Posted on December 23, 2012 at 6:30pm 22 Comments 1 Like
ओ तरुणी
मेरे आंसू
तेरे दुख
कम नहीं कर पाएँगे
मेरी संवेदनाएँ
तेरे जख्म नहीं भर पायेंगे
तार -तार हैं सपने तेरे
रोम रोम में जहर भर गए
कुंठित होगा मन का कोना
घृणा के ज्वार पे तुम सवार
बदले की आग में भी जलोगी
ना कुछ करने की विवशता
आत्महत्या के लिए प्रेरित करेगी
ओ मेरी अनजान…
ContinuePosted on December 5, 2012 at 4:22pm 17 Comments 0 Likes
जानती हूँ
या कहो
बखूबी समझती हूँ
तुम्हारे चुपचाप रहने का सबब
हमारे बीच समझ का
जो अनकहा पुल है
कभी सच्चा लगता है और
कभी दिवास्वप्न सा
दुविधा की कई बातें हैं
जज्बातों की कई सौगाते भी हैं
जो अकेले बैठ के
अपने मन मंदिर में
कोमल अहसासों से पिरोयें हैं
साझा करने को कभी
पुल के इस पार तो आओ
दो बातें तो कर जाओ
जानती हूँ तुम्हें
या नहीं जानती की
उलझन तो सुलझा जाओ
Posted on June 3, 2012 at 9:46pm 24 Comments 2 Likes
सांसे जब तक चलती हैं
तब तक चलता है
सुख- दुःख का एहसास
मान -अपमान की पीडाएं
उंच -नीच , जात -पात का भेद
सम्पन्नता -विपन्नता का आंकलन
नहीं मिलने मिलाने के उलाहने
प्रतियोगिता की अंधी दौड़
एक दुसरे को मिटा डालने का षड़यंत्र
सांसे जब तक टूटती हैं
उस क्षण को
ग्लानी से भरता है मन
और छोड़ देता है तन को
बची रह जाती है
उसकी कुछ यादें
अंततः कुछ भी नहीं बचता शेष
और फिर से शुरू हो…
ContinuePosted on June 3, 2012 at 9:29pm 11 Comments 2 Likes
नियति तू कब तक खेल रचाएगी
क्या हम सचमुच हैं
तेरे ही कठपुतले
तू जैसा चाहेगी
वैसा ही पाठ सिखाएगी
नियति तू कब तक खेल रचाएगी
कभी कुछ खोया था
कंही कुछ छुट गया था
कभी छन् से कुछ टूट गया था
भीतर जख्मो के कई गुच्छे हैं
गुच्छो के कई सिरे भी हैं
पर उनके जड़ो का क्या
तेरा ही दिया खाद्य औ पानी था
नियति तू कब तक खेल रचाएगी
कंही कुछ मर रहा है
कंही कुछ पल रहा…
Continue
श्रीराम said… सुंदर प्रस्तुति ... बहुत-बहुत बधाई
कुमार गौरव अजीतेन्दु said… महिमा जी, नववर्ष की हार्दिक बधाई स्वीकार करें.....
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said… महिमा जी, सस्नेह
प्रतियोगिता में प्रस्तुत आपकी रचना दिल की गहराईयों को छु गयी. बधाई.
Laxman Prasad Ladiwala said… महिमा जी आभार आप का,
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said… .महिमा जी आभार आप का देश भक्ति रचना को आप ने सराहा ..आज कल उपस्थिति कुछ कम दर्ज हो रही ही ..प्रभु सब मंगले करें ...जय हिंद ..प्रोत्साहन के लिए आभार ....स्वतन्त्रता दिवस की बधाई
bahut hi acchi likhi hai khas kar saanse.(parvanchnaye)
aap to lagta hai adhyatmikta me bhi ruchi rakhti hai.
bahut bahut badhai.
डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said… महिमा जी नमस्कार ! आपकी बधाइयों के लिए बहुत आभारी हूँ । धन्यवाद !
DEEPAK SHARMA 'KULUVI' said…
डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said… महिमा जी बहुत बहुत शुक्रिया आपके उत्साह वर्धक प्रतिक्रियाओं के लिए !
praveen singh "sagar" said… NIJATWA KI KHATIR ko mahine ki sarwashresth rachna ghishit hone par aapko tahe dil se dher saari badhaiyaan.
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