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KALPANA BHATT
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KALPANA BHATT replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ ’चित्र से काव्य तक’ छंदोत्सव" अंक- 73 की समस्त रचनाएँ चिह्नित in the group चित्र से काव्य तक
"धन्यवाद् आदरणीय सर |"
Thursday
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post बहती नदी (कविता)
"धन्यवाद आदरणीय नरेंद्र जी"
Monday
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post बहती नदी (कविता)
"आदाब आदरणीय समर साहब,सादर धन्ययवाद"
Monday
narendrasinh chauhan commented on KALPANA BHATT's blog post बहती नदी (कविता)
"सुन्दर रचना "
Monday
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT's blog post बहती नदी (कविता)
"मोहतरमा कल्पना भट्ट साहिबा आदाब,बहुत सुंदर कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post बहती नदी (कविता)
"धन्यवाद आदरणीय आरिफ़ साहब।"
Monday
KALPANA BHATT replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ ’चित्र से काव्य तक’ छंदोत्सव" अंक- 73 की समस्त रचनाएँ चिह्नित in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सर कृपया इस संशोधित रचना को प्रस्थापित कर कृतार्थ करें । सार छंद छन्न पकैया छन्न पकैया,भोली भाली नारी घूँघट ओढ़े जब भी आती,लगती कितनी प्यारी छन्न पकैया छन्न पकैया,लगती है दिल जानी लंगड़ी लूली हो भले ही,या हो अंधी कानी छन्न पकैया छन्न…"
Monday
Mohammed Arif commented on KALPANA BHATT's blog post बहती नदी (कविता)
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी आदाब, नदी को आधार और जीवनदायिनी बनाकर सहज , सरल और सरस कविता की बानगी पेश की आपने । नये बिम्ब और प्रतीकों की कमी महसूस हो रही है । बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
KALPANA BHATT posted a blog post

बहती नदी (कविता)

बहती नदी से पूछा मैंनेबहती रहती हो थमती नहींदेख मुझको वो मुस्कायीबोली कुछ पल कुछ भी नहीं ।देख हंसी उसकी फिर पूछा मैंनेबोलो न क्यों तुम रूकती नहींदेख मेरी उत्सुकता वह बोलीअरे मेरी भोली सी बहनारुक गयी तो कैसे चलेगाखेतों का गागर कैसे भरेगासागर से फिर कौन मिलेगाहरियाली से कौन बतियाईएगाइतराती नहीं नारी हूँ मैं भीचंचल हिरणी , मनभावन हूँ मैं भीटकरा जाती हूँ चट्टानों सेबादलों से करती हूँ मैं बातेंसूरज की तपिश को पी लेतीचाँद को निगल जाती हूँ मैंदेख मुझको पुकारता है सागरप्यार से अपनी लेहरो से करता है…See More
Monday
KALPANA BHATT shared their discussion on Facebook
May 21
KALPANA BHATT shared their discussion on Facebook
May 21
KALPANA BHATT added a discussion to the group English Literature
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Support (short story)

Maa : Take me to doctor today . I am unable to walk because of the back ache .Son : Oh maa , every day you complain about something or the other . Please think of us too . We have our own lives too .Maa : Oh dear ! Yes sorry son , I shall not disturb you any more .She went away in her room silently weeping. Her son and daughter-in-law couldn't see her tears . Her grand children were looking at her. They loved their granny . Both went into their room .Their parents couldn't understand their…See More
May 21
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 73 in the group चित्र से काव्य तक
"छन्न पकैया छन्न पकैया,भोली भाली नारी घूँघट ओढ़े जब भी आती,लगती कितनी प्यारी छन्न पकैया छन्न पकैया,लगती है दिल जानी लंगड़ी लुली हो भले ही,या हो अंधी कानी छन्न पकैया छन्न पकैया,सुधरो अब तुम भैया गये ज़माने छोड़ो जी अब,मारे है ये गैया छन्न पकैया छन्न…"
May 19
KALPANA BHATT added a discussion to the group English Literature
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Boon

