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TEJ VEER SINGH
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surender insan commented on TEJ VEER SINGH's blog post बसंत - लघुकथा –
"बहुत अच्छी सार्थक रचना जी।बहुत बहुत बधाई हो जी।"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post लघुकथा - गवाह –
"हार्दिक आभार आदरणीय महेंद्र कुमार जी।"
4 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post बसंत - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी।"
4 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post बसंत - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय महेंद्र कुमार जी।"
4 hours ago
Mohammed Arif commented on TEJ VEER SINGH's blog post बसंत - लघुकथा –
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी आदाब,                        बहुत ही सशक्त और प्रभावशाली लघुकथा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
7 hours ago
Mahendra Kumar commented on TEJ VEER SINGH's blog post बसंत - लघुकथा –
"अच्छी लघुकथा है आ. तेज वीर सिंह जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
18 hours ago
Mahendra Kumar commented on TEJ VEER SINGH's blog post लघुकथा - गवाह –
"इस बढ़िया यथार्थपरक लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आ. तेज वीर सिंह जी. सादर."
19 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"हार्दिक बधाई आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी।बेहतरीन गीत।"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on सतविन्द्र कुमार's blog post बढ़े तो दर्द अक्सर टूटता है-ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय सतविंदर जी।बेहतरीन गज़ल। गुमाँ ने कस लिया जिस पर शिकंजाभटकता है वो दर-दर,टूटता है"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
"हार्दिक बधाई आदरणीय सलीम रज़ा रेवा साहब जी।बेहतरीन गज़ल। जो  ज़ख्म  खाके भी रहा है आपका सदा उस दिल पे फिर से आपने खंज़र चला दिया"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post बसंत - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय राजेश कुमारी साहिबा जी।"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post बसंत - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on TEJ VEER SINGH's blog post बसंत - लघुकथा –
"इससे प्यारा गिफ्ट क्या होगा बसंत विषय पर बहुत प्यारी लघु कथा लिखी है आद० तेजवीर सिंह जी बहुत बहुत बधाई "
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on TEJ VEER SINGH's blog post बसंत - लघुकथा –
"बहुत ख़ूबसूरत भावपूर्ण सकारात्मक रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय तेजवीर सिंह जी। किसी सैनिक की बीवी के लिए इससे अच्छा बसंत और तोहफ़ा और क्या हो सकता है सरप्राइज के साथ! बाद में थोड़ा और समय देकर इसे संवारा जा सकता है। सादर।"
yesterday
TEJ VEER SINGH posted a blog post

बसंत - लघुकथा –

बसंत - लघुकथा –रजनी के पति का जन्म बसंत पंचमी को हुआ था इसलिये घरवालों ने उसका नाम बसंत ही रख दिया था। रजनी उसके जन्म दिन को खूब जोश  के साथ मनाती थी। शादी को चार साल हुए थे लेकिन अभी तक उसकी गोद खाली थी। इसका एक मुख्य कारण उसके पति का सेना में होना भी था। चूंकि बसंत की तैनाती सीमा पर थी अतः परिवार साथ नहीं रख सकता था।अभी कुछ दिन पहले एक फोन आया था कि बसंत लापता है, तलाश जारी है। रजनी के अरमानों पर तो मानो वज्रपात हो गया था। वह बसंत के जन्म दिन के लिये क्या क्या सपने बुन रही थी। क्योंकि बसंत ने…See More
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on rajesh kumari's blog post मखमल के गद्दों पे गिरगिट सोए हैं (नवगीत 'राज')
"हार्दिक बधाई आदरणीय राजेश कुमारी जी।आज के संदर्भ में मन को विचलित करता, एक कटु सत्य को उजागर करता, कमाल का गीत।मखमल के गद्दों पे गिरगिट सोए हैं|"
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बसंत - लघुकथा –

