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KALPANA BHATT ('रौनक़')
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नौ दो ग्यारह ...(लघुकथा)

" काल सुबह कु तैयार हो जाना! हमलोगा को लेने बस आवेगी।"" किधर कु जाना है? मुकादम जी!" " अरे! उवा पिछली बेर गए थे न, मकान बनाने..."" ओह! उधर कु तो मेरी लुगाई नही जावेगी।""कीयों?"" बस ! मेरी मरजी... मेरी लुगाई है ... वो हरामी ठेकेदार और वाके आदमी... मेरी लुगाई पर...""अबे साले! तू क्या खुद को सलमान खान समझता है? तेरी लुगाई को संग लाना होगो वरना..." मुकादम ने जर्दा थूकते हुए अपने करीब खड़े अपने दोस्त से कहा," साला! हरामी! समझता नही यह, इसको काम इसकी लुगाई की वजह से ही तो मिलता है.... साला दलित...…See More
Aug 7
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"बढ़िया लघुकथा कही है आदरणीय सतविंद्र जी। बधाई स्वीकार करें।"
May 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"आयोजन में सहभागिता के लिये हार्दिक बधाई आदरणीया वीणा सेठी जी। गुणीजनों की बातोंं का संज्ञान  लीजियेगा। "
May 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"वृद्ध आश्रम जाने के लिये जो वजह आपने लिखी है वह लीक से हटकर है जिसके लिए आपको हार्दिक बधाई आदरणीय तेज वीर सिंह जी। "
May 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"इस प्रभावशाली लघुकथा के लिये हार्दिक बधाई आदरणीया नमिता सुंदर जी। "
May 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"मालकिन और नौकरानी के बीच भी ममता का रिश्ता बन जाता है। कथ्य के साथ-साथ शीर्षक भी बहुत सटीक दिया है आपने आदरणीय गणेश बागी जी। इस बेहतरीन लघुकथा के लिये हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
May 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"इस सद्प्रयास के लिये हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय मोहन बेगोवाल जी। "
May 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"इस लघुकथा के माध्यम से 'एक औरत को सजग और सावधान रहने कितना जरूरी है ' यह संदेश देने का आपने सद्प्रयास किया है जिसके लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये आदरणीया अर्चना जी। "
May 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"आदरणीय सर  इस लघुकथा में सम्प्रेषण तो आ गया है परंतु इस रचना में कहीं 'तुम' और कहीं तुझे' का प्रयोग हो रहा है। क्या इस तरह से लिखना सही होता है ?  सादर।"
May 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"इस गोष्ठी में आपकी प्रथम प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई। इस रचना से एक सजीव चित्रण उभर कर आ रहा है। आदरणीय योगराज प्रभाकर सर ने आपकी रचना को पुनः लिखकर चार-चाँद लगा दिए हैं। इस मार्मिक रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।"
May 31
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on vijay nikore's blog post सम्मोहन
"बहुत बढ़िया कविता हुई है आदरणीय विजय निकोर जी। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Mar 8
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post लघुकथा : सब्जीवाला (गणेश जी बाग़ी)
"बहुत उम्दा लघुकथा हुई है आदरणीय बागी सर। आजकल ऐसा माहौल हर जगह दिखाई देता है। दौड़ औऱ होड़ लगी हुई है। अवार्ड देने वाले मंच भी तय बढ़ रहे हैं। सादर।"
Mar 8
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to kalpana bhatt's discussion आधा चाँद in the group बाल साहित्य
"धन्यवाद आदरणीय।"
Jan 16
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"वाह! बहुत सही बात कही है आपने। हार्दिक बधाई इस लघुकथा के लिए"
Dec 30, 2019
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-57 (विषय: औलाद)
"बहुत बढ़िया बात कही है आपने आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। हार्दिक बधाई इस लघुकथा के लिये।"
Dec 30, 2019
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"आदरणीय शहजाद उस्मानी जी ! नमस्ते| इस रचना में मुझे एक चीज खटक रही है और वो है विराम चिह्नों का प्रयोग| कुछ जगहों पर अधूरे वाक्यों के बाद ही आपने पूर्ण विराम का चिह्न लगाया है |  इस पर गुणी जन ही बता पाएंगे| सादर| "
Oct 31, 2019

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

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नौ दो ग्यारह ...(लघुकथा)

" काल सुबह कु तैयार हो जाना! हमलोगा को लेने बस आवेगी।"

" किधर कु जाना है? मुकादम जी!" 

