For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

surender insan
Share

Surender insan's Friends

  • मेघा राठी
  • पंकजोम " प्रेम "
  • Sheikh Shahzad Usmani
  • Samar kabeer
  • Saurabh Pandey
  • योगराज प्रभाकर
 

surender insan's Page

Latest Activity

JAWAHAR LAL SINGH commented on surender insan's blog post "एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"
"जख़्म दिल के तो नहीं अब तक भरे है।हां मगर पहले से बेहतर हो गया हूँ। खूबसूरत पंक्तियाँ! बधाई!"
Dec 5
Tasdiq Ahmed Khan commented on surender insan's blog post "एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"
"जनाब सुरेन्द्र साहिब ,सुन्दर ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
Dec 5
Ajay Tiwari commented on surender insan's blog post "एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"
"आदरणीय सुरेन्द्र जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाईयाँ. 'जख़्म दिल के तो नहीं अब तक भरे है' को 'जख्म दिल के भर नहीं याये हैं अब तक' या 'जख्म अब तक भर नहीं याये हैं दिल के ' किया जा सकता है. सादर "
Dec 4
Kalipad Prasad Mandal commented on surender insan's blog post "एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"
"आ सुरेन्द्र जी ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ  है,बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 4
surender insan's blog post was featured

"एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"

2122 2122 2122एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ।मैं समय के साथ बेहतर हो गया हूँ।।कल तलक अपना समझते थे मुझे जो।उनके ख़ातिर आज नश्तर हो गया हूँ।।मैं बयां करता नहीं हूँ दर्द अपना।सब समझते हैं कि पत्थर हो गया हूँ।।ज़िन्दगी में हादसे ऐसे हुए कुछ।मैं जरा सा तल्ख़ तेवर हो गया हूँ।।जख़्म दिल के तो नहीं अब तक भरे है।हां मगर पहले से बेहतर हो गया हूँ।।सुरेन्द्र इंसानमौलिक व अप्रकाशितSee More
Dec 4
Samar kabeer commented on surender insan's blog post "एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । दूसरे शैर के सानी मिसरे में 'उनके'की जगह "उनकी"कर लें 'ख़ातिर' शब्द स्त्रीलिंग है ।"
Dec 2
Manoj kumar shrivastava commented on surender insan's blog post "एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"
"अच्छी रचना, बधाइयाँ।"
Dec 2
Sheikh Shahzad Usmani commented on surender insan's blog post "एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"
"ज़िंदगी में हम जो अनुभव करते हैं, जो हम भोगते या महसूस करते हैं और लोगों के उन पर जो भिन्न नज़रिए या कटाक्ष/व्यंग्य होते हैं, इस रचना में बढ़िया अभिव्यक्त हुए हैं। सादर हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेन्द्र इंसान जी।"
Dec 2
surender insan posted a blog post

"एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"

2122 2122 2122एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ।मैं समय के साथ बेहतर हो गया हूँ।।कल तलक अपना समझते थे मुझे जो।उनके ख़ातिर आज नश्तर हो गया हूँ।।मैं बयां करता नहीं हूँ दर्द अपना।सब समझते हैं कि पत्थर हो गया हूँ।।ज़िन्दगी में हादसे ऐसे हुए कुछ।मैं जरा सा तल्ख़ तेवर हो गया हूँ।।जख़्म दिल के तो नहीं अब तक भरे है।हां मगर पहले से बेहतर हो गया हूँ।।सुरेन्द्र इंसानमौलिक व अप्रकाशितSee More
Dec 2
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-88
"वाह वाह वाह। बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है आदरणीय दिली मुबारक़बाद कबूल करे जी। सादर नमन जी।"
Oct 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-88
"बहुत बढ़िया ग़ज़ल दिनेश भाई ।बधाई स्वीकार करे जी।"
Oct 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-88
"मैं अपने हिस्से की उसको सारी ख़ुशियाँ दे दूँगा यार कभी अपना ग़म लेकर मेरे दर पर आए तो गीत,ग़ज़ल हो या चौपाई ,सबका अपना लहजा है ये सब अच्छे लगते हैं जब सुर में कोई गाए तो यार 'मुज़फ़्फ़र हनफ़ी' सब कुछ बाद में समझा देना तुम "पहले ये बतलादो…"
Oct 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-88
"बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय।"
Oct 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-88
"आदरणीय दिलबाग जी सादर नमन जी। ग़ज़ल का बहुत अच्छा प्रयास हुआ है जी। पागल आवारा ठहरा, दूजा तन्हा तन्हा है दोनों पूरे होंगे, दरिया सागर से मिल जाए तो । वाह वाह वाह आखरी शेर बहुत पसंद आया जी। बहुत बहुत बधाई हो जी।"
Oct 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-88
"वो ख़्वाबों में ही आए पर मुझसे मिलने आए तो। कैसे भी किसी सूरत मुझसे अपना प्यार जताए तो।। हम भी करदें इज़हार मगर रुक जाते हैं सोच यही। पहले वो भी हमको अपने दिल की बात बताए तो।। वार अगर सीने पर हो तो हम सह लेंगे कैसे…"
Oct 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-88
"आदरणीय नीलेश जी सादर नमन जी। बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है जी बधाई स्वीकार करे जी। ग़ज़ल पर सबकी टिप्पणियां भी पढ़ी है। आदरणीय एक बात जानकारी के लिए पूछनी है।। सही शब्द मेरे आगोश होगा या मेरी आगोश जी? या दोनों सही होंगे जी? बारे बताये जी।"
Oct 28

Profile Information

Gender
Male
City State
sirsa (haryana)
Native Place
india
Profession
self work
About me
a simple parson. give respect take respect .always be happy & let others be happy.

