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Mohammed Arif
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ग़ज़ल (बह्र--22/22/22/2)

सौदें होते हैं तन केरिश्ते-नाते हैं धन के ।याद बहुत आते हैं अबमुझको दिन वो बचपन के ।मीठी-मीठी यादें सबताने-बाने हैं मन के ।कितने ही होते हैं दुखमाँ को लालन-पालन के ।ग़ुर्बत के शिकवें हैं,येख़ाली सारे बरतन के ।मौलिक एवं अप्रकाशित ।See More
2 hours ago
Mohammed Arif commented on Rahila's blog post ***बदलते सुर***(लघुकथा)राहिला
"आदरणीया राहिला जी आदाब,लघुकथा क्षण में घटित होने वाली घटना होती है । आपकी यह लघुकथा दो काल खंड को प्रदरर्शित कर रही है--(1)दफ्तर के लिए जाते हुए पत्नी अनुराग को चैक थमा रही है । यह सुबह का समय है । (2)जब रात में अनुराग कमरे में प्रवेश करता हैऔर…"
3 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"तबाह करने चला था बस्तियाँ जो तूफान वो इंक़लाब की सूरत नगर से निकला था । वाह!वाह!!वाह!! हर शे'र लाजवाब । मुबारकबाद क़ुबूल करें आदरणीय अशफाक़ अली साहब ।"
5 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"मोहतरम मोहम्मद नायाब जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । ग़ज़ल के शैल्पिक विधान के बारे में गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
14 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब, शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ क़ुबूल करें ।"
15 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय गजेंद्र श्रोत्रिय जी आदाब, बहुत अच्छे अशआर । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ क़ुबूल करें ।"
15 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"कोई इधर से तो कोई उधर से निकला था हर एक शख़्स परेशान घर से निकला था । वल्लाह कमाल है ।कितनी सच्चाई है इस शे'र में । नहीं था कुछ भी मेरे पास इक ख़ुदा के सिवा जब अपना लेके परिवार घर से निकला था । कितनी बेबाकी है इस शे'र में हर शे'र…"
20 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"दुआ सलाम लिए जब उधर से निकला था, बड़े इताब से नश्तर नज़र से निकला था । कमाल है!कमाल है!! बहुत हु बेहतरीन मतला । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें आदरणीय रवि शुक्ला जी ।"
23 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन अशआर हुए हैं । हर शे'र बेहतरीन । मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
23 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"बना रहा है वो अख़बार शहर की अक्सर, ख़बर नहीं है सूरज किधर से निकला था । बहुत बेहतरीन मक़्ता हुआ है । बहुत ख़ूब!! शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद आदरणीय मोहन बेगोवाल जी ।"
23 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"हुआ हबाब सा जीवन कि हफ्तदोजख जन्नत बहा जो ख़ून का दरिया उमर से निकला । वल्लाह कमाल है!! बहुत हु उम्दा शे'र आदरणीय लक्ष्मण धामी जी शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
23 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय साजिद हाशमी जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल । कुछ शे'र वाकई सामयिक बन पड़े हैं । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"तलाश जिसकी थी रावण को अपनी लंका में वो भेदिया उसी रावण के घर से निकला था । बहुत ख़ूब!बहुत ख़ूब!! शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें आदरणीय आशुतोष मिश्रा जी ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"क़दम बढ़ाते ही रस्ते से हो गई अनबन, अगरचे ठान के मंज़िल मैं घर से निकला था । कमाल है!कमाल है!! जो शख़्स ग़ैर के साये में ढूँढता है पनाह, हमारे साये के गहरे असर से निकला । बहुत मारक क्षमता वाला शे'र शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल…"
yesterday
Mohammed Arif commented on Dr.Prachi Singh's blog post दो कुण्डलिया छंद
"आदरणीया प्राची जी आदाब, कुंडलियों का बेहतरीन प्रयास है । कहीं-कहीं पर यति का प्रयोग छूट गया है । मात्रिक विधान की दृष्टि से ये कुंडलिया कहाँ तक सफल है इस बारे में गुणीजन अपना पक्ष रखेंगे,इंतज़ार करें ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय गिरिराज भंडारी जी आदाब, शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
yesterday

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Ujjain M.P.
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Ujjain
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Teacher
About me
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ग़ज़ल (बह्र--22/22/22/2)

सौदें होते हैं तन के
रिश्ते-नाते हैं धन के ।
याद बहुत आते हैं अब
मुझको दिन वो बचपन के ।
मीठी-मीठी यादें सब
ताने-बाने हैं मन के ।
कितने ही होते हैं दुख
माँ को लालन-पालन के ।
ग़ुर्बत के शिकवें हैं,ये
ख़ाली सारे बरतन के ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on May 27, 2017 at 10:40am

ग़ज़ल बह्र-22/22/22/2

उसने बस धन देखा है,
कब ये जीवन देखा है ।
टेसू छाया बाग़ों में,
उसका यौवन देखा है ।
देखी उसकी सूरत तो,
फिर से दरपन देखा है ।
जब-जब बरसे बादल तो,
भीगा तन-मन देखा है ।
उसकी बजती पायल पर,
खिल उठता मन देखा है ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on May 21, 2017 at 7:54am — 16 Comments

ग्रीष्म के दोहे

सूरज शोले छोड़ता ,पशु भी ढूँढे छाँव ।
दर खिड़की सब बंद है ,सन्नाटे में गाँव ।।

भीषण गरमी पड़ रही,पशु -मानव हैरान ।
भू जल भी घटने लगा, साँसत में है जान ।।

पारा बढ़ता जा रहा, सूख रहे तालाब ।
देखो गाँव महानगर , हालत हुई खराब ।।

पत्ते झुलसे पेड़ पर ,नीम बबूल उदास ।
पशु किसान सबको लगी, पानी की अब आस ।।

.
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on May 11, 2017 at 8:30am — 15 Comments

ग़ज़ल: सूखे-सूखे जंगल अब

बह्र-22/22/22
सूखे-सूखे जंगल अब,
रूठे-रूठे बादल अब ।

.
वादे, नारे सब झूठे,
बदले-बदले हैं दल अब ।

.

देखो किसकी साज़िश है,
रिश्ते-नाते घायल अब ।

.

बोतल में ऊँचे दामों,
बिकता है गंगा जल अब ।

.

ग़रीब के घर भी यारों,
ख़ुशियों वाला हो पल अब ।

.
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on May 7, 2017 at 9:00pm — 14 Comments

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At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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