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Sheikh Shahzad Usmani
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Sheikh Shahzad Usmani commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post "अखबार" पर तीन कुण्डलिया
"बेहतरीन यथार्थपूर्ण, कटाक्षपूर्ण उम्दा कुण्डलिया छंदों के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' साहिब।"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'डस्ट-मून्ज़' (लघुकथा)
"मेरी इस ब्लॉग पोस्ट पर भी उपस्थित होकर पहली टिप्पणी, अनुमोदन और प्रोत्साहन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब समर कबीर  साहिब।"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरी धरोहर - लघुकथा -
"आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' साहिब, आदाब। यह बेहतरीन लघुकथा आदरणीय तेजवीर सिंह साहिब की लिखी हुई है। मेरा नाम शायद ज़ल्दबाज़ी में टाइप हुआ है। कृपया संशोधन कर लीजिएगा अपनी टिप्पणी में।"
Sunday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'डस्ट-मून्ज़' (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to योगराज प्रभाकर's discussion “ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी” अंक-43 में शामिल सभी लघुकथाएँ
"आदाब। आजकल के परिदृश्य और मुद्दों पर विचारोत्तेजक रचनाओं के साथ सम्पन्न लघुकथा गोष्ठी 43 के बेहतरीन संकलन हेतु  योगराज प्रभाकर साहिब तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और आभार आदरणीय मंच संचालक महोदय मुहतरम जनाब  साहिब। काफ़ी इंतज़ार…"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to योगराज प्रभाकर's discussion “ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी”  अंक-42 में शामिल सभी लघुकथाएँ
"आदाब। उम्मीद मुताबिक़ बेहतरीन रचनाओं की सहभागिता और तदनुसार बेहतरीन संकलन प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई और आभार आदरणीय मंच संचालक महोदय श्री योगराज प्रभाकर साहिब।  सभी सहभागी रचनाकारों और टिप्पणीकारों को सादर हार्दिक बधाई। मेरी रचना…"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'मर्म-सौगातें : सोने का देश' [कुछ हाइकु: भाग-2]
"  मेरे ब्लॉग--पटल पर नियमित पाठक रूपेण समय देकर रचनाओं के अनुमोदन और मेरी हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब  बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब। समालोचनाओं और मार्गदर्शन की भी ग़ुज़ारिश है।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ईको-फ्रेंडली प्रकाश-मित्र' [कुछ हाइकु]
" मेरे ब्लॉग--पटल पर नियमित पाठक रूपेण समय देकर रचनाओं के अनुमोदन और मेरी हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब  बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब। समालोचनाओं और  मार्गदर्शन की भी ग़ुज़ारिश है।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ईको-फ्रेंडली प्रकाश-मित्र' [कुछ हाइकु]
"मेरे ब्लॉग--पटल पर नियमित पाठक रूपेण समय देकर रचनाओं के अनुमोदन और मेरी हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब  बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब। समालोचना और मार्गदर्शन की भी  गुज़ारिश है। क्षमा करें शायद अभी…"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ईको-फ्रेंडली प्रकाश-मित्र' [कुछ हाइकु]
"मेरे ब्लॉग--पटल पर नियमित पाठक रूपेण समय देकर रचनाओं के अनुमोदन और मेरी हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब  बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब। समालोचनाऔस और मार्गदर्शन की भी ग़ुज़ारिश है।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"सकारात्मक आशावादी भावपूर्ण सृजन हेतु सादर हार्दिक बधाई आदरणीय दयाराम मेथानी साहिब।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"बेहतरीन कुण्डलिया छंद सृजन हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय सतविंदर कुमार राणा साहिब।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"आदाब। बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय सतविंदर कुमार राणा साहिब।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"आदाब। बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहिब।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"आदाब। अनुमोदन, हौसला अफ़ज़ाई और विचार साझा करने हेतु हार्दिक आभार आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहिब।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"आदाब। बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी ''मुसाफ़िर' साहिब।"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
Shivpuri M.P.
Native Place
Shivpuri
Profession
Radio Announcer
About me
A Private School- teacher, Freelancer and a Casual Radio Announcer. Simlple living, high thinking, fond of reading and writing.

