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Sushil Sarna
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KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Sushil Sarna's blog post तेरे इंतज़ार में ...
"आदरणीय सुशिल सरना जी बेहद सुंदर और भावपूर्ण कविता लिखी है आपने | हार्दिक बधाई |"
12 hours ago
Mahendra Kumar commented on Sushil Sarna's blog post तेरे इंतज़ार में ...
"बेहद भावपूर्ण कविता लिखी है आपने आ. सुशील सरना जी. अच्छी लगी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
14 hours ago
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post तेरे इंतज़ार में ...
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन प्रेम की अभिव्यक्ति । सच्चा प्रेम सिर्फ़ जीना जानता है । इंतज़ार में सदियाँ भी गुज़ार देता है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
15 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

तेरे इंतज़ार में ...

तेरे इंतज़ार में ...गज़ब करता रहा तेर हर वादे पे यकीं करता रहा हर लम्हा तेरी मोहब्बत में कई कई सदियाँ जीता रहा और हर बार सौ सौ बार मरता रहा पर अफ़सोस तू मुझे न जी सकी मैं तुझे न जी सका पी लिया सब कुछ मगर इक अश्क न पी सका मेरी ख़ामोशी को तूने मेरी नींद का बहाना समझा तू ग़फ़लत में रही और मैं अज़ल का हो गया तिश्नागर आँखों के अश्क सूख गए इंतज़ार की आदत से मज़बूर पलक खुली रह गयी वक्ते रुखसत तूने इक बार भी न देखा नज़र भर के मुझे गो मैं मर कर भी तेरे इंतज़ार में जीता ही…See More
17 hours ago
Sushil Sarna commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"जब नजर से ही काम चल जाएतीर को दागदार कौन करे.... वाह बहुत उम्दा ग़ज़ल की प्रस्तुति की है आपने आदरणीया राजेश कुमारी जी. हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
20 hours ago
Sushil Sarna commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र -फेलुन) यह ग़ज़ल दुनिया की सबसे छोटी ग़ज़ल है। इसे "गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स" में शामिल किया गया है ।
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब आदाब , गज़ब गज़ब गज़ब। ... कितना असहाय महसूस कर रहा हूँ शब्दों के अभाव में  ... वो शब्द कहाँ से लाऊँ जो इस स्वर्ण सृजन को अलंकृत कर सकें।  इस दिलकश अंदाज़ की ग़ज़ल के लिए मेरी हार्दिक हार्दिक बधाईयां स्वीकार करें। आपकी कलम,…"
20 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ज़िद कर रही हूँ ...
"आद.  Sweet Panday जी आदाब, प्रस्तुति आपकी आत्मीय प्रशंसा की आभारी है। "
21 hours ago
Sweet Panday commented on Sushil Sarna's blog post ज़िद कर रही हूँ ...
"बधाई स्वीकार करे सर, बहुत सुन्दर रचना है"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ज़िद कर रही हूँ ...
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब , सृजन के भावों अपने स्नेहिल शब्दों से मान देने का दिल से आभार।"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ज़िद कर रही हूँ ...
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब आदाब, प्रस्तुति आपकी आत्मीय प्रशंसा की आभारी है।"
Saturday
Sushil Sarna commented on rajesh kumari's blog post भले ही आईने धोये हुए हैं (फिल्बदीह ग़ज़ल 'राज')
"चढ़े सूरज तलक सोए हुए हैंकिसी की याद में खोए हुए हैं ग़ज़ल लिक्खी हुई है आंसुओं सेकहें किससे कि हम रोये हुए हैं वल्लाह गज़ब के अशआर कहे हैं आपने आदरणीया राजेश कुमारी जी। इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Thursday
Sushil Sarna commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post ख़्वाब तूने कोई बुना होगा
"शहर में होना आरज़ी है मगरतज़्किरा मेरा बारहा होगा वाह आदरणीय वाह ... बहुत ही बेहतरीन अशआर हुए हैं। इस दिलकश ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए दिल मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर।"
Thursday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post ज़िद कर रही हूँ ...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत भावपूर्ण कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Thursday
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post ज़िद कर रही हूँ ...
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, प्यार के अहसास की मधुर महक बिखेरी है आपने । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

ज़िद कर रही हूँ ...

