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डिम्पल गौड़ 'अनन्या'
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Welcome, डिम्पल गौड़ 'अनन्या'!

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Female
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Ahmedabad
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rajasthan
Profession
Teacher
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Poetess, Writer

डिम्पल गौड़ 'अनन्या''s Blog

तोहफा (कहानी )

तोहफा :

हेमा के हाथों में मेहँदी लग चुकी थी | विवाह में अब केवल दो ही दिन शेष रह गए थे |

रिश्तेदारों के नाम पर आए हुए कुछ लोगों में से दो महिलाएं खुसर फुसर कर रहीं थीं ||

“अरे इसके चेहरे पर तो दुल्हनों जैसी चमक ही नहीं है कितना बुझा बुझा सा मुखड़ा लग रहा है!

“अब क्या करे बेचारी ! माँ बाप ने कैसे न कैसे, जोड़ तोड़ करके तो यह रिश्ता करवाया है | “

"हाँ तुम सही कह रही हो | लेकिन यह अकेली ही तो इस घर की जिम्मेदारी उठा रही थी| अब क्या होगा इसके जाने के बाद ?"

"भाई है न…

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Posted on April 25, 2015 at 12:47am — 10 Comments

क्योंकि वह एक लड़की है (कविता )

ख्वाहिशों के सूरज का उगना हर सुबह 

मन की खिड़की से झांकना हर सुबह 

परदे मन पर लगाना चाहती है 

ओट में हसरतों को दबाना चाहती है 

क्योंकि वह एक लड़की है 

समाज की नज़रों में लड़की बोझ होती है 

उसे उम्मीदों के आँगन में 

आशाओं के फूल खिलाने का 

कोई हक नहीं होता 

उसे हक है बस इतना कि 

पराया धन कहलाए 

किसी और के मधुबन को

चमन वो बनाए 

लगा कर माथे रक्तिम गोल चिन्ह 

किसी की पत्नी तो 

किसी की बहू वह कहलाए 

पैरों में बाँध कर…

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Posted on April 21, 2015 at 12:00am — 16 Comments

नारी और देवी तुल्य ? (अनन्या )

नारी बरसों से   देवी तुल्य कहलाती है 

मगर यह बात मुझे अचंभित कर जाती है 

केवल कागजों में छपी हैं यह कागज़ी बातें 

सच्चाई मगर.. कुछ और बयां कर जाती है 

चीखें दबी -दबी सी ,साँसे घुटी. घुटी सी 

पथराई आँखें बदहवास सी नज़र आती है 

रुदन को गुप्त रख स्मित बरसाती है   

निशब्द सी धडकनें  डरकर रह जाती है 

जज्बात उसके  सदा सहमें से लगते हैं 

घरोंदे में छुपकर  वह जीवन बिताती है 

सिंदूर में रंग कर…

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Posted on February 27, 2015 at 1:00am — 18 Comments

अधूरी आस (कहानी )

“मम्मी मैं किटी पार्टी में जा रही हूँ , आप हेमा को कह दो वह विवान को दूध दे देगी ...वैसे भी विवान मेरे पास नहीं उसी के पास रहता है |” अपने लहराते हुए बालों को झटका देते हुए फाल्गुनी ने कहा ||स्टाइल में रहना, फैशनेबल कपड़े पहनना, सहेलियों के बीच अपनी सुन्दरता की प्रशंसा सुनना, यही तो मनपसंद कार्य है फाल्गुनी का | जन्म तो दिया बच्चे को मगर ममता नहीं लुटा पाई |

इसके विपरीत हेमा जो कि अपने से अधिक चिंता करती है घर परिवार की...अपनी जेठानी के पुत्र पर  जान से भी अधिक स्नेह लुटाती है मगर…

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Posted on February 14, 2015 at 3:30pm — 14 Comments

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At 3:18am on February 14, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:23pm on February 18, 2015, डिम्पल गौड़ 'अनन्या' said…

आपका बहुत बहुत आभार श्रीमान जीतेन्द्र जी |

At 9:33pm on February 18, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का स्वागत है, आदरणीया डिम्पल जी.

सादर!

 
 
 

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