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KALPANA BHATT
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KALPANA BHATT posted a blog post

सवाल (कविता)

पूछ रही सवाल धरा हैसुनलो ज़रा उसकी पुकारमथ रहे हो जो लगातारकितना और करोगे व्यापारखनिज मेरा तुम छिनते होफिर कहते हो खुद को महानमेरी चीज़ो से ही जानोबनते हो तुम धनवानमनुष्य हो तुम पशु नहीं होपशुता फिर भी है बिराजमानमथ रहे हो जाने कब सेअब मथो कुछ खुद को भीशायद विष पशुता का निकलेऔर दिख जाये तुममें इंसान ।मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
2 hours ago
KALPANA BHATT commented on Sushil Sarna's blog post तन्हा...
"Dhanyawad aadarniya Sushil ji , adarniya samar bhai ji ."
13 hours ago
KALPANA BHATT commented on Sushil Sarna's blog post तन्हा...
"सुंदर रचना आदरणीय शरर का मतलब क्या है आदरणीय | सादर "
19 hours ago
Nita Kasar commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"बहुत उम्दा कथा है,कितनी कुशलता से आपने घड़े को प्रतीक बना पिता को बेटे के भविष्य को लेकर निश्चिंत कर दिया है ।बधाई तो बनती है कल्पना बहना ।"
Tuesday
Nita Kasar commented on KALPANA BHATT's blog post सोमेश्वर मंदिर ( संस्मरण)
"बेहद रोचक और दिलचस्प संस्मरण है,हम अभी कुछ वर्ष पूर्व त्रामंबकेशवर हो कर आये पुरानी यादें ताज़ा हो गई ।कल्पना बहना बधाई संस्मरण साँझा करने के लिये ।"
Tuesday
KALPANA BHATT added a discussion to the group बाल साहित्य
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आलस ( कथा)

अनुष्का एक आलसी लड़की थी | लाख समझाने पर भी वह टस से मस नहीं होती थी | सुबह देर से उठना ,अपने कमरे में ही चाय दूध पीना , नाश्ता करना , और फिर सब बर्तन वहीँ रख देना | कमरे की न तो वह सफाई करती और सामान भी सब अस्तव्यस्त रखती थी |उसकी माँ और भाभी उसके कमरे को सही कर देते थे , पर धीरे धीरे उन्होंने भी बंद कर दिया | माँ कहती सफाई करने को तो वह कह देती , " माँ , मुझे सफाई नहीं करनी है | मेरा कमरा ऐसा ही मुझे अच्छा लगता है | "उसकी माँ नाराज़ हो कर कहती , " इतना आलस भी किस काम का ?"उसकी भाभी भी उसका मजाक…See More
Tuesday
Manisha Saxena commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"कल्पनाजी ,लघुकथा बहुत ही बढ़िया ,मानकों पर खरी उतरती हुई ,बधाई |"
Tuesday
Ravi Prabhakar commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"बहुत बढ़ीया लघुकथा आदरणीय कल्‍पना जी । कथानक व ट्रीटमेंट दोनों जर्बदस्‍त । विशेषकर अंतिम पंक्‍ितयां / बाबा मैंने भट्टी पे काम करते हुए आपको देखा है आप न घबराये, घड़े सही से ही पकाऊंगा  / बहुत ही गहन संदेश प्रेषित कर रही हैं । सुखिया…"
Monday
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post सोमेश्वर मंदिर ( संस्मरण)
"आदाब समर भाई जी , अभी कुछ दिनों पहले आपने मेरी एक कविता पर कहा था , पहली नदी है बाद में झरना क्यों ? असल में वो इसी जगह की यादे थी | इस जगह पर अनगिनित यादें है बेहद सुंदर जगह है , घंटो बिताया है समय मैंने | हसेंगे आप गर यह कहूँ की कई बार मैं किताबे…"
Sunday
Tasdiq Ahmed Khan commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"मुहतर्मा कल्पना साहिबा ,संदेश देती सुन्दर लघुकथा हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
Sunday
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,अच्छी लगी आपकी लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें और गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें ।"
Sunday
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT's blog post सोमेश्वर मंदिर ( संस्मरण)
"बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,यादों पर मबनी आपकी याददाश्त के पन्नों से उभरे इस सृजन पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Mohammed Arif commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी आदाब, आतंकवाद की पृष्ठभूमि पर लिखी गई औसत दर्ज़े की लघुकथा । कथानक में और कसावट की आवश्यकता है । कथानक और उभरने का अवसर मिलना था जो नहीं मिला । वर्तनीगत अशुद्धियाँ भी आसानी से देखी जा सकती है ।।बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"बेहतरीन कथानक पर बढ़िया प्रस्तुति के लिए सादर हार्दिक बधाई आपको आदरणीय कल्पना भट्ट जी। अंतिम पांच-सात पंक्तियों के स्थान पर कुछ बेहतरीन विचारोत्तेजक समापन भी हो सकता है आपकी सधी हुई लेखनी से। सादर।"
Sunday
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post सोमेश्वर मंदिर ( संस्मरण)
"dhanyawad Adarniya Mohit ji"
Sunday
Mohit mishra (mukt) commented on KALPANA BHATT's blog post सोमेश्वर मंदिर ( संस्मरण)
"सरल शब्दों और साधारण वाक्यों में असाधारण अभिव्यक्ति | सुन्दर संस्मरण "
Sunday