ज़िद कर रही हूँ ...जानती हूँ हर नसीब में हर शै नहीं हुआ करती फिर भी मैं असंभव को संभव करने की ज़िद कर रही हूँ कुछ और नहींबस उम्र के हर पड़ाव पर सिर्फ प्यार करने की ज़िद कर रही हूँमैं नहीं जानती सात जन्म क्या होते हैं पर उम्र की उस अवस्था पर जब सब ख्वाहिशें दम तोड़ देती हैं चाहती हूँ तब भी तुम किसी मठ के सन्यासी सी एकाग्रता लिए मुझ से प्यार करने चले आना प्यार में काल कहाँ बाधा होता है देहाकर्षण तो क्षणिक होता है मगर फिर भी यौवन की उत्कंठाओं को सहेजे मैं देह की दहलीज़ के श्वास द्वार पर अंतिम दस्तक के…See More
Thursday
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे
"चाँद बनकर वो निखर जाएंगे । शाम होते ही सँवर जाएंगे ।। जख्म परदे में ही रखना अच्छा । देखकर लोग सिहर जाएंगे ।। वाह आदरणीय वाह बहुत उम्दा अशआर कहे हैं आपने। मुबारकबाद कबूल फरमाएं।"
Wednesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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तेरे इंतज़ार में ...

तेरे इंतज़ार में ...

गज़ब करता रहा

तेर हर वादे पे

यकीं करता रहा

हर लम्हा

तेरी मोहब्बत में

कई कई सदियाँ

जीता रहा

और हर बार

सौ सौ बार

मरता रहा

पर अफ़सोस

तू

मुझे न जी सकी

मैं

तुझे न जी सका

पी लिया

सब कुछ मगर

इक अश्क न पी सका

मेरी ख़ामोशी को तूने

मेरी नींद का

बहाना समझा

तू

ग़फ़लत में रही

और

मैं

अज़ल का हो गया

तिश्नागर आँखों के …

Continue

Posted on September 25, 2017 at 2:00pm — 3 Comments

ज़िद कर रही हूँ ...

ज़िद कर रही हूँ ...

जानती हूँ

हर नसीब में

हर शै

नहीं हुआ करती

फिर भी

मैं असंभव को

संभव करने की

ज़िद कर रही हूँ

कुछ और नहीं

बस

उम्र के हर पड़ाव पर

सिर्फ

प्यार करने की

ज़िद कर रही हूँ

मैं नहीं जानती

सात जन्म क्या होते हैं

पर उम्र की उस अवस्था पर

जब सब ख्वाहिशें

दम तोड़ देती हैं

चाहती हूँ

तब भी तुम

किसी मठ के

सन्यासी सी एकाग्रता लिए

मुझ से प्यार करने चले आना…

Continue

Posted on September 21, 2017 at 3:10pm — 6 Comments

तुम ही बताओ न ...

तुम ही बताओ न ...

क्या हुआ

हासिल

फासलों से

आ के ज़रा

तुम ही बताओ न

इक लम्हा

इक उम्र को

जीता है

ख़ामोशियों के

सैलाब पीता है

उल्फ़त के दामन पे

हिज़्र की स्याही से

ये कैसी तन्हाई

लिख डाली

आ के

ज़रा

तुम ही बताओ न

ये किन

आरज़ूओं के अब्र हैं

जो रफ्ता रफ़्ता

पिघल रहे हैं

एक लावे की तरह

चश्मे साहिल से

क्यूँ हर शब्

तेरी…

Continue

Posted on September 5, 2017 at 5:30pm — 8 Comments

तुम ही बताओ न ...

तुम ही बताओ न ...

क्या हुआ

हासिल

फासलों से

आ के ज़रा

तुम ही बताओ न

इक लम्हा

इक उम्र को

जीता है

ख़ामोशियों के

सैलाब पीता है

उल्फ़त के दामन पे

हिज़्र की स्याही से

ये कैसी तन्हाई

लिख डाली

आ के

ज़रा

तुम ही बताओ न

ये किन

आरज़ूओं के अब्र हैं

जो रफ्ता रफ़्ता

पिघल रहे हैं

एक लावे की तरह

चश्मे साहिल से

क्यूँ हर शब्

तेरी…

Continue

Posted on September 5, 2017 at 5:30pm

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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