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pratibha pande
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pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"जिह्वा  इनकी रोज  फिसलती, शर्मनाक है  भाषा। मूल्यहीन  है राजनीति पर, सत्ता  की अभिलाषा।। कुत्सित  चाल चलें जो नेता, उनको सबक सिखाना। सब मिलकर मतदान केन्द्र पर, वोट  डालने जाना।।//  वाह   शानदार सृजन…"
Sunday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"सुन्दर गीत सृजन   हार्दिक बधाई आदरणीय सतविन्दर भाई"
Sunday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"क्षेत्रीय भाषा में छंद रचना पढना  अच्छा लगा आदरणीय उस्मानी जी  हार्दिक बधाई"
Sunday
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"हार्दिक आभार आदरणीय सतविन्दर भाई रचना को मान दिया"
Sunday
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"किसी भुलावे और लोभ में,हरगिज ना बिक जाएंजनहित में मतदाता बनकर, अपना फर्ज निभाएंनियम संयम अनुशासन में, मत कर मान बढ़ाएंमतदाता मतकर्मी मिलकर, सुंदर चमन सजाएं ll//  वाह  लोकतन्त्र के पर्व को मनाने की सही सीख देती प्रभावशाली रचना  हार्दिक…"
Sunday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"छन्न पकैया छन्न पकैया, मत को नहीं नकारें । बनती और बिगडती देखी, इक मत से सरकारें ।४।// बहुत सही बात  इस शानदार सृजन पर बधाई स्वीकारें आदरणीय सत्यनारायण सिंह जी"
Sunday
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"प्रदत्त चित्र को नये आयाम देते हुए शानदार सृजन   हार्दिक बधाई आदरणीय सतविन्दर भाई"
Sunday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"वंचित का शोषण करता हो , मूल ध्येय पद पैसा । कथनी -करनी में अंतर हो , चुनें न शासक ऐसा ।। विगत हुयीं जो त्रुटियाँ उनको ,और न हम दुहराएँ । लेकतंत्र का पर्व निकट है , चलो   सहर्ष   मनाएँ ।।//  वाह वाह बहुत सुन्दर छंद गीत रचना…"
Sunday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रदत्त चित्र अनुरूप शानदार छंद रचना हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक जी"
Sunday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"चलो बनाएं ऐसा भारत, हम सब इसके वासी,जहां नहीं हों राजा-रानी, रहे न दास व दासी।//  बहुत सुन्दर  हार्दिक बधाई आदरणीय अजय जी इस सुन्दर सृजन के लिये"
Sunday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"नेताओं के वादे झूठे, किंतु हमें क्या लेना। नंगों में जो कम नंगा है, वोट उसे ही देना॥// यही सच है। खरी बातों के साथ रचे छन्दों के लिये हार्दिक बधाई आदरणीय अखिलेश जी"
Sunday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"छन्न पकैया छन्न पकैया, उँगली दाग दिखाती।  'मत' देने से चूक न जाना ,सबको याद दिलाती।। छन्न पकैया छन्न पकैया, वक्त चुनावी आया। वादे दावे बड़बोलापन,  और प्रलोभन लाया।। छन्न पकैया छन्न पकैया, आतंकी चकराते। घाटी में वोटिंग में जब सब,…"
Sunday
pratibha pande commented on विनय कुमार's blog post वह निगाहें- लघुकथा
"कसे हुए शिल्प के साथ सुन्दर विचारोत्तोजक रचना के लिये बधाई आदरणीय विनय जी । नेता के नाम की जगह 'एक बड़ा नेता ' लिखना ज्यादा ठीक होता क्योंकि 'बूढे सरदार ड्राइवर'  का जिक्र काफी है उस समय के माहौल को दर्शाने के लिये। ।"
Apr 3
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-48 (विषय: जागृति)
" शबरी घर रामचंदर रातों रात गाँव में फेमस हो गई गंगू। अखबार टीवी हर तरफ एक ही खबर कि कैसे  वोट  मांगने निकले रामचंदर बाबू उस बूढी के कच्चे  मकान में रुके  और  खुद उसकी रसोई में घुसकर मक्के की रोटी और चटनी लाये और जमीन…"
Mar 31
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-48 (विषय: जागृति)
" शबरी घर रामचंदर रातों रात गाँव में फेमस हो गई गंगू। अखबार टीवी हर तरफ एक ही खबर कि कैसे  वोट  मांगने निकले रामचंदर बाबू उस बूढी के कच्चे  मकान में रुके  और  खुद उसकी रसोई में घुसकर मक्के की रोटी और चटनी लाये और जमीन…"
Mar 31
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 95 in the group चित्र से काव्य तक
"रक्षक रक्षा के लिए, हरदम हैं तैयार, मने उन्हीं के साथ भी, खुशियों का त्यौहार। उनके उर लेते रहें सदा नेह की झूल।//  बहुत सुन्दर   हार्दिक बधाई आदरणीय सतविन्दर जी"
Mar 17

Profile Information

Gender
Female
City State
Ratlam Madhya Pradesh
Native Place
Almora Uttarakhand
Profession
was a teacher , currently house wife and a social worker
About me
I am from a sahitya premi family ,love to read and write

Pratibha pande's Blog

राज़ [ लघुकथा प्रतिभा पाण्डे ]

“ कब से इंतज़ार कर रहा हूँ तेरा I एक राज़ की बात बतानी है I’’ राधा के बाहर आते ही अब्दुल ड्राईवर झट उसके पास आ गया I

“जल्दी बता, बहुत काम पड़ा है I” झटके का कपड़ा कमर में खोंसती राधा बोली I

“ कल तू बता रही थी ना कि मेमसाब आजकल बदली बदली हैं, बहुत मीठा बोलती हैं , टूट फूट में चिल्लाती  भी नहीं हैं I’’

“ हाँ तो ?’’

