For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Amit Tripathi Azaad
Share

Amit Tripathi Azaad's Friends

  • Ravi Shukla
  • Dr.Prachi Singh
  • मिथिलेश वामनकर
  • योगराज प्रभाकर
 

Amit Tripathi Azaad's Page

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh and Amit Tripathi Azaad are now friends
Sep 15, 2016
Amit Tripathi Azaad commented on Sulabh Agnihotri's blog post राम-रावण कथा (पूर्व-पीठिका) 38
"शानदार लेख अग्निहोत्री जी बधाई स्वीकार करें "
Jul 30, 2016
Amit Tripathi Azaad commented on Admin's page Tool Box
"आके सजन लग जा गले सावन जले भादो जले अंबर की छाया तले दो दिल मिले संग संग चलें आके सजन ..... किस बात से मजबूर है किस बात से है तू ख़फ़ा कियूँ ख़्वाब में आता है तू कियूँ बन गया है बेवफ़ा कियूँ दूर तक थे हम चले सावन जले भादो जले ...२ तू तो मेरा हमराज़…"
Jul 30, 2016
Amit Tripathi Azaad commented on Admin's group हिंदी की कक्षा
"हिंदी सीखने का इससे सुन्दर स्थान दूसरा नहीं है ,आभार आचार्य संजीव जी का |"
May 11, 2016
Amit Tripathi Azaad commented on Admin's group हिंदी की कक्षा
"हिंदी सीखने का इससे सुन्दर स्थान दूसरा नहीं है ,आभार आचार्य संजीव जी का |"
May 11, 2016
Amit Tripathi Azaad commented on Admin's group हिंदी की कक्षा
"हिंदी सीखने का इससे सुन्दर स्थान दूसरा नहीं है ,आभार आचार्य संजीव जी का |"
May 11, 2016
Amit Tripathi Azaad commented on Admin's group हिंदी की कक्षा
"हिंदी सीखने का इससे सुन्दर स्थान दूसरा नहीं है ,आभार आचार्य संजीव जी का |"
May 11, 2016
Amit Tripathi Azaad commented on Admin's group हिंदी की कक्षा
"आदरणीय संजीव सर कहानी और कविता की बारीकियों का ज्ञान देने का आशीर्वाद प्रदान करें "
May 11, 2016
Amit Tripathi Azaad commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे महबूब
"आदरणीय गिरिराज जी आपके द्वरा दिया गया सुझाव का सम्मान करते हुवे ये बता दूँ कि मै अभी सीख  ही रहा हूँ पर आपकी उचित सलाह को नमन करता हूँ "
May 2, 2016
Amit Tripathi Azaad commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे महबूब
"आदरणीया राजेश कुमारी जी आपके द्वारा दी गई सलाह को सर आँखों पर रखते हुवे आभार प्रगट करता हूँ "
May 2, 2016

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे महबूब
"आ० अमित जी ,प्रयास रत रहिये बेहतर कर सकेंगे विद्वद जनों की राय काबिले गौर है "
Apr 25, 2016

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे महबूब
"आदरणीय अमित भाई , गज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है , प्रयास जारी रखियेगा ! गज़ल की कक्षा के पाठ जरूर पढियेगा । आपको हार्दिक शुभकामनाये और बधाइयाँ ।"
Apr 25, 2016
Ravi Shukla commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे महबूब
"आदरणीय अमित जी आज़ाद अच्छा प्रयास हुआ है । आदरणीय समर साहब की सलाह पर ध्यान दीजियेगा । सादर ।"
Apr 24, 2016
Samar kabeer commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे महबूब
"जनाब आज़ाद साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है लेकिन अभी अभ्यास करना होगा,ओबीओ पर ग़ज़ल की कक्षा का लाभ लें । मतले के ऊला मिसरे में क़ाफ़िया नदारद है, तीसरे शैर में सानी मिसरा ऊला की जगह है,आख़री शैर में तुम और तेरे का फ़र्क़ है, प्रयासरत रहें ।"
Apr 24, 2016
Amit Tripathi Azaad posted a blog post

