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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on नादिर ख़ान's blog post डुबो देगी हमें ये बेईमानी
"जनाब नादिर ख़ान साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । पहले मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,देखियेग । छटे शैर के ऊला में सही शब्द है "अस्ल",और सानी मिसरे में आप उलट बात कह रहे हैं,सियासत का तो काम ही…"
Feb 5
Samar kabeer commented on Rakshita Singh's blog post हाल-ए- दिल
"मोहतरमा रक्षिता सिंह जी आदाब,बहुत उम्दा रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'कितनी मुश्किल आती हैं' इस पंक्ति में 'मुश्किल'शब्द एक वचन है, इसलिये 'हैं' को "है" करना उचित होगा । 20वीं पंक्ति में…"
Feb 4
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post 1. खोये स्वप्न .../2. मन्नत   ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी रचना है,बधाई स्वीकार करें । ये 'मन्नत का तारा' क्या है?"
Feb 4
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post जीने की आरज़ू तो है सब को खुशी के साथ
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Feb 4
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post गेटप्रेम (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 4
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आज मौसम बड़ा आशिकाना रहा
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन कई अशआर में रदीफ़ से इंसाफ़ नहीं हो सका, इसे जांचने का बहतर तरीक़ा ये है कि अपनी कही हुई पंक्ति को गद्ध में पढ़के देख लें ।"
Feb 4
Samar kabeer commented on Ajay Kumar Sharma's blog post कैसे करे व्यंग रे...
"जनाब अजय जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 4
Samar kabeer commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"जनाब डॉ.चन्द्रेश छतलानी जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 4
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post अमर हो गए ...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत बढ़िया कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 4
Samar kabeer commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post एक व्यंग रचना
"जनाब कालीपद प्रसाद मण्डल जी आदाब,ये रचना अभी बहुत समय चाहती है ।"
Feb 4
Samar kabeer commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2212 2212 212
"जनाब दंडपानी जी आदाब,ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,इस विधा के बारे में अभी आपको बहुत अध्यन करना होगा,ओबीओ पटल पर इस विधा को सिखाने के लिये "ग़ज़ल की कक्षा"की सुविधा मौजूद है, उसका लाभ लें ।"
Feb 4
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post विरह गीत
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,गीत का प्रयास अच्छा हुआ है,बधाई स्वीकार करें । गीत की पहली पंक्ति में सखी से सम्बोधन है और बाद की पंक्तियों में साजन से,इसलिये पहली पंक्ति को यूँ कर सकते हैं :- 'साजन मेरे मुझे बताओ, कैसे दीप जलाऊँ' 5वीं…"
Feb 4
Samar kabeer commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...गीत//अलका 'कृष्णांशी'
"आपने जो मिसरे लिखे हैं वो लय में नहीं हैं,इन मिसरों को यूँ कर सकती हैं:- 'हमारी उमीदें घटाने लगी है' 'हमें शर्म ख़ुद से ही आने लगी है'"
Feb 4
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post भीड़तंत्र - लघुकथा
"जी,कुछ दिनों से तबीअत ठीक नहीं,कुछ बहतर होते ही पटल पर हाज़िर हो गया ।"
Feb 4
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post भीड़तंत्र - लघुकथा
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 4
Samar kabeer commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...गीत//अलका 'कृष्णांशी'
"अलका जी आदाब,ग़ज़ल नुमा गीत का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'उम्मीदें अमन की घटाने लगी है' इस मिसरे में सही शब्द है "अम्न" 'के इंसानियत शर्म खाने लगी है' इस मिसरे में 'शर्म खाने' का प्रयोग सही नहीं…"
Feb 4

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Samar kabeer's Blog

तरही ग़ज़ल नम्बर 2,कुछ नये क़वाफ़ी के साथ ।

फाइलातून फ़ाइलातुन फाइलुन

दुश्मन-ए-जाँ लरज़ह  बर अंदाम है

जब तलक ज़िन्दा हमारा नाम है

सोचने की क़ुव्वतें मफ़लूज हैं

मुल्क में सबको हुआ सरसाम है

चूस लेती है बदन का ये लहू

शाइरी भी कितनी ख़ूँँ  आशाम है

उसको छूने से भी मुझको डर लगे

इस क़दर नाज़ुक वो गुल अंदाम है

ये तो दीवानों की बस्ती है "समर"

तुम यहां क्यों आ गए क्या काम…

Continue

Posted on December 28, 2017 at 11:12am — 27 Comments

'आपके पास है जवाब कोई'

फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़इलुन/फेलुन





मेरे ग़म का है सद्दे बाब कोई

आपके पास है जवाब कोई



सुनके मेरी ग़ज़ल कहा उसने

अपने फ़न में है कामयाब कोई



उतनी भड़केगी आतिश-ए-उल्फ़त

जितना बरतेगा इज्तिनाब कोई



सबसे उनको छुपा के रखता हूँ

तोड़ डाले न मेरे ख़्वाब कोई



पास है जिनके दौलत-ए-ईमाँ

उन पर आता नहीं अज़ाब कोई



कोई उस पर यक़ी नहीं करता

अच्छा बन जाए जब ख़राब कोई



आमने सामने हों जब दोनों

उनको देखे कि माहताब… Continue

Posted on November 12, 2017 at 3:06pm — 30 Comments

"अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा"

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन



अगर वो मुफ़लिसी को रौनक़-ए-बाज़ार कर देगा

कई महरुमियों को बर सर-ए-पैकार कर देगा



सभी ने कर लिया इक़रार, लेकिन जानता है वो

अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा



किताबों में लिखा है उसको जन्नत की बशारत है

वफ़ा की राह में क़ुर्बान जो घर बार कर देगा



मिलाएगा अगर हर बात में जो हाँ में हाँ उसकी

उसे नीलाम वो इक दिन सर-ए-बाज़ार कर देगा



हमारे इश्क़ का चर्चा अभी सरगोशियों तक है

जो बाक़ी काम है वो सुब्ह का… Continue

Posted on November 1, 2017 at 11:44am — 62 Comments

'ग़ालिब'की ज़मीन में एक ग़ज़ल

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फाइलुन



दूर कितनी शादमानी और है

कुछ दिनों की जाँ फिशानी और है



मेरे फ़न की दाद सबने दी मुझे

आपकी बस क़द्रदानी और है



हो चुकीं सब मौत की तैयारियाँ

दोस्तों की नोहा ख़्वानी और है



है ख़बर सबको बहादुर वो नहीं

उसकी वज्ह-ए-कामरानी और है



दास्तान-ए-इश्क़ तो तुम सुन चुके

ज़िन्दगानी की कहानी और है



दोस्तों से तो मुआफ़ी मिल गई

मुझको ख़ुद से सरगरानी और है



लग रहा है उनकी बातों से "समर"

उनके… Continue

Posted on October 22, 2017 at 10:56am — 45 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 5:21pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर जी
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

At 9:46pm on February 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय Samar kabeer जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:06am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

janab samar kabeer sahab aadab,    hosla afzayi ke liye shukriya ,  1. ar ka matlab hai agar...aur 2.chhar ka matlab hai  ..khayal.

At 6:40pm on March 18, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय समर कबीर जी आपको माह कि सर्वश्रेष्ठ रचना के हेतु चुने जाने के लिए बधाई प्रेषित करती हूँ । ये सच है कि ग़ज़ल को लिखना और उसमे खिताब पाना बहुत ही प्रशंशनीय है ,आपको एक बार फिरसे बधाई हो सादर । 

 
 
 

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