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Manan Kumar singh
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manan Kumar singh's blog post प्रजातंत्र(लघुकथा)
"बहुत ही बढ़िया सांकेतिक लघुकथा लिखी है आदरणीय..."
Jul 13
Neelam Upadhyaya commented on Manan Kumar singh's blog post प्रजातंत्र(लघुकथा)
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी, नमस्कार ।  अच्छी लघुकथा की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई । "
Jul 9
babitagupta commented on Manan Kumar singh's blog post प्रजातंत्र(लघुकथा)
"बेहतरीन लघु कथा ,हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिय्र्गा आदरणीय सरजी।"
Jul 8
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post प्रजातंत्र(लघुकथा)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 8
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post प्रजातंत्र(लघुकथा)
"आपका बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय शहजाद जी।"
Jul 8
Sheikh Shahzad Usmani commented on Manan Kumar singh's blog post प्रजातंत्र(लघुकथा)
"बहुत बढ़िया पेशकश। हार्दिक बधाई जनाब मनन कुमार सिंह साहिब।"
Jul 8
Manan Kumar singh posted a blog post

प्रजातंत्र(लघुकथा)

'एक सेठ के पाँच पुत्र थे, दो खूब पढ़े-लिखे,एक कुछ-कुछ पढ़ा हुआ और शेष दो के लिए काला अक्षर भैंस बराबर था।सेठ के मरते समय की बात के अनुसार घर की मिल्कियत(मालिकाना हक) साल भर के लिए पाँचों भाइयों में से सर्वसम्मति से या बहुमत से चुने हुए एक भाई को सौंप दी जाती।वह घर का कामकाज देखता,अपने हिसाब से विभिन्न मदों में धन खर्च करता।कभी पहला पढ़ा-लिखा भाई मालिक होता,तो कभी दूसरा।बीच-बीच में तीसरा कम पढ़ा लिखा भी मालिक बन जाता,अन्य दो अँगूठाछाप भाइयों की मदद से।पर उसकी कुछ चल नहीं पाती।ढुलमुल रवैये और…See More
Jul 8
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"आपका बी"
Jun 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"बहुत बहुत आभार आदरणीय।"
Jun 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीया नीता जी।"
Jun 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"आदरणीय समर जी,शुक्रिया।"
Jun 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय योगराज जी।"
Jun 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"आपका आभार आदरणीय।"
Jun 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"आपका आभार।"
Jun 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"आपका आभार।"
Jun 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-39 (विषय: समीकरण")
"शुक्रिया आपका।"
Jun 30

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Male
City State
Mumbai
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E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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प्रजातंत्र(लघुकथा)



'एक सेठ के पाँच पुत्र थे, दो खूब पढ़े-लिखे,एक कुछ-कुछ पढ़ा हुआ और शेष दो के लिए काला अक्षर भैंस बराबर था।सेठ के मरते समय की बात के अनुसार घर की मिल्कियत(मालिकाना हक) साल भर के लिए पाँचों भाइयों में से सर्वसम्मति से या बहुमत से चुने हुए एक भाई को सौंप दी जाती।वह घर का कामकाज देखता,अपने हिसाब से विभिन्न मदों में धन खर्च करता।कभी पहला पढ़ा-लिखा भाई मालिक होता,तो कभी दूसरा।बीच-बीच में तीसरा कम पढ़ा लिखा भी मालिक बन जाता,अन्य दो अँगूठाछाप भाइयों की मदद से।पर उसकी कुछ चल नहीं पाती।ढुलमुल रवैये…

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Posted on July 8, 2018 at 8:30am — 6 Comments

लालटेन(लघुकथा)

स्कूटर फर्राटे से थाने के सामने निकला।यह बात थाने को नागवार गुजरी।एक सिपाही ने हाथ दिया।स्कूटर रुक गया।उसने थाने के कंपाउंड में चलने का इशारा किया।अब स्कूटर थाने के मेन गेट पर खड़े इंचार्ज के सामने खड़ा था।सवार बगल में थे।इंचार्ज ने गाड़ी के कागज की माँग की,जो दिखा दिए गए।उसे गाड़ी का नंबर पढ़ने में दिक्कत हो रही थी।बार बार बताने के बावजूद वह अटक रहा था।अंत में स्कूटर सवार बुजुर्ग ने ध्यान दिलाया कि नंबर तो ठीक ही लिखा हुआ है।हाँ, लिखावट थोड़ी फीकी हो गयी है।लजाया-सा इंचार्ज झिझक भरे लहजे में…

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Posted on May 8, 2018 at 7:23am — 13 Comments

गजल(कहूँगा बात मैं....)

1222    1222    1222   1222

      ---------------------------------

कहूँगा बात हो जैसी,अरे मैं तो सलीके से

समझ लो बासमझ,झगड़ो नहीं ,आओ सलीके से।1



लगे हैं दाग ये कितने तुम्हारे आस्तीनों पर

अभी भी वक्त है पगले जरा धो लो सलीके से।2



बहाया खूं पता कितना शरीफों का, गरीबों का?

अगर सच में जिगर धड़के जरा रो लो सलीके से।3



बहुत इमदाद मुँह से बाँटते हो तुम गरीबों में

फ़टी झोली अभी भी है विलखते वो सलीके से।4



पटकने सर लगे कितने कहा…

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Posted on May 3, 2018 at 8:09pm — 10 Comments

गजल(ओ प न बु क् स औ न ला इ न)

2122    2122  212
ओस की बूंदें भी' प्यासी हैं अभी
परकटी चाहें अधूरी हैं अभी।1

नश्तरों का हाल अब मत पूछना
बुत बनी रातें यूँ तारी हैं अभी।2

क्या करोगे जानकर सब सिलसिला?
सच मरा है, बातें' टेढ़ी हैं अभी।3

औरतों के नाम लेके आजकल
नख चले,घातें यूँ' माती हैं अभी।4

लाइलाजों का करो कुछ तो जतन
इल्म वाली बाँहें' बाकी हैं अभी।5

नर्म बिस्तर के सिवा झपकी नहीं?
नाखुदाओ! लपटें' खासी हैं अभी।6
"मौलिक व अप्र का शि त"

Posted on April 22, 2018 at 8:49am — 8 Comments

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At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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