मेरे महबूब

मेरे महबूब सपनों से हक़ीक़त बन तू आ जाए मेरा उजड़ा हुवॉ जीवन मेरी जाँ फिर सवर जाएमुझे अहसास अब होने लगा है इश्क़ में तेरे कहीं ना ज़िन्दगी तेरी ही गलियों में गुज़र जाएजिसे हो जुस्तजू तेरी वो बेचारा किधर जाएजिए वो ज़िंदगी अपनी या आहें भर के मर जाएमैं अक्सर आह भरता हूँ तेरे दीदार के ख़ातिर झलक तेरी मिले गर तो मेरा जीवन सँवर जाएतेरी गलियों की मिट्टी भी मुझे जन्नत से प्यारी है चले गर साथ हम दोनों मुहब्बत भी निखर जाएनिगाहें मुन्तज़िर मेरी है मुद्दत से तेरीे ख़ातिर सहारा जाविदाँ मुझको मिले जीवन सुधर…See More
Apr 22, 2016
Sushil Sarna commented on Amit Tripathi Azaad's blog post मेरे सपनों का गाँव
"आदरणीय गाँवों के बदलते परिवेश को अपने शब्दों में आपने खूब उकेरा है , हार्दिक बधाई। वैसे क्षमा सहित मैं आदरणीय भ्रमर जी टिप्पणी से सहमत हूँ। भ्रमर जी की टिप्पणी के प्रत्युत्तर में भी अशुद्धि प्रतीत हो रही है यथा ''रचना में हुईं (हुई)…"
Apr 19, 2016

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur
Native Place
Allahabad
Profession
Writing

samast hindi dhurandhar ,sammanniy,mahamahim mitro ko mera sadar abhinandan 

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 4:52pm on February 1, 2016, Amit Tripathi Azaad said…
श्रेष्ठ अग्रज रवि जी को मेरा नमन स्वीकार हो
At 1:36pm on February 1, 2016, Ravi Shukla said…

आदरणीय अमित जी आपका स्‍वागत है

Amit Tripathi Azaad's Blog

मेरे महबूब

मेरे महबूब सपनों से हक़ीक़त बन तू आ जाए

मेरा उजड़ा हुवॉ जीवन मेरी जाँ फिर सवर जाए



मुझे अहसास अब होने लगा है इश्क़ में तेरे

कहीं ना ज़िन्दगी तेरी ही गलियों में गुज़र जाए

जिसे हो जुस्तजू तेरी वो बेचारा किधर जाए

जिए वो ज़िंदगी अपनी या आहें भर के मर जाए

मैं अक्सर आह भरता हूँ तेरे दीदार के ख़ातिर

झलक तेरी मिले गर तो मेरा जीवन सँवर जाए

तेरी गलियों की मिट्टी भी मुझे जन्नत से प्यारी है

चले गर साथ हम दोनों मुहब्बत भी निखर…

Continue

Posted on April 22, 2016 at 10:03am — 6 Comments

चेहरा तेरा चाँद का टुकड़ा

चेहरा तेरा चाँद का  टुकड़ा

भौहें तनी कमान हैं क्या

इन आँखों में मैं मर जाऊँ

होंठों का तिल शान है क्या..2

तेरे तन की ख़ुशबू लेकर

फूल चमन में खिलते हैं

शायर तेरे हुशनो जवाँ की

दिल में किताबें लिखते हैं

उठी नज़र फिर झुक जाए तो

ढल जाती ये शाम है क्या

इन आँखों पे ...

तेरे लबों की बात करूँ तो

खिले कमल शर्माते हैं

तेरे क़दम जो पड़े जमी पे

शहंशाह झुक जाते हैं

तेरा खनकता स्वर गूंजा या

वीना की कोई तार है…

Continue

Posted on April 19, 2016 at 6:14pm

मेरे सपनों का गाँव

मेरे सपनों में अक्सर ही

आकर मुझे जागता है

गाँव मेरा मुझको फिर यारों

वापस मुझे बुलाता है

वो खलिहानों की पगडंडी

सड़क बन गई काली है

दीपक भी अब नहीं रह गए

लाइट चमक निराली है

जिनके ख़ातिर दूर गया तू

वो सब मुझे दिखाता है

गाँव मेरा ....

