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Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"आपकी उत्साजनक प्रतिक्रिया से लेखन सार्थक हो । बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी ।"
46 seconds ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"बहुत बढ़िया सामयिक पेशकश। आपकी लेखनी का यह रूप देख कर बहुत ख़ुशी हासिल हुई। तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब।"
12 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"रचना पर प्रतिक्रिया देकर मान बढ़ाने का बहुत-बहुत आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी ।"
13 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"बहुत-बहुत आभार आदरणीत नरेंद्र सिंह जी ।"
13 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"बसंत पर बहुत प्यारी रचना लिखी है बहुत बहुत बधाई आद० मोहम्मद आरिफ़ जी "
14 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"सुन्दर कविता"
17 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"बहुत-बहुत आभार आदरणीय मोहित मिश्रा जी ।"
18 hours ago
Mohit mishra (mukt) commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"आदरणीय आरिफ जी आदाब , साधारण शब्दों में बसंत की खूबसूरत अगवानी की , बधाई।"
19 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तस्दीक़ अहमद साहब ।"
21 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"बहुय-बहुत आभार आदरणीय सलीम रज़ा साहब ।"
21 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"मुहतरम जनाब आरिफ़ साहिब ,बसंत ऋतु पर सुन्दर कविता हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।"
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"ख़ूबसूरत रचना के लिए मुबारक़बाद आरिफ साहिब."
yesterday
Mohammed Arif posted a blog post

कविता- बसंत

हृदय की फुलवारी में राग-बसंती छिड़ गया अंग-प्रत्यंग प्रफुल्लित आनंदित हो गया चहुँदिश दिशा में छा गया यौवन लग गया बाग़ों में फिर से सरसों , जूही , केतकी का मेला चटखने लगी कमसिन कलियाँ उन्हें भी प्रेम निमंत्रण मिलने लगा मतवाले भँवरों का कारवाँ चला देखो, कामदेव का जादू फिर चला । मौलिक एवं अप्रकाशित ।See More
Sunday
Mohammed Arif commented on santosh khirwadkar's blog post तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”
"आदरणीय संतोष जी आदाब,                         बहुत ही बढ़िया अश'आर । हर शे'र ज़ोरदार । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।"
Sunday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया राजेश कुमारी जी आदाब,                            बहुत ही सजीव चित्रण । शब्द चित्र में भूख है, ग़रीबी है, बेबसी है, आँसू है , बेदर्द मौसम की मार है , बचपन की विवशता है ,…"
Saturday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया सुनंदा झा जी आदाब,                       बहुत ही मार्मिक छंद रचा आपने और वर्तमान में हमारे देश में जो दुष्कर्म की घटनाएँ हो रही है उस ओर भी आपने इशारा कर दिया ।हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Saturday

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कविता- बसंत


हृदय की फुलवारी में
राग-बसंती छिड़ गया
अंग-प्रत्यंग प्रफुल्लित
आनंदित हो गया
चहुँदिश दिशा में
छा गया यौवन
लग गया बाग़ों में फिर से
सरसों , जूही , केतकी का मेला
चटखने लगी कमसिन कलियाँ
उन्हें भी प्रेम निमंत्रण मिलने लगा
मतवाले भँवरों का कारवाँ चला
देखो, कामदेव का जादू फिर चला ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on January 21, 2018 at 10:06am — 12 Comments

कटाक्षिकाएँ



(1) राष्ट्रीय पर्व पर

मिला किसी को

पद्म भूषण , पद्म विभूषण

तो किसी को मिला पद्म श्री

लेकिन जो थे सच्चे हक़दार

नहीं मिला उन्हें यह सम्मान

क्योंकि उनकी नहीं थी कोई

राजनैतिक पहचान । 

 

(2) जिन बच्चों को माँ-बाप ने

चलना -फिरना , उठना-बैठना

आदि का सलीका सिखाया

उन्हीं बच्चों ने बड़ा होकर

बुढ़ापे में वृद्धाश्रम पहुँचाया ।

 

(3) दुर्घटना और बीमारियाँ

बहुत सस्ती हो गईं हैं

इसीलिए तो-

बीमा किश्त महँगी…

Continue

Posted on January 14, 2018 at 7:00am — 13 Comments

दोहे--नव वर्षाभिनंदन

ख़ुशियों से हो ये भरा,नया हमारा साल ।
मेल जोल सबसे बढ़े, बदले सबकी चाल ।।

घर आँगन में हो ख़ुशी,चले हास-परिहास ।
पीड़ाओं की आँधियाँ, फटकें कभी न पास ।।

साल नया ख़ुश हाल हो,सब हों माला माल ।
जीवन में दुख का कभी,आये नहीं सवाल ।।

नये साल में हम करें,कोई अच्छा काम ।
युग -युग तक जपते रहें,लोग हमारा नाम ।।

माँगूँ रब से ये दुआ,रहें सभी आबाद ।
बीते दिन कोई यहाँ, करे न'आरिफ़' याद ।।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।।

Posted on January 1, 2018 at 12:27am — 26 Comments

पर्यावरणीय कविता --"हिंसक"


हमने एक दुनिया उजाड़ दी
शेरों और नील गायों की
ख़रीद ली उनकी खाल
बारह सींगों के
सींगों से कर रहे हैं
घर की दीवारों का श्रृंगार
अब आदमखोर
शेरों को नहीं
इंसानों को कहना होगा बेहतर
हिंसक हरकतें सारी
चुरा ली है
शेरों से इंसानों ने
कितने ही लक्षण आ गए हैं
पशुओं वाले इंसानों में
ऐसे में लाजमी है
जंगलों का ख़त्म होना
शेरों का ख़त्म होना ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on December 17, 2017 at 7:10am — 14 Comments

Comment Wall (4 comments)

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At 2:08pm on January 18, 2018, dandpani nahak said…
जनाब मोहम्मद आरिफ़ जी आदाब
शुक्रगुज़ार हूँ की आपको मेरी ग़ज़ल पसंद आई और गुणी जनों की राय जानने को बेक़रार भी हूँ आशा है गुणीजन मेरी गलतियों को बताएं ताकि मैं आगे सुधर कर सकूँ! आपका बहुत शुक्रिया
At 5:05pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय जनाब मोहम्मद आरिफ साहब आदाब ,नमस्कार
ये मेरा परम सौभाग्य की मेरी पहली ही रचना हेतु आपने अपना बहुमूल्य समय निकाला,पढ़ा और सराहा .निश्चित ही मुझमें अभी बहुत कमियाँ हैं आशा करता हूँ आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में कुछ सीख सकूँगा
बहुत बहुत शुक्रिया तथा देरी के लिए माफ़ी चाहता हूँ
At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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7 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल ( निकल कर तो आओ कभी रोशनी में )
"आद0 तस्दीक अहमद साहिब, बहुत बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने,बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर।"
7 hours ago
सतविन्द्र कुमार commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
"वाहः वाहः बहुत खूब अशआर हुए हैं। सादर बधाई"
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SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
"शुक्रिया मोहित भाई."
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"आदरणीय सलीम जी उम्दा ग़ज़ल, बहुत बहुत मुबारकबाद "
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