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KALPANA BHATT ('रौनक़') Online Now
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KALPANA BHATT ('रौनक़') posted blog posts
15 minutes ago
TEJ VEER SINGH commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post ग़ज़ल (३)
"हार्दिक बधाई आदरणीय कल्पना भट्ट जी।बेहतरीन गज़ल।पहली बार आपकी गज़ल पढ़ी।अच्छा प्रयास।"
40 minutes ago
Mohammed Arif commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post ग़ज़ल (३)
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी आदाब, बढ़िया ग़ज़ल । अच्छे अशआर । शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
2 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-मुझ को कोई ख़रीद ले सस्ता किए बग़ैर
"खुबसूरत ग़ज़ल आदरणीय निलेश जी | हार्दिक बधाई |"
3 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on vijay nikore's blog post प्राण-स्वप्न
"भावपूर्ण रचना | हार्दिक बधाई इस रचना के लिए आदरणीय विजय निकोरे जी | "
3 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on TEJ VEER SINGH's blog post परोथन – लघुकथा -
"अच्छी कथा हुई है आदरणीय तेज वीर सिंह जी | हार्दिक बधाई |"
3 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post ग़ज़ल (३)
"आदाब आदरणीय समर भाई जी | जी भाई जी अभी सही करती हूँ , सादर धन्यवाद आपका , आप बहुत अच्छे से सिखाते हैं हम जैसे नवोदितों को , साधुवाद आपको | सादर प्रणाम |"
3 hours ago
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post ग़ज़ल (३)
"बहना कल्पना भट्ट'रौनक़'जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,बधाई स्वीकार करें । ये ग़ज़ल आपने 22 22 22 22 22 2 पर लिखी है जबकि ये 22 22 22 22 22 22 पर हो गई है,ग़ज़ल के अरकान ऊपर बदल दें । 'चले जायेंगे अपने रास्ते वो भी इक दिन' इस मिसरे…"
4 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') shared their discussion on Facebook
20 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Samar kabeer's blog post ग़ज़ल बतौर-ए-ख़ास ओबीओ की नज़्र
"आदरणीय समर भाई जी आप की ओ बी ओ से महब्बत और आपकी साहित्यिक सेवा से हमेशा से कायल रही हूँ , आप प्रेरणा हो मेरे , बड़े भाई हो , सच माने ऐसी साहित्यिक सेवा और कहीं नहीं देखी मैंने | साधुवाद आपको | जितना कहा जाए आपके लिए कम है |"
20 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल --पाक आतंकी कभी बाज़ आएँ क्या
"बहुत अच्छी ग़ज़ल | बधाई आदरणीय |"
21 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"बहुत सुंदर ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय रामबली जी हार्दिक बधाई स्वीकारें | "
21 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"अच्छी ग़ज़ल कही है आपने आदरणीया राजेश दी | हार्दिक बधाई "
21 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Samar kabeer's blog post ग़ज़ल बतौर-ए-ख़ास ओबीओ की नज़्र
"आह और वाह बेहद प्यारी ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय समर भाई जी , हर शब्द छोटा होगा , कुछ नहीं कह पा रही इस ग़ज़ल के लिए | बस वाह वाह और वाह | बहुत बहुत बधाई आपको , आपके इस मंच से प्यार को सलाम |"
21 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Sushil Sarna's blog post तेरे इंतज़ार में ...
"आदरणीय सुशिल सरना जी बेहद सुंदर और भावपूर्ण कविता लिखी है आपने | हार्दिक बधाई |"
21 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post बाज़ार में जूतमपैजार (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"उम्दा लघुकथा लिखी है आपने आदरणीय शहजाद जी एक प्रश्न आ रहा है मन में अन्यथा न लीजियेगा  "हां, सो तो है! जूतमपैजार और हमें ग़रीबी का अहसास!" सुहैल ने अब्बू को पलंग पर लिटाते हुए कहा।यह एक बच्चे ने कही न बात , क्या इतनी गंभीर बात उसके…"
21 hours ago

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

KALPANA BHATT ('रौनक़')'s Blog

मत पूछो

समुंदर से किनारे का रिश्ता मत पूछो 

परिंदों से आसमां का रिश्ता मत पूछो 

हर छोटे बड़े को इस जहां में रहना हैं 

फूलों से कलियों का रिश्ता मत पूछो 

जाने कितने अलग अलग   यहाँ  चेहरे है 

इंसा से चहेरों का रिश्ता मत पूछो 

दौलत  से होती है पहचान इंसान की

मुझसे मेरी माली हालत मत पूछो 

प्यार के रिश्ते को तराशा है हमने 

ज़ज्बात से दिल का रिश्ता मत पूछो 

मौलिक एवं…

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Posted on September 26, 2017 at 4:50pm

ग़ज़ल (३)

२२ २२ २२ २२ २२ २२  

दिल की बातें वो भी समझें ये  सोचा था 

होंगी मिलकर सारी बातें ये  सोचा था ?

चले जायेंगे अपने रस्ते वो भी इक दिन 

रह जाएंगी तन्हा रातें ये   सोचा था ?

जीवन जैसा होगा उसको जी लेना है 

दर्दो अलम की ले सौगातें ये सोचा था ?

एक बहाना मुझको जीने का मिल जाता 

रह जातीं बस उनकी यादें ये सोचा था ?

डूब गयीं हूँ प्यार में जिनके मैं " रौनक"…

Continue

Posted on September 25, 2017 at 9:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल (2)

२२ २२ २२ २२ २२ २



आओगे जब भी तुम मेरे ख्वाबों में

उन लम्हो को रख लूँगी मैं यादों में



और नही कुछ चाहूँ तुमसे मेरी जां

दम टूटे मेरा बस तेरी बाहों में

मेरा जीवन इस गुलशन के फूलों जैसा

घिरा हुआ है मगर बहुत से काँटों में



तुमको में रूदाद सुनाऊं क्या अपनी

मेरा हर लम्हा बीता है आहों में



देख रही हो मुझको तुम जैसे "रौनक"

जी चाहे मैं डूब मरूँ इन आँखों में







मौलिक एवं…

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Posted on September 23, 2017 at 9:30am — 19 Comments

अधकटा पेड़(लघुकथा)

सुंदर से बाग़ के एक कोने में एक अधकटा पेड़ लोगों को आकर्षित तो कर रहा था पर उसकी बदसूरती पर लोग तरह तरह की बातें कर रहे थे |

और क्यों न हो चर्चा उसकी , एक बड़ा सा पेड़ जिसकी छाँव में कभी लोग बैठा करते थे आज उसकी ऐसी हालत ! एक तरफ से लग रहा थे मानो किसीने उसकी टहनियों को तोड़ कर उसकी खूबसूरती को उससे छीन लिया था |" पर ऐसा कोई क्यों करेगा ?" एक राहगीर ने दूसरे से पूछा |

" मुझे लगता है यह काम माली का ही होगा | बड़ा पागल होगा यह माली , पेड़ की कटाई करनी हो तो ढंग से तो करता |" मुँह बिचकाते…

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Posted on September 14, 2017 at 4:30pm — 11 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 10:51pm on August 8, 2017, श्याम किशोर सिंह 'करीब' said…

संदेशात्मक लघुकथा। सहज चित्रण के लिए बधाई।

KALPANA BHATT

At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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