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KALPANA BHATT ('रौनक़')
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vijay nikore commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post दूर कहीं सुख है मेरा (कविता)
"रचना अच्छी लगी... हार्दिक बधाई, आदरणीआ कल्पना जी।"
20 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Manan Kumar singh's blog post विमोचन(लघु कथा)
"वाह! आज के साहित्य जगत मैं ऐसा ही हो रहा है| हार्दिक बधाई इस लघुकथा के लिए|"
Monday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Mahendra Kumar's blog post बे-आवाज़ सिक्के /लघुकथा
"बहुत सुंदर लघुकथा हुई है आदरणीय महेंद्र जी| सार्वजनिक शौचालयों में भी पैसे लिए जाते हैं, गरीबों के लिए वहां भी दिक्कत आती ही होगी, एक सामायिक विषय पर आपने कलम चलायी है साधुवाद आपको|"
Monday
KALPANA BHATT ('रौनक़') posted a blog post

दूर कहीं सुख है मेरा (कविता)

दूर कहीं सुख है मेरा हैं यहाँ दुखो का डेरा करता हूँ जिससे शिकायतबस उसने तुरंत मुँह फेरा हर तरफ़ है तू-तू, मैं-मैं हर जगह बस मेरा-तेरा हम एक हैं ,ख्वाब बन गया समय ने ही है यह खेल खेला कंक्रीट  के मकान बन रहे भीड़ का है बस रेला-पेला |देखकर,सब को मैंने सोचाचला लिया खूब दुखों का ठेला स्वच्छ मन से हँसने लगा मैं खिल उठा अंतर-मन मेरा अब नहीं दुखों को आने देता बन गया है, सुख अब मेरा चेला लो देखो ,अब मैं हूँ खड़ासंग मेरे हैं दोस्तों का मेला| तुम भी खुश और मैं भी खुश सुख हुआ अब देखो मेरा-तेरा| मौलिक एवं…See More
Monday
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post दूर कहीं सुख है मेरा (कविता)
"बहना कल्पना भट्ट "रौनक़" जी आदाब,बहुत सुंदर कविता है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । अंतिम पंक्ति के ऊपर वाली पंक्ति में 'खुस' को "ख़ुश" कर लें,एक दो जगह टंकण त्रुटियाँ हैं,देख लें ।"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post दूर कहीं सुख है मेरा (कविता)
"आद0 कल्पना जी सादर अभिवादन, बढ़िया कविता लिखी आपने, बहुत बहुत बधाई इसप्रस्तुति पर"
Monday
Mohit mishra (mukt) commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post दूर कहीं सुख है मेरा (कविता)
"हर तरफ है तू-तू, मैं-मैं  हर जगह बस मेरा-तेरा  शानदार कविता कल्पना दी , सादर बधाई।"
Sunday
Mohammed Arif commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post दूर कहीं सुख है मेरा (कविता)
"आदरणीय कल्पना भट्ट जी आदाब,                        बहुत  ही सुंदर किंतु शिकायत भरी कविता के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ हैं , देखिएगा"
Sunday
KALPANA BHATT ('रौनक़') posted a blog post

दूर कहीं सुख है मेरा (कविता)

दूर कहीं सुख है मेरा हैं यहाँ दुखो का डेरा करता हूँ जिससे शिकायतबस उसने तुरंत मुँह फेरा हर तरफ़ है तू-तू, मैं-मैं हर जगह बस मेरा-तेरा हम एक हैं ,ख्वाब बन गया समय ने ही है यह खेल खेला कंक्रीट  के मकान बन रहे भीड़ का है बस रेला-पेला |देखकर,सब को मैंने सोचाचला लिया खूब दुखों का ठेला स्वच्छ मन से हँसने लगा मैं खिल उठा अंतर-मन मेरा अब नहीं दुखों को आने देता बन गया है, सुख अब मेरा चेला लो देखो ,अब मैं हूँ खड़ासंग मेरे हैं दोस्तों का मेला| तुम भी खुश और मैं भी खुश सुख हुआ अब देखो मेरा-तेरा| मौलिक एवं…See More
Saturday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on विनय कुमार's blog post मुआफ़ी- लघुकथा
"हृदय स्पर्शी लघुकथा कही है आपने आदरणीय विनय सर| बधाई स्वीकारें आदरणीय|"
Saturday
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"नारी मन का बहुत सुंदर चित्रण किया है आपने आदरणीय सुशिल सरना जी | हार्दिक बधाई आदरणीय|  आपकी लेखनी को प्रणाम|"
Saturday
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"इस सुंदर गीत के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय सतविन्द्र  भैया|"
Saturday
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"धन्यवाद आदरणीय सर| "
Saturday
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"सादर धन्यवाद आदरणीय डॉ.विजय शंकर जी| "
Saturday
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"नमस्ते आदरणीय भाई जी, मैं आप ही का इंतज़ार कर रही थी| कोशिश करने के बाद भी मानव और दानव को नहीं हटा पा रही थी|  सादर धन्यवाद् भाई जी|"
Saturday
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बढ़िया दोहे हुए है आदरणीय सतीश मपात्पुरी जी| हार्दिक बधाई|"
Saturday

