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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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Sushil Sarna commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post शाइरी भी यार अब हम क्या करें
"हर जगह नफरत का आलम, क्या करेंज़ह्र होता ही नही कम क्या करें || मौत का सामान ख़ुद इंसाँ हुआऔर जुबाँ उसकी हुई बम क्या करें || वाह वाह आदरणीय सुरेन्द्र जी इस ग़ज़ल में बहुत ही दिलकश और हकीकी अशआर कहे हैं आपने ... इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई कबूल…"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post खुद आंसू पीते हैं
"आद0 आशुतोष मिश्र जी सादर अभिवादन, बहुत कुछ इस रचना पर गुनिकह चुके है, आप इसे देख लीजियेगा।सादर, मेरी कोटिश बधाइयाँ आपको।"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Rohit dobriyal"मल्हार"'s blog post "तन्हा" सपना (मल्हार)
"जनाब मल्हार साहिब आदाब,अच्छी लगी आपकी कविता,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - दुश्मनी घुट के मर न जाये कहीं - ( गिरिराज )
"आद0 भाई गिरिराज जी सादर अभिवादन, बहुत उम्दा गजल, हरेक शेर मुझे प्रभावित किया। ऐ ख़ुदा, क्या नहीं है बस में तिरे हिन्दी- उर्दू को एक जाँ कर दे।। क्या बात है, हृदय से बधाई निवेदित है। सादर"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...जहर से भरी वादियों में हवा है
"आद0 बृजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन, समसामयिक मुद्दों पर अच्छी गजल, शेष गुणीजन कह ही चुके है।मेरी इस उम्दा सृजन पर बधाई निवेदित हैं।"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on rajesh kumari's blog post “किन्नर” (लघु कथा 'राज')
"आद0 बहन राजेश कुमारी जी सादर प्रणाम, बहुत उम्दा कथानक के साथ बेहतरीन कहानी, मुझे तो बहुत हृदयस्पर्शी लगी, बधाई इस सृजन पर।"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Seema Mishra's blog post जंगल के फूल -सीमा पांडे मिश्रा "सुशी"
"आद0 सीमा जी सादर अभिवादन, उम्दा कथानक के साथ बेहतरीन कहानी, बधाई"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Dr.Prachi Singh's blog post मैं अलमस्त फकीर ..... गीत / डॉ० प्राची
"आद0 प्राची सिंह जी सादर अभिवादन, खूबसूरत सृजन पर बधाई।"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' and MANINDER SINGH are now friends
Monday
सतविन्द्र कुमार commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post शाइरी भी यार अब हम क्या करें
"आदर सुरेन्द्र भाई जी,उम्दा गजल कही है आपने। शेर दर शेर मुबारकबाद कुबूल करें!"
Apr 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post ग़ज़ल -- कभी जीत है कभी हार है ( दिनेश कुमार )
"आद0 दिनेश कुमार दानिश जी सादर अभिवादन, उम्दा गजल कही आपने, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।"
Apr 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद
"आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन, आपकी बेहद उम्दा भावपूर्ण कुंडलियाँ के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें"
Apr 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Arpana Sharma's blog post " अस्पृश्य" - लघुकथा :अर्पणा शर्मा
"आद0 अपर्णा शर्मा जी सादर अभिवादन, उचित कथानक के साथ उम्दा लघुकथा।बधाई।"
Apr 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Ravi Shukla's blog post तरही गजल : फूल जंगल में खिले किन के लिये
"आ गई अब ब्रेड में बीमारियाँ जी रहे थे क्या इसी दिन के लिए आये थे जापान से कल लौट कर फिर उड़े वो रूस बर्लिन के लिए पास पप्पू एक दिन हो जाएगा है दुआ इस गैर मुमकिन के लिए वाह वाह वाह वाह वाह, बहुत ही उम्दा और मजाकिया लहजा, नमन आपको। इस उम्दा ग़ज़ल पर…"
Apr 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post दो कवितायें
"भाई आशुतोष मिश्र जी बेहद उम्दा सर्जन, यथार्थ के बेहद करीब, बधाई।"
Apr 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल (12122-12122-12122-12122)
"भाई गुरप्रीत जी अच्छी ग़ज़ल के लिए दाद और मूबरकबाद, और आपकी ग़ज़ल के माध्यम से इतनी उचित चर्चा से मुझ जैसे लोगो को बहुत फायदा हुआ, सभी गुनी जनों का भी हृदय से आभार"
Apr 20

