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TEJ VEER SINGH
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TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
yesterday
TEJ VEER SINGH left a comment for Manan Kumar singh
"जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (चाहा था हमने जिसको हमें वो मिला नहीं)
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  जी। बहुत शानदार गज़ल। लेती है हर क़दम पे नया इम्तिहान येइस ज़िन्दगी से बढ़ के कोई भी सज़ा नहीं।।"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post लिए सुख की चाहतें हम - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी। बहुत शानदार गज़ल। उन्हीं रास्तों से जिन पर कभी तुम थे साथ मेरे‌चला जा रहा हूँ बेबस मैं अकेला अब सफर में।५।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on TEJ VEER SINGH's blog post हमारा दीपक - लघुकथा -
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई।"
Jan 17
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मिट्टी की तासीरें जिस को ज्ञात नहीं -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।बेहतरीन गज़ल। लूटपाट  है  जिसका  पेशा  पुरखोंं सेदेखो तो वो  खुद को  रहबर कहता है।७।"
Jan 16
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जिसके पुरखे भटकाने की - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी। लाज़वाब गज़ल। जिसके पुरखे भटकाने की रोटी खाया करते थेवो कहता है आज देश को राह दिखाने आया है।३। **जिस बस्ती को दसकों पहले हमने खूब सदाएँ दीउस बस्ती को सूरज  देखो  आज जगाने आया है।४।"
Jan 14
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय डॉ वंदना गुप्ता जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें।"
Jan 13
TEJ VEER SINGH left a comment for Dr. Vandana Gupta
"आदरणीय डॉ वंदना गुप्ता जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें।"
Jan 13
TEJ VEER SINGH commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post भारत दर्शन (द्वितीय कड़ी) मत्त गयंद छंद
"हार्दिक बधाई आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'जी। बेहतरीन रचना। गाँव जहाँ ब्रज गोकुल से हिय में अपने जन प्रेम बसायेकृष्ण दिखें हर बालक में अधरों पर वो मुरली लटकाये"
Jan 8
TEJ VEER SINGH commented on pratibha pande's blog post एहतियातन( लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय प्रतिभा पांडे जी। वर्तमान हालात और सम सामयिक घटनाओं पर बेहतरीन लघुकथा।"
Jan 8
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तू भी निजाम नित नया मत अब कमाल कर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी।बेहतरीन गज़ल। कितना किया अहित है यूँ अपने ही देश का लोगों ने उसके नाम  पर  पत्थर उछाल कर।२।"
Jan 8
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post त्रिशंकु (लघुकथा)
"हार्दिक आभार आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा जी।आपको भी नव वर्ष की हार्दिक बधाई एवम शुभकामनायें।"
Jan 8
Dr Ashutosh Mishra commented on TEJ VEER SINGH's blog post त्रिशंकु (लघुकथा)
"आदरणीय तेजवीर जी आपकी लघु कथाएँ अलहदा अंदाज ही होती हैं और मुझे बेहद पसंद भी आती हैं. इस उत्तम रचना के लिए भी तहे दिल बधाई स्वीकार करें ./ नव बर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ सादर "
Jan 8
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post त्रिशंकु (लघुकथा)
"हार्दिक आभार आदरणीय रवि भसीन "शाहिद"जी। मैं भी इस व्यवस्था की खामियों का शिकार हो चुका हूँ।उसी घटना से प्रेरित होकर इस लघुकथा की उत्पत्ति हुई है।"
Jan 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on TEJ VEER SINGH's blog post त्रिशंकु (लघुकथा)
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी, आपको इस लघु कथा के लिए बहुत बधाई। इतने कम शब्दों में और बहुत सुन्दर भाषा में आपने एक कड़वी सच्चाई को उजागर किया है। मैं जानता हूँ कि आपकी कथा में कितना सच है क्यूंकि इसी तरह का कुछ मेरे और मेरे परिवार के साथ घटित हो चुका है।"
Jan 6

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त्रिशंकु (लघुकथा)

त्रिवेदी जी अपने समय के ख्याति प्राप्त व्यापारी, समाज सेवक, राज नेता, मंत्री और ना जाने किस किस पद को शोभायमान कर चुके थे।

आज वृद्धावस्था के कारण जर्जर शरीर को लेकर  अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई में मरणासन्न स्थिति में पड़े थे। दवाओं का शरीर पर कोई अनुकूल प्रभाव नहीं हो रहा था। लेकिन अस्पताल वाले अति आशावादी  होने का नाटक कर रहे थे। वहाँ के डॉक्टरों का दावा था कि वे पूर्व में मृत प्रायः लोगों में भी जान डाल चुके हैं| वे इतनी मोटी मुर्गी को तबियत से हलाल करना चाहते थे।यमदूत बार बार आकर…

