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KALPANA BHATT
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KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"Bahut achhi gazal kahi hai aapne Adarniya Gurpreet Singh ji .Hardik Badhayi ."
yesterday
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"Aadab Janab Samar sahab .Bemisal ashaar kahe hain aapne . Waqai Obo ka manch saare jahan se nirala hai . Aap sabhi ko padhna mere liye saubhagya ki baat hai .Hardik badhayi sir .sadar"
yesterday
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"ज़र्द पत्तों जैसी अपनी भी कहानी हो गईं उड़ चलेंगे ये हवायें जब रवानी हो गईं । चार किस्से सुन लिए बातें सुहानी हो गईं अब चलें इन कश्तियों की बादबानी हो गईं । कौन जाने मौसमों का क्या रहा होगा मिजाज घिर गए बादल औ' नदियाँ भी तूफानी हो गईं । अब…"
yesterday
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"Achhi gazal hui hai Adarniya Surendra nath ji .Hardik Badhayi."
yesterday
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"तन्हा तन्हा ज़िन्दगी थी याद जब आयी तेरी जितनी पस मुर्दा थीं सब रातें सुहानी हो गईं। आरज़ू थी उनको खत लिखूं मगर वो आ गए जिन को लिखना था वो सब बातें ज़बानी हो गईं जो अता की थी मोहब्बत दर्द-ओ-ग़म आहोफ़ुगां मेरे दिल के वास्ते वो सब निशानी हो गईं Bahut…"
yesterday
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"Behad shandaar gazal hui hai aadarniya Nilesh ji . Hardik Badhayi."
yesterday
KALPANA BHATT left a comment for Dr vimal Kumar sharma
"Pranam Adarniya Vimal sir"
Thursday
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"Dhyan rakhungi sir. Sadar."
Mar 18
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"Ji sir dhyan rakhungi . Prayas karungi chhand sikhne ka . Sadar"
Mar 18
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"Dhanyawad aadarniya"
Mar 18
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"गलतियों के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ सर ।"
Mar 18
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"आदाब समर साहब । कच्चे छंद के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ ।"
Mar 18
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"Di prayas to kiya par galat hue hai na :("
Mar 17
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"Ji sir ."
Mar 17
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"Dhanywad aadarniyaa Pratibha di"
Mar 17
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"Dhanywad aadarniya."
Mar 17

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

KALPANA BHATT's Blog

मधुमालती छंद ( मात्रा विधान - 7-7 , 7-7)

ऐसा हुआ , बारात में
लड़का नहीँ , आया अभी

बोले पिता , बेटा कहे
पैसा अभी , मिला नहीं

शादी नहीँ , होगी अभी
मिला नहीं , दहेज अभी ।

बेटी कहे , देना नहीं
पैसा बुरा , जले चिता

होती नहीं , बेटी बुरी
चलती नही , चालें कभी

पगड़ी भली , लागे मुझे
पिता बोज़ क्यों , माने मुझे

बेटी कभी , चाहे नहीँ
अपमान नहीँ , करे कभी ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on March 16, 2017 at 4:14pm — 7 Comments

क्षितिज (कविता )

ढूंढ रहा है आज क्षितिज तुम्हें

हाँ वही जो परेशान तुम्हें किया करता था

तुम्हें प्यार करते देख किसीको

अपने आँसूं बहाया करता था



नदी किनारे से अक़्सर देखा करता था

देख कर तुमको वो मुस्कुरा देता था

बादलों से शरारत करने को कहता था

फिर उनमें अपने को छिपा लेता था ।



तुम फिर उसकी तलाश में खो जाती थीं

अटखेलियां करते हुए बादलों से

जब उसका तुम पता पूछा करती थीं

चुपके से वो आड़ से तुम्हें देख लेता था ।



हो तुम दीवानी उसकी जानता है जग… Continue

Posted on March 6, 2017 at 7:06pm — 6 Comments

सखी

बदमाश सखी की चंचल बातें
करती मस्ती
कभी तो कर देती है दूर
खींच एक लकीर

क्या खोया पाया
मन की वेदना को
अब रास आती है
खामोशियाँ ....

हँसते रहना है
दूर हो जाये हर मुश्किल
सखी की ...

न दो अब कोई आवाज़
थके कदमो से चलना है
अभी बाक़ी है कोई राह
पुकारती हुई सी ...

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on February 22, 2017 at 7:13am — 2 Comments

बसन्त गीत

देखो देखो री सखी
किया कैसा है श्रृंगार
बसन्ती हवा है चली
ऋतु राजा है तैयार ।

मीठी कोयल की बोली
झूली अम्बुवा की डार ।

ऋतु राजा है बोला
पिया करलो थोडा प्यार ।

गाओ मन भावन ये राग
हो ये बसन्त बहार ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on February 9, 2017 at 8:49pm — 2 Comments

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At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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"सभी अशआर बस मन को भा गए. और बाबा जुकर वाले शेर का तो बस... बधाई हो आदरणीय..."
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भुवन निस्तेज replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"वर्तमान के प्रति आपकी चिन्ता इस ग़ज़ल में बखूबी झलक रही है आ० राजेश दीदी. कृप्या दाद कबूल करें ."
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अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"बहुत आभार नादिर भाई !!!"
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"Like.... bhaai !!!  "
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अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"जी, सर.... आप सामने आये, मैं होश में आ गया.... अत्यन्त आभार आपका आदरणीय समर साहब.... बरसी में…"
5 hours ago
Anuraag Vashishth replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आ. मिथिलेश बहुत अच्छी ग़ज़ल है बधाई हो."
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