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pratibha pande
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pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 73 in the group चित्र से काव्य तक
"घुंघटा से चिमटा निकलेगा , सोचा ना मरदाना । घिग्घी बंध गयी देख सामने , चण्डी बनी जनाना ।.... वाह  वाह  प्रदत्त  चित्र को बहुत रोचक ढंग से परिभाषित किया है आपने ...हार्दिक बधाई आदरणीय सतीश मापतपुरी जी  "
Saturday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 73 in the group चित्र से काव्य तक
"कुण्डलिया छंद में प्रदत्त चित्र को  दो अलग ढंग  से क्या खूब शाब्दिक किया है आपने ,  सार छंद में भी रिक्शे वाले और घूँघट वाली का एंगल भी खूब रोचक  बना   है ,  हार्दिक बधाई आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी "
Saturday
pratibha pande commented on Mohammed Arif's blog post मेरे भीतर की कविता
"  वाह  बहुत सुन्दर आदरणीय  ...एक एक शब्द अपने अन्दर ढेरों प्रश्न लिए  जो हरबार अनुत्तरित ही रहते हैं  .. हार्दिक बधाई  इस भावपूर्ण   विचारोत्तोजक सृजन के लिए "
Saturday
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"  पुरुष के मदिरा पान को  पिटाई  का कारण बताते हुए शानदार पहला छंद हुआ है  और अंत वाले में रिक्शे वाले और महिला का भाड़े को लेकर झगड़ा ..ये भी खूब रही ....हार्दिक बधाई सतविंदर भाई "
Saturday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 73 in the group चित्र से काव्य तक
"घूँघट वाली नार,क्रोध की भड़की ज्वाला| हाथ जोड़ मक्कार, बना है भोला भाला||...  पकडे जाने पर सभी हाथ जोड़कर  माफ़ी मांगने का नाटक करते हैं...   बहुत ..  बहुत  बढ़िया  छंद रचना ..हार्दिक बधाई आदरणीया राजेश कुमारी जी  "
Saturday
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"दोनों छंद रचनाएँ चित्र  को सटीक परिभाषित कर रही हैं ,  हार्दिक बधाई आदरणीय  C.M.Upadhyay  जी "
Saturday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 73 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रदत्त चित्र अनुरूप सुन्दर छंद रचना ...हार्दिक बधाई आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी "
Saturday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 73 in the group चित्र से काव्य तक
"कुण्डलिया छंद में ससुर बहू का एंगल  खूब लिया आपने ,  सार छंद भी चित्र अनुरूप शानदार बने हैं ,  हार्दिक बधाई आपको आदरणीया छाया जी "
Saturday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 73 in the group चित्र से काव्य तक
"2- छन्न पकैया छन्न पकैया,मची नगर में हलचलहाथों में है घूँघट वाली,के मोबाइल चप्पल.....  वाह ...दोनों छंद  बहुत शानदार और चित्र अनुरूप हैं ,...हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक जी "
Saturday
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"हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण  धामी जी "
Saturday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 73 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आदरणीय सतीश मापतपुरी  जी "
Saturday
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"वाह वाह आदरणीय हास्य का पुट लिये क्या खूब छंद रचना ,हार्दिक बधाई"
Friday
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"हार्दिक आभार आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी"
Friday
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"हार्दिक आभार आदरणीय सतविन्दर जी"
Friday
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"हार्दिक आभार आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी"
Friday
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"हार्दिक आभार आदरणीय गिरिराज जी"
Friday

Profile Information

Gender
Female
City State
Ratlam Madhya Pradesh
Native Place
Almora Uttarakhand
Profession
was a teacher , currently house wife and a social worker
About me
I am from a sahitya premi family ,love to read and write

Pratibha pande's Blog

मेरी दादी [गीत ] प्रतिभा पांडे

 

 ऊ न   सलाई संग दादी का

बहुत पुराना था याराना

चपल उँगलियों का दादी की  

जाड़े ने भी लोहा माना

 

छत पर जब दादी को पाती

धूप गुनगुनी  मिलने आती

ख़ास सहेली बन दादी की  

वो भी फंदों से बतियाती

 

सीधे पर दो उल्टे फंदे

बुनता जाता ताना बाना

 

कल जो था बाबा का स्वेटर

अब छोटू का टोपा मफलर

नई पुरानी ऊनों के संग

चपल उँगलियाँ चलतीं सर सर

 

इस रिश्ते से उस रिश्ते…

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Posted on December 18, 2016 at 1:00pm — 8 Comments

