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pratibha pande
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pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"एक छंद में सम्पूर्ण चित्र का मर्म उकेर दिया है आपने ...हार्दिक बधाई आदरणीय अरुण कुमार निगम जी "
Jun 17
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
" . रहिये चुप बस देखकर, तपता वृद्ध शरीर | आग बुझाती भूख है , राख बताती पीर || राख बताती पीर , जवानी बीती जल-जल, रही आग ही साथ, उम्रभर पलपल हरपल,...बहुत सुन्दर     हार्दिक बधाई आदरणीय अशोक जी   "
Jun 17
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"जले कोयला खुद हो काला,करता उजली आँचइसी आँच से मिलती रोटी, बात यही है साँच.....सुन्दर सरसी छंद रचना ,में  प्रदत्त चित्र को  शब्द दिए हैं ,  हार्दिक बधाई आदरणीय सतविंदर  जी "
Jun 17
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"रचना को मान देने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय अखिलेश जी "
Jun 17
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"आपको ये प्रयास पसंद आया ,लिखना सफल हुआ ,हार्दिक आभार  आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी "
Jun 17
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"उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण लडिवाला  जी "
Jun 17
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"हार्दिक आभार आदरणीय तस्दीक जी , रचना को आपने मान दिया "
Jun 17
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"आज मशीनी युग का खेला , नहीं मिले रोजगार । कैसे जलायें पेट का चुल्हा , सोचे नहीं सरकार ।...बहुत सुन्दर भाव ..हार्दिक बधाई आदरणीय    "
Jun 17
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"धकधक करती चली धौंकनी, हुआ कोयला लाल | ग्रीष्मकाल रमजान महीना , मन में उठे सवाल || ...वाह ..चित्र को रमजान महीने से जोड़ते हुए नए आयाम दे दिए आपने  ...हार्दिक बधाई इस सुन्दर छंद रचना पर आदरणीय  अशोक जी  "
Jun 17
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"चले हथौड़ा लाल लौह पर, लोहा बदले रूप। अथक परिश्रम हर मौसम में, ठंडी बरखा धूप॥..वाह    सिर्फ भुजाओं के दम पर तो, हाल हुआ बेहाल। फैला जाल मशीनों का तो, घटे आय हर साल॥....हाथ से काम करने वालों की  यही दुर्दशा है  ..प्रदत्त चित्र को…"
Jun 17
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"लिये आत्म विश्वास, आंच में लोह तपाता फिर साँचें में ढाल, वस्तुएं खूब बनाता |....बहुत सुन्दर छंद रचना ,प्रदत्त चित्र को सटीक  परिभाषित करती हुई  हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडिवाला  जी  "
Jun 17
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"जर्जर दोनों दिख रहे,लोहा और शरीरलेकिन तपकर आग में,रहते दोनों धीर....बहुत सुन्दर ...प्रदत्त चित्र के मर्म को पकड़ कर  रची गई आपकी दोनों छंद रचनाएँ बहुत सुन्दर हैं ,हार्दिक बधाई आदरणीय सतविंदर जी "
Jun 17
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
" ) छेनी भट्टी और हथौड़ा ,जब है तेरे पास हिम्मत से कर महनत होगी ,पूरी तेरी आस....प्रदत्त चित्र  सम्पूर्ण परिभाषित है आपकी दोनों छंद रचनाओं में ,बधाई स्वीकार करें आदरणीय  तस्दीक जी  "
Jun 17
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"    चाहे हल की फाल बना दूँ , चाहे तो तलवार।  चाहे मैं औजार बना दूँ , चाहे फाल कटार ||        सरसी छंद पर सुन्दर रचना ,हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय चौथमल जैन जी "
Jun 17
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छंद [गीत ]   अंगारों में लोह तपाता ,ये बूढ़ा लोहार तन निर्बल,मन की क्या पूछें ,बड़ी पेट की मार   लोहारी औजार पड़े हैं, यहाँ वहाँ सब ओर इसके हिस्से का उजियारा ,लायेगी कब भोर नहीं गिला शिकवा है कोई, मौन उठाये भार अंगारों में लोह…"
Jun 17
pratibha pande replied to योगराज प्रभाकर's discussion ओबीओ लाईव लघुकथा गोष्ठी अंक-26 में स्वीकृत लघुकथाएँ
" आदरणीय योगराज प्रभाकर जी , एक और सफल गोष्ठी के लिए आपको और सभी मित्रों को हार्दिक बधाई I  कृपया  १९ क्रमांक पर मेरी रचना को इस परिमार्जित रूप से प्रतिस्थापित कर दें I कृपया इस पर अपनी अमूल्य टिप्पणी देने की भी कृपा करें I…"
Jun 1

Profile Information

Gender
Female
City State
Ratlam Madhya Pradesh
Native Place
Almora Uttarakhand
Profession
was a teacher , currently house wife and a social worker
About me
I am from a sahitya premi family ,love to read and write

Pratibha pande's Blog

मेरी दादी [गीत ] प्रतिभा पांडे

 

