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Mohammed Arif
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Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय अजीत शर्मा जी आदाब, बहुत शानदार ग़ज़ल के लिए शेर दर शेर दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल कीजिए ।"
6 hours ago
Mohammed Arif commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post कोई फकीर तो कोई बादशा नजर आये
"आदरणीय आमोद जी आदाब, बहुत अच्छी ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद कु़बूल कीजिए । ग़ज़ल के मतले के उला शेर म़ें आपने "बादशा"शब्द का इस्तेमाल किया है जबकि सही शब्द "बादशाह'"होता है । बाक़ी गुणीजन आपनी राय देंगे । शुक्रिया ।"
6 hours ago
Mohammed Arif commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-फैला बस अँधियार है भइया-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली गुप्ता जी आदाब, बहुत बेहतरीन ग़ज़ल ,वर्तमान संदर्भ में बिलकुल सामयिक ग़ज़ल । शेर दर शेर मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।"
6 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय महेन्द्र कुमार जी आदाब,शानदार ग़ज़ल बधाई स्वीकार करें ।"
7 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी आदाब, बहुत शानदार ग़ज़ल । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
7 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब,बहुत अच्छी ग़ज़ल कहने का प्रयास किया है आपने । हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए । कुछ शब्दों की तरफ ध्यान दिलाना चाहूँगा जैसे-बाग नहीं बाग़,जख्म नहीं ज़ख़्म होता है । देखियेगा ।"
10 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय अनुराग वशिष्ठ जी आयोजन में सहभागिता के लिए बधाई ।"
15 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय गोपाल नारायण जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल कही है आपने । शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । ग़ज़ल का रदीफ " हो गईं "है जबकि आपने "हो गयी" इस्तेमाल किया है जो ग़लत है । देखियेगा ।"
15 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय आशुतोष जी आदाब,शानदार ग़ज़ल के लिए आपको ढेरों मुबारक़बाद पेश करता हूँ क़ुबूल करें ।"
15 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय मनन कुमार जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद क़ुबूल कीजिए ।"
20 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"वाह वाह वाह क्या ग़ज़ल है, क्या ताज़गी है, नये काफियें हैं, नई सोच है, नया ग़ज़ल का अंदाज़, सत्ता के ऊपर तंज़ भी, नया चिंतन भी , नया ढंग भी । बहुत-बहुत बधाई ।"
20 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"सहभागिता के लिए बधाई आदरणीय लक्ष्मण लडीवाला जी ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आदाब,बहुत ही सादगी वाले अशआर उकेरें हैं आपने अपनी ग़ज़ल में। हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on BAIJNATH SHARMA'MINTU''s blog post अशफाक-मंगल औ भगत को मत भुलाना तुम ( बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’)
"आदरणीय बृजनाथ जी आदाब,देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय दयाराम जी आदाब, उम्दा ग़ज़ल । गुणीजनों की बातों पर ध्यान दें । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय नादिर ख़ान जी आदाब, बदलते समय, रिश्तों में बदलाव और बेटियों के सयाने होने की चिंता को उजागर करती इस ग़ज़ल के लिज आपको ढेरों मुबारक़बाद ।"
yesterday

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Male
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Ujjain M.P.
Native Place
Ujjain
Profession
Teacher
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हाइकु

1.प्यासा तालाब
पीपल उदास-सा
गाँव है चुप ।
2.हुक्का , खटिया
चौपाल है गायब
बीमार गाँव ।
3.दहेज प्रथा
परिवर्तित रूप
कैश का खेल ।
4.धरती छोड़
चाँद पर छलांग
पुकारे भूख ।
5.मिलन नहीं
प्यास है बरकरार
है इंतज़ार ।
6.ऐश्वर्य प्रेमी
संत उपदेशक
माया का खेल ।
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on March 18, 2017 at 7:30pm — 4 Comments

सार छंद (मात्रिक विधान-16-12/16-12 )

छन्न पकैया छन्न पकैया ,बोले मीठी बोली ।

गाँवों , बाग़ो़ं गलियों छाई , टेसू की रंगोली ।।

.

छन्न पकैया छन्न पकैया , देखो, खिलता पलाश ।

पागल मतवाले भँवरों को , कलियों की है तलाश ।।

.

छन्न पकैया छन्न पकैया , टेसू मन को भाया ।

मतवाला, दीवाना, पागल, भँवरा भी इठलाया ।।

.

छन्न पकैया छन्न पकैया , उड़ता अबीर-गुलाल ।

यारों, संगी-साथी मिलकर ,करते मस्ती धमाल ।।

.

छन्न पकैया छन्न पकैया , पलाश के हैं झूमर ।

मौसम, यौवन, कलियाँ…

Continue

Posted on March 14, 2017 at 7:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल (बह्र-22/22/22/2)

पानी वाला बादल हो ,
नदियों में फिर हलचल हो ।
गाँवों की पनघट पे अब ,
फिर से बजती पायल हो ।
झूठे वादों से ऊपर ,
कोई तो ऐसा दल हो ।
जिसमें राहत हो सबको ,
आने वाला वो कल हो ।
सारे दुख सह जाऊँ मैं ,
सर पे माँ का आँचल हो ।
साफ़ हवा पानी पायें ,
पेड़ों वाला जंगल हो ।
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on March 12, 2017 at 1:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल (बह्र-22/22/22/2)

थोड़ा आगे आने दो ,
मौक़ा उनको पाने दो ।


देखो, भटके फिरते हैं ,
उनको भी समझाने दो ।


कब तक सहना पाबंदी ,
दौर नया दिखलाने दो ।


सबको राहत मिल जाये ,
मौसम ऐसा आने दो ।


फिक्र करो मत दुनिया की ,
छोड़ो यारो जाने दो ।

.
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on March 7, 2017 at 11:30am — 22 Comments

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At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

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भुवन निस्तेज replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"सभी अशआर बस मन को भा गए. और बाबा जुकर वाले शेर का तो बस... बधाई हो आदरणीय..."
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भुवन निस्तेज replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"वर्तमान के प्रति आपकी चिन्ता इस ग़ज़ल में बखूबी झलक रही है आ० राजेश दीदी. कृप्या दाद कबूल करें ."
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"बहुत आभार नादिर भाई !!!"
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"Like.... bhaai !!!  "
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अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"जी, सर.... आप सामने आये, मैं होश में आ गया.... अत्यन्त आभार आपका आदरणीय समर साहब.... बरसी में…"
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Anuraag Vashishth replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आ. मिथिलेश बहुत अच्छी ग़ज़ल है बधाई हो."
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