फिर आओ गोपाल [ दोहा गीत जन्माष्टमी पर ]

 

हे पार्थ के सारथी, हे जसुमति के लाल

हरने जन की पीर अब , फिर आओ  गोपाल

 

ध्वस्त किया था कंस का ,इक दिन तुमने मान

निडर हो गया कंस अब ,और हुआ बलवान

घूम रहा है ओढ़ कर ,सज्जनता की खाल

हरने जन की पीर अब ,  फिर आओ  गोपाल

 

पाँचाली के चीर का ,किया खूब विस्तार   

नयनों में भर नीर फिर ,तुमको रही पुकार

अंध सभा में ठोकता , दुःशासन फिर  ताल

हरने जन की पीर अब  ,फिर आओ गोपाल

 

अर्जुन का रथ थाम कर…

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Posted on August 25, 2016 at 8:00am — 14 Comments

‘बेच रहा है आज तिरंगा’

 

चौराहे नाके पर बालक

बेच रहा है आज तिरंगा

 

झंडे लेकर उससे इक दो

कुछ पैसे उसको दे डालो

फिर गाडी में उन्हें लगा कर

आज़ादी की रस्म निभा लो

 

खाली हाथों घर जो लौटा

बाप करेगा पी कर पंगा

 

शनि लेकर कल घूम रहा था

सरसों तेल व जलती बाती

भूखे बच्चे चौराहे पर

कब बीतेगी साढ़े साती

 

रोजी उसकी ही खा जाता 

खादी  जाली का हर दंगा

 

बीते न बस रस्मी…

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Posted on August 15, 2016 at 11:18am — 4 Comments

हुनरबाज [लघु कथा ]

दर्जी रमेश के एक कमरे के घर में आज उत्साह पसरा हुआ था I टी वी के एक कार्यक्रम में बेटे राजू का गाना आनेवाला था I

“काकी टी वी नहीं खोला i राजू भैया का गाना शुरू हो गया है “  पडौस  की लड़की  हाँफती  अन्दर आई I

“सुबह से इंतज़ार था और इनकी मशीन की खट खट में समय का ध्यान नहीं रहा, चल लगा  दे जल्दी से “I  बेटे को टी वी में देखने को बेताब कांता , टी वी के एकदम पास बैठ गई  I

टी वी खोलने तक गाना हो चुका था I तालियों की गडगडाहट के बीच राजू को देख उसकी आँखें भर आईं Iमाथे के…

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Posted on July 23, 2016 at 7:43pm — 18 Comments

Comment Wall (17 comments)

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At 7:55am on June 24, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीया प्रतिभा पांडे जी आपको कविता पर कविता पसंद आई हार्दिक आभार।
At 7:35pm on June 23, 2016, kanta roy said…
इस बीच मैने महसूस किया है कि कई गहरे आत्मीय संबंध मेरी मित्र सूची में शामिल नहीं है तो अचरज से भर गई । वास्तव में हमारा रिश्ता बहुत गहरा है । अपनी सौम्य ,सहज साझीदार को हृदय से अभिनंदन प्रेषित करती हूँ । :)))
At 6:57pm on November 19, 2015, maharshi tripathi said…

धन्यवाद  आ.प्रतिभा जी |

At 3:58pm on November 19, 2015, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिवस पर शुभ कामनाएं व्यक्त करने अनुग्रहित करने के  लिए ह्रदयतल से आभारी हूँ आपका  आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी, सादर   -
ईश कृपा से ही हुऐ,सात दशक ये पार,
मित्रों इस सद्भाव का, बहुत बहुत आभार ।

- लक्ष्मण रामानुज लडीवाला,जयपुर

At 6:27pm on November 18, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीया प्रतिभा जी आपको सपरिवार जन्मदिन की ढेरों बधाईयाँ एवं शुभकामनाएं। 

At 5:24pm on November 18, 2015, नादिर ख़ान said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीया प्रतिभा जी । 

At 2:55am on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
जन्मदिन की सालगिरह पर तहे दिल बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी।
At 12:41am on November 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 12:40am on November 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया प्रतिभा जी , आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 4:03pm on November 7, 2015, Abid ali mansoori said…

आदरणीया प्रतिभा जी हार्दिक आभार आपका!

 
 
 

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"अहा ! हर शेर जैसे classic है। ऐसी ही और गज़लें पढ़ने को देते रहें, समर भाई।"
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"इस अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय सुशील जी"
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