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प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
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योगराज प्रभाकर's Discussions

“ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी” अंक-43 में शामिल सभी लघुकथाएँ
1 Reply

(1). आ० शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी लुई शमाशा उई.. देख तमाशा..' . डियर छुईमुई, आज फिर सुई चुभा गईं तुम्हारी यादें! सच.. तुम जीतीं और मैं हारी! हारी; बुरी तरह हारी! ज़िद्दी थी! सनकी थी! हवाओं के तात्कालिक…Continue

Tags: गोष्ठी, लघुकथा

Started this discussion. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani on Sunday.

“ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी” अंक-42 में शामिल सभी लघुकथाएँ
1 Reply

(1). आ० अनीता शर्मा जी   उम्मीद आज वो तीस साल की हो गई लेकिन अभी तक कहीं उसका रिश्ता तय नहीं हुआ था , ऐसा नहीं है कि अन्नू सुन्दर नहीं है, अन्नू सुन्दर भी बहुत है और पढ़ी लिखी भी, लेकिन थोड़ी मोटी है,…Continue

Tags: गोष्ठी, लघुकथा

Started this discussion. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani on Sunday.

“ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी”  अंक-41 में शामिल सभी लघुकथाएँ
23 Replies

(1). आ० अजय गुप्ता जी तपस्या . लैब कंपाउंड में रिपोर्ट का इंतज़ार करते आनंद और तपस्या. लैब अटेंडेंट ने केबिन से बाहर आ कर आवाज़ दी, “रिपोर्ट ले लो. उद्भव सन ऑफ़ आनंद एंड तपस्या.” आक्रोशित सा दिख रहा…Continue

Started this discussion. Last reply by Mahendra Kumar Sep 30.

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-40 में सम्मिलित सभी लघुकथाएँ
13 Replies

(1). आ० मोहम्मद आरिफ़ जी कलयुग . एक था कछुआ , एक था खरगोश जैसा कि आपको पता है । आप कहेंगे इसमें कौन-सी नई बात है । जो कथा आपने पढ़ी-सुनी थी अब उसका कलयुगी संस्करण आया है । तो सुनो , खरगोश ने कछुए से…Continue

Started this discussion. Last reply by विनय कुमार Aug 2.

 

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Sheikh Shahzad Usmani replied to योगराज प्रभाकर's discussion “ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी” अंक-43 में शामिल सभी लघुकथाएँ
"आदाब। आजकल के परिदृश्य और मुद्दों पर विचारोत्तेजक रचनाओं के साथ सम्पन्न लघुकथा गोष्ठी 43 के बेहतरीन संकलन हेतु  योगराज प्रभाकर साहिब तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और आभार आदरणीय मंच संचालक महोदय मुहतरम जनाब  साहिब। काफ़ी इंतज़ार…"
Sunday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर posted discussions
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to योगराज प्रभाकर's discussion “ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी”  अंक-42 में शामिल सभी लघुकथाएँ
"आदाब। उम्मीद मुताबिक़ बेहतरीन रचनाओं की सहभागिता और तदनुसार बेहतरीन संकलन प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई और आभार आदरणीय मंच संचालक महोदय श्री योगराज प्रभाकर साहिब।  सभी सहभागी रचनाकारों और टिप्पणीकारों को सादर हार्दिक बधाई। मेरी रचना…"
Sunday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"जिंदाबाद राणा भाई जिंदाबाद."
Oct 22

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
""ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 को सफल बनाने हेतु सभी सुधि साथिओं का हार्दिक आभार. "
Oct 21

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"ग़ज़ल अभी बहुत वक़्त मांग रही है आ० नन्द कुमार जी. आयोजन में सहभागिता हेतु अभिनंदन स्वीकार करें.  "
Oct 21

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"हार्दिक आभार आ० कल्पना भट्ट जी. अम्मा तो कोई नहीं आई - अलबत्ता आप ज़रूर तशरीफ़ ले आई हैं जिसका खैर मक़दम है."
Oct 21

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"जवानी के खुमार में डूबी हुई इस तहरीर को आखिर तक पढो. "
Oct 21

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)
" एकदम सत्य कहा आदरणीय. "
Oct 21

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)
"बेहद बेशकीमती मशविरा आ० समर कबीर साहिब. "
Oct 21

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)
"आपकी इन्किसारी को सलाम. "
Oct 21

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"भाई राणा जी, मंच संचालक की शाबाशी मिली, पप्पू पास हो गया. "
Oct 21

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"गधेपन का तमगा क्यों न मिले? भतीजा किसका हूँ चाचा श्री?"
Oct 21

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"दिल से शुक्रिया इस उत्साहवर्धन का आ० रवि शुक्ला भाई जी. "
Oct 21

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"हार्दिक आभार आदरणीय अजेत शर्मा आकाश जी. "
Oct 21

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"हाहाहाहा - गजब. "
Oct 21

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तरही ग़ज़ल-2 (आ० समर कबीर जी को समर्पित)

1222 1222 122
.
हमारा धर्म दहशत है? नहीं तो!

तो पूरी क़ौम सहमत है? नहीं तो!
.
तेरे हाथों में ख़ंजर है, मेरे भी
ये क्या अच्छी अलामत है? नही तो



फ़क़त मंदिर ओ मस्जिद के मसौदे,

यही क़ौमी क़यादत है? नही तो!  



अज़ीमुशशां मक़ाबिर के जो खालिक,

कहीं उनकी भी तुर्बत है? नही तो!


