इस समूह मे ग़ज़ल और ग़ज़ल के तकनीकि पहलुओं पर चर्चा की जा सकती है
Location: विश्व
Members: 77
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Started by वीनस केसरी. Last reply by shakteesh dwivedi yesterday. 17 Replies 2 Likes
इस पोस्ट के पहले भाग में आपने ग़ज़ल, शाईरी, शाईरी, शेर, अशआर, मिसरा-ए-उला, मिसरा-ए-सानी, मतला, हुस्ने मतला, मक्ता, रदीफ, मुरद्दफ़ ग़ज़ल, गैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल, काफिया, बह्र, रुक्न, मात्राएं, अर्कान, जुज, लाम और गाफ का अर्थ जाना, अब आगे ... अब वो शब्द जो…Continue
Started by वीनस केसरी. Last reply by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' Apr 23. 2 Replies 0 Likes
अलग अलग दो ग़ज़ल पर दिए कमेन्ट को यहाँ इस आशय के साथ लगा रहा हूँ किइसमें कही बात से अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें ...१ - सीखा है बस निभाना रिश्ते न आज़माना;लज़्ज़त भरा कलेवा, तेरा हाथ से खिलाना; पोस्ट का लिंक = …Continue
Started by वीनस केसरी. Last reply by Saurabh Pandey Mar 31. 50 Replies 1 Like
सुधिजन, मेरी जानकारी में एब -ए- तनाफुर उर्दू लिपि को दोष है तो इसे देवनागरी लिपि में कहाँ तक मानना चाहिए और आज के बड़े {प्रसिद्ध} ग़ज़लकार भी एब -ए- तकाबुले रदीफ पर ध्यान नहीं देते यह कितना उचित है ?आप चर्चा के लिए आमंत्रित हैंनिवेदन है कि एब -ए-…Continue
Started by वीनस केसरी. Last reply by अश्विनी कुमार Mar 26. 48 Replies 3 Likes
बा-बह्र ग़ज़ल लिखने के लिए तक्तीअ ही एक मात्र अचूक उपाय है, यदि शेर की तक्तीअ करनी आ गई तो देर सबेर बह्र में लिखना भी आ जाएगा क्योकि जब किसी को पता हो कि मेरा लिखा शेर बह्र में नहीं है तभी उसे सही करने का प्रयास करेगा और तब तक करेगा जब तक वह शेर बह्र…Continue
Started by Rana Pratap Singh. Last reply by charnjit mann Feb 25. 3 Replies 1 Like
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सम्मानित सदस्योंआप सभी को प्रणाम जैसा की पहले ही अवगत कराया जा चुका है की "बह्र पहचानिए" कोई पहेली नहीं है, यह तो एक चर्चा है, इल्मे अरूज और आम आदमी की दुनिया में बरसों से चली आ रही खाई को पाटने की, इसी के तहत हमने…Continue
Started by वीनस केसरी. Last reply by Raj Lally Sharma Jan 7. 12 Replies 4 Likes
ग़ज़ल = एक समान रदीफ (समांत) तथा भिन्न भिन्न काफियों (तुकांत) से सुसज्जित एक ही वज्न( मात्रा क्रम) अथवा एक ही बह्र (छंद) में लिखे गए अलग अलग शेरों का समूह शाईरी = ग़ज़ल लिखने की प्रक्रिया शाइर / सुखनवर / ग़ज़लगो = ग़ज़ल लिखने वाला शे’र (शेअर) = एक…Continue
Started by धर्मेन्द्र कुमार सिंह. Last reply by Raj Lally Sharma Jan 7. 30 Replies 0 Likes
ग़ज़ल की बहरें समझना बहुत टेढ़ी खीर है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि बहर के बारे में जानकारी तो बहुत ज्यादा मिल जाती है अंतर्जाल पर, मगर कहीं भी व्यवस्थित ढंग से नहीं मिलती। तो जहाँ सूचना ज्यादा हो वहाँ उसको समझने में सारिणी बड़ी मददगार साबित हो सकती है।…Continue
Started by वीनस केसरी Sep 3, 2011. 0 Replies 0 Likes
धर्मेन्द्र जी ने बहुत दिन पहले एक सारिणी लगा कर ग़ज़लकारों के लिए एक महती कार्य किया था परन्तु रुक्न लिखने का काम रह गया था आज फिर से खोल कर देखा तो अब तक रुक्न नहीं लिखे थे तो सारिणी को संशोधित करके लगा रहा हूँ आशा करता हूँ जिन्हें रुक्न गिनती से…Continue
Started by shahid mirza shahid. Last reply by Tilak Raj Kapoor Jul 2, 2011. 4 Replies 0 Likes
सम्मानित साथियो...बहर पर मज़बूत पकड़ बनाने के लिए...अध्ययन...अभ्यास और गुरू का होना नितांत आवश्यक है.Continue
Started by Rana Pratap Singh Mar 3, 2011. 0 Replies 0 Likes
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सम्मानित सदस्योंआप सभी को प्रणाम जैसा की पहले ही अवगत कराया जा चुका है की "बह्र पहचानिए" कोई पहेली नहीं है, यह तो एक चर्चा है, इल्मे अरूज और आम आदमी की दुनिया में बरसों से चली आ रही खाई को पाटने की, इसी के तहत हमने…Continue
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Comment by asha pandey ojha on February 16, 2012 at 4:31pm umda jankaree
Comment by Afsos Ghazipuri on November 8, 2011 at 2:14am ग़ालिब, मीर और दाग जैसे शायरॉं ने ग़ज़ल की ज़मीन छोड़ी ही कहाँ है जहाँ ग़ज़ल की फसल उगाई जा सके, फिर भी काफिया/रदीब की बातें कर अपना मन बहला तो सकते ही हैं ? बहुत कम लोग जानते हैं की ग़ज़ल लिखी नही, कही जाती है . और कहना तो तभी होगा जब सीखा जाय ?
Comment by satyendr sengar on February 2, 2011 at 11:13pm
Comment by मनोज कुमार on February 2, 2011 at 8:30am
Comment by nemichandpuniyachandan on January 31, 2011 at 4:35pm आवश्यक सूचना:-
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Rohit Dubey "योद्धा " commented on Rohit Dubey "योद्धा "'s blog post कोशिशों के समंदर© 2012 Created by Admin.
कुछ आवश्यक लिंक्स
| 2-ग़ज़ल तक्तीह प्रणाली पर एक चर्चा | 3-ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) -1, | 4-ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) -2 |
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