बसंत - लघुकथा –

रजनी के पति का जन्म बसंत पंचमी को हुआ था इसलिये घरवालों ने उसका नाम बसंत ही रख दिया था। रजनी उसके जन्म दिन को खूब जोश  के साथ मनाती थी। शादी को चार साल हुए थे लेकिन अभी तक उसकी गोद खाली थी। इसका एक मुख्य कारण उसके पति का सेना में होना भी था। चूंकि बसंत की तैनाती सीमा पर थी अतः परिवार साथ नहीं रख सकता था।

अभी कुछ दिन पहले एक फोन आया था कि बसंत लापता है, तलाश जारी है। रजनी के अरमानों पर तो मानो वज्रपात हो गया था। वह बसंत के जन्म दिन के लिये क्या क्या सपने बुन रही…

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Posted on January 22, 2018 at 6:20pm — 9 Comments

लघुकथा - गवाह –

 लघुकथा - गवाह –

नेताजी की हवेली में काम करने वाली चंपा की नाबालिग लड़की रूपा की नेताजी के लड़के ने ज़बरन इज्जत लूट ली। नेताजी ने साम, दाम, दंड और भेद सब हथकंडे अपना लिये, लेकिन चंपा किसी भी तरह मामले को रफ़ा दफ़ा करने को राजी नहीं हुयी।

आखिरकार नेताजी अपनी औक़ात पर आ गये। चंपा को बोल दिया,"जा जो तेरी मर्जी हो कर ले"।

चंपा भी इतनी आसानी से हार मानने वाली नहीं थी। चीख चीख कर सारी बस्ती इकट्ठा कर ली। चंपा के दो चार पुराने शुभ चिंतकों ने मशविरा दे डाला कि सब जुलूस लेकर थाने चलो…

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Posted on January 20, 2018 at 8:54pm — 8 Comments

मृत्यु भोज - लघुकथा –

मृत्यु भोज - लघुकथा –

राघव के स्वर्गीय पिताजी का तीसरा संपन्न हुआ था अतः सारे परिवार के सदस्य आगे क्या करना है, इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे।

"क्यों राघव, तेरहवीं का क्या सोचा है? हलवाई बगैरह तय कर दिया या मैं किसी से बात करूं"?

"ताऊजी, आपको तो पता ही है कि पिताजी इन सब पाखंडों के खिलाफ़ थे। और मृत्यु भोज तो उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं था। इसीलिये माँ की मृत्यु पर उन्होंने हवन किया और अनाथालय के बच्चों को भोजन कराया था"।

"देख बेटा, तेरे पिता तो चले गये। उनके रीति…

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Posted on December 12, 2017 at 6:49pm — 14 Comments

प्रश्न चिन्ह - लघुकथा –

प्रश्न चिन्ह - लघुकथा –

आज छुट्टी थी तो सतीश घर के पिछवाड़े लॉन में अपने दोनों बच्चों के साथ बेडमिंटन खेल रहा था।

 "सतीश,…. सतीश,…. पता नहीं बाहर क्या कर रहे हो? दो तीन बार आवाज़ दी, सुनते ही नहीं हो"?

"क्या हुआ क्यों चिल्ला रही हो सुधा जी। कोई इमरजेंसी आ गयी क्या"?

"हाँ, यही समझ लो"।

"क्या हुआ| कुछ बोलो भी"?

"पैथोलोजी लैब वाला आया था, मम्मी की ब्लड रिपोर्ट दे गया है"।

सतीश ने उत्सुकता से पूछा,"क्या लिखा है"?

"ब्लड कैंसर लिखा…

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Posted on December 9, 2017 at 11:33am — 10 Comments

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At 4:09pm on December 8, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीय तेजवीर सिंह जी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें। 

At 8:19pm on December 4, 2015, kanta roy said…

वाह ! आदरणीय तेजवीर जी , गौरव का ये पल , आपका माह के सक्रीय सदस्य  चुने जाने के उपलक्ष्य में बहुत ख़ुशी महसूस हुई।  बधाई प्रेषित है।  

At 12:21pm on November 29, 2015, amod srivastav (bindouri) said…
माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिए हार्दिक बधाई नमन सर
At 12:57pm on November 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तेज वीर सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:39pm on May 29, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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