जहाँ पत्थर की हर देवी सुरक्षित,…
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Posted on May 7, 2017 at 7:30pm — 18 Comments

आते जाते पल (लघुकथा)

वह अपनी धुंधली आँखों से बीत रहे वर्ष की पीठ पर बने रंग बिरंगे चित्रों को बहुत गौर से निहार रही थी, वह अभी उनमें छुपे चेहरों को पहचानने का प्रयास ही कर रही थी कि सहसा वे चित्र चलने फिरने और बोलने लग पड़ेI   

"माँ जी! कितनी दफा कहा है कि इन बर्तनों को हाथ मत लगाया करोI" 

नये टी सेट का कप उससे क्या टूटा उसके घर में कलेश ने पाँव पसार लिए थेI 

अगले दृश्य में नए साल की इस झांकी को होली के रंगों ने ढक लियाI  

"बेटा ये बहू की पहली होली है, तो इस बार त्यौहार धूमधाम से..."…

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Posted on January 1, 2017 at 12:01am — 14 Comments

अधूरी कथा के पात्र (लघुकथा) .

अचानक स्कूटर खराब हो जाने के कारण वापिस लौटने में काफी देर हो चुकी थी अत: वह काफी तेज़ी से स्कूटर चला रहा थाI एक तो अँधेरा ऊपर से आतंकवादियों का डरI इस सुनसान रास्ते पर बहुत से निर्दोष लोगों की हत्याएँ हो चुकी थींI वह अपने अंदर के भय को पीछे बैठी पत्नी से छुपाने का प्रयास तो कर रहा था, किन्तु उसकी पत्नी स्कूटर तेज़ रफ़्तार से सब कुछ समझ चुकी थीI स्कूटर नहर की तरफ मुड़ा ही था कि अचानक हाथों में बंदूकें पकडे पाँच सात नकाबपोश साए सड़क के बीचों बीच प्रकट हो गएI

“रुक जा ओये!” एक…
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Posted on December 27, 2016 at 10:00am — 10 Comments

तुम क्या हो? (अतुकांत कविता)

तुम क्या हो?    

किसी समुद्री मछली के उदर में

किसी ब्रह्मचारी के पथभ्रष्ट शुक्राणु का अंश मात्र

किन्तु उसका निषेचन?

अभी बहुत समय बाकी है उसमे  

बहुत.....

हे प्रिये!

बुरा नहीं स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझना

अमरत्व का दिवा-स्वप्न भी बुरा नहीं

किन्तु समझना आवश्यक है

यह जान लेना आवश्यक है कि

अमर होने ने लिए मरण आवश्यक है

मरण हेतु जन्म अति आवश्यक

फिर तुम्हें तो अभी जन्म लेना है

जन्म लेने से पूर्व…

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Posted on December 14, 2016 at 12:42pm — 7 Comments

Comment Wall (80 comments)

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At 5:54pm on September 15, 2018, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० अनुज . आशा है ई स्वस्थ और सानान्न्द होंगे . अवगत कराना है कि मोबाईल पर चार बार असफल कोशिश के बाद  यहाँ सन्देश निवेदित कर रहा हूँ . सूची है कि ओ बी ओ लखनऊ-चैप्टर , प्रतिवर्ष की  भांति इस वर्ष माह नवम्बर 2018 में वार्षिक कार्यक्रम करने हेतु परिकरबद्ध  है और तदनुसार डॉ. शरदिंदु मुकर्जी के संरक्षण में वार्षिक पत्रिका ‘सिसृक्षा’ के अगले अंक का प्रकाशन भी होना है  . इसके लिए  शुभकामना सन्देश के साथ साथ रचनायें  भी  अपेक्षित  हैं  . कृपया अपनी रचना / शुभकामना  सदेश  25 सितम्बर तक srivastavagopalnarain @gmail.com पर अवश्य भेज दें ,  कार्यक्रम तिथि की सूचना शीघ्र ही दी जायेगी . सादर . सानुरोध---------------------- गोपाल नारायण श्रीवास्तव 

At 4:25pm on May 22, 2017, Lajpat Rai Garg said…

यॊगराज जी,
आपकी लघुकथा-अधूरी कथा के पात्र- पंजाब के आतंकवाद की याद ताजा कर गई. सुंदर रचना के लीये बधाई.

At 9:37pm on April 21, 2016, Dr. Ehsan Azmi said…
धन्यवाद सर
At 9:37pm on April 19, 2016, Radha Shrotriya"Asha" said…

Shukriya sir 

At 8:45pm on November 18, 2015, pratibha pande said…

जन्मदिन की ढेरों  शुभकामनाएँ आदरणीय 

At 3:38pm on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
हृदयतल से बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सर, मुझे अपनी सूची में जुड़ने का सुअवसर प्रदान करने के लिए।
At 3:04am on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
प्रतिष्ठित ई-साहित्यिक-पत्रिका "ओपन बुक्स ऑनलाइन" के विख्यात प्रधान संपादक वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय गुरुजी श्री योगराज प्रभाकर जी के जन्मदिन की वर्षगाँठ पर मेरी तरफ से हृदयतल से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ ।
At 12:39am on November 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

परम आदरणीय योगराज प्रभाकर सर, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 10:21am on July 12, 2015, kanta roy said…
सर जी , मेरा कमेंट बाॅक्स नहीं खुल पा रहा है लघुकथा की कक्षा में । क्यों ???
At 4:05pm on January 3, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

नए वर्ष में         नए हर्ष में

सुधियों     का      मकरंद i

जीवन का परिमल बन जाए

महकाये      हर      छंद I

      -गोपाल नारायन  श्रीवास्तव

 
 
 

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