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Dr. Vijai Shanker
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Dr. Vijai Shanker posted a blog post

क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर

बहुत कुछ , बहुत हास्यास्पद है , फिर भी किसी को हंसी आती नहीं। बहुत कुछ , बहुत दुखदायी है ,  फिर भी आंसू किसी को आते नहीं।… 1.बाज़ार भी अजीब जगह है जहां आप शाहंशाह होकर भी रोज बिक तो सकते हैं , पर एक दिन को भी अपनी पूरी हुकूमत में , पूरा बाज़ार खरीद नहीं सकते ………. 2 .बहुत शिकायतें हैं हवा से कि बुझा देती हैं चिरागों को , चलो एक चिराग ही बिना हवा के जला के दिखा दो। ……….. 3 .मौलिक एवं अप्रकाशित See More
17 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Usha's blog post आख़िर कब तक?
"अचानक गंभीर बीमारी , अस्पताल और अस्पतालों में आवश्यक गम्भीरताओं के प्रति अभाव पूर्ण व्यवहार कुछ सामान्य से होते जा रहे हैं। आदमी चिकित्सालयों से उलझे या अपने ही परिवार और रिश्तेदारों से ? सबकुछ असंतुलित सा होता जा रहा है। बात आई सी यू की हो या ओ पी…"
Jun 2
Dr. Vijai Shanker commented on vijay nikore's blog post मरज़ जुदाई का (अतुकांत)
"उम्र के चढ़ाव पर तन्हा जुदाई जैसे गम्भीर विषय पर एक बहुत ही भावपूर्ण प्रस्तुति के लिये आपको ह्रदयतल से बहुत बधाई , आदरणीय विजय निकोर जी , सादर।"
Jun 2
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-38 (विषय: "डर")
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी  , सुन्दर , सामयिक प्रस्तुति , बधाई, सादर।  "
May 30
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-38 (विषय: "डर")
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी , सुन्दर सामयिक प्रस्तुति , बधाई, सादर।"
May 30
Dr. Vijai Shanker commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post लघुकथा : धनवान (गणेश जी बाग़ी)
"कभी - कभी लगता है , हम अभी भी वहीं हैं , आगे बढ़ने और बढ़ लेने का तो मात्र दिखावा करते हैं। बधाई , इस प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए , आदरणीय गणेश जी, बागी जी , सादर।"
May 29
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब , इस बहुत आशान्वित करनेवाली लघु-कथा हेतु हार्दिक बधाई , सादर।"
Apr 30
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी , देश और पूर्वजों को पुन्नः समेटने वाली प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई , सादर।"
Apr 30
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मान जी , प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई , सादर।"
Apr 30
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आदरणीय डॉo गोपाल नारायण जी , इस भावपूर्ण प्रस्तुति पर ह्रदय से बधाई , सादर।"
Apr 30
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी , विषय संगत प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई , सादर।"
Apr 30
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी , इस काल्पनिक परन्तु आशान्वित करने वाली प्रस्तुति के लिए बधाई , सादर।"
Apr 30
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी , आपकी उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए आपका ह्रदय से आभार एवं धयवाद। सादर।"
Apr 30
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब , लघु-कथा पर आपके उदगार हेतु ह्रदय से आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Apr 30
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी, ह्रदय से आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Apr 30
Dr. Vijai Shanker replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आदरणीय विनय कुमार सिंह साहब , आपका ह्रदय से बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद , सादर . "
Apr 30

Profile Information

Gender
Male
City State
UP
Native Place
Allahabad
Profession
Retired
About me
Educationist

.जिंदगी तुझे ही पढ़ लेते हैं ---डा० विजय शंकर

चलो किताबों को बंद कर देते हैंजिंदगी तुझे ही सीधे-सीधे पढ़ लेते हैं .किताबों में सबकुझ तेरे बारे में ही तो हैलो , तुझसे ही सीधे-सीधे बात कर लेते हैं.किताबें तो बहुत सी हैं , मिल भी जायेंगींउन को पढ़ लूँ तो क्या तू मिल जायेगी .मौत को कितने और कौन-कौन पढ़ते हैंपर उसका वादा है , सबको मिलती है .भरोसा नहीं , तू किसको मिले , कितनी मिलेतेरे लिये , तेरे चाहने वाले दिन रात लगे रहते हैं .अरे सब कुछ तो तेरे लिए ही है जिंदगी मेंतू है तो सब है , तू नहीं तो क्या है जिंदगी में .इसलिए चलो किताबों को बंद कर देते हैं .तू है , तुझसे सीधे-सीधे बात कर लेते हैं ...डा० विजय शंकर---------------( मौलिक और अप्रकाशित )

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Comment Wall (18 comments)

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At 5:38pm on January 1, 2017, Mohammed Arif said…
आदरणीय डॉ.विजय शंकर मेहताजी सकारात्मक सोच को उद्घरित करती रचना के लिए बधाई । नव वर्ष मंगलमय हो !
At 4:58pm on November 5, 2015, Abid ali mansoori said…

देर से ही सही.. हर्दिक आभार आपका आदरणीय विजय शंकर जी!

