For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डिम्पल गौड़ 'अनन्या'
  • Female
  • ahmedabad ,gujarat
  • India
Share

डिम्पल गौड़ 'अनन्या''s Friends

  • pratibha tripathi
  • Mohinder Kumar
  • विनोद खनगवाल
  • narendrasinh chauhan
  • जितेन्द्र पस्टारिया
  • वेदिका
  • योगराज प्रभाकर
  • asha pandey ojha
  • Er. Ganesh Jee "Bagi"

डिम्पल गौड़ 'अनन्या''s Groups

 

Welcome, डिम्पल गौड़ 'अनन्या'!

Profile Information

Gender
Female
City State
Ahmedabad,Gujarat
Native Place
rajasthan
Profession
Teacher
About me
मैं एक लेखिका हूँ | मेरी विधाएँ कविता , कहानी , लघुकथा ,ग़ज़ल इत्यादि हैं

डिम्पल गौड़ 'अनन्या''s Blog

तोहफा (कहानी )

तोहफा :

हेमा के हाथों में मेहँदी लग चुकी थी | विवाह में अब केवल दो ही दिन शेष रह गए थे |

रिश्तेदारों के नाम पर आए हुए कुछ लोगों में से दो महिलाएं खुसर फुसर कर रहीं थीं ||

“अरे इसके चेहरे पर तो दुल्हनों जैसी चमक ही नहीं है कितना बुझा बुझा सा मुखड़ा लग रहा है!

“अब क्या करे बेचारी ! माँ बाप ने कैसे न कैसे, जोड़ तोड़ करके तो यह रिश्ता करवाया है | “

"हाँ तुम सही कह रही हो | लेकिन यह अकेली ही तो इस घर की जिम्मेदारी उठा रही थी| अब क्या होगा इसके जाने के बाद ?"

"भाई है न…

Continue

Posted on April 25, 2015 at 12:47am — 10 Comments

क्योंकि वह एक लड़की है (कविता )

ख्वाहिशों के सूरज का उगना हर सुबह 

मन की खिड़की से झांकना हर सुबह 

परदे मन पर लगाना चाहती है 

ओट में हसरतों को दबाना चाहती है 

क्योंकि वह एक लड़की है 

समाज की नज़रों में लड़की बोझ होती है 

उसे उम्मीदों के आँगन में 

आशाओं के फूल खिलाने का 

कोई हक नहीं होता 

उसे हक है बस इतना कि 

पराया धन कहलाए 

किसी और के मधुबन को

चमन वो बनाए 

लगा कर माथे रक्तिम गोल चिन्ह 

किसी की पत्नी तो 

किसी की बहू वह कहलाए 

पैरों में बाँध कर…

Continue

Posted on April 21, 2015 at 12:00am — 16 Comments

नारी और देवी तुल्य ? (अनन्या )

नारी बरसों से   देवी तुल्य कहलाती है 

मगर यह बात मुझे अचंभित कर जाती है 

केवल कागजों में छपी हैं यह कागज़ी बातें 

सच्चाई मगर.. कुछ और बयां कर जाती है 

चीखें दबी -दबी सी ,साँसे घुटी. घुटी सी 

पथराई आँखें बदहवास सी नज़र आती है 

रुदन को गुप्त रख स्मित बरसाती है   

निशब्द सी धडकनें  डरकर रह जाती है 

जज्बात उसके  सदा सहमें से लगते हैं 

घरोंदे में छुपकर  वह जीवन बिताती है 

सिंदूर में रंग कर…

Continue

Posted on February 27, 2015 at 1:00am — 18 Comments

अधूरी आस (कहानी )

“मम्मी मैं किटी पार्टी में जा रही हूँ , आप हेमा को कह दो वह विवान को दूध दे देगी ...वैसे भी विवान मेरे पास नहीं उसी के पास रहता है |” अपने लहराते हुए बालों को झटका देते हुए फाल्गुनी ने कहा ||स्टाइल में रहना, फैशनेबल कपड़े पहनना, सहेलियों के बीच अपनी सुन्दरता की प्रशंसा सुनना, यही तो मनपसंद कार्य है फाल्गुनी का | जन्म तो दिया बच्चे को मगर ममता नहीं लुटा पाई |

इसके विपरीत हेमा जो कि अपने से अधिक चिंता करती है घर परिवार की...अपनी जेठानी के पुत्र पर  जान से भी अधिक स्नेह लुटाती है मगर…

Continue

Posted on February 14, 2015 at 3:30pm — 14 Comments

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 3:18am on February 14, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:23pm on February 18, 2015, डिम्पल गौड़ 'अनन्या' said…

आपका बहुत बहुत आभार श्रीमान जीतेन्द्र जी |

At 9:33pm on February 18, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का स्वागत है, आदरणीया डिम्पल जी.

सादर!

At 10:42pm on February 17, 2015, pratibha tripathi said…

अदरणीय डिम्पल जी आपका बहुत आभार और स्वागत है मेरी कविताओं को पढ़ने के लिए। सादर धन्यवाद । 

At 5:34pm on February 8, 2015, pratibha tripathi said…

aadarniy dimpal gaur ji mujhe mitr banane ke liye dil se aapka dhanywad deti hu aur apaka swagat karti . 

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Manoj kumar shrivastava posted blog posts
17 minutes ago
Rahila commented on Rahila's blog post परित्यागी (कविता)राहिला
"आदरणीय आरिफ़ साहब सिर्फ अभिव्यक्ति है। मुझे छंद ,मात्रा देखकर ही बुखार आ जाता है। यदि ये कविता के…"
48 minutes ago
Mohammed Arif commented on Rahila's blog post परित्यागी (कविता)राहिला
"आदरणीया राहिला जी आदाब, सुंदर भावाभिव्यक्ति । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । यह रचना किस छंद में लिखी…"
8 hours ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post महफिल का भार
"सम्माननीय सुरेन्द्रनाथ सिंह जी, आपका हृदय से आभार। आपसे सतत मार्गदर्शन की अपेक्षा है।"
9 hours ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post महफिल का भार
"आदरणीय समर कबीर जी आपका हृदय से आभार। आपके मार्गद मार्गदर्शन का सतत अभिलाषी हूं। धन्यवाद!"
9 hours ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post बने-बनाये शब्दों पर
"कोटिशः आभार आदरणीय समर कबीर जी, आपकी बधाई अंतस से स्वीकार करता हूं, आपसे सतत मार्गदर्शन की अपेक्षा…"
10 hours ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post स्वच्छ बर्तन में मैला मन
"कोटिशः आभार आदरणीय शेख शहजाद असमानी जी,  आपसे सतत मार्गदर्शन का अभिलाषी हूं"
10 hours ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post स्वच्छ बर्तन में मैला मन
"कोटिशः आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी, आपसे सतत मार्गदर्शन की अपेक्षा है।"
10 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post महिला सशक्तिकरण (कामरूप छःन्द)
"जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब ,महिलाओं का दर्द बयान करते सुन्दर कामरूप छन्द हुए हैं ,मुबारकबाद क़ुबूल…"
10 hours ago
Kumar Gourav updated their profile
10 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (नाज़ कब वो भी उठा पाते हैं दीवाने का )
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
10 hours ago
Samar kabeer commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"जनाब प्रदीप कुमार पाण्डेय'दीप'जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । कुछ…"
10 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service