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रामबली गुप्ता
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  • India
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Ajay Tiwari commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"आदरणीय बलराम जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है . शुभकामनाएं. सादर "
Oct 15
रामबली गुप्ता commented on rajesh kumari's blog post वक़्त ऐसी किताब माँगेगा (ग़ज़ल 'राज')
"बहुत ही सुंदर ग़ज़ल हुई है आदरणीया बहन राजेश कुमारी जी। हार्दिक बधाई स्वीकारें"
Oct 13
रामबली गुप्ता posted a blog post

ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल2122 2122 2122 212गलतियाँ किससे नही होतीं भला संसार मेंहै मगर शुभ आचरण निज भूल के स्वीकार मेंशून्य में सामान्यतः तो कुछ नही का बोध परहै यहाँ क्या शेष छूटा शून्य के विस्तार मेंआधुनिकता के दुशासन ने किया ऐसे हरणद्रौपदी निर्वस्त्र है खुद कलियुगी अवतार मेंसूर्य को स्वीकार गर होता न जलना साथियोंतो भला क्या वो कभी करता प्रभा संसार मेंव्यर्थ ही व्याख्यान आदर्शों पे देने से भलाअनुसरण कुछ कीजिये इनका निजी व्यवहार मेंलालसा दिल में यही मिल जाय वो मीठा शहदजो मिला था माँ की लोरी थपकियों और प्यार मेंप्रेम…See More
Oct 13
रामबली गुप्ता commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल- हिंदी तुकांत के साथ एक प्रयोग (..अण ,, क़ाफ़िये पर संभवत: पहली ग़ज़ल है इस मंच पर)
"सुंदर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें आद0 भाई नीलेश जी"
Oct 13
रामबली गुप्ता commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल: बलराम धाकड़
"वाह वाह भाई बलराम धाकड़ जी क्या खूब ग़ज़ल कही है। हार्दिक बधाई स्वीकारें। गांधी वाले मिसरे में यदि गोली के स्थान पर हिंसा रखें तो कैसा हो जरा विचारियेगा। जनम जन्म का तद्भव है मेरे हिसाब से सही है। बाकी अन्य सुधीजनों की जो राय हो।"
Oct 13
Balram Dhakar commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"बहुत शानदार ग़ज़ल आदरणीय रामबली सा० बहुत बहुत बधाई।"
Oct 11
surender insan commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"आदरणीय राम बलि गुप्ता जी आदाब। ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है बधाई स्वीकार करे जी।।"
Oct 8

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"बहर में सधी पंक्तियों से आपकी प्रस्तुति अवश्य पठनीय हो गयी है, भाई रामबली जी. आपके प्रयासों से मन प्रसन्न है. गीतिका की विधा पर आपका हुआ प्रयास श्लाघनीय है. शुभेच्छाएँ "
Oct 7
रामबली गुप्ता posted blog posts
Oct 7
रामबली गुप्ता commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सीने से चिमटा कर रोये,
"बहरे मीर पर एक पूरी ग़ज़ल जिसका मिसरा ओबीओ के तरही मुशायरे में रखा गया था आप देखें- भूली बिसरी चंद उमीदें, चंद फ़साने याद आये तुम याद आये और तुम्हारे साथ ज़माने याद आये दिल का नगर शादाब था फिर भी ख़ाक सी उडती रहती थी कैसे ज़माने ऐ गम -ए -जाना तेरे बहाने…"
Oct 6
रामबली गुप्ता commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सीने से चिमटा कर रोये,
"आद0 भाई नीलेश जी, मै कविता के उन साधकों /रचनाकारों में नही हूँ जो किसी की भी पोस्ट पर यूं ही कुछ भी लिख दिया करते हैं। जो कुछ भी लिखता हूँ बहुत सोच समझ कर लिखता हूँ। कल जब हम और आप भी नामचीन रचनाकारों में शुमार हो जाएंगे और हमें भी उस्ताद शायर आदि…"
Oct 6
रामबली गुप्ता commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सीने से चिमटा कर रोये,
"आड़0 भाई नीलेश जी वैसे तो मतले से लेकर मक्ते तक हर शेर बहुत ही दमदार और उम्दा है और इसके लिए मैं आकाश भर बधाई देता हूँ। किन्तु कहना चाहूँगा कि मतले से लेकर मक्ते तक तमाम शेरों में आपको परिवर्तन करना होगा ताकि वे निर्धारित बहर के अनुसार हो सकें। जी…"
Oct 5
रामबली गुप्ता posted a blog post