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

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सवाल (कविता)

पूछ रही सवाल धरा है
सुनलो ज़रा उसकी पुकार

मथ रहे हो जो लगातार
कितना और करोगे व्यापार

खनिज मेरा तुम छिनते हो
फिर कहते हो खुद को महान

मेरी चीज़ो से ही जानो
बनते हो तुम धनवान

मनुष्य हो तुम पशु नहीं हो
पशुता फिर भी है बिराजमान

मथ रहे हो जाने कब से
अब मथो कुछ खुद को भी

शायद विष पशुता का निकले
और दिख जाये तुममें इंसान ।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on July 28, 2017 at 9:22am

सोमेश्वर मंदिर ( संस्मरण)

सन १९८२ , बी वाय के कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स, शरणपुर रोड, नाशिक , यह उनदिनों की बात है जब मैं इस कॉलेज में पढ़ती थी |

हमारी कॉलेज के पैरेलल दो सड़के जाती थी, एक त्रम्बकेश्वर रोड, और दूसरी गंगापुर रोड , और इन दोनों के बीच पड़ता है हमारा कॉलेज रोड|

हमारे कॉलेज से एक रास्ता कट जाता है जो गंगापुर रोड की तरफ जाता है , कॉलेज से करीब ४.८ किलोमीटर की दुरी पर है यह सोमेश्वर मंदिर | महादेव जी का यह एक प्राचीन मंदिर है , गोदावरी नदी के तट पर बसा यह मंदिर अपनी सुंदरता लिए हुए है | उनदिनों…

Continue

Posted on July 22, 2017 at 7:17pm — 5 Comments

पक्का घड़ा ( लघुकथा )

गाँव वालों के बीच इन दिनों एक ही चर्चा चल रही थी और वो थी सुखिया के  बेटे का आतंकवादी बन जाना  | सुखिया एक सीधा सादा कुम्हार था पर उसके हाथ के बने घड़े सुन्दर और पक्के होते थे | आस पास के गाँव वाले भी उसके पास घड़े खरीदने आते थे |

लोगों को जब उनके बेटे के बारे में पता चला तो वे सब सकते में आ गए ।



किसीने कहा , " घोर कलजुग है भैया , किसीका भरोसा नहीं । "



कोई बोला ," इसमें तो मुझे उस सुखिया कुम्हार की ही गलती दिखे है , माटी के घड़े तो बना दिए पर खुद…

Continue

Posted on July 22, 2017 at 5:47pm — 7 Comments

सावन ( हाइकू)

आया सावन 

बोले मयूरा सुनो 

उसकी बोली |

२ 

गरज गए

बादल सावन के 

नाचो औ  गाओ |

३ 

गीत कोई तो 

सुना दो सावन के 

मनवा डोले  |

४ 

मधुर गीत 

गाती जब  सखियाँ

पिया पुकारें |

५ 

हरित धरा 

कहती कुछ कुछ 

सुनो तो सही |

चमके जब 

बिजली डर लागे 

ढूँढे पिया को…

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Posted on July 18, 2017 at 10:30pm — 13 Comments

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At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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