मिट्टी के घर नहीं रहे अब

ईंटों के माकान बने

निर्मल निश्चल दिल वाले

अब पत्थर के इंसान बने

दिन प्रति दिन उन पत्थर में

इंसान नज़र ना आता है

गाँव...

हरे भरे तालाब सूखकर खेलों के…

Continue

Posted on April 19, 2016 at 1:09pm — 3 Comments

"माँ शारदे वंदना "

भवदिव्य भाव मनोरमां,झन झनक झन झनकार दे

जय जयति जय जय ,जयति जय जय जयति जय माँ शारदे

कमलासिनी वरदायिनी माता हमें वरदान दे

जय जयति ........

चरणों में तेरे हैं समर्पित ज्ञान की ले याचना

वेदों का कर दो दान माते कर रहे हम प्रार्थना

माँ हम फसें मझधार में भवतारिणी तू तार दे

जय जयति.......

माँ छेड़ दो वो राग जिससे स्वरमयी धारा बहे

लोकों में तीनो मातु तेरी लोग सब जै जै कहें

स्वरदायनी माँ स्वरस्वती स्वर का हमें अधिकार दे

जय…

Continue

Posted on February 12, 2016 at 10:00am — 1 Comment

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani posted blog posts
2 minutes ago
Naveen Mani Tripathi commented on Sushil Sarna's blog post ऐ आसमान ....
"आदरणीय  सुशील शरण साहब बहुत सुंदर अभिव्यक्ति हेतु आप को बधाई ।"
2 minutes ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post धार्मिक पशु (लघुकथा)
"आप जैसे प्रबुद्ध पाठकों का मिलना सौभाग्य की बात है। आपका पुनः बहुत-बहुत आभार आदरणीय शेख़ शहज़ाद…"
2 minutes ago
Naveen Mani Tripathi commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आल्हा
"वाह आ0 छोटे लाल सिंह साहब बहुत अच्छा लिखा आपने बधाई ।"
5 minutes ago
Naveen Mani Tripathi commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'सैलाब में प्रत्याशी, मतदाता या किसान!' (लघुकथा)
"वाह वाह बहुत ही सुन्दर लिखा आपने । व्यवस्था पर करारी चोट । मुबारक हो सर ।"
7 minutes ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

आना मेरे दयार में कुर्बत अगर मिले

221 2121 1221 212कुछ रंजो गम के दौर से फुर्सत अगर मिले । आना मेरे…See More
9 minutes ago
Ajay Tiwari commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नवगीत- लोकतंत्र
"आदरणीय बसंत जी, आज के राजनैतिक परिदृश्य पर बहुत सटीक व्यंग-गीत के लिए हार्दिक…"
13 minutes ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post अटल जी को श्रद्धांजलि
"आदरणीय नवल किशोर जी बहुत बहुत आभार"
1 hour ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post अटल जी को श्रद्धांजलि
"आदरणीय नवीन जी बहुत बहुत आभार"
1 hour ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : जग-जगती में // -- सौरभ
"आपकी भाषा, शैली, कथ्य और उनको जीवंत रूप दे देने की असीम क्षमता, कोई जान बूझ कर उपेक्षित कर दे तो…"
1 hour ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुछ दोहे -लक्ष्मण धामी"मुसाफिर"
"आखिरी दोहा यूं करें तो मात्रतात्मक रूप से शुद्ध हो जाएगा........ संस्कार की घूँट में, जाने क्या है…"
1 hour ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ताटंक छंद अभ्यास'
"ग़ज़ल पर अभ्यास करने पर हिंदी के छंदों में मात्रा गणना के समय समस्या स्वभावतः आ जाती है, इसलिए आपके…"
1 hour ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service