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'डस्ट-मून्ज़' (लघुकथा)

"देखो, हम सेलिब्रिटीज़ की ज़िन्दगी के साथ मीडिया ऐसे ही बर्ताव करता रहता है! टेंशन मत लो!"

"सब कुछ मेंशन हो चुका है! तुम तो सिर्फ़ यह बता दो कि मैं तुम्हारा पहला चांद हूं या दूसरा या फिर तीसरे नंबर का?"

"क्या मतलब?"

"देखो अर्थ! अब ज़्यादा मत इतराओ! मैंने भी तुम्हारी उन दोनों लैलाओं के बयान सुन लिए हैं टेलीविज़न पर!"

"देखो शशि! मुझ पर और तुम स्वयं पर विश्वास रखो! तुम्हीं मेरा पहला और आख़री चांद हो, तुम्हीं इंदु, विधु और तुम्हीं मेरी चंदा हो डार्लिंग!"

"फ़िर वे दोनों…

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Posted on November 8, 2018 at 9:00am — 4 Comments

"आहरण या चीर-हरण" (लघुकथा)

"आज न छोड़ेंगे, सोते हुओं को चेतायेंगे!"

"घोर अन्धकार है महाराज! सुझावों, चेतावनियों, प्रतिबंधों और घोषणाओं को चुनौती देकर पटाखों, आतिशबाज़ियों और वैद्युत-सजावटों से ही इनका राष्ट्र दहक रहा है, चमक रहा है! इतना तो आपके दहन-आयोजन के आडंबर मेंं भी नहीं होता!"

"...'आडंबर'..! मत कहो मेरे नई सदी के 'सक्रीय अस्तित्व' और 'सांकेतिक स्मरण' को 'आडंबर'..! मेरे दशानन की बदलती भूमिकाएं नहीं मालूम क्या तुम्हें?" नई सदी के नवीन दस मुखौटों वाले विशाल शरीर में अपनी आत्मा लिए दीपावली पर भारत-भ्रमण…

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Posted on November 7, 2018 at 9:30am

'राहगुज़र : दिव्यालोक' [कुछ हाइकु: भाग-3]

1-
आलोक पर्व
सेतु ये जन-हेतु
प्रकाश-स्तंभ


2-
राहगुज़र
अंधेरे का निस्तार
प्रकाश-पर्व


3-
अपनापन
दीप से विस्तारित
आत्मकेंद्रित

4-
रूप चौदस
सौंदर्य प्रसाधन
आध्यात्मिकता

5-
दूज सुबोध
भ्रातृ-भगिनि योग
दिव्य-आलोक


(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on November 6, 2018 at 10:09am — 8 Comments

'बिसात पर नूरा-कुश्ती' (लघुकथा)

"हमने कई थी न कि देर है अंधेर नईं! सबके साथ सबके दिन फिर रये! सो अपने भी दिन फिरहें!" नदी किनारे बैठे हुए एक बाबा ने दूसरे साथी बाबाओं से किया अपना दावा दोहराते-सिद्ध करते हुए कहा - "अपने कित्ते बाबा अंतर्राष्ट्रीय हो गये, ध्यान और योग से उद्योग जम गओ, ... एक और बाबा हाईटेक हो गओ!"

"हओ! मंत्री बनत-बनत रह गये; लेकिन अब रस्ता खुल गओ अपने लाने! धंधा-पानी भी संग-संग चलो करहे अब राम-नाम जपने के साथ! दुनिया खों आयुर्वेद को भेद बहुतई अच्छी तरा समझ में आ गओ!"

"लेकिन गुरु, धरम-करम और…

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Posted on November 6, 2018 at 12:11am — 2 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 12:50am on October 5, 2018, mirza javed baig said…

आली जनाब शहज़ाद उस्मानी साहिब आदाब, 

मुझे अपनी दोस्तों की फ़ेहरिस्त में जोड़ने का शुक्रिया 

At 6:43am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय Sheikh Usmani साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 11:59am on April 12, 2018, MD SHAFIQUE ASHRAF said…

जी बहूत  बहुत शुक्रिया जनाब ... नया हूँ .... थोड़ा सीखने का मौका दीजिये  

At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

 
 
 

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