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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post होश की मैं पैमाइश हूँ:........ग़ज़ल, पंकज मिश्र..........इस्लाह की विनती के साथ
"अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब, सबसे पहले आपकी ग़ज़ल के क़वाफ़ी के अर्थ देखते हैं :- "ख़्वागीश"--आरज़ू,तमन्ना "पैमाइश"---नाप,ख़ुसूसन ज़मीन का नाप "काविश"---तलाश "नाज़िश"---फ़ख़्र(गर्व),घमण्ड,मुहावरा-नाज़ होना,फ़ख़्र(गर्व)…"
4 hours ago
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- नेकियाँ तो आपकी सारी भुला दी जाएँगी / दिनेश कुमार
"जनाब सौरभ भाई आदाब,मिज़ाज बख़ैर । अब आये हैं तो ब्लॉग पर जनाब श्रीपूनम जौधपुरी साहिब का नवगीत भी देख लें मुझे उस पर आपकी टिप्पणी दरकार है,कृपया कष्ट करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल
"प्रयासरत रहें । इस मंच पर हर विधा का स्वागत है ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "हिन्दी दिवस पर विशेष" हिन्दी ग़ज़ल
"जनाब अशोक कुमार रक्ताले जी आदाब,ग़ज़ल आपको पसंद आई लिखना सार्थक हुआ,ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और इस पर आपकी मंज़ूम प्रतिक्रया पाकर मुग्ध हूँ, और आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार भी । जवाब देर से देने के लिए माज़रत चाहता हूं ।"
yesterday
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल
"जनाब क़मर जौनपुरी साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
yesterday
Samar kabeer commented on santosh khirwadkar's blog post मिट गए नक़्श सभी....संतोष
"जनाब संतोष जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
yesterday
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post पहल - लघुकथा -
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post होश की मैं पैमाइश हूँ:........ग़ज़ल, पंकज मिश्र..........इस्लाह की विनती के साथ
"आपकी ग़ज़ल पर पुनः आता हूँ,समय मिलते ही ।"
yesterday
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post चन्द मुक्तक
"जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,मुक्तक का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । शिल्प और गेयता पर अभी आपको समय देना होगा ।"
yesterday
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६८
"'   चंद लम्हों में उसके हाल बदल जाते थे मेरी नज़दीक जो आता था अदू दीवाना' इस शेर का ऊला मिसरा लय में नहीं,और सानी में 'मेरी' को "मेरे" करना उचित होगा,शैर यूँ कर सकते हैं:- 'चन्द लम्हों में ही हालात बदल जाते…"
yesterday
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६८
""  जब भी होता है मेरे क़ुर्ब में तू दीवाना मेरी नस नस में भी दौड़े है लहू दीवाना" सानी मिसरा यूँ कर लें तो गेयता बढ़ जाएगी:- "दौड़ता है मेरी नस नस में लहू दीवाना" '  एक हम ही नहीं बस्ती में परस्तार हुए' इस…"
yesterday
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६८
"जनाब क़मर जौनपुरी साहिब आदाब,ओबीओ मंच पर आपका स्वागत है । "बू" शब्द हिन्दी और उर्दू में स्त्रीलिंग है ।"
yesterday
Samar kabeer commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post एक ग़ज़ल - शिज्जु शकूर
"जनाब शिज्जु शकूर साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Monday
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post किसी के इश्क में बिस्मिल हमारी बेबसी कब तक(गजल)
"जनाब सतविन्द्र कुमार राणा जी आदाब, तरही ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन समय चाहता है,बधाई स्वीकार करें । 'किसी के इश्क में बिस्मिल हमारी बेबसी कब तक' इस मिसरे को यूँ कर लें :- 'रहेगी इश्क़ में बिस्मिल हमारी बेबसी कब…"
Monday
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६८
"जनाब राज़ नवादवी साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । ' ऐसे होता है मेरे क़ुर्ब में तू दीवाना जैसे होती है किसी फूल पे बू दीवाना' मतले के सानी मिस्रेरे में "बू" शब्द स्त्रीलिंग है, देखियेगा । तू बता किस जगह मस्जिद…"
Monday
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post "अखबार" पर तीन कुण्डलिया
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,अख़बार पर व्यंग करते अच्छे कुण्डलिया छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । ' पढ़के खबरें पढ़कर रोज ही'--? ' खबर सब हमें रुलाती'--इस पंक्ति में 'सब' शब्द लिया तो…"
Monday

