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Dr. Vijai Shanker
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Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सदमे में है बेटियाँ चुप बैठे हैं बाप - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण सिंह धामी जी , इस गंभीर, सामयिक और शिक्षाप्रद प्रस्तुति के लिए बधाई , सादर।"
Dec 8
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कठिन बस वासना से पार पाना है-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"आदरणीय लक्ष्मण सिंह धामी जी , इस गंभीर प्रेरक प्रस्तुति के लिए बधाई , सादर।"
Dec 8
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दूसरे का दर्द - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय विजय निकोर जी , रचना पर आगमन आपके से एक सुखानुभूति हुयी। आपके के द्वारा उसकी सराहना से हौसला बढ़ा , आपका ह्रदय से आभार , आप स्वस्थ एवं सानंद रहें , धन्यवाद , सादर।"
Dec 3
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दूसरे का दर्द - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप जी , आपके रचना पर आगमन एवं उसकी प्रशस्ति के लिए ह्रदय से आभार , एवं धन्यवाद , सादर।"
Dec 3
Dr. Vijai Shanker commented on Usha's blog post ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)
"आदरणीय सुश्री डॉo उषा जी , इस दार्शनिक अतुकांत प्रस्तुति पर बधाई , सादर।"
Dec 3
Dr. Vijai Shanker and प्रदीप देवीशरण भट्ट are now friends
Dec 2
vijay nikore commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दूसरे का दर्द - डॉo विजय शंकर
"आपकी रचना हम सभी के लिए, समाज के लिए, प्रेणादायक है, मार्गदर्शक है। हार्दिक बधाई, मित्र विजय जी।"
Nov 30
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दूसरे का दर्द - डॉo विजय शंकर
"आद0 डॉ विजय शंकर जी सादर अभिवादन। बढ़िया प्रस्तुति, गागर में सागर भरती हुई।। बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 30
Dr. Vijai Shanker commented on Usha's blog post क्षणिकाएं।
"आदरणीय सुश्री उषा जी , अच्छी क्षणिकाएं बनी है , जीवन के अनुभवों को सांकेतिक करती हुयी , बधाई , सादर।"
Nov 29
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दूसरे का दर्द - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , आपकी बहुत खूबसूरत टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार , सच तो यह है की आपकी टिप्पणियां न केवल गंभीर और धनात्मक होती हैं आगे और विचारों का सृजन करतीं हैं। सच तो यह है कि किसी के दर्द को समझने के लिए एहसास का होना ही बहुत बड़ी…"
Nov 28
Samar kabeer commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दूसरे का दर्द - डॉo विजय शंकर
"जनाब डॉ. विजय शंकर जी आदाब, आपकी ये कविता पढ़ कर बेसाख़्ता 'अमीर मीनाई' जी का ये शैर याद आ गया:- 'ख़ंजर चलें किसी पे तड़पते हैं हम 'अमीर' सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है' दुनिया में ऐसे लोग कम ही होते हैं जो दूसरों के…"
Nov 28
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दूसरे का दर्द - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय डॉO छोटे लाल जी , आपकी पकड़ का ह्रदय से स्वागत है , आपका हार्दिक आभार एवं सादर धन्यवाद , शेष विवेचना हेतु डॉo उषा जी की टिप्पणी पर लिख ही चुका हूँ। सादर।"
Nov 27
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दूसरे का दर्द - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुश्री उषा जी , आप इन चार पंक्तियों की गहराई तक पँहुचीं , स्वागत है। आपकी यह बात भी सही है कि हमें / लोगों को sympathy से empathy की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। दोनों ही शब्द ग्रीक भाषा के pathos शब्द से विकसित हुए हैं , अंगरेजी भाषा में…"
Nov 27
Dr. Vijai Shanker commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's photo
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" स्वागत है। आयोजन पर बधाई।  "
Nov 27
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दूसरे का दर्द - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय डॉ विजय शंकर जी आपने चंद पंक्तियों में जबरदस्त भाव पिरो दिया मन प्रफुल्लित हो गया बहुत बहुत बधाई"
Nov 27
Usha commented on Dr. Vijai Shanker's blog post दूसरे का दर्द - डॉo विजय शंकर
"आदरणीय विजय शंकर सर, आज सचमुच इस बात की ज़रूरत है की 'सिम्पैथी' से 'एम्पैथी' की ऒर रुख़ किया जाये। ये हो जाये तो आशा है लोगों के दुःख-दर्द काफ़ी कम हो जाएँगे। किसी का हृदय से इतना ही कह देना कि हम आपका दर्द समझते हैं, बहुत सुकून दे…"
Nov 27

Profile Information

Gender
Male
City State
UP
Native Place
Allahabad
Profession
Retired
About me
Educationist

