For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Usha
  • Female
  • Meerut, UP
  • India
Share

Usha's Friends

  • Sheikh Shahzad Usmani

Usha's Groups

 

Usha's Page

Latest Activity

Samar kabeer commented on Usha's blog post ऐसी सादगी भरी शोहरत को सलाम। (अतुकांत कविता)
"मुहतरमा ऊषा जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 9, 2019
Samar kabeer commented on Usha's blog post ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)
"मुहतरमा ऊषा जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें । 'हर राह, एक नया तज़ुर्बा' इस पंक्ति में 'तज़ुर्बा' शब्द ग़लत है, सहीह शब्द है "तज्रिब:" 'खुद भी मसर्रत हासिल रहे' इस पंक्ति में वाक्य ठीक नहीं,यूँ…"
Dec 8, 2019
Usha commented on Usha's blog post ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)
"आदरणीय श्री लक्ष्मण जी, कविता आपको पसंद आई, ह्रदय से आपका आभार। सादर।"
Dec 7, 2019
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha's blog post ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)
"आ. ऊषा जी, अच्छी कविता हुई है । हार्दिक बधाई।"
Dec 7, 2019
Usha commented on Usha's blog post उल्फत या कि नफ़रत। (अतुकांत कविता)
"आदरणीय समर कबीर साहब, इतनी कमज़ोर हुई मेरी रचना फिर भी आप बधाई देकर मेरा प्रोत्साहन बढ़ा रहे हैं। आपका हृदय से आभार। (मेरे ख़याल से अभी आपको बहुत अध्यन करना है,मंच पर आई अतुकांत कविताओं का अध्यन करें ।)- जी सर बिल्कुल, आपकी बात मान्य है। ('सुना था…"
Dec 6, 2019
Usha commented on Usha's blog post उल्फत या कि नफ़रत। (अतुकांत कविता)
"आदरणीय महेंद्र साहब, समर कबीर साहब का हर सुझाव मेरे लिए मान्य है। मैं प्रयासरत हूँ कि अच्छा कर सकूँ। इस मंच से ही सीख रही हूँ। यूँ तो मैं अंग्रेज़ी साहित्य की छात्रा व् प्राध्यापिका हूँ किन्तु हिन्दी में लिखने का प्रयास सुखद लगता है। इस मंच की…"
Dec 6, 2019
Usha posted a blog post

ऐसी सादगी भरी शोहरत को सलाम। (अतुकांत कविता)

शोहरतों का हक़दार वही जो,न भूले ज़मीनी-हकीक़त, न आए जिसमें कोई अहम्,न छाए जिसपर बेअदबी का सुरूर,झूठी हसरतों से कोसों दूर,न दिल में कोई फरेब,न किसी से नफ़रत,पलों में अपना बनाने का हुनर,ज़ख्मों को दफ़न कर,सींचे जो ख़ुशियों को,चेहरे पर निराला नूर,आवाज़ में दमदार खनक,अंदर भी रोशन,बाहर भी जगमग रहे,न रखे कोई दंभ,न करे कोई आडम्बर,ऐसी सादगी भरी शोहरत को सलाम।मौलिक व अप्रकाशित।See More
Dec 6, 2019
Usha commented on Usha's blog post उल्फत या कि नफ़रत। (अतुकांत कविता)
"आदरणीय समर कबीर साहब, आपके सभी सुझाव सर मेरे लिए सुखद हैं। इसी प्रकार सीखकर बेहतर कर पाऊँगी। अभी सचमुच मुझे बहुत सीखना है। १. कहने का प्रयास था कि खामोश रह जाने पर मसले ख़ुद ही ख़त्म हो जाते हैं और प्रेम का प्रदर्शन हो जाता है। एक तरह से नाराज़गी ख़त्म।…"
Dec 6, 2019
Usha commented on Usha's blog post क्षणिकाएं।
"आदरणीय महेन्द्र सर, आपको मेरी क्षणिकाएं पसंद आयी, प्रसन्नता हुई। साभार।"
Dec 4, 2019
Mahendra Kumar commented on Usha's blog post उल्फत या कि नफ़रत। (अतुकांत कविता)
"आदरणीया उषा जी, अतुकान्त का अच्छा प्रयास है। कृपया आदरणीय समर कबीर सर की बातों का संज्ञान लें। हार्दिक बधाई। सादर।"
Dec 4, 2019
Mahendra Kumar commented on Usha's blog post क्षणिकाएं।
"अच्छी क्षणिकाएँ हैं आदरणीया उषा जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Dec 4, 2019
Usha commented on Usha's blog post ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)
"आदरणीय विजय शंकर सर, कविता आपको पसंद आयी, ह्रदय से आभार। सादर।"
Dec 3, 2019
Dr. Vijai Shanker commented on Usha's blog post ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)
"आदरणीय सुश्री डॉo उषा जी , इस दार्शनिक अतुकांत प्रस्तुति पर बधाई , सादर।"
Dec 3, 2019
Usha commented on Usha's blog post ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)
"आदरणीय प्रदीप सर, आपको कविता पसंद आई। आभार ।सादर ।"
Dec 2, 2019
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Usha's blog post ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)
"बेहतरीन, ज़िंदगी का फलसफा बयाँ करती कविता बधाई"
Dec 2, 2019
Usha posted a blog post

ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)

ख़ूबसूरत मंच है, ज़िन्दगी,हर राह, एक नया तज़ुर्बा,ख़ुदा की नेमतों से,मिला ये मौका हमें,कि बन एक उम्दा कलाकार,अदा कर सकें अपना किरदार,कर लें वह सब,जो भी हो जाए मुमकिन,खुद भी मसर्रत हासिल रहे,औरों के चेहरे की ख़ुशी भी कायम रहे,और न रहे रुख़सती पर यह मलाल,कि हम क्या कुछ कर सकते थे,चूक गए, और वक़्त मिल जाता,तो ये कर लेते, कि वो कर लेते,इस मंच को जी लें हम भरपूर,और हो जाएँ फना फिर सुकून सेएक ख़ूबसूरत मुस्कुराहट के साथ।मौलिक और अप्रकाशित।See More
Dec 2, 2019

Profile Information

Gender
Other
City State
Meerut
Native Place
Firozabad
Profession
Assistant Professor - English
About me
Apart from teaching English literature, I am fond of training students for personality development skills. Love to compose short stories and poems in Hindi and English both languages. I bag three books to my account out of which, the latest one is a fiction "Her Life... His Ways...!!!" based upon true incidents.

Usha's Blog

ऐसी सादगी भरी शोहरत को सलाम। (अतुकांत कविता)

शोहरतों का हक़दार वही जो,

न भूले ज़मीनी-हकीक़त, 

न आए जिसमें कोई अहम्,

न छाए जिसपर बेअदबी का सुरूर,

झूठी हसरतों से कोसों दूर,

न दिल में कोई फरेब,

न किसी से नफ़रत,

पलों में अपना बनाने का हुनर,

ज़ख्मों को दफ़न कर,

सींचे जो ख़ुशियों को,

चेहरे पर निराला नूर,

आवाज़ में दमदार खनक,

अंदर भी…

Continue

Posted on December 6, 2019 at 9:09am — 1 Comment

ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)

ख़ूबसूरत मंच है, ज़िन्दगी,

हर राह, एक नया तज़ुर्बा,

ख़ुदा की नेमतों से,

मिला ये मौका हमें,

कि बन एक उम्दा कलाकार,

अदा कर सकें अपना किरदार,

कर लें वह सब,

जो भी हो जाए मुमकिन,

खुद भी मसर्रत हासिल रहे,

औरों के चेहरे की ख़ुशी भी कायम रहे,

और न रहे रुख़सती पर यह मलाल,

कि हम क्या कुछ कर सकते थे,

चूक गए, और वक़्त मिल जाता,

तो ये कर लेते, कि वो कर लेते,

इस मंच को जी लें हम भरपूर,

और हो जाएँ फना फिर सुकून से

एक ख़ूबसूरत मुस्कुराहट के…

Continue

Posted on December 2, 2019 at 11:27am — 7 Comments

उल्फत या कि नफ़रत। (अतुकांत कविता)

