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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

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vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे दो जून के - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"दोहे अच्छे लिखे हैं।। बधाई, लक्ष्मण  जी"
yesterday
Neelam Upadhyaya commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे दो जून के - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर जी, नमस्कार। अच्छे दोहे लिखे हैं। बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे दो जून के - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर जी आदाब,अच्छे दोहे लिखे आपने,इसके लिए बधाई स्वीकार करें । 'कभी किसी को ना करे, भूख यहाँ बेहालरोटी सब दो जून की, पाकर हों खुशहाल' इस दोहे की तुकांतता क्या है? ग़ौर करें ।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

दोहे दो जून के - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

कभी किसी को ना करे, भूख यहाँ बेहाल रोटी सब दो जून की, पाकर हों खुशहाल।१। मुश्किल  से  दो जून की, रोटी  आती हाथ खाने को यूँ आज तो, मिल बैठो सब साथ।२। रोटी को दो जून की, अजब गजब से खेल इसकी खातिर जग करे, दुश्मन से भी मेल।३। रोटी को  दो  जून  की, क्या  ना  करते लोग झूठ ठगी दैहिक व्यसन, सब इसके ही योग।४। रोटी बिन दो जून की, बिलखाती है भूख रोटी  पा  दो  जून  की, ढूँढें  लोग  रसूख।५। सदा भाग्य ने है लिखा, निर्धन के घर झोल रोटी को  दो  जून  की, अस्मत  से  ले मोल।६। पड़ी जलावन पर यहाँ, मँहगाई की मार रोटी तब दो  जून  की, कैसे पकती यार।७। रोटी से दो  जून  की, इक  है  कोसों दूर खाना खर्चा एक को, किस्मत से भरपूर।८। सरकारें निश्चिंत  अब, नित  कर मँहगा नून जनता का मुश्किल हुआ, कटना यूँ दो जून।९। मेहनतकश फाका करे, कामचोर की मौज रोटी को दो जून की, जुटती सबकी फौज।१०। मौलिक अप्रकाशित लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ. भाई तेजवीर जी, बहुत ही दुःखद समाचार प्राप्त हुआ, इस दुःख की घड़ी में हम सभी आपके साथ हैंं, ईश्वर दिवंगत की आत्मा को शांति प्रदान करें ।"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आदमी - ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई मुनीश जी, सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई।"
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई दयाराम जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई अमर जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई आमोद जी, सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई।"
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई दयाराम जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार ।"
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई अमित जी, गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए धन्वाद ।"
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. आमोद जी, गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए धन्वाद ।"
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए आभार ।"
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. राजेश दी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए धन्वाद ।"
May 25
dandpani nahak left a comment for लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने के लिए!"
May 24
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. अंजलि जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 24
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई नवीन जी, बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई।"
May 24
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आ. भाई दंडपाणि जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
May 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

दोहे दो जून के - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

कभी किसी को ना करे, भूख यहाँ बेहाल

रोटी सब दो जून की, पाकर हों खुशहाल।१।



मुश्किल  से  दो जून की, रोटी  आती हाथ

खाने को यूँ आज तो, मिल बैठो सब साथ।२।



रोटी को दो जून की, अजब गजब से खेल

इसकी खातिर जग करे, दुश्मन से भी मेल।३।



रोटी को  दो  जून  की, क्या  ना  करते लोग

झूठ ठगी दैहिक व्यसन, सब इसके ही योग।४।



रोटी बिन दो जून की, बिलखाती है भूख

रोटी  पा  दो  जून  की, ढूँढें  लोग  रसूख।५।



सदा भाग्य ने है लिखा,…

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Posted on June 11, 2019 at 4:30pm — 3 Comments

दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

दोहे



तरुवर  देते  फूल फल, नदिया  देती  नीर

मानव मानव को मगर देता नित क्यों पीर।१।



ओछा मन हद तोड़ता, ओछी नदिया कूल

जैसे चन्दन  से  अधिक, माथे चढ़ती धूल।२।



जो बोता  है  पेड़  इक, बाँटे सबको छाँव

काटे जो वट रात दिन, जलते उसके पाँव।३।



अर्थी, पूजा, प्रीत को, मिले न आगन फूल

इस युग बोने सब लगे, कैक्टस कैर बबूल।४।



मरने पर जिसको रही, गंगाजल की चाह

उसने  गंगा  ओर  की, हर  नाले की राह।५।



जहाँ पसीना…

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Posted on May 18, 2019 at 6:03pm — 8 Comments

सजती चुनाव में यहाँ जब तस्तरी बहुत - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/२२२/१२१२



सजती चुनाव  में  यहाँ  जब  तस्तरी बहुत

फिर भी बढ़े है रोज क्यों ये भुखमरी बहुत।१।



उतरा न मन का मैल जो सियासत ने भर दिया

दे कर  भी  हमने  देख  ली  है  फ़िटकरी बहुत।२।



अब खेल वो दिखाएगी उसको चुनाव में

जनता से जिसने है करी बाज़ीगरी बहुत।३। 



नेता न आया  एक  भी  सेवा  की राह पर

लोगों ने कह के देख ली खोटी खरी बहुत।४।



क्या होगा उनके राज का जनता बतायेगी

करते सदन में जो रहे गत मशखरी बहुत।५।



आता…

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Posted on April 28, 2019 at 7:04pm — 11 Comments

सीढ़ी हो उनके वास्ते कुर्सी की राह पर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/ २१२१/२२२/१२१२



लेकर  शराब  साड़ियाँ  मतदान  कीजिए

फिर पाँच साल जिन्दगी हलकान कीजिए।१।



देता है जो भी सीख  ये  तुमको चुनाव में

फूलों से  ऐसे  नेता  का  सम्मान कीजिए।२।



बाँटेंगे  जात  धर्म  की  सरहद  में  खूब वो

मत खाक उनका आप ये अरमान कीजिये।३।



सीढ़ी हो उनके  वास्ते  कुर्सी  की राह पर

हर लक्ष्य उनका आप ही परवान कीजिए।४।



सेवक हैं उनको आप मत…

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Posted on April 19, 2019 at 8:04pm — 5 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 10:03pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने के लिए!
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
At 5:20pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शुक्रिया लक्ष्मण जी
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

At 4:26pm on April 2, 2015, gumnaam pithoragarhi said…
लक्ष्मण धामी जी नमस्कार शुक्रिया आपने मुझे ये सम्मान दिया क्या मैं आपसे बात कर सकता हूँ यदि आप चाहें तो ................ मेरा नंबर ये है ,,,,,,,,,,7579 100213.........क्या आप अपना नंबर देंगे ?
At 10:37pm on February 17, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई लक्ष्मण धामीजी, यदि संभव हो तो 18 फरवरी को भी भेंट हो सकती है. मैं 18 फरवरी को भी प्रगति मैदान के पुस्तक मेले में उपस्थित रहूँगा.
शुभ-शुभ

At 6:34am on July 9, 2014, gumnaam pithoragarhi said…
माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना
sir main pithoragarh se hoon achchha laga ki aap bhi dharchula se hain ............................... ek baar fir badhai ,,,,,,,,,
At 2:53pm on July 8, 2014, Sushil Sarna said…

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना 

At 2:27pm on July 8, 2014, Nilesh Shevgaonkar said…

बधाई 

 
 
 

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