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Sushil Sarna
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डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन बहुत ही प्रेरक रचना है मन खुश हो गया बधाई कुबूल कीजिए"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post रंग काला :
"आ. भाई सुशील जी, अच्छी कविता हुई है। हार्दिक बधाई ।"
Monday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post रंग काला :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी कविता हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
Rakshita Singh commented on Sushil Sarna's blog post रंग काला :
"आदरणीय सुशील जी नमस्कार,  बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ ...  वास्तव  में काले रंग की यह भी विशेषता है कि इस पर कोई और रंग नहीं चढ़ता !"
Sunday
pratibha pande commented on Sushil Sarna's blog post मौन सरोवर ....
"खूबसूरत रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post मौन सरोवर ....
"आ. भाई सुशील जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई । "
Sunday
Sushil Sarna posted a blog post

रंग काला :

रंग काला :जाने कितने रंग सृष्टि के अद्भुत लेकिन है रंग कालाकाली अलकें काली पलकें काले नयन लगें मधुशाला काला भँवरा हुआ मतवालाकाला टीका नज़र उतारे काला धागा पाँव सँवारे काली रैना चंदा ढूंढें अपना शिवालाकाले में हैं सत्य के साये हर उजास के पाप समाए रैन कुटीर सृष्टि की शाला रंग सपनों को भाए कालाकाले से तो भय व्यर्थ है इसमें जीवन का अर्थ है आदि अंत का ये है प्याला हर यथार्थ को इसने पालासुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Saturday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post मौन सरोवर ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Thursday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं, बधाई स्वीकार करें ।"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

मौन सरोवर ....

मौन सरोवर ....जुदा न होना मेरे होकरकैसे कह दूँ तुम स्वप्न हो मेरी श्वास का तुम दर्पण हो बोलो प्रिय कहाँ गए तुम मेरी पलक में सपने बो करजीवनतल की अकथ कथा तुम प्रेम पलों की मधुर ऋचा तुम तुम बिन देखो सूख न जाएँ अभिलाषा के मौन सरोवरअभी यहाँ थे अभी नहीं हो मेरी क्षुधा की सुधा तुम्हीं हो जीवन दुर्लभ तुमको खोकर तुम अंतस की अमर धरोहरसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
May 21
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post भेद :
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बढ़िया बात लिखी आपने। इंसान में असली और नकली रंग कैसे समझाएंगे। बधाई स्वीकार कीजिये"
May 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post जीवन पर कुछ दोहे :
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बहुत खूबसूरत दोहे रचे हैं । बधाई स्वीकार कीजिये"
May 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ :
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।"
May 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post भेद :
"आ. भाई सुशील जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 18
Sushil Sarna posted a blog post

कुछ क्षणिकाएँ :

कुछ क्षणिकाएँ :सीख लिया शब्दों ने जीना और मरना बिना परिधान बदले देह का साथ रहकरव्योम को सूक्ष्म से अलंकृत करो कि स्वप्न भीकल्पना हैं अचेतन मन कीकह दिया काँपती लौ ने दिए से आज मैं सो जाऊंगी तुम्हारी गोद में क्रूर पवन के वेग से आहत होकर शायद मेरा उजाला अंधेरों को नहीं भायामिट गई जीत की आकांक्षा तिमिर में इक दूजे से हारते हुएहम के आवरण में तुम और मैं सदा बतियाते हैं चुप रहकर भी लाज भरी बातस्वरहीन वेग अन्तस् का बहुत कुछ कह गया सलवटों मेंसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
May 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post जीवन पर कुछ दोहे :
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । अच्छे दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
May 18

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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रंग काला :

रंग काला :

जाने कितने रंग सृष्टि के

अद्भुत लेकिन है रंग काला

काली अलकें काली पलकें

काले नयन लगें मधुशाला

काला भँवरा

हुआ मतवाला

काला टीका नज़र उतारे

काला धागा पाँव सँवारे

काली रैना चंदा ढूंढें

अपना शिवाला

काले में हैं सत्य के साये

हर उजास के पाप समाए

रैन कुटीर सृष्टि की शाला

रंग सपनों को

भाए काला

काले से तो भय व्यर्थ है

इसमें जीवन का अर्थ है

आदि अंत का ये…

Continue

Posted on May 22, 2020 at 7:48pm — 3 Comments

मौन सरोवर ....

मौन सरोवर ....

जुदा न होना

मेरे होकर

कैसे कह दूँ तुम स्वप्न हो

मेरी श्वास का तुम दर्पण हो

बोलो प्रिय

कहाँ गए तुम

मेरी पलक में सपने बो कर

जीवनतल की अकथ कथा तुम

प्रेम पलों की मधुर ऋचा तुम

तुम बिन देखो

सूख न जाएँ

अभिलाषा के मौन सरोवर

अभी यहाँ थे अभी नहीं हो

मेरी क्षुधा की सुधा तुम्हीं हो

जीवन दुर्लभ

तुमको खोकर

तुम अंतस की अमर धरोहर

सुशील सरना

मौलिक एवं…

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Posted on May 20, 2020 at 7:49pm — 3 Comments

कुछ क्षणिकाएँ :

कुछ क्षणिकाएँ :

सीख लिया शब्दों ने

जीना और मरना

बिना परिधान बदले

देह का

साथ रहकर

व्योम को

सूक्ष्म से अलंकृत करो

कि स्वप्न भी

कल्पना हैं

अचेतन मन की

कह दिया काँपती लौ ने

दिए से

आज मैं सो जाऊंगी

तुम्हारी गोद में

क्रूर पवन के वेग से आहत होकर

शायद मेरा उजाला

अंधेरों को

नहीं भाया

मिट गई

जीत की आकांक्षा

तिमिर में

इक दूजे से

हारते हुए

हम के…

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Posted on May 17, 2020 at 9:37pm — 3 Comments

भेद :

भेद :

समझा दिया मैंने

अपने बच्चों को

सत्य और असत्य में क्या है भेद

समझा दिया

मैंने अपने बच्चों को

भानु से फैला उजास

कितने रंगों को होता है

समझा दिया मैंने

यह भी अपने बच्चों को

कि रंगीली गिरगिट का

कौन सा रंग असली और कौन सा नकली होता है

मगर

मुझे ये समझाने में

बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ा

कि इंसान का कौन सा रंग असली है

और कौन सा नकली

शायद वक्त के साथ

वो इस…

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Posted on May 15, 2020 at 6:19pm — 3 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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