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Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय हेमंत कुमार जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल । कुछ शे'र तो वाकई प्रासंगिक बन गए है । ढेरों मुबारकबाद पेश करता हूँ क़ुबूल फरमाएँ ।"
5 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय रवि शुक्ला जी आदाब, लाजवाब ग़ज़ल हुई है । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ क़ुबूल फरमाएँ ।"
8 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"मोहतरम नादिर ख़ान साहब आदाब, पूरी ग़ज़ल और हर शे'र बेजोड़, बेमिसाल , बाकमाल। ढेरों मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।"
10 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"कभी थमती खिलाफत है?नहीं तो कहो थकती सियासत है?नहीं तो। बहुत ही बढ़िया मतला हुआ है । पूरी ग़ज़ल लाजवाब है । हर शे'र मेरी दाद क़ुबूल कीजिए आदरणीय मनन कुमार जी ।"
14 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"किया करता है बातें दीन की जो उसे पास-ए-शरीअत है? नहीं तो वाह!वाह!!क्या ख़ूब दीनी शे'र कहा है । ग़ज़ल के नाम पर बकवास करना बुज़ुर्गों की रिवायत है? नहीं तो बहुत ख़ूब !क्या ख़ूब बात कही है आपने । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद कुबूल…"
55 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"गमो की कोई किल्लत है? नही तो! ये क्या छोटी सहूलत है? नही तो!वाह!वाह!!वाह!!! वल्लाह क्या शे'र है मेरे घर को जलाकर हँसने वालेे, तेरा छप्पर सलामत है? नहीं तो वाह!वाह!!क्या सच्चाई है । ख़ूब! क़लम हाकिम की लौंडी हो चुकी है, तो इम्काने बगावत है? नहीं…"
4 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय वासुदेव जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल , लाजवाब ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।"
4 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"किसी झूठी खबर पर कान देना तुम्हें क्या इतनी फुर्सत है? नहीं तो बहुत ख़ूब, बहुत ख़ूब क्या शे'र है । ढेरों मुबारकबाद आदरणीय शिज्जू शकूर साहब ।"
5 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"मुहब्बत में तिजारत हो गई है ग़लत क्या यह कहावत है ,नहीं तो | मिलाना हाथ खंजर को छुपा कर पुरानी तेरी हरकत है ,नहीं तो |दोनों ही शे'र बड़े ही सामयिक हुए है। शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए मोहतरम तस्दीक़ अहमद साहब ।"
6 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"रहें भूखे अगर माँ बाप बोलो सफ़ल कोई इबादत है? नही तो || अकेले रह लिए, अब तो बताओ बिना माँ घर ये जन्नत है ? नही तो दोनों शे'र बेजोड़, लाजवाब । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी ।"
6 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"तू रोटी के लिए दौड़ा है फिरता तुझे खाने की फुर्सत हैैै? नहीं तो ॥वाह!वाह!!क्या माकूल शे'र कहा है । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए आदरणीय गुरमीत जी ।"
6 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"बिछड़ जाना रवायत है? नहीं तो! बिछड़ कर दिल सलामत है? नहीं तो। वाह!वाह!!क्या ख़ूब मत्ला है । हर शे'र लाजवाब । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद कुबूल फरमाएँ ।"
14 hours ago
KALPANA BHATT commented on Mohammed Arif's blog post मेरे भीतर की कविता
"बहुत ही संवेदनशील भावपूर्ण रचना हुई है जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहब । हार्दिक बधाई ।"
16 hours ago
Mohammed Arif commented on Manan Kumar singh's blog post बाल ग ज ल
"आदरणीय मनन कुमार जी आदाब, बहुत अच्छी बाल सुलभता वाली बाल ग़ज़ल । आजकल बाल साहित्य की रचना के प्रति साहित्यकारों में उदासीनता है । आपने अपना छोटा-सा प्रशंसनीय योगदान दिया है ।बहुत-बहुत बधाई ।"
16 hours ago
Mohammed Arif commented on vijay nikore's blog post क्षणिकाएँ
"आदरणीय विजय निकोर जी आदाब, बेहतरीन भावपूर्ण कविताएँ । इन रचनाओं को क्षणिका कहने के बजाय कविता कहना ज़्यादा उचित होगा क्योंकि क्षणिकाओं में करारा व्यंग्य या कटाक्ष होता है और कविता में तीव्र भावाभिव्यक्ति होती है । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे । हार्दिक…"
20 hours ago
Mohammed Arif's blog post was featured

