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रामबली गुप्ता
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रामबली गुप्ता's blog post पूनम का रजनीश लजाया-रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी सादर अभिवादन, बेहतरीन छःन्द रचना की आपने, इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर"
Nov 27
रामबली गुप्ता commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे :
"बहुत खूब हार्दिक बधाई स्वीकारें। अच्छे भावपूर्ण दोहे हुए हैं आदरणीय सुशील सरना जी। कुछ शिल्पगत गुंजाइश है अभी। 'काहे करे शृंगार' में मात्राभार अधिक है। इसे 'काहे करे सिँगार' कर लीजिए। 'कह गई राज रात के' गेयता भंग है।…"
Nov 25
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post पूनम का रजनीश लजाया-रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,बहुत सुंदर रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 23
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on रामबली गुप्ता's blog post पूनम का रजनीश लजाया-रामबली गुप्ता
"आआ० रामबली जी . बहुत सुन्दर रचना हुयी है , आपसे एक निवेदन है अछे कवि  कर्म के लिए कर्ण कटु शब्दों से बचना आवश्यक है  अधर शब्द में जो लालित्य है वह ओष्ठ  में नही है  पर अधर १२ है  तो .फिर सीधे सीधे होंठ ही क्यों न कहें -----…"
Nov 23
Tasdiq Ahmed Khan commented on रामबली गुप्ता's blog post पूनम का रजनीश लजाया-रामबली गुप्ता
"जनाब राम बली साहिब ,सुन्दर मत्त गयन्द सवैये छन्द हुए है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं"
Nov 23
Mohammed Arif commented on रामबली गुप्ता's blog post पूनम का रजनीश लजाया-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली गुप्ता जी आदाब, बहुत ही सुंदर मत्तगयंद छंद की रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 23
रामबली गुप्ता posted a blog post

पूनम का रजनीश लजाया-रामबली गुप्ता

मत्तगयन्द सवैयासूत्र=211×7+22; सात भगण+गागासुंदर पुष्प सजा तन-कंचन केश-घटा बिखराय चली है।हैं मद पूरित नैन-सरोवर, ओष्ठ-सुधा छलकाय चली है।।अंग सुगंध लिए सम चंदन मत्त गयंद लजाय चली है।लूट लिया हिय चैन सखे! कटि यूँ गगरी रख हाय! चली है।।1।।यौवन ज्यों मकरन्द भरा घट और सुवासित कंचन काया।भौंह कमान कटार बने दृग, केश घने सम नीरद-छाया।।देख छटा मुख की अति सुंदर, पूनम का रजनीश लजाया।ओष्ठ-खिली कलियाँ अति कोमल, देख हिया-अलि है ललचाया।।2।।मौलिक एवं अप्रकाशित-रामबली गुप्ताSee More
Nov 23
रामबली गुप्ता commented on लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's blog post जग में करूँ प्रसार (गीत) - रामानुज लक्ष्मण
"सरल, सहज भावों और शब्द चयन के साथ बहुत ही सुन्दर गीत रचा है आपने आदरणीय भाई रामानुज लक्ष्मण जी। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।सादर आपने उक्त गीत के लिए सरसी छंद को आधार बनाया है जिसकी मधुरिम गेयता के कारण रचना और सुंदर हो गयी है। वर्ष पार किये…"
Nov 23
रामबली गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत ही सटीक तरीके से चित्र को परिभाषित किया है आपने सरसी छंद के माध्यम से आदरणीय भाई सुरेश कल्याण जी। हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर"
Nov 18
रामबली गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आद0 बहन राजेश कुमारी जी"
Nov 18
रामबली गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर आभार भाई सतविंदर राणा जी"
Nov 18
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"हार्दिक आभार आदरणीय अरुण कुमार जी"
Nov 18
रामबली गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत खूब आदरणीय अरुण कुमार जी सभी छंद सुंदर हुए हैं एवं चित्र को पूरी तरह परिभाषित कर रहे हैं। सादर बधाई स्वीकार करें।"
Nov 18
रामबली गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"राणा जी चित्र के अनुरूप सुंदर सरसी छंदाधारित गीत के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर"
Nov 18
रामबली गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह आदरणीया बहन राजेश कुमारी जी बहुत ही सुंदर प्रवाहमय सरसी रचा है आपने। हार्दिक बधाई स्वीकारें।सादर"
Nov 18
रामबली गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय प्रणाम प्रथमतः नाज और आज की बात छोड़ देते हैं। "क्यों न करें कमाल" न टंकण त्रुटि है उसे 'ना' पढा जाय(वैसे भी उच्चारण के अनुसार उस पर मात्राभार 2 ही हो रहा है।) 'बुढापे में बेटी' ज्यादा सटीक है। सुझाव के लिए सादर…"
Nov 18

