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मकर संक्रांति के अवसर पर
दोहा एकादश . . . . पतंग
आवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग ।
बीच पतंगों के लगे, अद्भुत दम्भी जंग ।।
बंधी डोर से प्यार की, उड़ती मस्त पतंग ।
आसमान को चूमते, छैल-छबीले रंग ।।
कभी उलझ कर लाल से, लेती वो प्रतिशोध ।
डोर- डोर की रार का, मन्द न होता क्रोध ।।
नीले अम्बर में सजे, हर मजहब के रंग ।
जात- पात को भूलकर, अम्बर उड़े पतंग ।।
जैसे ही आकाश में, कोई कटे पतंग ।
उसे लूटने के लिए, आते कई दबंग ।।
किसी धर्म…
ContinuePosted on January 14, 2026 at 3:03pm
कुंडलिया. . . .
किसने समझा आज तक, मुफलिस का संसार ।
आँखें उसकी वेदना, नित्य करें साकार ।।
नित्य करें साकार , दर्द यह कहा न जाता ।
उसे भूख का दंश , सदा ही बड़ा सताता ।।
पत्थर पर ही पीठ , टिकाई हरदम इसने ।
भूखी काली रात , भाग्य में लिख दी किसने ।।
सुशील सरना / 9-1-26
मौलिक एवं अप्रकाशित
Posted on January 9, 2026 at 1:29pm
दोहा पंचक. . . . क्रोध
मानव हरदम क्रोध में, लेता है प्रतिशोध ।
सही गलत का फिर उसे, कब रहता है बोध ।।
बड़े भयानक क्रोध के, होते हैं परिणाम ।
बदले के अंगार को, मिलता नहीं विराम ।।
हर लेता इंसान का, क्रोधी सदा विवेक ।
मिटते इसके ज्वाल में, रिश्ते मधुर अनेक ।
क्रोध अनल में आदमी, कर जाता वह काम ।
घातक जिसके बाद में, अक्सर हों परिणाम ।।
पर्दे पड़ते अक्ल पर, जब आता है क्रोध ।
दावानल में क्रोध की, बस लेता प्रतिशोध…
Posted on January 8, 2026 at 2:00pm — 4 Comments
बात हुई कुछ इस तरह, उनसे मेरी यार ।
सिरहाने खामोशियाँ, टूटी सौ- सौ बार ।।
मौसम की मनुहार फिर, शीत हुई उद्दंड ।
मिलन ज्वाल के वेग में, ठिठुरन हुई प्रचंड ।
मौसम आया शीत का, मचल उठे जज्बात ।
कैसे बीती क्या कहें, मदन वेग की रात ।।
स्पर्शों की आँधियाँ, उस पर शीत अलाव ।
काबू में कैसे रहे, मौन मिलन का भाव ।।
आँखों -आँखों में हुए, मधुर मिलन संवाद ।
संवादों के फिर किए , अधरों ने अनुवाद…
Posted on November 16, 2025 at 7:30pm — 4 Comments
आदरणीय सुशील सरना जी ,
सादर अभिवादन , आपके नाम और सावन पर लिखे सभी दोहे मन मोह गए । दोनों कविताएं 'मौसम को' व प्रश्न गंभीर भावों को लिए हुए है। साधुवाद ।
आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है.
आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर
आ० सरना भाई जी, सादर प्रणाम!
आपका हार्दिक स्वागत है. मित्रता से भाग्योदय होता है , मैं धन्य हुआ. सादर
आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर
आ० सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम! आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर
आदरणीय
सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
मोहतरम जनाब सुशील सरना साहिब , यह आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है , जिसके लिए आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी
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