मेरे भीतर की कविता

मेरे भीतर की कविता अक्सर छटपटाती है शब्दों के अंकुर भावों की विनीत ज़मीन पर अंकुरित होना चाहते हैं ना जाने क्यों वे अर्थ नहीं उपजा पाते हैं मेरे भीतर की कविता फिर भी जाकर संवाद करती है सड़क किनारे बैठे उस मोची पर जो फटे जूते सी रहा है बंगले की उस मेम साहिबा पर जो अपना बचा फास्ट फुड डस्टबिन में फेंककर ज़ोर से गेट बंद करके अंदर चली जाती है लेकिन अनुभूतियाँ ज़ोर मारती है पछाड़े खाकर गिर जाती है हृदय की धड़कन पर ना जाने क्यों मैं एक अच्छी कविता नहीं लिख पाता हूँ मैं शब्दों की सच्चाई का अपराधी हूँ । मौलिक…See More
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Ujjain M.P.
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मेरे भीतर की कविता

मेरे भीतर की कविता

अक्सर छटपटाती है

शब्दों के अंकुर

भावों की विनीत ज़मीन पर

अंकुरित होना चाहते हैं

ना जाने क्यों वे

अर्थ नहीं उपजा पाते हैं

मेरे भीतर की कविता फिर भी

जाकर संवाद करती है

सड़क किनारे बैठे

उस मोची पर जो

फटे जूते सी रहा है

बंगले की उस मेम साहिबा पर

जो अपना बचा फास्ट फुड

डस्टबिन में फेंककर

ज़ोर से गेट बंद करके

अंदर चली जाती है

लेकिन

अनुभूतियाँ ज़ोर मारती है

पछाड़े खाकर गिर जाती है

हृदय…

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Posted on April 17, 2017 at 5:30pm — 5 Comments

ग्रीष्म के हाइकु

1. झुलसी काया
आतंकी-सा सूरज
बेचैन सब ।
2.सूनी सड़कें
पसरा है सन्नाटा
जारी खर्राटे ।
3.डाल से टूटे
बरगद के पत्ते
सुनाए राग ।
4. सूखने लगे
पोखर औ तालाब
छोटी रात ।
5.नन्ही चीड़िया
करके जलपान
फुर्र हो जाए ।
6.चैत्र महीना
रात-दिन तपाए
किधर जाएँ ।
7.लू के थपेड़े
साँय-साँय सन्नाटा
सुस्ती में तन ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on April 2, 2017 at 3:30pm — 15 Comments

हाइकु

1.प्यासा तालाब
पीपल उदास-सा
गाँव है चुप ।
2.हुक्का , खटिया
चौपाल है गायब
बीमार गाँव ।
3.दहेज प्रथा
परिवर्तित रूप
कैश का खेल ।
4.धरती छोड़
चाँद पर छलांग
पुकारे भूख ।
5.मिलन नहीं
प्यास है बरकरार
है इंतज़ार ।
6.ऐश्वर्य प्रेमी
संत उपदेशक
माया का खेल ।
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on March 18, 2017 at 7:30pm — 4 Comments

सार छंद (मात्रिक विधान-16-12/16-12 )

छन्न पकैया छन्न पकैया ,बोले मीठी बोली ।

गाँवों , बाग़ो़ं गलियों छाई , टेसू की रंगोली ।।

.

छन्न पकैया छन्न पकैया , देखो, खिलता पलाश ।

पागल मतवाले भँवरों को , कलियों की है तलाश ।।

.

छन्न पकैया छन्न पकैया , टेसू मन को भाया ।

मतवाला, दीवाना, पागल, भँवरा भी इठलाया ।।

.

छन्न पकैया छन्न पकैया , उड़ता अबीर-गुलाल ।

यारों, संगी-साथी मिलकर ,करते मस्ती धमाल ।।

.

छन्न पकैया छन्न पकैया , पलाश के हैं झूमर ।

मौसम, यौवन, कलियाँ…

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Posted on March 14, 2017 at 7:00pm — 7 Comments

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At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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