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पुस्तक समीक्षा

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इस ग्रुप में पुस्तकों की समीक्षा लिखी जा सकती है |

Location: Vishva
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"लघुकथा कौमुदी"  -  यथार्थ और कल्पना के बीच की ज़मीन पर पनपती लघुकथाएँ. . .

"लघुकथा कौमुदी"  -  यथार्थ और कल्पना के बीच की ज़मीन पर पनपती लघुकथाएँ. . .वर्तमान में लघुकथा, साहित्य की एक ऐसी विधा बन चुकी है जिसकी कथ्य शैली का विस्तार निरंतर बढ़ रहा है। बहुत से रचनाकार अपनी अभिव्यक्ति को, पहले से तय मानकों से हटकर  लिखने का…Continue

Tags: सँग्रह, लघुकथा

Started by VIRENDER VEER MEHTA May 1.

समीक्षा -समकालीन मुकरियाँ 1 Reply

समीक्षा : ‘समकालीन मुकरियाँ ’ सम्पादक – त्रिलोक सिंह ठकुरेला ISBN : 978-81-95138-18-0 प्रकाशक – राजस्थानी ग्रन्थागार,…Continue

Started by Anamika singh Ana. Last reply by Ashok Kumar Raktale Jan 24.

समीक्षा : 'न बहुरे लोक के दिन' (नवगीत संग्रह) 2 Replies

‘न बहुरे लोक के दिन’रचनाकार – अनामिका सिंहप्रकाशक – बोधि प्रकाशन, जयपुर (राज.)ISBN : 978-93-5536-091-5मूल्य -  रूपये…Continue

Tags: दिन, के, लोक, बहुरे,

Started by Ashok Kumar Raktale. Last reply by Ashok Kumar Raktale Jan 14.

समीक्षा पुस्तक : दोहा-सागर

समीक्षा : दोहा-सागर रचयिता : पंकज शर्मा ‘तरुण’ प्रकाशक : उत्कर्ष प्रकाशन, 142, शाक्य पूरा, कंकर खेडा, मेरठ केंट-२५०००१, (उ.प्र.) प्रथम संस्करण 2019 मूल्य : रुपये 150/-. पंकज शर्मा ‘तरुण’ का दोहा-संग्रह ‘दोहा-सागर’ हाथ में आया तो बहुत प्रसन्नता हुई.…Continue

Started by Ashok Kumar Raktale May 1, 2020.

देवभूमि के इतिहास का गौरव-पृष्ठ है –यह उपन्यास ‘चन्द्रवंशी’ ::डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

अतीत से जुड़ना भी एक मानवीय प्रवृत्ति है I जिन साहित्यकारों को अतीत से मोह होता है वे प्रायशः भारतीय इतिहास के किसी गौरवशाली पृष्ठ को टटोलते हैं और उसमे निहित सामग्री या इतिवृत्त के आधार पर कथा या काव्य रचते हैं I रामायण और महाभारत पर आधारित…Continue

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव Dec 31, 2019.

समीक्षा पुस्तक : टुकड़ा-टुकड़ा धूप (दोहा संकलन) 1 Reply

पुस्तक : टुकड़ा-टुकड़ा धूप (दोहा संकलन)सम्पादक : रेखा लोढ़ा ‘स्मित’सह-सम्पादक : वीरेंद्र कुमार लोढ़ामूल्य : रूपये 150/- मात्रप्रकाशक : बोधि प्रकाशन,सी-46, सुदर्शनपुरा इंडस्ट्रियल एरिया एक्सटेंशन,नाला रोड, 22 गोदाम, जयपुर -302006             दोहा एक ऐसा…Continue

Started by Ashok Kumar Raktale. Last reply by Saurabh Pandey May 7, 2019.

निकष पर -ःकिरण किरण रोशनी’            ::   डा. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 समीक्ष्य पुस्तक- किरण किरण रोशनी (कहानी संग्रह)लेखिका-रूबी शर्माप्रकाशन वर्ष- 2017 ई0प्रकाशक- नमन प्रकाशन, स्टेशन रोड, लखनऊ                ‘अब आप हैं ओैर ये कहानियाँ हैं’ यह कहकर लेखिका ने बड़ी ही विनम्रता से अपना संग्रह लोकार्पित किया है। इस संकलन…Continue

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव Apr 23, 2019.

ककनमठ( उपन्यास) समीक्षा 2 Replies

प्रथम प्रयास पुस्तक : ककनमठलेखक: पं. छोटेलाल भरद्वाजप्रकाशक: प.दिनेश भरद्वाजमूल्य: ५००/- रूपयेप्रथम संस्करण: १९८८द्वितीय संस्करण: २०१७ ऐतिहासिक पुरातत्विक पृष्ठभूमि पर आधारित इस उपन्यास में भारत के अंधकार-पूर्ण काल-खण्ड को कथांकित किया गया है|…Continue

Started by KALPANA BHATT ('रौनक़'). Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Feb 25, 2019.

पटना वाला प्यार (कहानी संग्रह) पुस्तक समीक्षा

पुस्तक : पटना वाला प्यारविधा- कहानी संग्रहलेखक- अभिलाष दत्तप्रकाशक-समदर्शी प्रकाशनसंस्करण- अक्टूबर,2018मूल्य - ₹150/-अभिलाष दत्त द्वारा लिखी हुई इस पुस्तक में कुल 11 कहानियाँ हैं। इस संग्रह को पढ़ते हुए यह मेहसूस ही नही हुआ कि मैं कोई कहानी पढ़ रही…Continue

Started by KALPANA BHATT ('रौनक़') Feb 23, 2019.

मेघदूत का छायानुवाद है ‘यक्ष का संदेश’- डॉ. पाण्डेय रामेन्द्र                                   प्रस्तुति – गोपाल नारायण श्रीवास्तव    7

यक्ष का संदेश – डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तवअंजुमन प्रकाशन, 942, मुट्ठीगंज, इलाहाबाद-3,प्रथम संस्करण 2018, कुल पृ0-92, मूल्य- रू. 150/-भारतीय वाड्मय जगत प्रसिद्ध है, सर्वमान्य है। संस्कृत भाषा के प्रख्यात कवि और नाटककार महाकवि कालिदास उँगलियों पर…Continue

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव Nov 30, 2018.

 
 
 

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किराए का मकान

दीवारें हैं छत हैंसंगमरमर का फर्श भीफिर भी ये मकान अपना घर नहीं लगताचुकाता हूँमैं इसका दाम, हर…See More
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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"//अनबुझ का अर्थ यहाँ कभी न बुझने वाली के सन्दर्भ में ही लिया गया है। हिन्दी में इसका प्रयोग ऐसे भी…"
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"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व सुझाव के लिए आभार। "
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"आ. भाई गुमनाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार। अनबुझ का अर्थ यहाँ कभी न…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। भूलवश अरकान गलत…"
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"आ. भाई गुमनाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
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सत्य

सत्यउषा अवस्थीअसत्य को धार देकरबढ़ाने का ख़ुमार हो गया हैस्वस्थ परिचर्चा को ग़लत दिशा देनालोगों की…See More
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"आदरणीय गुमनाम पिथौरागढ़ी जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
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