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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Page

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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post हम पंछी भारत के
"आद0 प्रदीप देवी शरण भट्ट जी सादर अभिवादन। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये"
Thursday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"आद0 लक्ष्मण जी सादर अभिवादन। रचना पर आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया का कोटिश आभार"
Jan 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"आद0 अखिलेश कृष्ण जी सादर अभिवादन। क्या बेहतरीन मी टू पर व्यंग किया आपने,, बहुत बहुत बधाई, मजा आ गया पढ़के"
Jan 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"आद0 अखिलेश कृष्ण जी सादर अभिवादन। आपकी ऐसी प्रतिक्रिया से बहुत बल मिलता है।हृदय तल से आभार आपका"
Jan 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी सादर अभिवादन। विषयानुकूल बेहतरीन और संजीदगी भरी दोहों के लिए कोटिश बधाई निवेदित है। सादर"
Jan 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"आद0 उषा अवस्थी जी सादर अभिवादन। विषयानुकूल बढ़िया रचना पर बढ़ाओ स्वीकार कीजिये"
Jan 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"आद0 मनन कुमार सिंह जी सादर अभिवादन। समसामयिक विषयों के अनुरूप विषयानुकूल अच्छी रचना प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
Jan 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"आद0 दयाराम मैठानी जी सादर अभिवादन,, विषयानुकूल बेहतरीन रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
Jan 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"द्वितीय प्रस्तुति (छप्पय छःन्द) माँग रही है भीख, कहीं बैठी सच्चाईबेच रहा जो झूठ, करे दिन रात कमाईधर्म ग्रंथ हर लेख, सत्य की बात बतातेपर जो बोले झूठ, वहीं अब मौज उड़ातेसाथ अगर सच आपके, मुश्किल है पग डोलनाकुछ कड़वी सच्चाइयाँ, झूठ सिखातीं…"
Jan 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"आद0 लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर अभिवादन। हृदयतल से आभार बन्धु"
Jan 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"कुछ भ्रम है,,यहीं तो भ्रमजाल है"
Jan 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"आद0 डॉ विजय शंकर जी सादर अभिवादन। वैसे सामाजिक फिल्में बने जिसमें विसंगतियों को दिखाया जाए तो कोई बुराई नहीं,, पर... इस सृजन पर आपको बधाई"
Jan 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"आद0 प्रतिभा पांडेय जी सादर अभिवादन। मुक्तक और क्षणिका,, दोनों ही विषयानुरूप बेहतरीन है। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jan 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"नमिता सुंदर जी सादर अभिवादन,, आपकी प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से आभार"
Jan 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"आद0  प्रतिभा पाण्डेय जी सादर अभिवादन। रचना पर आपकी उत्साह बढ़ाती प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से आभार।"
Jan 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-111
"प्रथम प्रस्तुति (मत्त गयंद छंद) भाग्य रहा अपना कुछ तो हमने यदि मानव का तन पायापावक व्योम हवा धरती जल से यह निर्मित सुन्दर कायापुण्य कमा न सके कुछ भी बस सोकर क्यों यह जन्म गवायाभौतिक बन्धन तोड़ सके न सदा भ्रमजाल शिकार बनाया।।1 प्यास दिवाकर की घटती न…"
Jan 11

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

भारत दर्शन (द्वितीय कड़ी) मत्त गयंद छंद

वैभव औ सुख साधन थे उनको पर चैन नही मिल पाया

कारण और निवारण का हर प्रश्न तथागत ने दुहराया

घोष हुआ दिवि घोष हुआ भ्रम का लघु बंधन भी अकुलाया

गौतम से फिर बुद्ध बने जग विप्लव शंशय पास न आया।।1

गौतम बुद्ध जहाँ तप से हिय दिव्य अलौकिक दीप जलाए

मध्यम मार्ग चुना अनुशीलन राह यहीं जग को बतलाये

रीति कुरीति सही न लगे यदि क्यों फिर मानव वो अपनाए

तर्क वितर्क करो निज से, धर जीवन संयम को समझाये।।2

गाँव जहाँ ब्रज गोकुल से हिय में अपने जन प्रेम…

Continue

Posted on January 7, 2020 at 5:30pm — 6 Comments

भारत दर्शन (प्रथम कड़ी) मत्त गयंद छंद

जन्म लिया जिस देश धरा पर वो हमको लगता अति प्यारा

वैर न आपस में रखते वसुधैव कुटुम्ब लगे जग सारा

पूजन कीर्तन साथ जहाँ सम मन्दिर मस्जिद या गुरुद्वारा

लोग निरोग रहे जग में नित पावन सा इक ध्येय हमारा।।1

पूरब में जिसके नित बारिश, हो हर दृश्य मनोरम वाला

लेकर व्योम चले रथ को रवि वो अरुणाचल राज्य निराला

गूढ़ रहस्य अनन्त छिपा पहने उर पादप औषधि माला

जो मकरन्द बहे घन पुष्पित कानन को कर दे मधुशाला।।2

उत्तर में जिसके प्रहरी सम पर्वत राज हिमालय…

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Posted on January 3, 2020 at 5:00pm — 9 Comments

नववर्ष की शुभकामनाएं (मत्तगयंद छंद)

स्वागत हेतु सजी धरती उर में बहु सौख्य-समृद्धि पसारे

राग विराग हुआ सुर सज्जित हर्षित अम्बर चाँद सितारे

भव्य करो अभिनन्दन वन्दन लेकर चन्दन अक्षत प्यारे

स्नेह लिए नव अंकुर का अब द्वार खड़ा नव वर्ष तुम्हारे।।1

नूतन भाव विचार पले जड़ चेतन में निरखे छवि प्यारी

एक नया दिन जीवन का यह, हो जग स्वप्निल मंगलकारी

ओज अनन्त बसे सबके हिय राह नई निरखें नर नारी

दैविक दैहिक कष्ट न हो वरदान सुमंगल दें त्रिपुरारी।।2

प्यार दुलार करें सबसे नित, दुश्मन को हम…

Continue

Posted on December 31, 2019 at 6:00pm — 12 Comments

कुछ ज्वलन्त विषयों पर कुण्डलिया

नशाख़ोरी

करते हैं जन जो नशा, होता उनका नाश

तिल-तिल गिरते पंक में, बनते हैं अय्याश

बनते हैं अय्याश, नष्ट कर कंचन काया

रिश्तों को कर ख़ाक बनें लगभग चौपाया

छपती खबरें रोज न जाने कितने मरते

युवा वर्ग गुमराह नशा जो हर दिन करते।।1

जरदा गुटखा पान सँग, बीड़ी औ' सिगरेट

अब यह कैसे बन्द हो, इस पर करें डिबेट

इस पर करें डिबेट, किया क्या हमने अब तक

आसानी से नित्य पहुँचता क्यों यह सब तक

बालक, वृद्ध, जवान न करते इनसे…

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Posted on November 28, 2019 at 7:30pm — 8 Comments

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At 7:03pm on April 11, 2019, Vivek Pandey Dwij said…
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी आभार आप को इस उत्साह वर्धन के लिए।
At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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