For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सालिक गणवीर
  • Male
  • Chhattisgarh
  • India
Share

सालिक गणवीर's Friends

  • नाकाम/naakaam
  • Rupam kumar -'मीत'
  • रवि भसीन 'शाहिद'
  • Samar kabeer
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

सालिक गणवीर's Groups

 

सालिक गणवीर's Page

Latest Activity

सालिक गणवीर commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post औरों से क्या आस रे जोगी-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने ,बधाई स्वीकार करें। कबीर साहिब की बातों का संज्ञान लें."
Tuesday
सालिक गणवीर commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सब कुछ है अब यार सियासी- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी आदाब बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने ,बधाई स्वीकार करें और गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें."
Tuesday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक आभार.जैसा कि मैंने चेतन प्रकाश जी को बताया सब को सज़ा तो दे दी है बेवज्ह आपने-----लिखना चाह रहा था मगर इससे बहतर मिसरा आपने सुझाया है, कबीर साहिब बहुत शुक्रियः ममनून हूँ . सादर"
Tuesday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीयChetan Prakash जीआदाब ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक आभार.दरअस्ल टाइप करते वक़्त गलती हो गई है मुहतरम ,वास्तव में सब को सज़ा तो दे दी है बेवज्ह आपने-----लिखना चाह रहा था इससे बहतर तरमीम कबीर साहिब ने कर दी है. सादर"
Tuesday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जीग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक आभार."
Tuesday
Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I मक़ते का ऊला बह्र में नहीं है,यूँ कर सकते हैं :- `उसको सज़ा ही दी है अभी तक तो आपने`"
Tuesday
Chetan Prakash commented on सालिक गणवीर's blog post होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदाब सालिक गणवीर भाई ! ग़ज़ल कुल मिलाकर अच्छी लगी, बधाई स्वीकार करे। परन्तु मकता कहीं मन मे खटकता रहा, जहाँ आपने बेवजह की मात्रा बढ़ाकर बेवजाःह कर मात्रा भार ही पूरा किया। लेकिन लय जाती रही । साभार !"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Monday
सालिक गणवीर posted a blog post

होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221 2121 1221 212होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी कैसे करे ये दिल बता आराम भी कभी  (1)अब हो न जाँऊ यार मैं बदनाम भी कभी हो जाए मुफ्त में न मेरा नाम भी कभी  (2)क्या क्या चुरा लिया है ये मुझसे न पूछिये लूटा गया है मुझको सर-ए-आम भी कभी  (3)कुछ इस तरह से छोड़ गए हैं मुझे यहाँ आते नहीं हैं मुद्दतों पैगाम भी कभी  (4)करते रहे हवाई सफ़र मुफ़्त में सदा कुछ लोग तो चुकाते नहीं दाम भी कभी  (5)वैसे है बेगुनाह अभी है वो जेल में क़ातिल पे तो लगाइये इल्ज़ाम भी कभी  (6)चर्चा बहुत हुआ था मगर यार आजकल होता नहीं है…See More
Monday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post उसे पहले कभी देखा नहीं था.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"  Rachna Bhatiaजीग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिए आपका हार्दिक आभार"
Jan 6
Rachna Bhatia commented on सालिक गणवीर's blog post उसे पहले कभी देखा नहीं था.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई।बधाई स्वीकार करें।"
Jan 6
सालिक गणवीर posted a blog post

उसे पहले कभी देखा नहीं था.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

1222 1222 122उसे पहले कभी देखा नहीं था वो दिल के पास जो रहता नहीं था  (1)लगी है शह्र की इसको हवा अब हमारा गाँव तो ऐसा नहीं था  (2)बहुत कुछ बोलती थीं आँखें उसकी ज़ुबाँ से वो कभी कहता नहीं था  (3)अँधेरों ने रखा था क़ैद जब तक उजाला दूर तक फैला नहीं था  (4)न जाने क्या हुआ भरता नहीं है पुराना घाव तो गहरा नहीं था  (5)वही तन कर खड़ा रहता है आगे कभी जो सामने बैठा नहीं था  (6)रखा था क़ैद में यादों ने तेरी वहाँ पर तो कहीं पहरा नहीं था  (7)बिका मैं मुफ़्त में कल रात"सालिक" किसी की जेब में पैसा नहीं था …See More
Jan 6
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post उसे पहले कभी देखा नहीं था.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"उस्ताद - ए - मुहतरम Samar kabeer  साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिए हार्दिक आभार। आपकी क़ीमती इस्लाह से ग़ज़ल संवर गई है जनाब। ममनून हूँ ,सलामत रहें"
Jan 5
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post उसे पहले कभी देखा नहीं था.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिए आपका हार्दिक आभार"
Jan 5
Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post उसे पहले कभी देखा नहीं था.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'वो दिल के पास भी रहता नहीं था'  इस मिसरे में 'भी' की जगह "जो" शब्द उचित होगा ।"
Jan 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post उसे पहले कभी देखा नहीं था.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jan 3

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

सालिक गणवीर's Blog

उसे पहले कभी देखा नहीं था.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

1222 1222 122

उसे पहले कभी देखा नहीं था

वो दिल के पास जो रहता नहीं था  (1)