At 10:23pm on November 4, 2015, Abid ali mansoori said…

Haardik abhaar aapka!

At 3:46pm on July 1, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर,

आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 7:50pm on June 3, 2015, Tanuja Upreti said…
आभार आदरणीय
At 7:28pm on May 4, 2015, Seema Singh said…
आभार सर मार्गदर्शन के लिए
At 8:35am on April 17, 2015, Mohan Sethi 'इंतज़ार' said…

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आप का हार्दिक आभार ....मंगलकामनाएँ...सादर  

At 6:57am on January 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, निवेदन स्वीकार करने के लिए आभार...

विद्यार्थी की मुक्त कंठ प्रशंसा आपका बड़प्पन और आपके हृदय की विशालता का प्रमाण है.

आपका  स्नेह और आशीर्वाद  सदैव मिलता रहे, इसके लिए सदैव प्रयास करता रहूँगा. नमन 

At 10:51pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, आभार, धन्यवाद.... आप लोगो के स्नेह और आशीर्वाद से ही मंच पर सक्रिय हो पाता हूँ. आपका आभार हार्दिक धन्यवाद 

At 4:40pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

Dr. Vijai Shanker's Blog

क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर



बहुत कुछ , बहुत हास्यास्पद है ,

फिर भी किसी को हंसी आती नहीं।

बहुत कुछ , बहुत दुखदायी है , 

फिर भी आंसू किसी को आते नहीं।… 1.

बाज़ार भी अजीब जगह है

जहां आप शाहंशाह होकर भी

रोज बिक तो सकते हैं , पर एक

दिन को भी अपनी पूरी हुकूमत में ,

पूरा बाज़ार खरीद नहीं सकते ………. 2 .

बहुत शिकायतें हैं हवा से

कि बुझा देती हैं चिरागों को ,

चलो एक चिराग ही बिना

हवा के जला के दिखा दो। ……….. 3…

Continue

Posted on June 21, 2018 at 8:30pm

कोई फरक नहीं पड़ता — डॉo विजय शंकर

क्या फरक पड़ता है ,
कुछ पढ़े-लिखे लोगों ने
आपको और आपकी
किसी भी बात को नहीं समझा।
आपको , आप जैसे लोगों ने तो
समझा और खूब समझा।
आपकी नैय्या उनसे और
उनकी नैय्या आपसे
पार लग ही रही है ,
आगे भी लग जाएगी ।

- मौलिक एवं अप्रकाशित
 

Posted on March 23, 2018 at 5:41am — 7 Comments

सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर

आप सही हैं,
वह भी सही है ,
हर एक सही है ,
फिर भी कुछ भी
सही नहीं है।
कुछ गिने चुने
लोग बहुत खुश हैं ,
यह भी सही नहीं है।
सच जो भी है ,
सब जानते हैं ,
बस मानते नहीं ,
यह भी सही नहीं है।
ऊँट सामने है ,
देखते नहीं,
हड़िया में ढूँढ़ते है ,
यह भी सही है।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on February 21, 2018 at 8:40am — 13 Comments

बंधन की डोरियां - डॉo विजय शंकर

कुछ डोरियां

कच्चे धागों की होती हैं ,

कुछ दृश्य होती हैं ,

कुछ अदृश्य होती हैं ,

कुछ , कुछ - कुछ

कसती , चुभती भी हैं ,

पर बांधे रहती हैं।

कुछ रेशम की डोरियां ,

कुछ साटन के फीते ,

रंगीले-चमकीले ,फिसलते ,

आकर्षित तो बहुत करते हैं ,

उदघाट्न के मौके जो देते हैं ,

पर काटे जाते हैं।

इस रेशम की डोरी

की लुभावनी दौड़ में ,

ज़रा सी चूक ,

बंधन की डोरियां

छूट गईं या टूट गईं ,

रेशम की डोरियां …

Continue

Posted on January 4, 2018 at 9:30am — 11 Comments

 
 
 

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