" अरे! उवा पिछली बेर गए थे न, मकान बनाने..."

" ओह! उधर कु तो मेरी लुगाई नही जावेगी।"

"कीयों?"

" बस ! मेरी मरजी... मेरी लुगाई है ... वो हरामी ठेकेदार और वाके आदमी... मेरी लुगाई पर..."

"अबे साले! तू क्या खुद को सलमान खान समझता है? तेरी लुगाई को संग लाना होगो वरना..." मुकादम ने जर्दा थूकते हुए अपने करीब खड़े अपने दोस्त से कहा," साला! हरामी! समझता नही यह, इसको…

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Posted on August 7, 2020 at 12:20pm

एल.ओ.सी (लघुकथा)

रविवार सवेरे 7:00 बजे।
चाय की पहली चुस्की ली ही थी कि अखबार में छपे एक चित्र ने ध्यान खींच लिया। एक आँख जिसमें खुली पलकों के नीचे पुतली की बजाय सलाखें थी और उन सलाखों को एक हाथ ने थाम रखा था। कितने ही क्षण मैं हाथ में कप लिए उस चित्र को एकटक देखता रहा। इच्छाओं से जुड़े सपनों को कितनी ही बार सलाखों के पीछे बंद कर दिया जाता है।
सवेरे 9:00 बजे।
नाश्ता नहीं खा पाया, वही चित्र आँखों के सामने घूम रहा है। बचपन से नौकर-चाकरों और केअर टेकर के साथ ही रहा। डैडी  को…
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Posted on April 18, 2019 at 11:22pm — 3 Comments

माँ (कविता)

माँ! तुम हो शक्ति स्वरूपा

न पाया तुमसा कोई दूजा

समय से भी तुमने की लड़ाई

हर बार समय को आँख दिखाई

नन्हीं नन्हीं क्यारियों में तुमने

प्यार-मुहब्बत के बीज जो बोये

अपने प्यार से सींचा है तुमने

घर-आँगन महकाया है तुमने

माँ तुमसा और न कोई देखा

हर दुःख को तुमने हँसते हुए फेंका

हर बार जब भी मैं घबरायी

सामने तुम ही तुम नज़र आई

कैसा डर! यह पूछा जब तुमने

नारी शक्ति से परिचय करवाया तुमने

आज जो भी कुछ है मैंने पाया

संग मेरे रहा तुम्हारा… Continue

Posted on March 12, 2019 at 9:52am — 5 Comments

फ्रोज़न माइंड ( लघुकथा)

अस्पताल में एक रूम में बैठी हुई थी। तभी एक नर्स दौड़ती हुई आई और कहने लगी, " मिस्टर सुदर्शन के साथ कौन है?"

काव्या के कान चौकन्ने हो गए, उसने उस नर्स से कहा," जी मैं हूँ। क्या बात है सिस्टर?"

"आई.सी.यू. में आपको तुरंत बुलाया है...।

नर्स की बात पूरी भी नही हुई और काव्या चीते की गति से उस ओर दौड़ पड़ी।

आई.सी. यू. का दरवाजा खोलते ही उसने कमरे में चारों तरफ नज़र घुमाई, उसके पिताजी पिछले एक माह से कोमा में थे, डॉक्टरों ने फिर भी उम्मीद नही छोड़ी थी। उसने डॉक्टर की तरफ देखते हुए पूछा,"… Continue

Posted on March 1, 2019 at 8:14pm — 6 Comments

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At 10:51pm on August 8, 2017, श्याम किशोर सिंह 'करीब' said…

संदेशात्मक लघुकथा। सहज चित्रण के लिए बधाई।

KALPANA BHATT

At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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"आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । आपकी उपस्थिति व स्नेह पाकर गजल मुकम्मल हुई । हार्दिक आभार ।"
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