.जिंदगी तुझे ही पढ़ लेते हैं ---डा० विजय शंकर

चलो किताबों को बंद कर देते हैंजिंदगी तुझे ही सीधे-सीधे पढ़ लेते हैं .किताबों में सबकुझ तेरे बारे में ही तो हैलो , तुझसे ही सीधे-सीधे बात कर लेते हैं.किताबें तो बहुत सी हैं , मिल भी जायेंगींउन को पढ़ लूँ तो क्या तू मिल जायेगी .मौत को कितने और कौन-कौन पढ़ते हैंपर उसका वादा है , सबको मिलती है .भरोसा नहीं , तू किसको मिले , कितनी मिलेतेरे लिये , तेरे चाहने वाले दिन रात लगे रहते हैं .अरे सब कुछ तो तेरे लिए ही है जिंदगी मेंतू है तो सब है , तू नहीं तो क्या है जिंदगी में .इसलिए चलो किताबों को बंद कर देते हैं .तू है , तुझसे सीधे-सीधे बात कर लेते हैं ...डा० विजय शंकर---------------( मौलिक और अप्रकाशित )

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At 7:54pm on August 31, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी प्रणाम! बहुत बहुत शुक्रिया आपको मेरी प्रथम लघुकथा अच्छी लगी आपने अपना अमूल्य समय निकाला और जो हौसला बढ़ाया उसका ह्रदय से आभार आपका स्नेहभाव सदा यूँ ही बना रहे!
At 5:38pm on January 1, 2017, Mohammed Arif said…
आदरणीय डॉ.विजय शंकर मेहताजी सकारात्मक सोच को उद्घरित करती रचना के लिए बधाई । नव वर्ष मंगलमय हो !
At 4:58pm on November 5, 2015, Abid ali mansoori said…

देर से ही सही.. हर्दिक आभार आपका आदरणीय विजय शंकर जी!

At 10:23pm on November 4, 2015, Abid ali mansoori said…

Haardik abhaar aapka!

At 3:46pm on July 1, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर,

आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 7:50pm on June 3, 2015, Tanuja Upreti said…
आभार आदरणीय
At 7:28pm on May 4, 2015, Seema Singh said…
आभार सर मार्गदर्शन के लिए
At 8:35am on April 17, 2015, Mohan Sethi 'इंतज़ार' said…

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आप का हार्दिक आभार ....मंगलकामनाएँ...सादर  

At 6:57am on January 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, निवेदन स्वीकार करने के लिए आभार...

विद्यार्थी की मुक्त कंठ प्रशंसा आपका बड़प्पन और आपके हृदय की विशालता का प्रमाण है.

आपका  स्नेह और आशीर्वाद  सदैव मिलता रहे, इसके लिए सदैव प्रयास करता रहूँगा. नमन 

At 10:51pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, आभार, धन्यवाद.... आप लोगो के स्नेह और आशीर्वाद से ही मंच पर सक्रिय हो पाता हूँ. आपका आभार हार्दिक धन्यवाद 

Dr. Vijai Shanker's Blog

दूसरे का दर्द - डॉo विजय शंकर

दर्द की एक
अजब अनुभूति होती है ,
अपने और अपनों के दर्द
कुछ न कुछ तकलीफ देते हैं।
कभी किसी बिलकुल
दूसरे के दर्द को महसूस करो ,
वो तकलीफ तो कुछ ख़ास
नहीं देते हैं , पर जो दे जाते हैं
वो किसी भी दर्द से भी
कहीं अधिक कीमती होता है।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on November 26, 2019 at 11:57am — 14 Comments

अकेलापन —डॉo विजय शंकर

जिंदगी जीने का मौक़ा ,

भीड़ से निकल कर मिलता है ,

माहौल कुछ इस कदर

असर करता है।

अकेले हों तो ख़ुद से बात

करने का मौक़ा मिलता है l

भीड़ में तो आदमी बस

दूसरों की सुनता है।

हर आदमी कोई न कोई

सवाल लिए मिलता है ,

आपको अपनी सुनाता है ,

फिर भी आपके जवाब

को कौन सुनता है ?

शायद इसीलिये अकेलापन

आपको बहुत कुछ सीखने

समझने का मौक़ा देता है।

जिंदगी जीने का मौक़ा तो

भीड़ से निकल कर ही मिलता है।

मौलिक…

Continue

Posted on November 4, 2019 at 4:57pm — 14 Comments

प्रश्न , एक छोटी सी बहुत बड़ी कविता — डॉo विजय शंकर

प्रश्न ये है
कि अन्तोगत्वा
हाथ क्या लगता है ?
समझ में आ जाये
तो बताइये हाथ
आपका क्या लगता है ?

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on October 23, 2019 at 7:55am — 10 Comments

पुरोधा कौन — डॉo विजय शंकर

मूर्खता विद्व्ता के सर पर ताण्डव कर रही है ,

सर के अंदर छुपी विद्व्ता संतुलन बनाये हुए है ,

क्योंकि मूर्खता में कोई वजन नहीं है ,

विद्व्ता शालीन है , संयत है , संतुलित है

आराम से मूर्खता को ढोये जा रही है ,

क्योंकि यही युग धर्म है आज , शायद ,

कि वह मूर्खता को शिरोधार्य करे ,

उसे नाचने के लिए ठोस मंच दे , आधार दे।

युगदृष्टा जाने विद्व्ता ने शायद ही कभी

मूर्खता का पृश्रय लिया हो , उसे आधार बनाया हो।

भाषा वैज्ञानिक स्वयं भ्रमित…

Continue

Posted on September 27, 2019 at 6:30pm — 4 Comments

 
 
 

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