“दोनों कड़वे करेलों की दरियादिली का राज़ आज खुल गया है I’’ अब्दुल का अंदाज़ भेद भरा था  I

“दोनों मतलब ?’’

“ साहब भी आजकल मीठे हो रहे हैं I…

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Posted on July 6, 2017 at 6:00pm — 9 Comments

मेरी दादी [गीत ] प्रतिभा पांडे

ऊन सलाई संग दादी का

बहुत पुराना था याराना

चपल उँगलियों का दादी की  

जाड़े ने भी लोहा माना

 

छत पर जब दादी को पाती

धूप गुनगुनी  मिलने आती

ख़ास सहेली बन दादी की  

वो भी फंदों से बतियाती

 

सीधे पर दो उल्टे फंदे

बुनता जाता ताना बाना

 

कल जो था बाबा का स्वेटर

अब छोटू का टोपा मफलर

नई पुरानी ऊनों के संग

चपल उँगलियाँ चलतीं सर सर

 

इस रिश्ते से उस रिश्ते तक

गर्माहट का आना…

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Posted on December 18, 2016 at 1:00pm — 8 Comments

फिर आओ गोपाल [ दोहा गीत जन्माष्टमी पर ]

 

हे पार्थ के सारथी, हे जसुमति के लाल

हरने जन की पीर अब , फिर आओ  गोपाल

 

ध्वस्त किया था कंस का ,इक दिन तुमने मान

निडर हो गया कंस अब ,और हुआ बलवान

घूम रहा है ओढ़ कर ,सज्जनता की खाल

हरने जन की पीर अब ,  फिर आओ  गोपाल

 

पाँचाली के चीर का ,किया खूब विस्तार   

नयनों में भर नीर फिर ,तुमको रही पुकार

अंध सभा में ठोकता , दुःशासन फिर  ताल

हरने जन की पीर अब  ,फिर आओ गोपाल

 

अर्जुन का रथ थाम कर…

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Posted on August 25, 2016 at 8:00am — 14 Comments

‘बेच रहा है आज तिरंगा’

 

चौराहे नाके पर बालक

बेच रहा है आज तिरंगा

 

झंडे लेकर उससे इक दो

कुछ पैसे उसको दे डालो

फिर गाडी में उन्हें लगा कर

आज़ादी की रस्म निभा लो

 

खाली हाथों घर जो लौटा

बाप करेगा पी कर पंगा

 

शनि लेकर कल घूम रहा था

सरसों तेल व जलती बाती

भूखे बच्चे चौराहे पर

कब बीतेगी साढ़े साती

 

रोजी उसकी ही खा जाता 

खादी  जाली का हर दंगा

 

बीते न बस रस्मी…

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Posted on August 15, 2016 at 11:18am — 4 Comments

Comment Wall (20 comments)

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At 3:07pm on November 18, 2018, Sheikh Shahzad Usmani said…

 

आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय साहिबा, जन्मदिन की हार्दिक बधाई और  शुभकामनाएँ।

At 1:39pm on November 18, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीया प्रतिभा पांडे साहिबा, जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ. ईश्वर आपको सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रखे. सादर 

At 12:19pm on November 18, 2018, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय प्रतिभा पांडे जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें।प्रभु आपकी समस्त मनोकामनायें पूर्ण करें।माता रानी का सदैव आशीर्वाद मिले। जीवन में सुख, शाँति,समृद्धि और सेहत से मालामाल रहें।सदैव उन्नति के पथ पर अग्रसर रहें।

At 7:55am on June 24, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीया प्रतिभा पांडे जी आपको कविता पर कविता पसंद आई हार्दिक आभार।
At 7:35pm on June 23, 2016, kanta roy said…
इस बीच मैने महसूस किया है कि कई गहरे आत्मीय संबंध मेरी मित्र सूची में शामिल नहीं है तो अचरज से भर गई । वास्तव में हमारा रिश्ता बहुत गहरा है । अपनी सौम्य ,सहज साझीदार को हृदय से अभिनंदन प्रेषित करती हूँ । :)))
At 6:57pm on November 19, 2015, maharshi tripathi said…

धन्यवाद  आ.प्रतिभा जी |

At 3:58pm on November 19, 2015, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिवस पर शुभ कामनाएं व्यक्त करने अनुग्रहित करने के  लिए ह्रदयतल से आभारी हूँ आपका  आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी, सादर   -
ईश कृपा से ही हुऐ,सात दशक ये पार,
मित्रों इस सद्भाव का, बहुत बहुत आभार ।

- लक्ष्मण रामानुज लडीवाला,जयपुर

At 6:27pm on November 18, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीया प्रतिभा जी आपको सपरिवार जन्मदिन की ढेरों बधाईयाँ एवं शुभकामनाएं। 

At 5:24pm on November 18, 2015, नादिर ख़ान said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीया प्रतिभा जी । 

At 2:55am on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
जन्मदिन की सालगिरह पर तहे दिल बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी।
 
 
 

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