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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Page

Latest Activity

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mohan Begowal's blog post ग़ज़ल
"आद0 मोहन बोगोवाल जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल का बढिया प्रयास है। गुणीजनों के इस्लाह की प्रतीक्षा कीजिये  मेरी बधाई स्वीकार करें।"
Jul 8
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on SudhenduOjha's blog post चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह
"आद0 सुधेन्दु ओझा जी सादर अभिवादन। बढिया गीत लिखा है आपने। पढ़कर अच्छा लगा। इस प्रस्तुति पर मेरी बधाई आपको।सादर"
Jul 8
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post "मानसून की पहली बारिश का मज़ा" (लघुकथा - हास्य व्यंग्य)
"आद0 मुज़फ्फर इकबाल जी सादर अभिवादन। बढ़िया लघुकथा कही आपने। वैसे अभी तक हमारे यहाँ कोई खास बारिश हुई नही है,, अतएव आपकी लघुकथा के माध्यम से ही बारिश का आनन्द ले रहा हूँ। बहुत बहुत बधाई आपको।"
Jul 8
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Neelam Upadhyaya's blog post जीवन यथार्थ
"आद0 नीलम जी सादर अभिवादन,, जीवन की सार्थकता को अपने ढंग से परिभाषित करती बेहतरीन कविता पर मेरी बधाई स्वीकार कीजिये"
Jul 6
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on TEJ VEER SINGH's blog post समय बड़ा बलवान - लघुकथा –
"आद0 तेजवीर जी सादर अभिवादन। बेहतरीन पंच लाइन  "माँ, जो लोग वक्त की कीमत नहीं समझते। वक्त उनको भी मूल्यहीन कर देता है"। वाह,, सीख देती बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jul 6
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post पाँच दोहे (गणेश जी बाग़ी)
"आद0 गणेश जी बागी जी सादर अभिवादन। एक से बढ़कर एक उम्दा दोहे। वर्तमान को आईना दिखाती,,  रीति जहां की देख कर, मन चंचल, मुख मौन।मतलब के सधते सभी, पूछें तुम हो कौन ? वाह वाह वाह, क्या कहने  बहुत बहुत बधाई आपको।"
Jul 6
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post ला-इलाज कैंसर की तरह
"आद0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन भाव सम्प्रेषण। बहुत उम्दा लिखा आपने। बधाई इस प्रस्तुति पर। सादर"
Jul 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कैसे अजब हैं लोग जो - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आद0 लक्ष्मण जी सादर अभिवादन। बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल। कई अशआर दिल को छू गए। बधाई शैर दर शैर। बहुत खूब"
Jul 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mohan Begowal's blog post बड़ा सवाल(लघुकथा )
"आद0 मोहन बोगोवाल जी सादर अभिवादन। बढ़िया विषय लिया आपने। पर इस बात से मैं पूर्णतया सहमत नहीं कि घर का काम मम्मी करती हैं और श्रेय पापा को मिलता है। घर के उत्तम कार्यों का श्रेय मम्मी को भी मिलता है। हाँ स्कूल के उदाहरण पर मैं आपके साथ हूँ। बधाई देता…"
Jul 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mohammed Arif's blog post बारिश के हाइकु
"आद0 मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन। बढ़िया हाइकू लिखी आपने। बहुत बहुत बधाई आपको। सादर"
Jul 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post अकेली ...
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बढिया लिखा है आपने। इस प्रस्तुति पर मेरी अनन्त बधाई स्वीकार कीजिये"
Jul 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mohan Begowal's blog post जुआ (लघुकथा)
"आद0 मोहन बोगोवाल जी सादर अभिवादन। बढ़िया विषय लिया आपने। अक्सर ऐसा होता है कि हमारी हार में भी जीत छुपी होती है। आपकी लघुकथा में शब्दों की कसावट की अभी कमीं है। सुधार के बावजूद आप बार बार पढ़िए और जहाँ त्रुटि लग रही है उसे नोट कीजिये। फिर सुधारिये।…"
Jul 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post रहमत में हरम मागा- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आद0 लक्ष्मण जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। शैर दर शैर मुबारकबाद कुबूल करें। माँगा शुद्ध शब्द है। कृपया वर्तनी सही कर लीजिए। "
Jul 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on somesh kumar's blog post दिल का साँचा
"आद0 सोमेश कुमार जी सादर अभिवादन। बढ़िया भाव सम्प्रेषण। बधाई देता हूँ इस प्रस्तुति पर। जनाब समर साहब के बातों का संज्ञान लीजिये। सादर"
Jul 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Satyanarayan Singh's blog post अबला नहिं आज रही महिला
"आद0 सत्य नारायण जी सादर अभिवादन। बढ़िया भाव प्रधान सवैया।। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये।  एक प्रश्न है,, क्या नहीं को नहि लिखना सही है??"
Jul 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"आद0 सतविंदर भाई जी सादर आभार"
Jun 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

