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प्रदीप देवीशरण भट्ट
  • Male
  • हैदराबाद (तेलांगाना)
  • India
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प्रदीप देवीशरण भट्ट's Friends

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प्रदीप देवीशरण भट्ट's Page

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प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मन है कि मानता ही नहीँ ....
"शुक्रिया महेंद्र जी, कभी कभी ऐसी गलतियाँ हो जाती हैं"
8 hours ago
प्रदीप देवीशरण भट्ट posted a blog post

प्रकृति मेरी मित्र

प्रकृति हम सबकी माता हैसोच, समझ,सुन मेरे लालकभी अनादर इसका मत करनावरना बन जाएगी काल गिरना उठना और चल देनातू स्वंय को रखना सदा संभालइतना भी आसाँ ना समझोबनना सबके लिए मिसाल सत्य व्रत का पालन करनाकभी किसी ना तू डरनाविपदाओं को मित्र बनाकरबस थामे रहना ‘दीप’ मशाल                                                              मौलिक व अप्रकाशित -प्रदीप देवीशरण भट्ट - हैदराबाद    03.12.2019 See More
15 hours ago
Mahendra Kumar commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post उर उमंग से भर गया
"अच्छी रचना है आदरणीय प्रदीप जी। हार्दिक बधाई। सादर।"
yesterday
Mahendra Kumar commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post यादें
"हार्दिक बधाई आदरणीय प्रदीप जी, अच्छी रचना हुई है।  //वो आकाश में बिजली का वो कौंधना// इस पंक्ति में एक "वो" अतिरिक्त है। सादर।"
yesterday
Mahendra Kumar commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मन है कि मानता ही नहीँ ....
"अच्छी रचना है आदरणीय प्रदीप जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
yesterday
Dr. Vijai Shanker and प्रदीप देवीशरण भट्ट are now friends
Monday
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Chhaya Shukla's blog post चाँद तारे बना टाँकती रह गई
"प्यास  कैसे बुझे / बाँचती रह गई बहुत खूब छाया जी"
Monday
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post उर उमंग से भर गया
"शुक्रिया समर जी"
Monday
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"बहुत खूब निलेश जी, गज़ल में से अच्छा खासा नूर टपक रहा है "
Monday
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Usha's blog post ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)
"बेहतरीन, ज़िंदगी का फलसफा बयाँ करती कविता बधाई"
Monday
Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post उर उमंग से भर गया
"ननब प्रदीप जी आदाब,अच्छी प्रस्तुति,बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post यादें
"जनाब प्रदीप जी आदाब,अच्छी प्रस्तुति,बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
vijay nikore commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मन है कि मानता ही नहीँ ....
"अच्छी रचना के लिए बधाई, आदरणीय देवीशरण जी।"
Saturday
प्रदीप देवीशरण भट्ट posted a blog post

उर उमंग से भर गया

उर उमंग से भर गयामैं छम छम नाचूँ आजख़बर सखी ने दी मुझेमेरे पिया खड़े हैं द्वार मन प्रसन्न इस बात सेनित गाए ख़ुशी के गीतमिलने क़ी बेताबी उर मेंप्रतिदिन औऱ बढ़ाए प्रीत द्वार तक रहे सुबह से नयनाऔऱ छत पे कागा का शोरस्वाती क़ी बूँदों क़ी प्रतीक्षाकरता रहता है जैसे चकोर         -प्रदीप देवीशरण भट्ट -26.11.2019, हैदराबाद(9867678909)मौलिक व अप्रकाशितSee More
Saturday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मन है कि मानता ही नहीँ ....
"आद0 प्रदीप देवीशरण भट्ट जी सादर अभिवादन। बढ़िया प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये।"
Saturday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post यादें
"आद0 प्रदीप जी सादर अभिवादन। इस खूबसूरत प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये।सादर"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
हैदराबाद
Native Place
रुडकी (उत्तराखंड)
Profession
Government
About me
Superintendent in KVIC, हैदराबाद

प्रदीप देवीशरण भट्ट's Blog

प्रकृति मेरी मित्र

प्रकृति हम सबकी माता है

सोच, समझ,सुन मेरे लाल

कभी अनादर इसका मत करना

वरना बन जाएगी काल

 

गिरना उठना और चल देना

तू स्वंय को रखना सदा संभाल

इतना भी आसाँ ना समझो

बनना सबके लिए मिसाल

 

सत्य व्रत का पालन करना

कभी किसी ना तू डरना

विपदाओं को मित्र बनाकर

बस थामे रहना ‘दीपमशाल

                                                              

मौलिक…

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Posted on December 3, 2019 at 12:30pm

उर उमंग से भर गया

उर उमंग से भर गया

मैं छम छम नाचूँ आज

ख़बर सखी ने दी मुझे

मेरे पिया खड़े हैं द्वार

 

मन प्रसन्न इस बात से

नित गाए ख़ुशी के गीत

मिलने क़ी बेताबी उर में

प्रतिदिन औऱ बढ़ाए प्रीत

 

द्वार तक रहे सुबह से नयना

औऱ छत पे कागा का शोर

स्वाती क़ी बूँदों क़ी प्रतीक्षा

करता रहता है जैसे चकोर

 

     

 

  -प्रदीप देवीशरण भट्ट -26.11.2019, हैदराबाद(9867678909)

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on November 28, 2019 at 6:00pm — 3 Comments

यादें

अब सिर्फ़ तुम्हारी यादें ही तो हैं

जिन्हें संजोकर रक्खा हुअ है मैंने।

अपनी धुँधली होती हुई स्मृतियों में,

इन गुलाब के फूलों क़ी पंखुड़ियों में॥

 

मैं अभी तक भी कुछ नहीं भूला हूँ,

लैंपपोस्ट क़ी वो मद्दिम रौशनी में।

मेरे कांधे तुम्हारा धीरे से सर रखना,

औऱ फिर घंटो तलक अपलक निहारना॥

 

वो आकाश में बिजली का वो कौंधना,

तुम्हारा घबराकर मुझसे लिपट जाना।

मुझे अहसास कराता था सदियों का,

उन पलों का कुछ देर यूँ ही…

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Posted on November 27, 2019 at 6:30pm — 4 Comments

मन है कि मानता ही नहीँ ....

काश मैं भी उड़ सकती

खुले विस्तृत गगन में

बादलों को चीरते हुए 

और छू सकती आकाश

                                                                   

पर ये संभव ही कहाँ है …

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Posted on November 26, 2019 at 1:00pm — 14 Comments

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At 7:12am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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