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Sushil Sarna posted a blog post

अजल की हो जाती है....

अजल की हो जाती है.... ज़िंदगी साँसों के महीन रेशों से गुंथी हुई बिना सिरों वाली एक रस्सी ही तो है जिसकी उत्पत्ति भी अंधेरों से और विलय भी अंधेरों में होता हैज़िंदगी लम्हों के पायदानों पर आबगीनों सी ख़्वाहिशों को छूने के लिए सांस दर सांस चढ़ती जाती है मौसम अपने ज़िस्म के इक इक लिबास को उतारते ज़िंदगी को हकीकत के आफ़ताब की तपिश से रूबरू करवाने की हर मुमकिन कोशिश करते हैं मगर अफ़सोस ग़रूर में ग़ुम ज़िंदगी कायनात की हर ख़्वाहिश को अपनी मुट्ठी में क़ैद करना चाहती है नहीं जानती कि ख़्वाहिश तो अजल की डिब्बी में क़ैद…See More
2 hours ago
Sushil Sarna posted a photo
4 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...
"आदरणीय डॉ प्राची सिंह जी सृजन को अपनी मनोहारी प्रशंसा से अलंकृत करने का दिल से आभार। "
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी सृजन के भावों को सहमति देती आत्मीय प्रशंसा से सृजन सार्थक हुआ।  आपकी शुभकामनाओं का हार्दिक आभार। "
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब, आदाब .. सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया एवं सुझावों की हार्दिक आभारी है। भविष्य में इनकी पुरावृति न हो , इसका ध्यान रखने का प्रयास करूंगा। वैसे सर हिंदी में वर्ण के नीचे नुक़्ते (.) का चलन मेरी नज़र में नहीं आया हाँ उर्दू लिपि में…"
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"आदरणीय सलीम साहिब सृजन को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार। "
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी सृजन के गहन भावों को सहमति देती आत्मीय प्रशंसा से सृजन सार्थक हुआ। हार्दिक आभार। "
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद साहिब, आदाब ... सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।"
21 hours ago
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"आलरणीय सुशील सरना जी आदाब, बहुत सुंदर अंतर्मन की शाब्दिक अभिव्यक्ति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियों की ओर ध्यान दिलाना चाहूँगा जैसे:-बाकी/बाक़ी,सागर/साग़र, गोहर/गौहर,नशवरता/नश्वरता,रहूंगी/रहूँगी, पढूंगी/पढ़ूँगी,किताब/क़िताब आदि ।"
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"वाह... जनाब सुशील सरना साहिब ,बहुत ही आकर्षक और सुन्दर कविता हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बहुत गहरी सोच को प्रतिबिंबित करती अतुकांत, पढ़ते पढ़ते भावों में खोने को बरबस खिंचती।बहुत बहुत बधाई इस अतुकांत पर।"
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"जनाब सुशील सरना साहिब ,बहुत ही आकर्षक और सुन्दर कविता हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मधुर दोहे :
"आदरणीय रामानुज जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। भविष्य में ५ से कम तो कभी नहीं होंगे आपके प्रिय दोहे। थैंक्स "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मधुर दोहे :
"आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan साहिब, आदाब , सृजन को अपनी मनोहारी प्रतिक्रिया से मान देने का दिल से आभार।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"आदरणीय समर कबीर जी , अपने शीरीं अल्फ़ाज़ों से सृजन के भावों को सम्मान देने का दिल से आभार। सर आपके द्वारा इंगित त्रुटि को मैंने संशोधित कर दिया है। आपका तहे दिल से शुक्रिया। यही बारीकियां है जो आपकी पारखी नज़रों की पकड़ में आती हैं। पुनः शुक्रिया सर।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"आदरणीय रामानुज जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।"
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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अजल की हो जाती है....

अजल की हो जाती है.... 

ज़िंदगी

साँसों के महीन रेशों से

गुंथी हुई

बिना सिरों वाली

एक रस्सी ही तो है

जिसकी उत्पत्ति भी अंधेरों से

और विलय भी अंधेरों में होता है

ज़िंदगी

लम्हों के पायदानों पर

आबगीनों सी ख़्वाहिशों को

छूने के लिए

सांस दर सांस

चढ़ती जाती है

मौसम

अपने ज़िस्म के

इक इक लिबास को उतारते

ज़िंदगी को

हकीकत के आफ़ताब की

तपिश से रूबरू करवाने की

हर मुमकिन कोशिश करते हैं

मगर…

Continue

Posted on November 22, 2017 at 12:25pm

बंद किताब ...

बंद किताब ...

ठहरो न !

थोड़ी देर तो रुक जाओ

अभी तो रात की स्याही बाकी है

सहर की दस्तक से घबराते हो

प्यार करते हो

और शरमाते हो

कभी नारी मन के

सागर में उतर के देखो

न जाने कितने गोहर

सीपों में

किसी के लम्स के मुंतज़िर हैं

देहाकर्षण के परे भी

एक आकर्षण होता है

जहां भौतिक सुख के बाद का

एक दर्पण होता है

नशवरता से परे

अनंत में समाहित

अमर समर्पण होता है

पर रहने दो

तुम ये…

Continue

Posted on November 20, 2017 at 1:30pm — 12 Comments

मधुर दोहे :

मधुर दोहे :

मन के मधुबन में मिले, मन भ्र्मर कई बार।
मूक नयन रचते रहे, स्पंदन का संसार।।

थोड़ा सा इंकार था थोड़ा सा इकरार।
सघन तिमिर में हो गयी , प्रणय सुधा साकार।।

बाहुपाश से देह के, टूटे सब अनुबंध।
स्वप्न सेज महका गयी ,मधुर बंध की गंध।।


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on November 15, 2017 at 9:22pm — 12 Comments

३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...

३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...

मन चाहे करती रहूँ , दर्पण में शृंगार।
जब से अधरों को मिला, अधरों का उपहार।1।

अब सावन बैरी लगे, बैरी सब संसार।
जब से कोई रख गया, अधरों पे अंगार।2।

नैंनों की होने लगी , नैनों से ही रार।
नैन द्वन्द में नैन ही, गए नैन से हार।3।

जीत न चाहूँ प्रीत में , मैं बस चाहूँ हार।
'दे दे मेरी देह को', स्पर्शों का शृंगार।4।

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on November 13, 2017 at 8:00pm — 14 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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