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पुस्तक समीक्षा

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इस ग्रुप में पुस्तकों की समीक्षा लिखी जा सकती है |

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मातृ धर्म से मानव धर्म की राह बताता उपन्यास " श्याम की माँ "

पुस्तक - श्याम की माँलेखक - साने गुरूजीअनुवादक - संध्या पेडणेकरप्रकाशक - प्रभात प्रकाशनमूल्य - ४०० रुपएसंस्करण - २०१७----------------------आज जबकि परिवार का प्रत्येक सदस्य जिंदगी की आपाधापी और भागदौड़ में इतना व्यस्त है कि दिन प्रति दिन संवादहीनता की…Continue

Started by shashi bansal Nov 5.

पृथ्वी के छोर पर ; लेखक – शरदिन्दु मुखर्जी : एक पाठकीय टिप्पणी -- शुभ्रांशु पाण्डेय

  बहुत दिनों से इस पुस्तक के बारे में लिखना चाह रहा था जोकि संस्मरण विधा की एक अनुपम कृति की तरह सामने आयी है. मै शरदिन्दु मुखर्जी की पुस्तक "पृथ्वी के छोर पर" की बात कर रहा हूँ. लेखक ने इस पुस्तक के प्रारंभिक अंशो को ओपेनबुक्सआनलाइन के पटल पर डाला…Continue

Tags: मुखर्जी, अण्टार्कटिका, शरदिन्दु, पर, के

Started by Shubhranshu Pandey Oct 24.

ज़िन्दगी से जुड़ी व ज़िन्दगी से जोड़ती राजेश कुमारी की लघुकथाएं 28 Replies

पुस्तक-   ‘गुल्लक’ (लघुकथा संग्रह)लेखिका-   राजेश कुमारीप्रकाशक-  अंजुमन प्रकाशन,…Continue

Tags: समीक्षा, पुस्‍तक, कुमारी, राजेश, गुल्‍लक

Started by Ravi Prabhakar. Last reply by Ravi Prabhakar Oct 10.

ग़ज़ल संग्रह “डाली गुलाब पहने हुए” : मेरे विचार 2 Replies

                      आज राजेश कुमारी ‘राज’ जी का ग़ज़ल संग्रह “डाली गुलाब…Continue

Started by मिथिलेश वामनकर. Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Oct 4.

समीक्षा : 'मन में भरो उजास' 1 Reply

“मन में भरो उजास” – कुण्डलिया छंद संग्रहछंदकार – सुभाष मित्तल ‘सत्यम्’प्रकाशक – बोधि प्रकाशन, जयपुर. (राज.)मूल्य – रुपये 150/- “बदलते परिवेश पर सत्यम् जी के उद्गार”जिसने कवि गिरधर को पढ़ा है, जिसने काका हाथरसी को मंचों से कुण्डलिया छंद नुमा रचनाएं…Continue

Started by Ashok Kumar Raktale. Last reply by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला Sep 20.

रश्मि शर्मा का कविता संग्रह : ' मन हुआ पलाश'

कृति‍ : मन हुआ पलाश लेखिका : रश्मि शर्मा वि‍धा : काव्‍य मूल्‍य : 320 रुपये प्रकाशक : अयन प्रकाशन , नई दि‍ल्‍ली मन के पलाश की तलाश------------------------------अपने नव प्रकाशित संग्रह ‘मन हुआ पलाश’ में कवयित्री रश्मि शर्मा अपनी कविताओं में स्त्री की…Continue

Started by डॉ.लक्ष्मी कान्त शर्मा Sep 4.

शफ़क--राजकुमारी नायक का कविता संग्रह

श्रीमती राजकुमारी नायक का काव्य संग्रह शफ़क  जब हमारी लेखिका संघ की अध्यक्षा आ. अनिता सक्सेना जी ने मुझे सौंपा तो यह मेरे लिए एक नई चुनौती लेकर आया. रुबरु राजकुमारी जी से मेरा कोई परिचय नहीं है, लेकिन जैसे जैसे कविता दर कविता शफ़क से गुजरती गई उनसे…Continue

Started by नयना(आरती)कानिटकर Aug 23.

‘करो परिष्कृत अंतर्मन को’- काव्य की आत्मा से एक संवाद

(कवयित्री माधवी मिश्रा  की पुस्तक  ‘करो परिष्कृत अंतर्मन को’  की संवाद शैली में आलोचना )                          ‘करो परिष्कृत अंतर्मन को‘ पढ़कर आत्मलीन हुआ ही था कि काव्य की आत्मा मुझमे प्रविष्ट हो गयी. उसने झकझोर कर कहा –‘क्या कर रहे हो ?’मैंने…Continue

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव Jun 26.

पुस्तक समीक्षा : लक्ष्मण की कुण्डलियाँ 3 Replies

समीक्षक : अशोक कुमार रक्ताले.       आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला जी कविताई तो लम्बे समय से कर रहे हैं किन्तु उन्होंने छंद रचनाएं करना पिछले कुछ वर्षों से ही प्रारंभ किया है और कुछ ही वर्षों में उन्होंने अपनी रचनाओं को इतना परिष्कृत कर लिया है की…Continue

Started by Ashok Kumar Raktale. Last reply by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला Mar 17.

‘पृथ्वी के छोर पर’- अभियान और अनुभूति का एक रोमांचक दस्तावेज - डॉ0 गोपाल नारायन श्रीवास्तव

हिन्दी साहित्य की गद्याधारित विधाओं में नाटक, उपन्यास, कहानी और निबंध के बाद जीवनी आत्म-कथा, संस्मरण, यात्रा वृत्तांत, रहस्य-रोमांच के इतिवृत्त और रेखाचित्र का विशेष स्थान है और इन इतर विधाओं को एक ही पुस्तक में ढाल देने  जैसे  जादुई करिश्मे का नाम…Continue

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव Mar 16.

 
 
 

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"आपके आशिर्वाद का दिल से शुक्रगुज़ार हूँ , आ0 दादा समर कबीर जी , अफरोज़ जी , उस्मानी जी ..... और निखार…"
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"आदरणीय समर कबीर जी, उत्साहवर्धन हेतु आपका कोटिशः आभार, आपका स्नेह बना रहे।"
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"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'इस उम्मीद पर अब भी इन्तिज़ार…"
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अजल की हो जाती है.... ज़िंदगी साँसों के महीन रेशों से गुंथी हुई बिना सिरों वाली एक रस्सी ही तो है…See More
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"जनाब मनोज कुमार श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
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"आदरणीय पंकजोम प्रेम जी इस रचना पर बहुत बधाई आपको । रदीफ़,,, "कौन है शायरी" ज़ू, मानी दे…"
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तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा

212 1222 212  1222तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैंरात - रात भर तेरा इंतज़ार करते हैंतुमको…See More
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