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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल
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"क्या बात है, बहुत उम्दा हार्दिक बधाई l सादर"
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"आदरणीय लक्ष्मण जी उम्दा गजल के लिए मुबारकबाद ......"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल

१२२ १२२ १२२ १२२दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं सियासत में सब तिलमिलाने लगे हैं।१। घोटाले सभी अब गिनाने लगे हैं मगर दोष अपना छिपाने लगे हैं।२। वतन डूबता है तो अब डूब जाये सभी खाल अपनी बचाने लगे हैं।३। कभी खुद दलाली में थे कोयले की गजब  ऊँगलियाँ  वो उठाने लगे हैं।४। दिया था भरोसा कि लुटने न देंगे वही बेबसी  अब  जताने  लगे हैं।५। जो पाले  हुए  थे  सदी से लुटेरे खुशी से बहुत गुनगुनाने लगे हैं।६। पुरानी  हुई  चौथे  खम्भे  की बातें बहस ही बहस सब दिखाने लगे हैं।७। कभी सीना छप्पन जो हुंकारते थे वही  आज  आँसू  बहाने  लगे  हैं।८। मौलिक-अप्रकाशितSee More
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"आ. भाई सतविंद्र जी, परामर्श देती छंदबद्ध प्रतिक्रिया के लिए आभार ।"
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"आ. भाई सतविंद्र जी, सुन्दर प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई ।"
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"आ. भाई सुरेन्द्र जी, स्नेह व मार्गदर्शन के लिए आभार ।"
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"आ. भाई अखिलेश जी, इस छंद का प्रथम प्रयास है । आपकी सकारात्मक टिप्पणी से उत्साहवर्धन हुआ है । आभार।"
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"फिर चूक हो गई ..."
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल



१२२ १२२ १२२ १२२

दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं

सियासत में सब तिलमिलाने लगे हैं।१।



घोटाले सभी अब गिनाने लगे हैं

मगर दोष अपना छिपाने लगे हैं।२।



वतन डूबता है तो अब डूब जाये

सभी खाल अपनी बचाने लगे हैं।३।



कभी खुद दलाली में थे कोयले की

गजब  ऊँगलियाँ  वो उठाने लगे हैं।४।



दिया था भरोसा कि लुटने न देंगे

वही बेबसी  अब …

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Posted on February 19, 2018 at 4:00pm — 5 Comments

दाग कितने नित लगाओगे वतन के भाल पर -- (गजल)-- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२ २१२२ २१२२ २१२



खूब नजरें  जो  गढ़ाये  हैं  पराये  माल पर

है भरोसा खूब उनको दोस्तो घड़ियाल पर।१।



भूख बेगारी औ'  नफरत है पसारे पाँव बस

अब भगत आजाद रोते हैं वतन के हाल पर ।२।



आज सम्मोहन  कला  हर नेता को आने लगी

है फिदा जनता यहाँ की हर सियासी चाल पर।३।



खुद  पहन  खादी  चमकते पूछता हूँ आप से

दाग कितने नित लगाओगे वतन के भाल पर।४।



ऐसा होता तो सुधर  जाते  सभी हाकिम यहाँ

वक्त जड़ता पर कहाँ है अब तमाचा गाल…

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Posted on February 11, 2018 at 10:25pm — 8 Comments

फितरत नहीं छिपती है - (गजल)- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२२१ १२२२ २२१ १२२२



नफरत के बबूलों को आँगन में उगाओ मत

पाँवों में स्वयं के अब यूँ शूल चुभाओ मत।१।



ऐसा न हो यारों फिर बन जायें विभीषण वो

यूँ दम्भ में इतना भी अपनों काे सताओ मत।२।



फितरत नहीं छिपती है कैसे भी मुखौटे हों

समझो तो मुखौटे अब चेहरों पे लगाओ मत।३।



माना कि तमस देता तकलीफ बहुत लेकिन

घर को ही जला डाले वो दीप जलाओ मत।४।



ढकने को कमी अपनी आजाद बयानों पर

फतवों के मेरे  हाकिम  पैबंद  लगाओ…

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Posted on February 1, 2018 at 6:00am — 15 Comments

शीत के दोहे - लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर'

शीत के दोहे



बालापन सा हो गया, चहुँदिश तपन अतीत

यौवन सा ठिठुरन लिए, लो आ पहुँची शीत।१।



मौसम बैरी  हो  गया, धुंध ढके हर रूप

कैसै देखे अब भला, नित्य धरा को धूप।२।



शीत लहर के तीर नित, जाड़ा छोड़े खूब

नभ  के  उर  में  पीर  है, आँसू  रोती दूब।३।



हाड़  कँपाती  ठंड  से , सबका  ऐसा हाल

तनमन मागे हर समय, कम्बल स्वेटर शॉल।४।



शीत लहर फैला रही, जाने क्या क्या बात

दिन घूँघट  में  फिर रहा, थरथर काँपे रात।५।



लगी…

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Posted on January 8, 2018 at 7:27am — 8 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 5:20pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शुक्रिया लक्ष्मण जी
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

At 4:26pm on April 2, 2015, gumnaam pithoragarhi said…
लक्ष्मण धामी जी नमस्कार शुक्रिया आपने मुझे ये सम्मान दिया क्या मैं आपसे बात कर सकता हूँ यदि आप चाहें तो ................ मेरा नंबर ये है ,,,,,,,,,,7579 100213.........क्या आप अपना नंबर देंगे ?
At 10:37pm on February 17, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई लक्ष्मण धामीजी, यदि संभव हो तो 18 फरवरी को भी भेंट हो सकती है. मैं 18 फरवरी को भी प्रगति मैदान के पुस्तक मेले में उपस्थित रहूँगा.
शुभ-शुभ

At 6:34am on July 9, 2014, gumnaam pithoragarhi said…
माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना
sir main pithoragarh se hoon achchha laga ki aap bhi dharchula se hain ............................... ek baar fir badhai ,,,,,,,,,
At 2:53pm on July 8, 2014, Sushil Sarna said…

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना 

At 2:27pm on July 8, 2014, Nilesh Shevgaonkar said…

बधाई 

At 2:21pm on July 8, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 6:53am on October 23, 2013, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

सभी प्रबुद्ध जानो को नमन एवं सुझावों के लिए हार्दिक धन्यवाद . अभी ग़ज़ल शाश्त्र से सम्पूर्ण तौर पर अनभिज्ञ हूँ . पर समझने का प्रयास भी कर रहा हूँ . आप सभी से निवेदन है कि मार्गदर्शन करते रहें .

 
 
 

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