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Sushil Sarna
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MANINDER SINGH commented on Sushil Sarna's blog post क़ैद रहा ...
"बहुत बढ़िया सर...."
28 minutes ago
Arpana Sharma commented on Sushil Sarna's blog post बेशर्मी से ... (क्षणिका )...
"अंधेरों की दरकार में दिये के जलने की ठीठता .... भावपूर्ण क्षणिका की बधाई ।"
16 hours ago
Arpana Sharma commented on Sushil Sarna's blog post क़ैद रहा ...
"रूहानी जज़्बातों को पिरोये सुंदर रचना।"
16 hours ago
pratibha pande commented on Sushil Sarna's blog post बेशर्मी से ... (क्षणिका )...
"आदरणीय समर कबीर जी वाली जिज्ञासा मेरे मन में भी थी ,पर आपका जवाब पढ़कर उसके आलोक में जब रचना पढ़ी तो बस वाह ही निकली ...हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी "
17 hours ago
pratibha pande commented on Sushil Sarna's blog post बेशर्मी से ... (क्षणिका )...
"आदरणीय समर कबीर जी वाली जिज्ञासा मेरे मन में भी थी ,पर आपका जवाब पढ़कर उसके आलोक में जब रचना पढ़ी तो बस वाह ही निकली ...हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी "
17 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क़ैद रहा ...
"आदरणीय शिज्जु शकूर साहिब सृजन को भावों को मान देने का हार्दिक आभार। आपके इस सूक्ष्म सुझाव का हार्दिक आभार। मैं आपसे सहमत हूँ. अभी इसे पुनः संशोधित कर प्रेषित करता हूँ। ऐसा ही स्नेह बनाये रखें सर।"
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क़ैद रहा ...
"आदरणीय  narendrasinh chauhan जी प्रस्तुति के भावों को मान देने का हार्दिक आभार। "
21 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on Sushil Sarna's blog post क़ैद रहा ...
"आ. सुशील सरना जी अच्छी रचना है, बधाई आपको। एक बात मगर कहना चाहूँगा कि अल्फ़ाज़ अपने आप में बहुवचन है उसे अल्फ़ाजों कहना ठीक नहीं है।"
22 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post क़ैद रहा ...
" खूब सुन्दर रचना "
yesterday
Sushil Sarna commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post कितने अच्छे थे मेरा ऐब बताने वाले
"अपने क़ातिल से शिकायत नहीं कोई मुझकोकर गए ग़र्क मेरी कश्ती, बचाने वाले।। वाह आदरणीय शिज्जु शकूर साहिब गज़ब के अशआर कहे हैं आदरणीय ... दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर।"
yesterday
Sushil Sarna's blog post was featured

कलियों का रुदन ....

कलियों का रुदन   .... रात भर कलियों का रुदन होता रहा उनके अश्रु ओस कणों में परिवर्तित हो गए पर तुम उनके अंतर्मन की वेदना से अनभिज्ञ रहे भानुउनकी सिसकियाँ सन्नाटों में तुम्हें पुकारती रहीं मगर तुम न सुन सके आहों के वेग से तुम अनभिज्ञ रहे भानुसच तुम बहुत निष्ठुर हो भलातुम्हारे रश्मि दूत भी कहीं उनके मूक बंधन के कारण का निवारण बन सकते हैंतुम कारण हो उनकी विरह वेदना का तुम ही निवारण हो उनके अंतर्मन की व्यथा का तुम आओ तो शायद उनका अश्रु प्रवाह रुक पाए उनके अकथ शब्दों को थाह मिल जाएदेखो विभावरी भी…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क़ैद रहा ...
"आदरणीय  सतविन्द्र कुमार जी प्रस्तुति के भावों को मान देने का हार्दिक आभार। "
yesterday
सतविन्द्र कुमार commented on Sushil Sarna's blog post क़ैद रहा ...
"बहुत् खूब,सुन्दराभिव्यक्ति!हार्दिक बधाई आदरणीय sushil sarna जी,"
yesterday
Sushil Sarna commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-नूर की- ऐसा लगता है फ़क़त ख़ार सँभाले हुए हैं,
"मुझ को मिल जाये अगर तू, मैं लिपट कर रो लूँ,आँखें अब तक तेरा इन्कार सँभाले हुए हैं. वाह आदरणीय नीलेश जी बहुत खूब। ... आपने इस ग़ज़ल में बन्दे का दिल जीत लिया ... शे'र दर शे'र के लिए मुबारकबाद कबूल फरमाएं।"
yesterday
Sushil Sarna commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post शाइरी भी यार अब हम क्या करें
"हर जगह नफरत का आलम, क्या करेंज़ह्र होता ही नही कम क्या करें || मौत का सामान ख़ुद इंसाँ हुआऔर जुबाँ उसकी हुई बम क्या करें || वाह वाह आदरणीय सुरेन्द्र जी इस ग़ज़ल में बहुत ही दिलकश और हकीकी अशआर कहे हैं आपने ... इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई कबूल…"
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

Sushil Sarna's Blog

क़ैद रहा ...

क़ैद रहा ...

वादा
अल्फ़ाज़ की क़बा में
क़ैद रहा

किरदार
लम्हों की क़बा में
क़ैद रहा

प्यार
नज़र की क़बा में
क़ैद रहा

इश्क
धड़कनों की क़बा में
क़ैद रहा

कश्ती
ढूंढती रही
किनारों को
तूफ़ां
शब् की क़बा में
क़ैद रहा

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 25, 2017 at 5:00pm — 8 Comments

बेशर्मी से ... (क्षणिका )...

बेशर्मी से ... (क्षणिका )

अन्धकार
चीख उठा
स्पर्शों के चरम
गंधहीन हो गए
जब
पवन की थपकी से
इक दिया
बुझते बुझते
बेशर्मी से
जल उठा

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 22, 2017 at 8:49pm — 9 Comments

कलियों का रुदन ....

कलियों का रुदन   .... 

रात भर

कलियों का रुदन होता रहा

उनके अश्रु

ओस कणों में

परिवर्तित हो गए

पर तुम

उनके अंतर्मन की वेदना से

अनभिज्ञ रहे भानु

उनकी सिसकियाँ

सन्नाटों में

तुम्हें पुकारती रहीं

मगर तुम न सुन सके

आहों के वेग से

तुम

अनभिज्ञ रहे भानु

सच तुम

बहुत निष्ठुर हो

भला

तुम्हारे रश्मि दूत भी कहीं

उनके मूक बंधन के

कारण का निवारण बन

सकते…

Continue

Posted on April 20, 2017 at 5:39pm — 2 Comments

बस चला जा रहा हूँ...

बस चला जा रहा हूँ ...

मैं

समय के हाथ पर

चलता हुआ

गहन और निस्पंद एकांत में

तुम्हारे संकेत को

हृदय की

गहन कंदराओं में

अपने अंतर् के

चक्षुओं में समेटे

बस चला जा रहा हूँ

मैं

समय के हाथ पर

मधुरतम क्षणों का आभास

स्वयं का

अबोले संकेत में

विलय का विशवास

अपने अंतर् के

चक्षुओं में समेटे

बस चला जा रहा हूँ

मैं

समय के हाथ पर

वाह्य जगत के

कल ,आज और कल के

भेद…

Continue

Posted on April 15, 2017 at 7:16pm — 13 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, Kewal Prasad said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, Kewal Prasad said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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