सुना था मसले,
दो तरफा हुआ करते हैं,
पर हैरानगी का आलम तब हुआ कि,
जब वे अकेले ही ख़फा हो, बैठ गए।
हमने भी यह सोच कर,
ज़िक्र न छेड़ा कि,
ख़ामोशी कई मर्तबा,
लौटा ही लाती है, मुहब्बते-इज़हार,
पर अफसोस कि,
पासा ही पलट गया,
अपना तो मजमा लग गया,
और वे जो उल्फ़तों के किस्से गढ़ा करते थे,
नफ़रतों की मीनारें खड़ी करते चले गए।

मौलिक व् अप्रकाशित।

Posted on November 26, 2019 at 9:00am — 14 Comments

क्षणिकाएं।

क्षणिकाएं।



इतने बड़े जहां में,

क्यों तू ही नहीं छिप सका,

ऐसा क्या खास तुझमें हुआ किया,

कि, हर नए ज़ख्म पर,

नाम तेरा ही छपा पाया।............. 1



सुना-सुना सा लगता है,

वो सदा है उसके वास्ते,

जीया-जीया सा सच है,

वो खुद ही है खुद के वास्ते,

हाँ, और कोई नहीं, कोई नहीं।............. 2



कहते…

Continue

Posted on November 24, 2019 at 10:18am — 14 Comments

Comment Wall (3 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:50pm on November 27, 2019, प्रदीप देवीशरण भट्ट said…

कुछ याद आ गया

जीस्त दो हिस्सों में मेरी बंट गई

उम्र जीने की मेरी कुछ घट गई

फूल यादों के दबे जिन पन्नों में

खूबसूरत वो किताबें फट गई

At 12:57pm on September 7, 2019, Usha said…

आदरणीय विजय शंकर सर, मेरी कविता पर बधाई के लिए धन्यवाद। सादर।

At 12:56pm on September 7, 2019, Usha said…

आदरणीय समर कबीर सर, प्रोत्साहन के लिए शुक्रिया। जी, भविष्य में अवश्य ध्यान रखूंगी। अभी अतुकांत कवितायेँ ही लिखने का प्रयास कर प् रही हूँ। सादर।

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीय सतविन्दर कुमार राणा जी, बहुत सुंदर गज़ल कही है आपने। सुंदर सृजन के लिए बधाई।"
15 minutes ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आभार आदरणीय दयाराम जी।"
18 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीय सतिवन्द्र कुमार राणा जी,  प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार।"
18 minutes ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीय मैठाणी जी, प्रदत्त विषय पर अच्छी गजल कही है। हार्दिक बधाई"
40 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब, ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। "
46 minutes ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post क्यों ना जड़ पर चोट ?
" सादर प्रणाम, सुरेंद्र नाथ सिंह जी, उत्साह बढ़ाती टिप्पणी हेतु बहुत धन्यवाद"
2 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि  जी।बेहतरीन गज़ल। मेरा ख़त पढ़के बहुत ख़ामोश है वो…"
3 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गया (ग़ज़ल)
"हार्दिक बधाई आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' जी।बेहतरीन गज़ल। लगता है उसकी आंख में थोड़ा मलाल…"
3 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तेरे ख्वाहिशों के शह्र में- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"हार्दिक बधाई आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी।बेहतरीन गज़ल। चाहत न कोई…"
3 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप जी।बेहतरीन गज़ल। सितारों की लिए बारात सज के…"
3 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post विकास - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  जी।"
3 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"ग़ज़ल वक्त पर हर शख्स की दरकार है रोटी जिंदगी है जिंदगी से प्यार है रोटी। जुस्तजू में इसकी बीतें…"
4 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service