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

KALPANA BHATT ('रौनक़')'s Blog

दूर कहीं सुख है मेरा (कविता)

दूर कहीं सुख है मेरा 

हैं यहाँ दुखो का डेरा 

करता हूँ जिससे शिकायत

बस उसने तुरंत मुँह फेरा 

हर तरफ़ है तू-तू, मैं-मैं 

हर जगह बस मेरा-तेरा 

हम एक हैं ,ख्वाब बन गया 

समय ने ही है यह खेल खेला 

कंक्रीट  के मकान बन रहे 

भीड़ का है बस रेला-पेला |

देखकर,सब को मैंने सोचा

चला लिया खूब दुखों का ठेला 

स्वच्छ मन से हँसने लगा मैं 

खिल उठा अंतर-मन…

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Posted on January 13, 2018 at 9:00pm — 5 Comments

बदल रहा है बचपन(लघुकथा)

सड़क पर एक बच्चा हाथों में पत्थर लिए चल रहा था| मासूम हाथों में पत्थर देख एक राहगीर ने पूछा,' कहाँ जा रहे हो बेटा?" 
उस मासूम ने जवाब दिया,' उनको मारने?'
" किसको!" उस राहगीर ने आश्चर्यचकित हो पूछा|
' जिन्होंने हम पर हमला किया है|'
'किसने हमला किया है बच्चे?'
'उन लोगों ने|' 
'तुम आखिर क्या करोगे उनका?'
'मार दूंगा|'
'पर क्यों?'
'क्योंकि वे हमें मार रहे हैं|"
'तुम यहाँ क्यों आये…
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Posted on January 3, 2018 at 10:31pm — 3 Comments

नदी के ऊपर का पुल (लघुकथा)

नदी के ऊपर का पुल पुल पर से रात और दिन गाड़ियों की आवाजाही को देख उसके नीचे बहती हुई नदी ने पूछा ," तुमको परेशानी नहीं होती ! दिन भर बजन लदा रहता है तुमपर । " " अरी पागल ! ये भी कोई बात है भला , अब लोग मुझपर से गाडी नहीं ले जायेंगे तो तुझे पार कैसे करेंगे।" पुल की इस बात पर नदी हँस पड़ी। पुल ने पूछा ," इसमें हँसने की क्या बात है। तुम वर्षों से यहाँ से बहती आई हो, तुम्हारा पाट भी विशाल है और प्रवाह भी। पर सच कहूँ तो कभी कभी मुझे डर लगता है तुमसे।" " डर और मुझसे!वो क्यों भला?" " जब बाढ़ की स्थिति…

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Posted on December 26, 2017 at 8:23pm — 3 Comments

पार्षद वाली गली (लघुकथा)



"क्यों कमला बाई, उस गली में सफाई नहीं की तुमने आज?"दरोगा ने पूछा।

"मैंने तो अपनी सब गलियों में झाड़ू लगाई है साब,आप किस गली की बात कर रहे हो?"

"कल ही तो दिखाई थी वो गली तुझको, अपने पार्षद साहब वाली गली।"

"पर वो तो मेरे हिस्से की गली नहीं है साब, वहां तो श्याम जाता है बरसों से।"

"मैंने बताया तो था आज से तेरा तबादला उस तरफ़ कर दिया गया हैं।"

"पर क्यों?"

"तेरे काम से खुश होकर पार्षद साहब ने ही ऐसा कहा है।"

" अच्छा अच्छा अब समझ में आया। कल मैंने चप्पल जो मारी थी…

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Posted on December 15, 2017 at 6:49pm — 6 Comments

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At 10:51pm on August 8, 2017, श्याम किशोर सिंह 'करीब' said…

संदेशात्मक लघुकथा। सहज चित्रण के लिए बधाई।

KALPANA BHATT

At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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