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KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय नीलेश जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई है । सवाल आख़िर जवाब आख़िर यही हो ‘किसी से कुछ शिकायत है? नहीं तो!’ . जिसे महसूस कर पाये या समझे बस उतनी ही हक़ीक़त है? नहीं तो! बहुत खूब । हार्दिक बधाई ।"
4 minutes ago
KALPANA BHATT commented on Mohammed Arif's blog post मेरे भीतर की कविता
"बहुत ही संवेदनशील भावपूर्ण रचना हुई है जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहब । हार्दिक बधाई ।"
16 hours ago
KALPANA BHATT commented on Arpana Sharma's blog post " अस्पृश्य" - लघुकथा :अर्पणा शर्मा
"बहुत अच्छी लघुकथा हुई है आदरणीया अर्पणा जी । हार्दिक बधाई ।"
16 hours ago
KALPANA BHATT's blog post was featured

छाँव

खेतों में चलते हैंहल जब भीपसीना बहता हैमिट्टी में घुल मिलकरलहराती फ़सल की देता सौगात हैधूप की तपिशबरसात होती वरदानथके कदमों कोबड़े वृक्ष देतें हैं छाँवकुदरत के बिनाजीना होगा असम्भवफिर कैसा घमण्डकैसा गुरुरज़मीन सभी कीपेड़ सभी केछोटे बड़ों कीक्या होतीं हैं पहचान ?ज़मीन भी यहींआसमान भीफिर यह कैसी सोचकि किसी एक कोमिल रहा सरंक्षण आसमान काजो नहीं किसी काबिलमिल रही छाँव उसकोहै वट वृक्ष की ।क्या क्रोध है यहया किसी तूफ़ान के आने का अंदेशाहर तरफ़ ज़िन्दगी चल रहीक्या होगा आगे क्या जाने ।कौन होता है अमर कभीजो आया…See More
yesterday
KALPANA BHATT commented on rajesh kumari's blog post “किन्नर” (लघु कथा 'राज')
"Waah Adarniya Rajesh di behtreen laghukatha hui hai ."
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan commented on KALPANA BHATT's blog post छाँव
"मुहतर्मा कल्पना साहिबा, कविता के माध्यम से अच्छी मंज़र कशी की है आपने ,सुन्दर प्रस्तुति पर मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
Saturday
KALPANA BHATT commented on Admin's group ग़ज़ल की कक्षा
"Sadar dhanyawad aadarniya Nilesh ji ."
Saturday
KALPANA BHATT commented on Admin's group ग़ज़ल की कक्षा
"सर यही और कभी की तुकांता हो पायेगी क्या ।"
Friday
KALPANA BHATT joined Admin's group
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ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के इच्‍छुक है वो यह ग्रुप ज्वाइन कर लें |धन्यवाद |See More
Friday
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"इस प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया प्रतिभा दी ।"
Friday
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"छन्न पकैय्या छन्न पकैय्या, कुत्तों में अपना पन उसी जहाँ में इंसानों में, जहाँ रही है अनबन छन्न पकैय्या छन्न पकैय्या, क्या ‘कुत्ता’ है गाली ? प्रश्न यही तो पूछ रही है, यह तस्वीर निराली बहुत ही सुन्दर सार छंद । हार्दिक बधाई सर।"
Friday
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तस्दीक़ साहब दोनों की रचनायें सुन्दर हुईं हैं हार्दिक बधाई स्वीकारें ।"
Friday
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा दी बहुत सुन्दर कुण्डलिया हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Friday
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"कभी उसे कर कैद, रखे उसपर निगरानी; किन्तु जगत विख्यात, प्रेम की अमर कहानी ; मध्य श्वान द्वय भीत, देख मन सोचे गुनिया; प्रेम विरोधी कृत्य, करे आखिर क्यों दुनिया बहुत सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय । हार्दिक बधाई ।"
Friday
KALPANA BHATT replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"मौत हमारी कुत्ते जैसी, जीवन भी है वैसा। बाहर हो या घर के अंदर, रहना कुत्ते जैसा॥ मानव अति कामी क्रोधी पशु ,पक्षी के हत्यारे.! फिर भी प्रभु को सब जीवों में, मानव लगते प्यारे.!! बेहद सुन्दर सार छंद । हार्दिक बधाई आदरणीय ।"
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on KALPANA BHATT's blog post छाँव
"बहुत खूब लाजबाब प्रस्तुति ।"
Apr 21

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

KALPANA BHATT's Blog

छाँव

खेतों में चलते हैं

हल जब भी

पसीना बहता है

मिट्टी में घुल मिलकर

लहराती फ़सल की देता सौगात है



धूप की तपिश

बरसात होती वरदान

थके कदमों को

बड़े वृक्ष देतें हैं छाँव



कुदरत के बिना

जीना होगा असम्भव

फिर कैसा घमण्ड

कैसा गुरुर



ज़मीन सभी की

पेड़ सभी के

छोटे बड़ों की

क्या होतीं हैं पहचान ?



ज़मीन भी यहीं

आसमान भी

फिर यह कैसी सोच

कि किसी एक को

मिल रहा सरंक्षण आसमान का



जो नहीं… Continue

Posted on April 21, 2017 at 9:02am — 3 Comments

हाइकू

लगती प्यारी
मोहे मेरी बिटिया
गोरैया जैसी ।

रोज़ जगाती
नींद से हर दिन
प्यारी बिटिया ।

ठुमक कर
चलती थी नन्हीं सी
मेरी बिटिया ।

बड़ी सयानी
मीठी जिसकी बोली
मेरी बिटिया ।


घर आँगन
महकाती प्यार से
मेरी बिटिया ।

नया घरौंदा
बसाया अपना भी
मेरी बिटिया ।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 7, 2017 at 4:30pm — 3 Comments

हाइकु

मौज मनाने
छुट्टियों में हैं आते
नदी किनारे

बड़ी सुहानी
हवा चलती यहाँ
नदी किनारे ।

मन मोहक
नज़ारा यहाँ होता
नदी किनारे ।

मस्त लहर
आकर टकराती
नदी किनारे ।

भीड़ अधिक
हो जाती है अक्सर
नदी किनारे ।

संग पिया के
सन्ध्या देखने आती
नदी किनारे ।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 4, 2017 at 7:59pm — 1 Comment

मधुमालती छंद ( मात्रा विधान - 7-7 , 7-7)

शारदे माँ ( मधुमालती छंद)

माँ शारदे वरदान दो
सत बुद्धि दो संग ज्ञान दो
मन में नहीं अभिमान हों
अच्छे बुरे का सज्ञान दो

वाणी मधुर रसवान दो
मैं मैं का न गुणगान हों
तुमसे कभी हम दूर हों
न ऐसे कभी मज़बूर हों

दिल में सदा ही तुम रहो
रात और दिन बस तुम रहो
तुम बीन न यह जीवन हों
माँ शारदे ऐसा वर दो ।।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 4, 2017 at 7:06pm — 7 Comments

Comment Wall (4 comments)

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At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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"बहुत बढ़िया सर...."
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"आदरणीय सुरेन्द्रनाथ जी,शुक्रिया।"
35 minutes ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
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