लगी है शह्र की इसको हवा अब

हमारा गाँव तो ऐसा नहीं था  (2)

बहुत कुछ बोलती थीं आँखें उसकी

ज़ुबाँ से वो कभी कहता नहीं था  (3)

अँधेरों ने रखा था क़ैद जब तक

उजाला दूर तक फैला नहीं था  (4)

न जाने क्या हुआ भरता नहीं है

पुराना घाव तो गहरा नहीं था  (5)

वही तन कर खड़ा रहता है आगे

कभी जो सामने बैठा नहीं…

Continue

Posted on January 1, 2021 at 2:30pm — 6 Comments

यहाँ तो बहुत हैं अभी यार मेरे.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

122 122 122 122

यहाँ तो बहुत हैं अभी यार मेरे

मगर याँ अदू भी हैं दो-चार मेरे (1)

कभी भूलकर भी न उनको सज़ा दी

रहे उम्र-भर जो गुनहगार मेरे (2)

हिकारत से अब देखते हैं मुझे भी

यही लोग थे कल तलबगार मेरे (3)

मुझे टुकड़ों में बाट कर ही रहेंगे

हैं दुनिया में जो लोग हक़दार मेरे (4)

जो रिश्ते सभी तोड़ कर जा चुका है 

उसी से जुड़े हैं अभी तार मेरे (5)

वही मिल…

Continue

Posted on December 24, 2020 at 11:00pm — 11 Comments

उसने आज़ाद कब किया है मुझे (ग़ज़ल)

2122 1212  22/122

क़ैद नज़रों में ही रखा है मुझे

उसने आज़ाद कब किया है मुझे  (1)

इससे बहतर तो था अदू मेरा

यार दीमक सा खा रहा है मुझे  (2)

 रात की नींद उड़ गई मेरी

ख़्वाब में जब से वो दिखा है मुझे  (3)

सुब्ह तक होश में नहीं आया

रात इतनी पिला चुका है मुझे  (4)

मंज़िलों तक पँहुच नहीं पाया

पर वो रस्ता बता गया है मुझे  (5)

वो शिकायत कभी नहीं करता

उससे इतना ही अब गिला है मुझे …

Continue

Posted on December 14, 2020 at 11:00pm — 6 Comments

सामने आ तू कभी ख़्वाब में आने वाले....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122 1122 1122 22

सामने आ तू कभी ख़्वाब में आने वाले

क्या मिला तुझको मेरी नींद उड़ाने वाले (1)

ऐसा लगता है कि आने का इरादा ही नहीं

वर्ना महशर में भी आ जाते हैं आने वाले (2)

चंद लम्हे भी अगर बंद हुई हैं पलकें

आ ही जाते हैं नये ख़्वाब दिखाने वाले (3)

क्या ग़जब है कि नये लोग चले आए हैं

घर में पहले से ही थे आग लगाने वाले (4)

मैं इस उम्मीद में बस आज तलक ज़िंदा हूँ

लौट आएँगे कभी छोड़ के जाने वाले…

Continue

Posted on December 8, 2020 at 9:20am — 11 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

विनय कुमार replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बेहद दुखद खबर है, विनम्र श्रद्धांजलि"
1 hour ago
VIRENDER VEER MEHTA replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बहुत ही दु:खद. . .  ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने चरणो में स्थान दे, और  परिवार को यह…"
1 hour ago
Aazi Tamaam left a comment for लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"मुसाफिर सर प्रणाम स्वीकार करें आपकी ग़ज़लें दिल छू लेती हैं"
2 hours ago
vijay nikore replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"प्रिय भाई योगराज जी, बहुत अफ़सोस है, मन दुखी है। भगवान जी आपको शक्ति दें। आपके परिवार के लिए…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बहुत ही दुखद समाचार है । ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीकमलों में स्थान व परिवार को यह आघात सहने की…"
4 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post दौड़ पड़ा याद का तौसन कोई----ग़ज़ल
"क्षमा निवेदन के साथ.......बहुत दिनों बाद ओबीओ पर हूँ, नए लोगों को ध्यान में रखलन के कारण गलती…"
11 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ॐ शांति शांति शांति। बहुत दुःखद समाचार सुनने को मिले हैं। असहनीय। "
11 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बेहद दु:खद समाचार,हम सभी योगराज भाई के ग़म में बराबर के शरीक हैं, विनम्र श्रद्धांजलि ।"
11 hours ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 117 in the group चित्र से काव्य तक
"साथियों, बड़े ही दुःख के साथ सूचित करना है कि आदरणीय गुरुदेव और ओ बी ओ के प्रधान संपादक श्री योगराज…"
11 hours ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"साथियों, बड़े ही दुःख के साथ सूचित करना है कि आदरणीय गुरुदेव और ओ बी ओ के प्रधान संपादक श्री योगराज…"
12 hours ago
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post दौड़ पड़ा याद का तौसन कोई----ग़ज़ल
"//आदरणीय समर कबीर बाउजी// आप मेरा नाम नहीं लेना चाहते थे,तभी तो 'बाउजी' कहना…"
14 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post दौड़ पड़ा याद का तौसन कोई----ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर बाउजी...प्रणाम मत्ले के उला मिसरे में मैं ज़हन शब्द याद शब्द की जगह रखना चाहता हूँ,…"
14 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service