दीपक सा उजियार करोगे-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल22 22 22 22जब जलना स्वीकार करोगेदीपक-सा उजियार करोगेस्नेह-समर्पण शस्त्र अगर होंहर दिल पर अधिकार करोगेदुर्ग दिलों के जीत सके तोजय सारा संसार करोगेदिल में दर्प बढ़ा दानव-साउसका कब संहार करोगेराष्ट्र-हितों पर मिट न सके तोजीवन यह बेकार करोगेदिल पर रखकर हाथ बता दो"हमसे कितना प्यार करोगे"दृष्टि रखोगे अर्जुन-सी तोलक्ष्य पे ही हर वार करोगेउर-अँधियार मिटा पाये तोखुद का साक्षात्कार करोगेहिल जाएगा भूधर का तलचोट जो बारम्बार करोगेलुट जाएगा चैन 'बली' गरनैन किसी से चार करोगेमौलिक एवं अप्रकाशितरामबली गुप्ताSee More
Oct 4
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,इधर उधर की बातों पर ध्यान न दें और अभ्यास करते रहें,आपकी ग़ज़ल बहुत उम्दा है,पुनःबधाई ।"
Oct 1
रामबली गुप्ता posted blog posts
Oct 1
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"आदरणीय भाई नीरज जी यदि आपको मेरी रचना ग़ज़ल के हिसाब से सटीक नही लग रही तो आप इसे कोई कविता मान लीजिए। व्यर्थ ही एक ही बात को पीटने से भी क्या लाभ? मेरे मन में ऐसा कोई आग्रह नहीं कि मैं अपनी रचना को ग़ज़ल ही कहूँ। आप इसे कविता ही मानें और बताएं कि कविता…"
Sep 30

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DEORIA
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KOTHA
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रामबली गुप्ता's Blog

ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल

2122 2122 2122 212



गलतियाँ किससे नही होतीं भला संसार में

है मगर शुभ आचरण निज भूल के स्वीकार में



शून्य में सामान्यतः तो कुछ नही का बोध पर

है यहाँ क्या शेष छूटा शून्य के विस्तार में



आधुनिकता के दुशासन ने किया ऐसे हरण

द्रौपदी निर्वस्त्र है खुद कलियुगी अवतार में



सूर्य को स्वीकार गर होता न जलना साथियों

तो भला क्या वो कभी करता प्रभा संसार में



व्यर्थ ही व्याख्यान आदर्शों पे देने से भला

अनुसरण कुछ कीजिये इनका निजी… Continue

Posted on September 25, 2017 at 5:00am — 44 Comments

जयति जयति जय...-रामबली गुप्ता

गीत

आधार छंद-आल्हा/वीर छंद

जयति जयति जय मात भारती, शत-शत तुझको करुँ प्रणाम।

जननी जन्मभूमि वंदन है, प्रथम तुम्हारी सेवा काम।

जयति जयति जय........

जन्म लिया तेरी माटी में, खेला गोद तुम्हारी मात!

लोट तुम्हारे रज में तन को, मिला वीर्य-बल का सौगात।।

तुझसे उपजा अन्न ग्रहण कर, पीकर तेरे तन का नीर।

ऋणी हुआ शोणित का कण-कण, ऋणी हुआ यह सकल शरीर।।

अब तो यह अभिलाषा कर दूँ, अर्पित सब कुछ तेरे नाम।

जननी जन्मभूमि वन्दन है प्रथम…

Continue

Posted on August 27, 2017 at 10:50pm — 26 Comments

दोहे-गुरु पूर्णिमा विशेष-रामबली गुप्ता

जग में बिन गुरु ज्ञान के, नर-पशु एक समान।

गुरु के शुचि सानिध्य में, बनता मूढ़ सुजान।।1।।



ज्ञान जगत का मूल है, संस्कृति का आधार।

किन्तु बिना गुरु ज्ञान कब, पाये यह संसार?2।।



निज गुरु पद में बैठ नित, खुद को लो यदि जान।

कलुष-भेद हिय-तम मिटे, हो शुचि तन-मन-प्रान।।3।।



ज्ञान ज्योति गुरु दीप सम, और तिमिर-अज्ञान।

अर्पित कर श्रम-स्नेह-घृत, बनते शिष्य सुजान।।4।।



नित गुरु-पद वंदन करें, इसमें चारो धाम।

गुरु को श्री-हरि-पार्थ भी, नत हो करें… Continue

Posted on July 9, 2017 at 10:30pm — 14 Comments

ग़ज़ल-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल

1222 1222 1222 1222



जो लड़कर आँधियों से जीत का इनआम लेता है

ज़माना फ़ख्र से उसका युगों तक नाम लेता है



सहारा जो यहाँ हर डूबते इन्सां का बन जाये

खुदा भी हाथ उसका मुश्किलों में थाम लेता है



दुआओं की कमी होती नहीं उसको कभी यारों

बज़ुर्गों का यहाँ जो हाल सुबहो-शाम लेता है



पता सबको है मुश्किल की घड़ी होती बहुत छोटी

कहाँ हर आदमी हिम्मत से लेकिन काम लेता है



खुदा को भी शिकायत होगी शायद अपने बन्दे से

कि वो है खुदग़रज़ दुख… Continue

Posted on July 4, 2017 at 11:30am — 21 Comments

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At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 3:10pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामबली गुप्ता जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपका गीत-हृदय का भ्रमर गुनगुनाता चला है को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:47am on May 14, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०  रामबली जी

आप जैसा सुन्दर कवि -मित्र पाकर आप्यायित हूँ . आपको सदैव शुभ .  

At 10:17pm on February 25, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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 ग़ज़ल की बातें 

 

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