You my soul, you a boonFrom the place you comeBring fragrance of loveYou know none but may know all soonSweet are your wordsSoft is your speachSoft is your heartWhere all yours liveYou love all and all love youYou are the personWho come from.a far away landA land of love a land of yoursI bow to you and your heart and soulYou whom I have met so farDifferent from others but one among allYou my soul ,you are a boonSelf composed and unpublishedSee More
May 16
KALPANA BHATT replied to Shivam Jha's discussion Me and You in the group English Literature
"Nice one Shivam ji"
May 16
vijay nikore commented on KALPANA BHATT's blog post शिक्षा सबके लिए ( लघुकथा)
"अच्छा संदेश देती इस लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई।"
May 16

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

KALPANA BHATT's Blog

बहती नदी (कविता)

बहती नदी से पूछा मैंने

बहती रहती हो थमती नहीं



देख मुझको वो मुस्कायी

बोली कुछ पल कुछ भी नहीं ।



देख हंसी उसकी फिर पूछा मैंने

बोलो न क्यों तुम रूकती नहीं



देख मेरी उत्सुकता वह बोली

अरे मेरी भोली सी बहना



रुक गयी तो कैसे चलेगा

खेतों का गागर कैसे भरेगा



सागर से फिर कौन मिलेगा

हरियाली से कौन बतियाईएगा



इतराती नहीं नारी हूँ मैं भी

चंचल हिरणी , मनभावन हूँ मैं भी



टकरा जाती हूँ चट्टानों… Continue

Posted on May 22, 2017 at 7:45am — 6 Comments

शिक्षा सबके लिए ( लघुकथा)

" तुम मुझे रोज़ लेने आ जाती हो , मेरे बाबा मुझे डाँटते है । उनको लगता है मैं आलसी हूँ , स्कूल नहीं जाना चाहती । " शीला ने अपनी सहेली मीना से कहा ।



" हाहा हाहा , सही तो कहते है तुम्हारे बाबा , पढ़ाई चोर तो तुम हो ही , जब देखो तुम्हारी कॉपियां अधूरी रहती है ...।" मीना ने हंसकर कहा



" धत्त , कोई नहीं झूठी मेरी कॉपियां तो पूरी होती है , वो तो ....... वो तो ........."अपनी माँ की तरफ़ देखकर शीला चुप हो गयी ।



मीना यह बात जानती थी कि शीला की माँ को शीला का स्कूल जाना पसंद… Continue

Posted on May 12, 2017 at 11:38am — 9 Comments

सार छंद ( 16 ,12 )

छन्न पकैया छन्न पकैया , ऐसे मेरे नाना
रोज़ सवेरे पानी देते , औ देते थे दाना

छन्न पकैया छन्न पकैया , खुश होते थे नाना
उड़ते हुए परिंदे आते , सब चुगने थे दाना

छन्न पकैया छन्न पकैया ,था उनका ये कहना
आपनी तरह परिंदों का भी, खयाल रखना बहना

छन्न पाकैया छन्न पकैया,सबको ये समझाना
पशु पक्षी पेडों पौधों से, प्यार सदा जतलाना

छन्न पकैया छन्न पकैया , जीना चाहें मरना
नाना सदा यही कहते थे ,प्रेम सभी से करना ।।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on May 11, 2017 at 1:30pm — 13 Comments

खो गये है शब्द (कविता)

जाने कहाँ खो गये
खो गये हैं शब्द

जिनको पढ़कर कभी
हुआ करती थी सुबह

प्रथम किरणों के संग
ओस की बूंदों के भीतर

खो गये है वे शब्द
जो सूर्योदय से सूर्यास्त तक

कर देते थे जिवंत
ख़्वाब सजाया करते थे

खो गये हैं शब्द
जाने कहाँ किस ओर गये ।


मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on May 6, 2017 at 11:08pm — 4 Comments

Comment Wall (4 comments)

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At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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