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Posted on January 4, 2020 at 11:00am — 8 Comments

ठूंठ - लघुकथा -

ठूंठ - लघुकथा -

राम दयाल अपनी घर वाली की जिद के आगे झुक गया। हालांकि उसकी दलील इतनी मजबूत तो नहीं थी लेकिन वह घर में किसी प्रकार की क्लेश नहीं चाहता था। उसकी घर वाली का मानना था कि उसके सासु और ससुर की वजह से उसके बेटे की शिक्षा पर बुरा प्रभाव पड़ रहा था।

अतः वह चाहती थी कि सासु ससुर जी को वृद्धाश्रम भेज दो।

आज मजबूरन राम दयाल उन दोनों को वृद्धाश्रम छोड़ कर घर वापस जा रहा था।लेकिन उसका मन इस कृत्य के लिये उसे धिक्कार रहा था।

वृद्धाश्रम से बाहर जैसे ही वह मुख्य सड़क…

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Posted on December 28, 2019 at 1:37pm — 8 Comments

उसूल - लघुकथा -

उसूल - लघुकथा -

"क्या बात है सर, आज पहली बार आपको व्हिस्की लेते देख रहा हूँ?"

"हाँ घोष बाबू, आज मैं भी कई साल बाद तनाव मुक्त महसूस कर रहा हूँ।"

"मगर सर मैंने आपको कभी हार्ड ड्रिंक लेते नहीं देखा।"

"आप सही कह रहे हैं। मैंने जिस दिन यह कुर्सी संभाली थी, अपने पिता को वचन दिया था कि मैं सेवा निवृत होने तक ड्रिंक नहीं करूंगा। आज रिटायर होने के साथ ही उस बंधन से मुक्त हो गया।"

"लेकिन सर, खैर छोड़िये...........?"

"क्यूँ छोड़िये, आज सब बंधन तोड़ दो। जो भी मन…

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Posted on November 16, 2019 at 12:42pm — 6 Comments

हमारा दीपक - लघुकथा -

हमारा दीपक - लघुकथा -

"अरे ज्योति देखो, अपना दीपक आज  दिये  बनाना सीख रहा है।"

"नहीं, बिलकुल नहीं। मेरा दीपक यह गंदा काम नहीं सीखेगा। सारे दिन मिट्टी से लथपथ बने रहो।"

"ज्योति, कैसी बात करती हो| यह तो हमारा पुश्तैनी धंधा है। मेरी सात पीढियाँ यही सब करती रही हैं। उसी से घर गृहस्थी चली है।"

"वह सब गुजरे जमाने की बातें हैं। तुम्हारे पुरखे अनपढ़ थे। उन्होंने शिक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया।"

"तुम्हारी बात से मैं सहमत हूँ लेकिन....।"

"लेकिन वेकिन कुछ नहीं,…

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Posted on October 26, 2019 at 11:50am — 5 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 5:41pm on November 18, 2019, JAWAHAR LAL SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी!

At 10:17am on September 8, 2019, Samar kabeer said…

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,आपकी महब्बतों के लिए दिल की गहराई से धन्यवाद ।

At 9:51pm on August 31, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय तेजवीर सिंह जी नमस्कार ! बहुत धन्यवाद् आपका आपने समय निकाला मेरी पहली ही लघुकथा के लिए और मेरा हौसला बढ़ाया आपका बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 10:43pm on August 15, 2019, Dr T R Sukul said…
हार्दिक धन्यवाद आदरणीय तेजवीर सिंह जी।
At 1:42pm on July 28, 2018, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय तेजवीर जी आपकी लघु कथाओं का नियमित पाठक हूँ और इस विधा पर लिखने का प्रयास भी आप सबकी रचनाएँ पढ़कर करता हूँ / आपके मित्रों की सूची में शामिल होना मेरे लिए सुखद है सादर प्रणाम के साथ 

At 4:09pm on December 8, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीय तेजवीर सिंह जी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें। 

At 8:19pm on December 4, 2015, kanta roy said…

वाह ! आदरणीय तेजवीर जी , गौरव का ये पल , आपका माह के सक्रीय सदस्य  चुने जाने के उपलक्ष्य में बहुत ख़ुशी महसूस हुई।  बधाई प्रेषित है।  

At 12:21pm on November 29, 2015, amod shrivastav (bindouri) said…
माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिए हार्दिक बधाई नमन सर
At 12:57pm on November 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तेज वीर सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:39pm on May 29, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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