 ऊ न   सलाई संग दादी का

बहुत पुराना था याराना

चपल उँगलियों का दादी की  

जाड़े ने भी लोहा माना

 

छत पर जब दादी को पाती

धूप गुनगुनी  मिलने आती

ख़ास सहेली बन दादी की  

वो भी फंदों से बतियाती

 

सीधे पर दो उल्टे फंदे

बुनता जाता ताना बाना

 

कल जो था बाबा का स्वेटर

अब छोटू का टोपा मफलर

नई पुरानी ऊनों के संग

चपल उँगलियाँ चलतीं सर सर

 

इस रिश्ते से उस रिश्ते…

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Posted on December 18, 2016 at 1:00pm — 8 Comments

फिर आओ गोपाल [ दोहा गीत जन्माष्टमी पर ]

 

हे पार्थ के सारथी, हे जसुमति के लाल

हरने जन की पीर अब , फिर आओ  गोपाल

 

ध्वस्त किया था कंस का ,इक दिन तुमने मान

निडर हो गया कंस अब ,और हुआ बलवान

घूम रहा है ओढ़ कर ,सज्जनता की खाल

हरने जन की पीर अब ,  फिर आओ  गोपाल

 

पाँचाली के चीर का ,किया खूब विस्तार   

नयनों में भर नीर फिर ,तुमको रही पुकार

अंध सभा में ठोकता , दुःशासन फिर  ताल

हरने जन की पीर अब  ,फिर आओ गोपाल

 

अर्जुन का रथ थाम कर…

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Posted on August 25, 2016 at 8:00am — 14 Comments

‘बेच रहा है आज तिरंगा’

 

चौराहे नाके पर बालक

बेच रहा है आज तिरंगा

 

झंडे लेकर उससे इक दो

कुछ पैसे उसको दे डालो

फिर गाडी में उन्हें लगा कर

आज़ादी की रस्म निभा लो

 

खाली हाथों घर जो लौटा

बाप करेगा पी कर पंगा

 

शनि लेकर कल घूम रहा था

सरसों तेल व जलती बाती

भूखे बच्चे चौराहे पर

कब बीतेगी साढ़े साती

 

रोजी उसकी ही खा जाता 

खादी  जाली का हर दंगा

 

बीते न बस रस्मी…

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Posted on August 15, 2016 at 11:18am — 4 Comments

हुनरबाज [लघु कथा ]

दर्जी रमेश के एक कमरे के घर में आज उत्साह पसरा हुआ था I टी वी के एक कार्यक्रम में बेटे राजू का गाना आनेवाला था I

“काकी टी वी नहीं खोला i राजू भैया का गाना शुरू हो गया है “  पडौस  की लड़की  हाँफती  अन्दर आई I

“सुबह से इंतज़ार था और इनकी मशीन की खट खट में समय का ध्यान नहीं रहा, चल लगा  दे जल्दी से “I  बेटे को टी वी में देखने को बेताब कांता , टी वी के एकदम पास बैठ गई  I

टी वी खोलने तक गाना हो चुका था I तालियों की गडगडाहट के बीच राजू को देख उसकी आँखें भर आईं Iमाथे के…

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Posted on July 23, 2016 at 7:43pm — 18 Comments

Comment Wall (17 comments)

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At 7:55am on June 24, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीया प्रतिभा पांडे जी आपको कविता पर कविता पसंद आई हार्दिक आभार।
At 7:35pm on June 23, 2016, kanta roy said…
इस बीच मैने महसूस किया है कि कई गहरे आत्मीय संबंध मेरी मित्र सूची में शामिल नहीं है तो अचरज से भर गई । वास्तव में हमारा रिश्ता बहुत गहरा है । अपनी सौम्य ,सहज साझीदार को हृदय से अभिनंदन प्रेषित करती हूँ । :)))
At 6:57pm on November 19, 2015, maharshi tripathi said…

धन्यवाद  आ.प्रतिभा जी |

At 3:58pm on November 19, 2015, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिवस पर शुभ कामनाएं व्यक्त करने अनुग्रहित करने के  लिए ह्रदयतल से आभारी हूँ आपका  आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी, सादर   -
ईश कृपा से ही हुऐ,सात दशक ये पार,
मित्रों इस सद्भाव का, बहुत बहुत आभार ।

- लक्ष्मण रामानुज लडीवाला,जयपुर

At 6:27pm on November 18, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीया प्रतिभा जी आपको सपरिवार जन्मदिन की ढेरों बधाईयाँ एवं शुभकामनाएं। 

At 5:24pm on November 18, 2015, नादिर ख़ान said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीया प्रतिभा जी । 

At 2:55am on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
जन्मदिन की सालगिरह पर तहे दिल बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी।
At 12:41am on November 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 12:40am on November 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया प्रतिभा जी , आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 4:03pm on November 7, 2015, Abid ali mansoori said…

आदरणीया प्रतिभा जी हार्दिक आभार आपका!

 
 
 

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