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Ravi Shukla
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vijay nikore commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल
"बहुत ही खूबसूरत गज़ल के लिए हार्दिक बधाई।"
Friday
laxman dhami commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल
"आ. भाई रवि जी सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई ।"
Thursday
Niraj Kumar commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय रवि शुक्ला जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद. पुराने लहजे की मुआमला बंदी का एक शेर बहुत अच्छा बन पड़ा है :    आँचल सरक के दोश से पहलू में क्या गिरा, बैठे भी वो नहीं थे लजा कर चले गए। मेरे ख्याल से मोमिन के शेर में…"
Thursday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भाई , बहुत अच्छी कही है आपने गज़ल , सभी अशआर अच्छे हुये हैं , मुबारक बाद स्वीकार करें । पुरसान-ए-हाल के लिये यूँ आये मेरे पास गोया कि एक रस्म निभा कर चले गए आये वो दर्द बाँटने लेकिन हक़ीक़तन, शिद्दत गमों की और बढ़ा कर चले…"
Thursday
Gurpreet Singh commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल
"इस जानकारी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय रवि शुक्ला जी ,,,गोया शब्द मैंने कई अशआर में पढ़ा था,,लेकिन इस के बारे में  जानता नहीं था,, आप ने बात स्पष्ट कर दी,,, शुक्रिया "
Thursday
Ravi Shukla commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post तुलसी को वनवास हो हो गया
"आदरणीय बसंत कुमार जी बहुत सुन्‍दर नवगीत लिखा आपने भाव और कथ्‍य की दृष्टि दोनो से ही अच्‍छा लगा  । बधाई स्‍वीकार करें"
Thursday
Ravi Shukla commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय गुरप्रीत जी हौसला आफजाई का श्‍ुा्क्रिया  पुरसान ए हाल  हाल चाल पूछना  और सुकूते शब  सूकूत का अर्थ है शान्ति नीरवता और शब तो रात है ही सुकूते शब रात्रि की नीरवता गोया दो तरह से प्रयुक्‍त होता है एक तो गोया मतलब…"
Thursday
Ravi Shukla commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र-22/22/22/22)
"आदरणीय मोहम्‍मद आरिफ साहब अच्‍छी गजल कही आपने मुबारक बाद पेश करते है । आखिरी शेर खास तौर पर पंसद आया । सादर ।"
Thursday
Gurpreet Singh commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय रवी सर जी नमस्कार ...बहुत खूब ग़ज़ल कही है आपने...इतने सारे अशआर और वो भी इतने उच्च स्तरीय ..कमाल कर दिया है आपने. पुरसान-ए-हाल, सुकूते शब ....इन शब्दों के अर्थ जानना चाहूंगा सर जी और साथ ही गोया का इसतेमाल करने की तरकीब भी जानना चाहूंगा की…"
Wednesday
Ravi Shukla commented on SHAFIQE SAIFI's blog post ग़ज़ल -तुम चाँद हो फलक पर, या तारों की बहार कह दुँ ,
"आदरणीय शफीक सैफी साहब आपने गजल विधा के साथ यह रचना पेश की है मंच के अनुशासन के अनुसार गजल का अरकान या बह्र लिखने की परंपरा है आपने नहीं लिखा जिससे इसका अनुमान नहीं हो पा रहा है कि आपने किस बहर में यह गजल कही है साथ ही काफिया का निर्वाह भी नहीं हो…"
Wednesday
Ravi Shukla commented on KALPANA BHATT's blog post सावन ( हाइकू)
"आदरणीया कल्‍पना जी सुंदर हाइकू की प्रस्‍तुतति हुई है बधाई स्‍वीकार करें"
Wednesday
Ravi Shukla commented on Naveen Mani Tripathi's blog post हौसला फिर कोई बड़ा रखिये
"आदरणीय नवीन जी अच्‍छे मतले से शुरुआत की आपने और बाकी अशआर भी बहुत अच्‍छे है टंकण त्रुटियॉं हुई है उनको सुधार लीजियेगा  । मुबारक बाद पेश करते है ।"
Wednesday
Ravi Shukla commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणनीय बृजेश जी आपकी हौसला अफजाई का बहुत बहुत श्‍ुाक्रिया"
Wednesday
Ravi Shukla commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय तस्‍दीक साहब आदाब आपसे प्रोत्‍साहन पाकर बहुत खुशी हुई है बहुत बहुत शुक्रिया आपका"
Wednesday
Ravi Shukla commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय कल्‍पना जी आपकी विस्‍तृत बधाई पाकर बहुत खुशी हुई सादर आभार स्‍वीकार करें"
Wednesday
Ravi Shukla commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणनीय नरेन्‍द्र सिंह जी आपकी हौसला अफजाई का बहुत बहुत श्‍ुाक्रिया"
Wednesday

