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KALPANA BHATT ('रौनक़')
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KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"अभी और काम किया जाए इस रचना पर तो बेहतर लघुकथा बन सकती है, ऐसा मुझे लगता है| सादर| उम्मीद है आप बुरा न मानेंगे शहजाद जी| "
Dec 31, 2018
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"कृषक पर आधारित बढ़िया लघुकथा हुई है आदरणीय विनय जी| हार्दिक बधाई | "
Dec 31, 2018
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"अच्छी कथा हुई है जिसके लिए बधाई स्वीकारें आदरणीय अजय गुप्ता जी|"
Dec 31, 2018
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"अच्छा प्रयास हुआ है आदरणीया अनीता जी| सुधिजनो की बातों पर संज्ञान लीजियेगा| सादर| "
Dec 31, 2018
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"आपकी लघुकथा अपने आप में एक अलग बात लिए होती है अलग दृष्टिकोण से आप रु-ब-रु करवाते हो| फंतासी की रचना वह भी सहज और इतनी रोचक बना देते हो| बहुत बढ़िया शिल्प, और परिकल्पना भी शानदार है| हार्दिक बधाई आपको इस लघुकथा के लिए|  बस एक जगह मुझे संदेह हो…"
Dec 31, 2018
विनय कुमार commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post स्वावलम्बी (लघुकथा)
"बहुत बढ़िया विषय उठाया है आपने इस लघुकथा में, प्रस्तुति में कहीं कहीं थोड़ी नाटकीयता आ गयी है जिसे दुरुस्त किया जा सकता है. किन्नर भी तो इंसान ही हैं और उनको भी अपने ढंग से जीने का हक़ है. बहरहाल बहुत बहुत बधाई इस गंभीर विषय पर लिखने के लिए आ कल्पना…"
Dec 27, 2018
babitagupta commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post स्वावलम्बी (लघुकथा)
"बहुत ही मार्मिक, संवेदना भरी रचना,विक्षिप्त सोच को आइना दिखाती ।बेहतरीन रचना के लिए बधाई स्वीकार कीजिएगा, आदरणीया कल्पना दी।"
Dec 27, 2018
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post रगों में बहता खून  (लघुकथा )
"अच्छी रचना हुई है, आदरणीय गोपाल नारायण जी| हार्दिक बधाई आपको| "
Dec 24, 2018
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post स्वावलम्बी (लघुकथा)
"धन्यवाद आदरणीय फूल सिंह जी| "
Dec 24, 2018
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post स्वावलम्बी (लघुकथा)
"धन्यवाद आदरणीया नीलम उपाध्याय जी| "
Dec 24, 2018
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post स्वावलम्बी (लघुकथा)
"नमस्ते आदरणीय समर भाई ! आपको लघुकथा लम्बी लगी, मैं पुनः इसको लिखने का प्रयास करुँगी| सादर|"
Dec 24, 2018
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post स्वावलम्बी (लघुकथा)
"धन्यवाद आदरणीय शहजाद जी|"
Dec 24, 2018
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on विनय कुमार's blog post विरासत- लघुकथा
"अच्छी लघुकथा हुई है आदरणीय विनय जी हार्दिक बधाई |"
Dec 24, 2018
PHOOL SINGH commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post स्वावलम्बी (लघुकथा)
"सच्चाई को बयां करती अच्छी लघु कथा बधाई स्वीकारें"
Dec 24, 2018
Neelam Upadhyaya commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post स्वावलम्बी (लघुकथा)
"बहुत ही मार्मिक कथा बनी है।  प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई। "
Dec 24, 2018
Neelam Upadhyaya commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post स्वावलम्बी (लघुकथा)
"बहुत ही मार्मिक कथा बानी है।  प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई। "
Dec 24, 2018

Profile Information

Gender
Female
City State
BHOPAL
Native Place
MUMBAI
Profession
house wife
About me
was a teacher for about 20 Years. Recently resigned. I am M.A in English,B.Ed ,LLB.. . interested in literature

KALPANA BHATT ('रौनक़')'s Blog

स्वावलम्बी (लघुकथा)

“अरे यार! हद्द है ये तो, अब क्या इसके हाथ का खाना पड़ेगा?”



