेन्ट दे दिया।
At 12:13pm on September 19, 2015, Dr. (Mrs) Niraj Sharma said…
माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हमारी ओर से आ. अखिलेश जी आपको शत शत बधाइयाँ।
At 4:40pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

At 3:32pm on January 7, 2014, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय अखिलेश जी ..महीने का सक्रीय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें ..नव बर्ष की शुभकामनाओं के साथ ही ...सादर 

At 1:55pm on January 7, 2014, Abhinav Arun said…

आदरणीय श्री अखिलेश जी माह का सक्रिय सदस्य पुरस्कार  प्रदान किये जाने पर हार्दिक बधाई और नव वर्ष की  हार्दिक शुभकामनायें !!

At 6:52pm on January 6, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

प्रिय अखिलेश जी

आपको माह का सक्रिय सदस्य बनाने पर कोटि-कोटि बधाई i

आपकी उर्जा ऐसी ही बनी रहे यही ईश्वर से प्रार्थना है i

 

At 12:17pm on January 5, 2014, Sushil Sarna said…

aa.Akhilesh Krishan Srivastav jee maheene ka skriy sadasy chune jaane pr aapko haardik badhaaee

At 9:39am on January 5, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय श्री अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर । 


आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:24pm on November 24, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

अखिलेश जी

मालिनी छंद पर आपकी सराहना का शत शत आभार  i

 
 
 

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