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तरही ग़ज़ल

221 2121 1221 212



आए वो बज़्म ए शौक में आ कर चले गए,

फ़ित्ना सा एक दिल में उठा कर चले गए।



महफ़िल में आये जलवः दिखा कर चले गए,

जादू सा एक पल में जगा कर चले गए।



आने का और जाने का होता नहीं यकीन,

कुछ लोग इस तरह से भी आकर चले गए।



आँचल सरक के दोश से पहलू में क्या गिरा,

बैठे भी वो नहीं थे लजा कर चले गए।



पुरसान-ए-हाल के लिये यूँ आये मेरे पास

गोया कि एक रस्म निभा कर चले गए



आये वो दर्द बाँटने लेकिन… Continue

Posted on July 18, 2017 at 1:53pm — 17 Comments

तरही गजल : फूल जंगल में खिले किन के लिये

2122 2122 212

कार्ड काफी था न लॉगिन के लिए

वो हमे भी ले गए पिन के लिए



चाँद पर जाकर शहद वो खा रहे

आप अब भी रो रहे जिन के लिए



शेर को आता है बस करना शिकार

फूल जंगल में खिले किन के लिए



गुठलियों के दाम भी वो ले गया

उसने शीरीं आम जब गिन के लिये



आ गई अब ब्रेड में बीमारियाँ

जी रहे थे क्या इसी दिन के लिए



आये थे जापान से कल लौट कर

फिर उड़े वो रूस बर्लिन के लिए



पास पप्पू एक दिन हो…

Continue

Posted on May 9, 2017 at 11:46am — 27 Comments

तरही गजल : दिन सुहाने हो गये राते सुहीनी हा गईं

2122   2122   2122   212

दिन सुहाने हो गए राते सुहानी हो गईं,

उनके आते ही बहारें जाफ़रानी हो गईं।



रंग और खुशबू की बातें अब कहानी हो गईं,

मुश्किलें लगता है जैसे जाविदानी हो गईं।



आसमाँ ने जब उफ़क पर चूम धरती को लिया,

कमसिनी को छोड़कर ऋतुएं सुहानी हो गईं।



बेकरारी आज जितनी है कभी पहले न थी,

आदतें भी सब्र की जैसे कहानी हो गईं।



मिहनतों को जब मिला तेरा सहारा ए ख़ुदा,

मुश्किलें भी मेरी घट कर दरमियानी हो गईं।



रेत का इक सैल…

Continue

Posted on March 31, 2017 at 11:06am — 17 Comments

ग़ज़ल :चुनाव के दिन हैं

1212 1122 1212 22



हमें न ख़्वाब दिखाओ चुनाव के दिन हैं,

अभी तो होश में आओ चुनाव के दिन है ।



बला से कोई बने शाह मुल्क में माना,

तुम अपना फ़र्ज़ निभाओ चुनाव के दिन हैं।



ख़ता मुआफ़ उसूलों को आज रहने दो,

अदू से हाथ मिलाओ चुनाव के दिन हैं।



ये इत्तिहाद मुबारक़ हो ओहदों के लिए,

हिसाब और लगाओ चुनाव के दिन हैं।



गुज़िश्ता पाँच बरस का हिसाब पूछेंगे

कहाँ थे आप बताओ चुनाव के दिन हैं।



सहीह आज ये मौका बदल दो सूरते… Continue

Posted on February 13, 2017 at 6:32pm — 18 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 3:39pm on April 5, 2017, Gurpreet Singh said…

आदरणीय रवि शुक्ला जी आपसे बहुत अच्छी चैटिंग हो रही थी... लेकिन ऐन वक़्त पर मेरे नेट ने धोखा दे दिया ( ये अक्सर मेरे साथ ऐसा ही करता है ) और आप से  बात चीत बीच में ही कट गई ,,, खैर फिर मौका मिला तो बात आगे बढ़ांएंगे,,, संपर्क करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 

At 11:45pm on July 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रवि शुक्ल जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - व्यापार होना चाहिए को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:23pm on December 17, 2015, Nirdosh Dixit said…
प्रणाम स्वीकारें आदरणीय शुक्ल जी, सादर आभार आपका।
At 11:19pm on November 7, 2015, जयनित कुमार मेहता said…
आपका हार्दिक आभार आदरणीय रवि जी..
At 7:31pm on November 4, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh
said…

क्षमा कीजियेगा आ० रवि शुक्ल जी आज ही आपका कमेंट देखा...

करवाचौथ पर लिखा गया मेरा गीत मात्रिक गीत नहीं है... इसे फायलुन X 4 की आवृति पर  लिखा गया है..

मात्रिक गीतों में मात्रा को गिराकर पढने का कोई विधान नहीं होता .. 

मात्रिक गीत (गीतिका छंद पर आधारित) के  कुछ  उदाहरण देखिये 

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:557225

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:518431

मंच पर गीत नवगीत पर एक आलेख देखिये 

http://www.openbooksonline.com/group/chhand/forum/topics/5170231:Topic:358338?commentId=5170231%3AComment%3A359492&xg_source=activity&groupId=5170231%3AGroup%3A156482

At 9:36pm on September 16, 2015, shree suneel said…
आदरणीय रवि शुक्ला जी, हार्दिक बधाई आपको 'महीने का सक्रिय सदस्य' चुने जाने पर, मेरी ओर से. सादर.
At 2:01pm on September 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

रवि शुक्ला जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 4:59pm on July 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपको दोहा गीत पसंद आया, जानकार मन गद्गद् हो गया. ओबीओ का यह आयोजन "चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" छंदों को ही समर्पित है. यह एक कार्यशाला है जहाँ सभी आपस में एक दुसरे से सीखते है. आप आयोजन में सम्मिलित होंगे तो आपको कुछ नया सीखने मिलेगा और आपके अनुभव का लाभ मंच के अन्य सदस्यों को होगा. आप इस आयोजन में सम्मिलित होंगे तो बहुत ख़ुशी होगी. लिंक साझा कर रहा हूँ - ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव"

At 1:36pm on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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