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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
"नीलम जी, ये तेजवीर सिंह जी की लघुकथा नहीं,विनय जी की ग़ज़ल है, देखिये ।"
2 hours ago
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post घाव समय के
"जनाब नरेन्द्र सिंह चौहान साहिब आदाब,पहले भी आपसे निवेदन किया था,आज फिर से निवेदन करता हूँ कि इतनी छोटी(तीन शब्दों की)टिप्पणी ओबीओ मंच की परिपाटी नहीं है,ये सीखने सिखाने का मंच है, कृपया मंच की गरिमा का कुछ तो ख़याल करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post रिलेशनशिप (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,आपको ग़ज़ल कहते देख प्रसन्नता हुई,अच्छा प्रयास हुआ है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । अंतिम दो अशआर में क़ाफ़िया दोष है,देखियेगा ।"
yesterday
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post सम्मान - लघुकथा –
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Arpana Sharma's blog post नीरज जी को श्रृद्धाजंली - अर्पणा शर्मा भोपाल
"मुहतरमा अर्पणा शर्मा जी आदाब, डॉ.गोपालदास'नीरज' को अच्छे शब्दों में श्रद्धांजलि पेश की आपने,वाक़ई वो गीतों के बादशाह थे,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post तुम जो होते तो हम भी संभल गए होते। ये हालात हैं, कुछ तो बदल गए होते॥
"जनाब सुधेन्दु ओझा साहिब आदाब,बह्र,शिल्प,व्याकरण की दृष्टि से ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,इस प्रयास पर बधाई आपको ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post जनता जस-की-तस! (छंदमुक्त/अतुकांत कविता)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,उम्दा अतुकान्त कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Arpana Sharma's blog post "धरा की पाती"/ कविता-अर्पणा शर्मा, भोपाल
"मुहतरमा अर्पणा शर्मा जी आदाब,बहुत सुंदर कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post तसल्ली  (लघुकथा)
"जनाब मुज़फ़्फ़र इक़बाल साहिब आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 4थे शैर में 'पकौड़ा' को " पकौड़े" कर लें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Neelam Upadhyaya's blog post कुछ हाइकू
"मुहतरमा नीलम उपाध्याय जी आदाब,अच्छे हाइकू हुए,बधाई स्वीकार करें,जनाब आरिफ़ भाई की बातों का संज्ञान लें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post घाव समय के
"अशआर आपको पसंद आये लिखना सार्थक हुआ,बहुत बहुत शुक्रिया प्रिय भाई विजय निकोर जी ।"
yesterday
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल - ढूँढ रहा हूँ
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,मात्रिक बह्र(बह्र-ए-मीर) में अच्छी ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । मतले का ऊला मिसरा यूँ कर लें तो ऊला और सानी में 'कहाँ'शब्द की तकरार ख़त्म हो जायेगी:- 'सिले थे माँ ने बड़े जतन से,वही…"
Friday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिका - तूफ़ान ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,वाह बहुत ख़ूब, बहुत उम्दा क्षणिका हुई,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"विनम्र श्रद्धांजलि,अदब का एक और सितारा डूब गया ।"
Friday

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Samar kabeer's Blog

जनाब निलेश 'नूर' की ज़मीन में ग़ज़ल नम्बर 2 (कुछ नये क़वाफ़ी के साथ)

मैं तो उसकी पे ब पे अंगड़ाइयाँ गिनता रहा

और वो दामन की मेरे धज्जियाँ गिनता रहा

सौ गुनह होते ही पूरे मारना था इसलिये

मैं भी इक शिशुपाल की बदकारियाँ गिनता रहा

मेरे सीने पर सितम की मश्क़ वो करते रहे

और मैं मासूम दिल की किर्चियाँ गिनता रहा

काम जब कुछ भी नहीं था ओबीओ पर दोस्तो

'नूर' साहिब की मैं कूड़ेदानियाँ गिनता रहा

मेरी बर्बादी पे ख़ुश होकर अज़ीज़ों ने "समर"

कितनी…

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Posted on July 11, 2018 at 10:00am — 27 Comments

'ग़ज़ल कहने जो बैठोगे तो नानी याद आएगी'

(चौथे शैर में तक़ाबल-ए-रदीफ़ नज़र अंदाज़ करे)

नसीहत जो बुज़ुर्गों की न मानी याद आएगी

हमें ता उम्र उनकी सरगरानी याद आएगी

मियाँ मश्क़-ए-सुख़न कर लो नहीं ये खेल बच्चों का

ग़ज़ल कहने जो बैठोगे तो नानी याद आएगी

ज़माने भर की आसाइश के जब सामाँ बहम होंगे

तुझे माँ-बाप की क्या जाँ फ़िशानी याद आएगी

जुड़ी होंगी मज़ालिम की बहुत सी दास्तानें भी

हवेली गाँव की जब ख़ानदानी याद…

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Posted on May 7, 2018 at 12:00pm — 34 Comments

'निलेश जी की ज़मीन में एक ग़ज़ल'

ज़िन्दगी में जो हुआ सूद-ओ-ज़ियाँ गिनता रहा

बैठ कर मैं आज सब नाक़ामियाँ गिनता रहा

बाग़बाँ को और कोई काम गुलशन में न था

फूल पर मंडराने वाली तितलियाँ गिनता रहा

और क्या करता बताओ इन्तिज़ार-ए-यार में

तैरती तालाब में मुर्ग़ाबियाँ गिनता रहा

रोकता कैसे मैं उनको नातवानी थी बहुत

बे अदब लोगों की बस गुस्ताख़ियाँ गिनता रहा

लोग भूके मर रहे थे और यारो उस…

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Posted on May 1, 2018 at 10:49am — 18 Comments

एक ताज़ा ग़ज़ल

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फेलुन/फ़इलुन

इसलिये आने से कतराते हैं ईमाँ वाले

तेरे कूचे में उधम करते हैं शैताँ वाले

.

ये किसी ख़तरे की आमद का इशारा तो नहीं

ख़्वाब क्यों मुझको दिखाता है वो तूफ़ाँ वाले

.

और सब कुछ यहाँ तब्दील हुआ है लेकिन

घर में दस्तूर हैं अब तक वही अम्माँ वाले

.

बाग़बाँ ने वो सितम तोड़े हैं इनपर देखो

कितने सहमे हुए रहते हैं गुलिस्ताँ वाले

.

रह्म करना किसी बिस्मिल पे गवारा ही…

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Posted on April 6, 2018 at 3:00pm — 28 Comments

Comment Wall (14 comments)

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At 8:05pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय
समर कबीर महोदय प्रणाम
आपका आदेश सर माथे पर
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 5:21pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर जी
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

At 9:46pm on February 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय Samar kabeer जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:06am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

janab samar kabeer sahab aadab,    hosla afzayi ke liye shukriya ,  1. ar ka matlab hai agar...aur 2.chhar ka matlab hai  ..khayal.

 
 
 

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"हार्दिक आभार आदरणीय नीलम उपाध्याय जी।"
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"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी, नमस्कार ।  अच्छी लघुकथा हुई है।  प्रस्तुति के लिए बधाई…"
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Shyam Narain Verma commented on Arpana Sharma's blog post "धरा की पाती"/ कविता-अर्पणा शर्मा, भोपाल
""क्या बात है ..... बहुत खूब ... बधाई आप को " .सादर "
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Neelam Upadhyaya commented on विनय कुमार's blog post सीख लिया है- एक ग़ज़ल
" आदरणीय तेजवीर सिंह जी, अच्छी सन्देश परक लघुकथा की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें । "
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