लोकल ट्रेन में बैठे एक व्यक्ति ने कहा। एक किन्नर इडली-सांभर के डिब्बों का थैला लिए डिब्बे में घूम रहा था| उसकी आवाज़ और उसके हाव-भाव से लोग उसकी ओर आकर्षित तो हो रहे थे | पर उससे सामान कोई नहीं खरीद रहा था| एक मनचले ने कहा, “ क्यों बे हिजड़े अब हमारे ऐसे दिन आ गए हैं कि ...|”



किन्नर ने उसके प्रतिउत्तर में कहा, “ क्यों रे? क्या तू किसी और तरह का अन्न खाता है?|



मनचले ने घृणा से उसकी ओर देखा|



किन्नर… Continue

Posted on December 22, 2018 at 10:23am — 10 Comments

लहरें ( कविता)

आज लहरों ने की बातें मुझसे 

बोलीं 

तुम सोचती हो तुम हो बहादुर 

समय से तुम लडती हो 

मूर्ख हो तुम 

जो यह सोचकर दम भरती हो| 

और वह इठला कर चली गयी 

दूर 

वहीं जहाँ से वह आयीं थी 

किनारे तक 

और वहाँ पड़े चट्टानों से 

टकरा-टकरा कर रही थी 

बातें उनसे, 

कह रहे थे चट्टान उनसे 

रुक जाओ 

करीब आप मेरे ऊपर से 

न यूँ बह जाओ 

रुको कुछ घड़ी 

की हम तपते हैं 

और…

Continue

Posted on October 26, 2018 at 12:00am — 9 Comments

दो धारी तलवार(लघुकथा)

"अरे सुखिया! सुन तो मन्ने एक बात सूझी हैं, तू कहे तो बताऊँ।"

"का बात सूझी है दद्दा! बताय ही द्यो। मैं तो परेसान हो गया हूँ, एक तो उ बैंक का मनजेर बाबू आज सुबह ही कह रहे थे कि जो करजवा हम लिये रही उ का ब्याज भरने को पड़ी...।"

"ह्म्म्म हम सुन लिए थे उ वा की बात, तभी तो हम आये हैं, तू एक काम कर, तू कल सरपंच से कछु उधार मांग ले, वो इंकार न करेगा, और उ पैसा से अपन का ब्याज की किश्त चुकाई दिए।"

"होउ , इ हे बात तो हमरी ख़ोपड़िया में आयी ही नही। हम कल ही सरपंच जी से बात करेंगे। पर…

Continue

Posted on September 12, 2018 at 10:30am — 7 Comments

सुष्ठु दुनिया(लघुकथा)

 "ऑफ़ ओह! शीला मैं तो तंग आ गया हूँ, तुम्हारे हाथ में चौबीसों घण्टे मोबाइल को देखकर।" शीला अपनी धुन में थी, नित्यक्रम से निबट कर टी.वी. के आगे अपना मनपसन्द सीरियल देख रही थी और साथ में उसकी उँगलियॉ मोबाइल पर लगातार चल रही थी। शीला की सास, और ससुर जी भी वहीं बैठे हुए थे। वे तपाक से बोले," शेखर की माँ! मुझे तुम्हारी जवानी याद आ रही है...।" शीला के कान चौकन्ने हो गये, वह उनकी तरफ देख रही थी। ससुर जी उसके देखने का आशय समझ गये; उन्होंने कहा,"अरे उस ज़माने में यह मुआ मोबाइल -शोबाइल नहीं था, तुम्हारी…

Continue

Posted on August 5, 2018 at 9:25pm — 11 Comments

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At 10:51pm on August 8, 2017, श्याम किशोर सिंह 'करीब' said…

संदेशात्मक लघुकथा। सहज चित्रण के लिए बधाई।

KALPANA BHATT

At 1:55pm on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीया कल्पना जी महीने की सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 1:26pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया 

श्रीमती कल्पना भट्ट जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:34am on May 15, 2016, Rahila said…
बहुत शुक्रिया आदरणीया दी! आपने मुझे दोस्ती के काबिल समझा ।
At 2:10pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है , धन्यवाद आदरणीया कल्पना जी 

 
 
 

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