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

शाइरी भी यार अब हम क्या करें

बह्र 2122 2122 212



हर जगह नफरत का आलम, क्या करें

ज़ह्र होता ही नही कम क्या करें ||



मौत का सामान ख़ुद इंसाँ हुआ

और जुबाँ उसकी हुई बम क्या करें ||



जो सहारे भाग्य के बैठा रहे

ऐसे का फिर राम गौतम क्या करें ||



कुछ नही अपना यहाँ यह जानकर

*जाने वाले चीज का ग़म क्या करें*



वक़्त से कोई बड़ा जब है नही

सर किसी के सामने ख़म क्या करें ||



इस हुनर पर हावी हैं मजबूरियाँ

शाइरी भी यार अब हम क्या करें… Continue

Posted on April 18, 2017 at 4:30am — 11 Comments

निकलना एक दिन है इस मकाँ से

बह्र 1222 1222 122



करो उम्मीद मत यूँ आसमाँ से ||

बिना मिहनत न कुछ मिलता वहाँ से||



उठाते साथ थे छप्पर सभी जब

हटा विश्वास क्यूँ फिर दरमियाँ से ||



कफ़न सर से कहाँ वो बाँधते हैं

मुहब्बत है जिन्हें अपनी ही जाँ से ||



जहन्नम से नही कम होती दुनिया

कोई भी गर नही जाता जहाँ से ||



कमी क्या रह गई इस ज़िन्दगी में?

दुआएँ मिल गई गर बाप माँ से ||



निकल कर अश्क वो कहते हैं अक्सर

जिसे कोई न कह पाये जुबाँ से… Continue

Posted on March 29, 2017 at 4:03pm — 22 Comments

नारी ( सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' )

नारी तुम! सुकुमार कुमुदुनी

सौम्य स्नेह औ प्रेम प्रदाता ||

धरती पर हो शक्ति स्वरूपा

तुम रण चंडी भाग्य विधाता ||



संस्कारों की शाला तुम हो

तुम लक्ष्मी सावित्री सीता |

निर्वाहिनी सत्कर्म की तुम

तुम्ही वेद कुरान औ गीता ||



सह कर असह्य प्रसव वेदना

तुम लाल धरा पर लाती हो |

तुम हो धात्री अखिल जगत की

तुम्ही सृष्टि सृजन बढाती हो ||



हे रूपवती हे कमनीया

ईश्वर की तुम अद्भुत रचना ||

तलवार धरो जब कर में तो

मुश्किल…

Continue

Posted on March 8, 2017 at 8:30am — 12 Comments

कभी न होगी यहाँ नाभिकीय वार की बात (ग़ज़ल)

बह्र 1212 1122 1212 1121/112



अगर सभी के दिलो में हो सिर्फ प्यार की बात

नही कठिन है मिटाना जहाँ से खार की बात



हिरोशिमा से सबक लें सभी जो मुल्क अगर

कभी न होगी यहाँ नाभिकीय वार की बात



जुबाँ कभी मेरी खाली न जाये इसलिए तो

कभी किसी से न की भूलकर उधार की बात



हुआ चलन जो मो'बाइल का हर जगह गोया

कि अब नही यहाँ होंगी किसी से तार की बात



दिखा न आँख हमे इस कदर समझ बुजदिल

हैं शेर हम नही करते कभी सियार की बात



दिखा रही है… Continue

Posted on March 4, 2017 at 3:30pm — 16 Comments

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At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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