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DEORIA
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रामबली गुप्ता's Blog

पूनम का रजनीश लजाया-रामबली गुप्ता

मत्तगयन्द सवैया



सूत्र=211×7+22; सात भगण+गागा



सुंदर पुष्प सजा तन-कंचन केश-घटा बिखराय चली है।

हैं मद पूरित नैन-सरोवर, ओष्ठ-सुधा छलकाय चली है।।

अंग सुगंध लिए सम चंदन मत्त गयंद लजाय चली है।

लूट लिया हिय चैन सखे! कटि यूँ गगरी रख हाय! चली है।।1।।



यौवन ज्यों मकरन्द भरा घट और सुवासित कंचन काया।

भौंह कमान कटार बने दृग, केश घने सम नीरद-छाया।।

देख छटा मुख की अति सुंदर, पूनम का रजनीश लजाया।

ओष्ठ-खिली कलियाँ अति कोमल, देख हिया-अलि है… Continue

Posted on November 23, 2017 at 6:30am — 5 Comments

मुख-शशि उज्ज्वल औ' धनु-भौहें

सरसी छंद



शिल्प-16,11 पर यति, चार चरण और दो पद, पदांत में गुरु-लघु।



भाव शब्द-कल गुरु लघु यति का, रखकर समुचित ध्यान।

दोहा तोटक रोला सरसी, रचिये छंद सुजान।।1।।



सोलह ग्यारह पर यति प्रति पद, गुरु-लघु पद के अंत।

चार चरण दो पद का सरसी, गायें सुर-नर-संत।।2।।



मुख-शशि उज्ज्वल औ' धनु-भौहें, तिरछे नैन-कटार।

हाय! डसें लट-अहि केशों के, हिय पर बारम्बार।।3।।



अरुण अधर-कोमल किसलय नव, दृग-मद पूर्ण तड़ाग।

यौवन-पुष्प खिला ज्यों लेकर घट भर… Continue

Posted on November 13, 2017 at 8:07am — 14 Comments

ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल

2122 2122 2122 212



गलतियाँ किससे नही होतीं भला संसार में

है मगर शुभ आचरण निज भूल के स्वीकार में



शून्य में सामान्यतः तो कुछ नही का बोध पर

है यहाँ क्या शेष छूटा शून्य के विस्तार में



आधुनिकता के दुशासन ने किया ऐसे हरण

द्रौपदी निर्वस्त्र है खुद कलियुगी अवतार में



सूर्य को स्वीकार गर होता न जलना साथियों

तो भला क्या वो कभी करता प्रभा संसार में



व्यर्थ ही व्याख्यान आदर्शों पे देने से भला

अनुसरण कुछ कीजिये इनका निजी… Continue

Posted on September 25, 2017 at 5:00am — 49 Comments

जयति जयति जय...-रामबली गुप्ता

गीत

आधार छंद-आल्हा/वीर छंद

जयति जयति जय मात भारती, शत-शत तुझको करुँ प्रणाम।

जननी जन्मभूमि वंदन है, प्रथम तुम्हारी सेवा काम।

जयति जयति जय........

जन्म लिया तेरी माटी में, खेला गोद तुम्हारी मात!

लोट तुम्हारे रज में तन को, मिला वीर्य-बल का सौगात।।

तुझसे उपजा अन्न ग्रहण कर, पीकर तेरे तन का नीर।

ऋणी हुआ शोणित का कण-कण, ऋणी हुआ यह सकल शरीर।।

अब तो यह अभिलाषा कर दूँ, अर्पित सब कुछ तेरे नाम।

जननी जन्मभूमि वन्दन है प्रथम…

Continue

Posted on August 27, 2017 at 10:50pm — 26 Comments

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At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 3:10pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामबली गुप्ता जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपका गीत-हृदय का भ्रमर गुनगुनाता चला है को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:47am on May 14, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०  रामबली जी

आप जैसा सुन्दर कवि -मित्र पाकर आप्यायित हूँ . आपको सदैव शुभ .  

At 10:17pm on February 25, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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