श्रमिकों के जीवन पर आधारित मेरे 21 दोहे

कहीं बनाते हैं सड़क, कहीं तोड़ते शैल

करते श्रम वे रात दिन, बन कोल्हू के बैल।1।

नाले देते गन्ध हैं, उसमें इनकी पैठ

हवा प्रवेश न कर सके, पर ये जाएँ बैठ।2।

काम असम्भव बोलना, सम्भव नहीं जनाब

पलक झपकते शैल को, दें मुट्ठी में दाब।3।

चना चबेना साथ ले, थोड़ा और पिसान

निकलें वे परदेश को, पाले कुछ अरमान।4।

सुबह निकलते काम पर, घर से कोसों दूर

भूमि शयन हो शाम को, होकर श्रम से चूर।5।

ईंट जोड़…

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Posted on May 7, 2018 at 5:30pm — 24 Comments

उसकी लाठी आवाज नहीं करती (लघुकथा)

"अरे रमेश ये कैसे हुआ? और बेटे की हालत कैसी है? मुझे तो जैसे ही खबर लगी,भागा-भागा चला आ रहा हूँ"  आई सी यू के बाहर खड़े रमेश से रतन ने पूछा।

रतन को देखते ही रमेश रो पड़ा। फिर अपने को संभालते हुए बोला-"क्या बताऊँ तुम्हें, मेरे घर के पास जो हाई वोल्टेज तार का खम्बा लगा हुआ था, वही कल अचानक गिर गया। और फिर ये…."

बोलते-बोलते वह फफक पड़ा।

रतन ढाँढस देते हुए बोला- "मित्र हिम्मत न हारो। सब कुछ ठीक हो जाएगा। .....डॉक्टर्स क्या कह रहे…

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Posted on March 27, 2018 at 7:44am — 16 Comments

सामाजिक विद्रूपताओं पर एक गीत (वीर रस)

देख दुर्दशा यार वतन की, गीत रुदन के गाता हूँ

कलम चलाकर कागज पर मैं, अंगारे बरसाता हूँ

कवि मंचीय नहीं मैं यारों, नहीं सुरों का ज्ञाता हूँ

पर जब दिल में उमड़े पीड़ा, रोक न उसको पाता हूँ

काव्य व्यंजना मै ना जानूँ, गवई अपनी भाषा है

सदा सत्य ही बात लिखूँ मैं, इतनी ही अभिलाषा है

आजादी जो हमे मिली है, वह इक जिम्मेदारी है

कलम सहारे उसे निभाऊं, ऐसी सोच हमारी है

काल प्रबल की घोर गर्जना, लो फिर मैं ठुकराता हूँ

देख…

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Posted on February 11, 2018 at 6:18am — 9 Comments

ग़ज़ल (तुम्हारे ख़त जो मेरे नाम पर नहीं आते)

अरकान-1212  1122  1212  22

तुम्हारे ख़त जो मेरे नाम पर नहीं आते

तो दुश्मनों के भी चहरे नज़र नहीं आते

सतर्क आप रहें हर घड़ी निगाहों से

लुटेरे दिल के कभी पूछ कर नहीं आते

भला भी वक़्त तुम्हारे लिये बुरा होगा

सलीक़े जीने के तुमको अगर नहीं आते

बदल दिए हैं हमीं ने मिजाज मौसम के

भिगोने अब्र हमें बाम पर नहीं आते

हमेशा पीछे भी क्या देखना जमाने में

समय जो बीत गए लौट कर नहीं…

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Posted on February 7, 2018 at 6:51pm — 8 Comments

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At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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