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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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dandpani nahak left a comment for लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत शुक्रिया"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल: वक़्त की शतरंज पर किस्मत का एक मोहरा हूँ मैं।
"आ. भाई बलराम जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post जाते हो बाजार पिया (नवगीत)
"आ. भाई धर्मेन्द्र जी, बेहतरीन नवगीत हुआ है । हार्दिक बधाई।"
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"आ. भाई ब्रिजेश जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on dandpani nahak's blog post गज़ल
"आ. भाई दण्डपाणि जी, हार्दिक धन्यवाद।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post विजयदशमी पर कुछ दोहे :
"आ. भाई सुशील जी, उत्तम दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post छंद मुक्त कविता : रावण दहन
"आ. भाई गणेश जी , बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"आ. प्रशांत जी, सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"आ. भाई शेखशहजाद जी, प्रदत्त विषय पर सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"आ. प्रतिभा बहन, स्नेह व उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"आ. भाई शेखशहजाद जी, प्रशंसा के लिए आभार।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"आ. सुनन्दा जी,उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। प्रशंसा और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"आ. भाई बासुदेव जी, उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"दोहेउतना ही उपयोग जल, नित करना निज कामव्यर्थ  बहाया  तो  मिले, नहीं  चुका  कर  दाम।१। होती है बिन नीर  कब, जीवन की पहचानइसीलिए सबसे  बड़ा, कहते जल का दान।२। नदिया पोखर साफ रख, जल को सदा सहेजयह पुरखों …"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"आ. भाई बासुदेव जी, सुंदर प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on मोहन बेगोवाल's blog post जहाँ ये कर दिखाना होगाl
"आ. भाई मोहन जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Oct 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post व्यथित हृदय
"आ.भाई, छोटेलाल जी, अच्छी रचना हुई है हार्दिक बधाई।"
Oct 7

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/ २१२१/ २२२/१२१२



रस्ते सभी जहाँ के ढब आसान जिंदगी

तू ही उलझ के रह गयी नादान जिंदगी।१।



पानी हवा बहुत  है  यूँ  जीने  के वास्ते

करती इकट्ठा  मौत का सामान जिंदगी।२।



जीवन नहीं करे है तू जीवन सा पर करे

सासों पे झूठ - मूठ का अहसान जिंदगी।३।



क्यूबा बनी सोमालिया, ईराक, सीरिया

कब होगी तू पता नहीं जापान जिन्दगी।४।



देती है उसको मान ढब आती है मौत…

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Posted on September 26, 2019 at 6:54am — 8 Comments

दीप बुझा करते है जिसके चलने पर - गजल( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर')

२२२२/२२२२/२२२


अश्क पलक से भीतर रखना सीख लिया
गम थे बेढब फिर  भी हँसना सीख लिया।१।


जख्म दिए  हैं  जब से  हँसकर  फूलों ने
काँटों को भी फूल हैं कहना सीख लिया।२।


कदम- कदम  पर  खंजर  रक्खे  अपनों  ने
हम भी शातिर जिन पर चलना सीख लिया।३।


दीप बुझा  करते  है  जिसके चलने पर
उस आँधी से हमने जलना सीख लिया।४।


उनकी कोशिश  थी  पत्थर से अटल रहें
नदिया बनकर हम ने बहना सीख लिया।५।


मौलिक/अप्रकाशित

Posted on September 18, 2019 at 7:29pm — 4 Comments

भला करे कश्मीर का, संशोधित सम्विधान - दोहे ( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर')

दोहे

***

वो तो बढ़चढ़ बाँटते, नफरत जिसका नाम

जन्नत में  सद्भावना, शेष  वतन  का  काम।१।

****

वैसे तो हम सब रहे, विविध रंग के फूल

किन्तु सूख अब हो गये, जैसे तीखे शूल।२।

****

पड़े जंग आतंक की, निसदिन जिन पर मार

उन्हें जिन्दगी फिर लगे, बोलो क्यों ना भार।३।

****

तन से तो अब देश में, बिलय हुआ कश्मीर

मन से भी जब हो  बिलय, बदलेगी तस्वीर।४।

****

बिस्थापित थे जो हुये, समझो उनकी पीर

जा पायें निज  ठाॅ॑व  वो, कश्मीरी…

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Posted on August 12, 2019 at 6:55am

गाँव के दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

गाँव के दोहे

संगत में जब से पड़ा, सभ्य नगर की गाँव

अपना घर वो त्याग कर, चला गैर के ठाँव।१।

***

मिलना जुलना बतकही, पनघट पर थी खूब

सब  अपनापन  मर  गया, मोबाइल  में  डूब।२।

***

बिछी सड़क कंक्रीट की, झुलसे जिसमें पाँव

पीपल कटकर गुम हुये, कौन करे फिर छाँव।३।

**

सेज माल  के  वास्ते, कटे  खेत  खलिहान

जिससे लोगों मिट गयी, गाँवों की पहचान।४।

**

सड़क योजना खा गयी, पगडंडी हर ओर

पहले सी होती  नहीं, अब  गाँवों  की…

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Posted on August 5, 2019 at 8:36am — 10 Comments

Comment Wall (15 comments)

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At 10:58am on October 18, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत शुक्रिया
At 2:30pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर' जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला अफ़जाई का आपने समय निकाला मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 10:47am on August 24, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्षमण धामी जी
At 10:03pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने के लिए!
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
At 5:20pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शुक्रिया लक्ष्मण जी
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

At 4:26pm on April 2, 2015, gumnaam pithoragarhi said…
लक्ष्मण धामी जी नमस्कार शुक्रिया आपने मुझे ये सम्मान दिया क्या मैं आपसे बात कर सकता हूँ यदि आप चाहें तो ................ मेरा नंबर ये है ,,,,,,,,,,7579 100213.........क्या आप अपना नंबर देंगे ?
At 10:37pm on February 17, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई लक्ष्मण धामीजी, यदि संभव हो तो 18 फरवरी को भी भेंट हो सकती है. मैं 18 फरवरी को भी प्रगति मैदान के पुस्तक मेले में उपस्थित रहूँगा.
शुभ-शुभ

 
 
 

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