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"तरही ग़ज़ल नम्बर 4

नोट:-

तरही मुशायरा अंक-100 में 87 ग़ज़लें पोस्ट हुईं,मेरी इस ग़ज़ल में जो क़वाफ़ी इस्तेमाल हुए हैं वो बिल्कुल नये हैं ।

पहले सिल पर घिसा गया है मुझे

फिर जबीं पर मला गया है मुझे

जाल हूँ इक सियासी लीडर का

नफ़रतों से बुना गया है मुझे

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे

कहदो तक़दीर से बखेरे नहीं

करके वो एक जा गया है…

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Posted on October 24, 2018 at 5:54pm — 38 Comments

"हिन्दी दिवस पर विशेष" हिन्दी ग़ज़ल

कितनी प्यारी ये मनभावन हिन्दी है

भारत की वैचारिक धड़कन हिन्दी है

जो लिखता हूँ हिन्दी में ही लिखता हूँ

मेरी ख़ुशियों का घर आँगन हिन्दी है

रफ़ी, लता,मन्नाडे को तुम सुन लेना

इन सबकी भाषा और गायन हिन्दी है

भारत में कितनी हैं भाषाएँ लेकिन

सारी भाषाओँ का यौवन हिन्दी है

पहले मैं अक्सर उर्दू में लिखता था

अब तो मेरा सारा लेखन हिन्दी है

मुझको तो लगती है ये भाषा…

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Posted on September 13, 2018 at 11:39pm — 31 Comments

"बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"

ग़ज़ल

बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ

मैं नफ़रतों का ही क़िस्सा तमाम करता चलूँ

अब आख़िरत का भी कुछ इन्तिज़ाम करता चलूँ

दिल-ओ-ज़मीर को अपने मैं राम करता चलूँ

जहाँ जहाँ से भी गुज़रूँ ये दिल कहे मेरा

तेरा ही ज़िक्र फ़क़त सुब्ह-ओ-शाम करता चलूँ

अमीर हो कि वो मुफ़लिस,बड़ा हो या छोटा

मिले जो राह में उसको सलाम करता चलूँ

गुज़रता है जो परेशान मुझको करता है

तेरे ख़याल से…

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Posted on September 1, 2018 at 3:12pm — 40 Comments

जनाब निलेश 'नूर' की ज़मीन में ग़ज़ल नम्बर 2 (कुछ नये क़वाफ़ी के साथ)

मैं तो उसकी पे ब पे अंगड़ाइयाँ गिनता रहा

और वो दामन की मेरे धज्जियाँ गिनता रहा

सौ गुनह होते ही पूरे मारना था इसलिये

मैं भी इक शिशुपाल की बदकारियाँ गिनता रहा

मेरे सीने पर सितम की मश्क़ वो करते रहे

और मैं मासूम दिल की किर्चियाँ गिनता रहा

काम जब कुछ भी नहीं था ओबीओ पर दोस्तो

'नूर' साहिब की मैं कूड़ेदानियाँ गिनता रहा

मेरी बर्बादी पे ख़ुश होकर अज़ीज़ों ने "समर"

कितनी…

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Posted on July 11, 2018 at 10:00am — 31 Comments

Comment Wall (16 comments)

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At 11:39pm on August 19, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय प्रणाम!
एवम् शुक्रिया मैं निरंतर सुधर करूँगा
At 6:09pm on August 7, 2018, Kishorekant said…

आपका आभार आदरणीय समर कबीर जी । आप की सुचना के अनुसार अभ्यास शुरु कर दिया है । आशा है आगे भी आपका मार्गदर्शन मिलता रहेगा ।भूलों के लिये दरगुजर करें ।

At 8:05pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय
समर कबीर महोदय प्रणाम
आपका आदेश सर माथे पर
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 5:21pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर जी
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

 
 
 

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