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सालिक गणवीर
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई । शेष छिटपुट कमियों के बार नीलेश भाई कह ही चुके हैं । सादर..।"
2 hours ago
सालिक गणवीर commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी (~रूपम कुमार 'मीत')
"प्रिय रुपम बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है. वाह.ढेरों बधाइयाँ।"
4 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on सालिक गणवीर's blog post सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. सालिक साहब, अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई। चौथे शेर में मिरे लिख कर बहर तोड़ दी आपने। पाँचवें शेर का मतलब समझ नहीं सका मैं। अन्तिम शेर में तुम और तू आने से शुतुरगुरबा हो रहा है। देखियेगा। सादर"
13 hours ago
Chetan Prakash commented on सालिक गणवीर's blog post सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"बढिया साफ सुथरी गज़ल हुई है, बंधुवर सालिक गणवीर महोदय, नाचीज़ की बधाई स्वीकार करें। बस एक जगह तीसरे शेर के सानी मिसरे के पहले हिस्से आप मुझे चूकते दिखाई दिए, आवाज़ "मिरे दर पे" ( 1 2 2 ), मेरी अल्प बुद्धि से "मेरे दर पे" होना…"
15 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on सालिक गणवीर's blog post सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी प्रणाम, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें सादर, शे'र दर शे'र दाद पेश करता हूँ। रौशनी* "
16 hours ago
Dimple Sharma commented on सालिक गणवीर's blog post सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
16 hours ago
सालिक गणवीर posted a blog post

सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221 2121 1221 212सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू मैं जानता हूँ रेत के नीचे दबी है तूमरना है एक दिन ये नई बात भी नहीं जी लूँ ऐ ज़िंदगी तुझे जितनी बची है तूआँखों को चुभ रही है अभी तेरी रोशनी काँटा समझ रहा था मगर फुलझड़ी है तूऐ मौत कोई दूसरा दरवाजा खटखटा आवाज़ मिरे दर पे ही क्यों दे रही है तूइक्कीसवीं है तो ये सभी लोग कह रहे सब कुछ वही है अस्ल में पिछली सदी है तूआज़ाद हो रही हैं ये शह्रों की लड़कियाँ खूँटे से गाँव में तो अभी तक बँधी है तूसाबित किया है तुमने सुलह कर के बारहा हर बार मैं ग़लत हूँ हमेशा सही…See More
22 hours ago
सालिक गणवीर commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"मुहतरम ' नूर ' साहेब क्या ग़ज़ल कही है आपने. वाह.सराहना के लिये शब्द नहीं. वाआआआह. दूसरे शैर के सानी में "कि" चुभ रहा है. "ये" लिखें तो काम बन सकता है,आदरणीय."
yesterday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"भाई नादिर ख़ान जीसादर अभिवादनउम्दा तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय मुनीस तन्हा जीसादर अभिवादनउम्दा तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय अजेय जीसादर अभिवादनउम्दा तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"भाई मुनीस तन्हा जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
" भाई तस्दीक़ अहमद ख़ानसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"प्रिय भाई नादिर ख़ानसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय निलेश जी आदाब इस लाजवाब तरही ग़ज़ल के शैर दर शैर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल करें."
Saturday
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"भाई तस्दीक अहमद ख़ान साहिबआदाबग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

सालिक गणवीर's Blog

सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221 2121 1221 212

सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू

मैं जानता हूँ रेत के नीचे दबी है तू

मरना है एक दिन ये नई बात भी नहीं

जी लूँ ऐ ज़िंदगी तुझे जितनी बची है तू

आँखों को चुभ रही है अभी तेरी रोशनी

काँटा समझ रहा था मगर फुलझड़ी है तू

ऐ मौत कोई दूसरा दरवाजा खटखटा

आवाज़ मिरे दर पे ही क्यों दे रही है तू

इक्कीसवीं है तो ये सभी लोग कह रहे

सब कुछ वही है अस्ल में पिछली सदी है तू

आज़ाद हो…

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Posted on September 28, 2020 at 10:23pm — 5 Comments

धुआँ उठता नहीं कुछ जल रहा है..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

1222 1222 122

धुआँ उठता नहीं कुछ जल रहा है

मुझे वो आग बन कर छल रहा है

पिछड़ जाउंँगा मैं ठहरा कहीं गर

ज़माना मुझसे आगे चल रहा है

बहुत ख़ुश था मैं तन्हाई में पर अब

ये सूनापन मुुझे क्यों खल रहा है

अंधेरे में उसे दिखता मैं कैसे

मगर फिर भी वो आँखें मल रहा है

बड़ा होकर दुखों में छाँव देगा

जो ये पौधा ख़ुशी का पल रहा है

निगल जाएगा मुझको भी अँधेरा

ये…

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Posted on September 20, 2020 at 1:30pm — 7 Comments

कह रहे हैं जब सभी तुम भी कहो..( ग़ज़ल : सालिक गणवीर)

2122 2122 212

कह रहे हैं जब सभी तुम भी कहो

आँख मूँदो आम को इमली कहो

बोलते हो झूठ लेकिन एक दिन

आइने के सामने सच ही कहो

कौन रोकेगा तुम्हें कहने से अब

तुम ज़हीनों को भी सौदाई कहो

कैसे कहता कह न पाया आज तक

दोस्तों को जब कहो बैरी कहो

वो नहीं कहता है तू भी कह नहीं

जब कहे हाँ तुम भी तब हाँ जी कहो

वो बने हैं एक दूजे के लिए

दोस्तों उनको दिया बाती कहो

कह नहीं पाया मैं…

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Posted on September 17, 2020 at 8:30am — 8 Comments

जहाँ की नज़र में वो शैतान हैं..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

122 122 122 12

जहाँ की नज़र में वो शैतान हैं
समझते हैं हम वो भी इंसान हैं

न हिंदू न यारो मुसलमान हैं
यहाँ सबसे पहले हम इंसान हैं

खु़दा कितने हैं ,कितने भगवान हैं
यही सोचकर लोग हैरान हैं

नहीं उनको हमसे महब्बत अगर
हमारे लिये क्योंं परेशान हैं

रिहा कर मुझे या तू क़ैदी बना

तेरे हैं क़फ़स तेरे ज़िंदान हैं

*मौलिक एवं अप्रकाशित.

Posted on September 11, 2020 at 5:30pm — 11 Comments

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