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Manan Kumar singh
  • बिहार
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Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय योगराज जी।"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"आभार आदरणीय लक्ष्मण भाई।"
Nov 29
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"लघुकथा पर अपनी बेबाक और सार्थक टिप्पणी करने हेतु आपका आभार आदरणीय उस्मानी जी।यह मेरे लिए उत्साहवर्धन है,सादर।"
Nov 29
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"शुक्रिया अजय जी।"
Nov 29
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"साथ***- तुमने मेरा साथ नहीं दिया।- कैसे?' साथ चलती आकृति ने सवाल किया।' मैंने तुम पर बहुत भरोसा किया।' फिर क्या?'- मुझे कोई फायदा नहीं हुआ।'' कैसा फायदा मेरे भाई?''अरे तुमने साथ देने की बात की थी।' कि साथ…"
Nov 29
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post संघे शक्ति(लघुकथा)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 25
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"बहुत बहुत आभार आदरणीय। "
Nov 23
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post कबड्डी (लघुकथा)
Nov 23
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post कबड्डी (लघुकथा)
Nov 23
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"बहुत सुंदर गजल भाई लक्ष्मण जी। गांठ जानदार लगी है,बधाई।"
Nov 23
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आभार आदरणीय लक्ष्मण भाई।"
Nov 23
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आभार आपका आदरणीय।"
Nov 23
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"शुक्रिया।"
Nov 23
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आभार आदरणीय तसदीक जी।वैसे तो वहम अब भाषा में रच बस गया है,पर इस शब्द के मूल रूप पर कायम रहने का भी अपना चलन है।अतः,मैंने शेर ही बदल डाला है;भाव प्रकट होने से अभिप्राय होना चाहिए।"
Nov 23
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"जी ऐसे भी हो सकता है।"
Nov 22
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय समर जी, वहम वाली उला को यूं कह सकते हैं: दिलासा को जहां में फिर पसारा जा रहा है। या पूरा शेर भी बदल सकते हैं: कहा जाता ,मिटा दें खार मन से जिस कदर भीभिंगोकर फिर बतासा को पसारा जा रहा है। @"
Nov 22

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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संघे शक्ति(लघुकथा)

संघे शक्ति

***

पका फल पेड़ पर लटका हुआ था।भालू परेशान था।वह चाहता था कि पका फल उसका रेंगता हुआ बेटा तोड़ लाए जिससे कुल खानदान का यश उजागर हो।पर बेटा वहां तक पहुंचे कैसे,यह यक्ष प्रश्न बना हुआ था। दूसरे भालू,लोमड़ी से बातें हुईं।उम्मीद बंधी।समय मुकर्रर हुआ।भीड़ जुट गई कि स्वर्गवासी भालू काका का पोता आज ऊंचे पेड़ से फल तोड़ लाएगा, भालू भाई और लोमड़ी काकी उसे ऊपर तक पहुंचने में मदद करेंगे। पर यह क्या.....?समय गुजरते निकल गया।न भालू काका आये,न लोमड़ी काकी। बेचारा बाप मन मसोसता रहा। सारे…

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Posted on November 17, 2019 at 10:16am — 1 Comment

कबड्डी (लघुकथा)

उसे स्कूल के दिन याद आ रहे हैं,जब क्लास शुरू होने के पहले,टिफिन में और कभी कभी स्कूल छूटने के बाद भी कबड्डी खेलना कितना पसंद था उन्हें। बुढ़िया कबड्डी में दोनों पक्षों की एक एक बूढ़ी गोल यानी गोल खिंचे हुए दायरे में हुआ करती।प्रत्येक बूढ़ी के आगे विरोधी पक्ष के खिलाड़ी होते। बारी बारी से दोनों पक्ष अपनी अपनी बूढ़ी को मुक्त कराने की कोशिश करते,वह सत्ता की प्रतीक होती;रानी भी कह लें।एक पक्ष का कोई खिलाड़ी "कबड्डी कबड्डी...." करते हुए दौड़ता,विपरीत पक्ष के खिलाड़ी भागते कि कहीं वह…

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Posted on November 16, 2019 at 9:30am — 4 Comments

अपनी अपनी धुन(लघुकथा)

कोयल मौसम में समरसता घोल रही थी।लोग उसकी सुमधुर धुन पर थिरक से रहे थे। लग रहा था कि पहले की रही सही रंजिश अब नहीं रही।यह सब कौवे को नागवार लगा।उसने अकस्मात अपनी पूरी कर्कशता से कांव कांव करना शुरू कर दिया।कोयल बिदकी,"यह कर्कशता कैसी भाई?अभी मेल जोल का माहौल है।खुशियां बांटें"।

"कैसा मेल जोल?तू मेरी आवाज बदल सकती है क्या?"

"नहीं।"

"तो फिर? तू अपनी गा, मैं अपना गाऊंगा।"

"ऐसा?"

"और क्या?अपनी आवाज में…

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Posted on November 10, 2019 at 7:30am — 5 Comments

काम

काम(लघुकथा)

***

"हम तुम्हें मुफ्त में सबकुछ देंगे", नेताजी ने एलान किया।

"मुफ्त में सबकुछ?" भीड़ से आवाज आई।

"हां। क्यों भरोसा नहीं तुमलोगों को?"

"अरे दे सको,तो काम दो सबको।"भीड़ से आवाज आई।

"हां, हां। काम चाहिए,काम।जैसे तुम्हे रोजगार मिले,औरों को भी दोगे,ऐसा बोलो।"भीड़ फिर से चिल्लाई।

"हम भी तो कुछ देने ही आए हैं।"

"जब सब कुछ देना ही है,तो फिर कुछ क्यों?हम बाद में ही मांगेंगे।तुम्हारा इस्तीफा भी,ज़रूरी हुआ तो।"

"ऐं?"नेताजी बगलें झांकने  लगे।

 "…

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Posted on November 3, 2019 at 7:50pm — 5 Comments

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At 2:33pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!
At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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