Surender insan's Blog

"एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"

2122 2122 2122

एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ।
मैं समय के साथ बेहतर हो गया हूँ।।

कल तलक अपना समझते थे मुझे जो।
उनके ख़ातिर आज नश्तर हो गया हूँ।।

मैं बयां करता नहीं हूँ दर्द अपना।
सब समझते हैं कि पत्थर हो गया हूँ।।

ज़िन्दगी में हादसे ऐसे हुए कुछ।
मैं जरा सा तल्ख़ तेवर हो गया हूँ।।

जख़्म दिल के तो नहीं अब तक भरे है।
हां मगर पहले से बेहतर हो गया हूँ।।


सुरेन्द्र इंसान

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on December 2, 2017 at 1:28pm — 7 Comments

ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"

2122 2122 2122

रोज जीना रोज मरना है सिखाया।
मुफ़लिसी ने पाठ ये अच्छा पढ़ाया।।

दोस्ती का अस्ल मतलब यूँ बताया।
हर कदम उसने सही रस्ता दिखाया।।

बाँटना दुख सुख कभी मुझको न आया।
हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया।।

ख़ुद ब ख़ुद इक दिन इशारे से बुलाया।
प्यार अपना इस तरह उसने जताया।।

वो भरोसा प्यार में करता कभी तो।
क्यो मुझे हर बार उसने आज़माया।।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 14, 2017 at 8:30pm — 8 Comments

ग़ज़ल "जिन्दगी इक अज़ब पहेली है"

2122 1212 22

ख़ुद उलझती है ख़ुद सुलझती है।

जिन्दगी इक अज़ब पहेली है।।



साथ तेरा मुझे मिला जबसे।

जिन्दगी मेरी मुस्कुराती है।।



सब्र करना व भूख से लड़ना।

मुफ़लिसी क्या नहीं सिखाती है।।



मैं बहुत चाहने लगा तुझको।

हर ग़ज़ल मेरी ये बताती है।।



बात कोई चुभे अगर दिल को।

तब ग़ज़ल ख़ुद मुझे बुलाती है।।



दुख घुटन दर्द आह मजबूरी।

ज़िन्दगी की यही कहानी है।।



मुस्कुराती हुई तेरी तस्वीर।

पास मेरे तेरी… Continue

Posted on October 6, 2017 at 2:32pm — 20 Comments

ग़ज़ल " जिंदगी से जी भर गया कब का "

2122 1212 22

ज़िन्दगी,जी तो भर गया कब का।
टूट कर मैं बिखर गया कब का ।।

***
इक मुहब्बत का था नशा मुझको।
वो नशा भी उतर गया कब का।।
***
चाहता था तुझे दिल-ओ-जां से।
वक़्त वो तो गुज़र गया कब का।।

***
देख हालत नशे के मारों की।
ख़ुद-ब-ख़ुद वो सुधर गया कब का।।

***
देख कर छल फ़रेब दुनिया के।
एक "इंसान" मर गया कब का।।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on August 9, 2017 at 5:00pm — 16 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:48pm on July 7, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manoj kumar shrivastava commented on रामबली गुप्ता's blog post कुंडलियाँ-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली गुप्ता जी, सादर नमस्कार, इस सुंदर रचना हेतु आपको कोटिशः बधाइयाॅ।"
7 minutes ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post निःशब्द देशभक्त
"आदरणीय दादा श्री समर कबीर जी, आपके स्नेह से मेरी ऊर्जा बढ़ती है, कोटिशः आभार स्वीकार करें। सादर"
21 minutes ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post निःशब्द देशभक्त
"ऊर्जा बढ़ाने हेतु आपका हृदयतल से आभार आदरणीय सुरेन्द्रनाथ जी, आपका स्नेह बना रहे।"
23 minutes ago
indravidyavachaspatitiwari replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लघुकथा हितैषी" सम्मान
"रवि यादव जी के सम्मान की खबर से प्रसन्नता हुई । उनके कार्यो से उत्साहित होने का अवसर लघुकथा लेखकों…"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on Neelam Upadhyaya's blog post हाइकु
"बहुत ही सुंदर और सामयिक हाइकु । हार्दिक बधाई आदरणीया नीलम उपाध्याय जी ।"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post असलियत (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी। बहुत शान्दार संदेश देती और साथ ही चुटीला कटाक्ष करती लघुकथा।"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post जाड़े के दोहे
"आपकी प्रतिक्रिया से मेरा लेखन सफल हो गया । हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोर जी ।"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on विनय कुमार's blog post पिंजरा--लघुकथा
"हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी। बहुत ही मासूमियत भरी लघुकथा।"
1 hour ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post बापू की जय(लघु कथा)
"आभार आदरणीय विजय जी।"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मृत्यु भोज - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोरे साहब जी।"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मृत्यु भोज - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी। आदाब।आपकी सार्थक टिप्पणी का सदैव इंतज़ार रहता है।"
1 hour ago
विनय कुमार posted a blog post

पिंजरा--लघुकथा

जैसे ही आशिया घर में घुसी उसे चिड़ियों के चहचहाने की आवाज़ आयी. चारो तरफ देखते हुए उसकी नज़र किनारे…See More
2 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service