For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जगदानन्द झा 'मनु'
  • Male
  • Delhi
  • India
Share on Facebook MySpace

जगदानन्द झा 'मनु''s Friends

  • Shivam Jha
  • डॉ. सूर्या बाली "सूरज"

जगदानन्द झा 'मनु''s Groups

 

जगदानन्द झा 'मनु''s Page

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई जगाबैएजखन बाजै मधुर मुरली मुरारीकेँतखन ई संग राधाकेँ नचाबैएसलोना श्याम हे चितचोर मोहन छीकरेजक चैन ई गोपिक चुराबैएमनोहर रूप ‘मनु’ ई देख कान्हाकेँचरणमे शीश अप्पन आ झुकाबैए(बहरे हजज, मात्राक्रम 1222-1222-1222)✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’See More
Jun 11
जगदानन्द झा 'मनु' posted a blog post

मैं कौन हूँ

मैं कौन हूँ अब तक मैं अपना   पहचान ही नहीं पा सका  भीड़ में दबा कुचला व्यथित मानव  दड़बे में बंद फड़फड़ाता परिंदा या पेट भरने के लिए मांस नोचता चील मैं कौन  हूँ ? अब तक मैं अपना  पहचान ही नहीं पा सका हँसता हुआ  बेफ़िक्र  शिशु अख्कड़  गली में  दौड़ता  किशोर  बलिष्ठ  जवानी जिसने की दुःख न देखा हो  या चिंता के बोझ से दबा गृहस्थ  जो रात के खाने की चिंता में  गला जा रहा है अथवा अपने जीर्ण-शीर्ण स्थूल शरीर का भार बेंत पर टिकाया हुआ वृद्ध जो की निष्कासित कर दिया गया हैन्यू जेनरेशन के हाथों जिसका सपना…See More
Feb 13, 2023
जगदानन्द झा 'मनु' commented on जगदानन्द झा 'मनु''s blog post मैं कौन हूँ
"हार्दिक धन्यवाद भाई आदरणीय लक्ष्मण धामी जी और भाई आदरणीय Samar Kabeer जी, आप का मार्गदर्शन इसी तरह से सदैव मिलता रहे। "
Feb 7, 2023
जगदानन्द झा 'मनु' posted a blog post

मैं कौन हूँ

मैं कौन हूँ अब तक मैं अपना   पहचान ही नहीं पा सका  भीड़ में दबा कुचला व्यथित मानव  दड़बे में बंद फड़फड़ाता परिंदा या पेट भरने के लिए मांस नोचता चील मैं कौन  हूँ ? अब तक मैं अपना  पहचान ही नहीं पा सका हँसता हुआ  बेफ़िक्र  शिशु अख्कड़  गली में  दौड़ता  किशोर  बलिष्ठ  जवानी जिसने की दुःख न देखा हो  या चिंता के बोझ से दबा गृहस्थ  जो रात के खाने की चिंता में  गला जा रहा है अथवा अपने जीर्ण-शीर्ण स्थूल शरीर का भार बेंत पर टिकाया हुआ वृद्ध जो की निष्कासित कर दिया गया हैन्यू जेनरेशन के हाथों जिसका सपना…See More
Feb 6, 2023
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on जगदानन्द झा 'मनु''s blog post मैं कौन हूँ
"आ. भाई मनु जी, अभिवादन। अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई। भाई समर जी की बात का संज्ञान लें।"
Jan 29, 2023
Samar kabeer commented on जगदानन्द झा 'मनु''s blog post मैं कौन हूँ
"जनाब 'मनु' जी आदाब , अच्छी रचना हुई है, बधाई सवीकार करें I  टंकण त्रुटियाँ देख लें I "
Jan 29, 2023
जगदानन्द झा 'मनु' posted blog posts
Jan 22, 2023
जगदानन्द झा 'मनु' and Shivam Jha are now friends
Jan 21, 2023

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Delhi

जगदानन्द झा 'मनु''s Blog

मैं कौन हूँ

मैं कौन हूँ

अब तक मैं अपना  

पहचान ही नहीं पा सका 

भीड़ में दबा कुचला व्यथित मानव 

दड़बे में…

Continue

Posted on February 13, 2023 at 9:16am — 3 Comments

धुँध

मैं धुँध को नहीं चीर सका तो क्या
आगे बढ़ने कि कोशिश तो की
कुछ कदम आगे मैं बढ़ा
सूरज भी कुछ कदम आगे की
मेरे सिर पर विजय मुकुट था
घटी चादर ज्योँ ही धुँध की


यह सोच गर मैं घर में रहता
धुँध बहुत हैं छायी
चलो रजाई तान कर सोएँ
बहुत सुहाबना मौसम हैं भाई
मेरे भाग्य की कलियाँ बंद होती
सूरज क्योंकर साथ मेरा देता
किसी अन्धेरे कोठरी में
मेरा नाम भी गुम गया होता


(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Posted on April 28, 2014 at 4:30pm — 4 Comments

मैं न जाने कहाँ खो गया

ढूंढने गया मैं खुद को

बाज़ार में

मैं न जाने कहाँ खो गया

चाँदी की खनक में

सोने की दमक में

मैं न जाने कहाँ खो गया



क्यों आया हूँ यहाँ

मैं क्या हूँ ?

मैं भूल गया

इस चमक-दमक की दुनियाँ में

मैं खुद को ही भूल गया



मैं भूल गया

मेरे हाथों में

कलम की ऐसी ताकत थी

ऊपर वाले की देन कहें

या हृदय की मेरी गागर थी



चलती थी

मेरी अश्रु स्याही से

भावो के मोती विखेरने को

समराग्नी की ताकत रखती थी

नव-निर्वाण की हुँकार…

Continue

Posted on June 23, 2012 at 1:30pm — 9 Comments

गीत -मैं भी कुछ सुनाऊँ तुमको, जो एसी भी शक्ति दी होती

मैं भी कुछ सुनाऊं तुमको,

जो ऐसी भी शक्ति दी होती



हे माँ तेरी चरणों में,

कुछ मेरी भी अर्जी तो होती



मैं दीन हूँ माँ समझो,

पर हीन न समझा करो



सीने से न अपने सही,

चरणों से न दूर करो



मैं पुत्र कुपुत्र हूँ माँ,

समझा न तेरे मन को



तुम तो माँ कुमाता नहीं,

समझो तो मेरे मन को



थोड़ा मुझ को भी दे दो माँ,

स्नेह अपनी झोली से तुम



है माँ बेटे का नाता,

माँ खोयी हो कहाँ तुम | …

Continue

Posted on June 7, 2012 at 1:00pm — 6 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
13 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
13 hours ago
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service