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अजय गुप्ता
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कैलेंडर

नौ तारीख तक कैलेंडर न आने से असुविधा होती है। यदि पहले से निर्धारित हो और 1-2 तारीख तक कैलेंडर आ जाए तो आसानी हो जाये।उम्मीद है आयोजक इस और ध्यान देंगेContinue

Started Apr 9

 

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Latest Activity

अजय गुप्ता commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"जनाब समर साहब। आप बड़े भाई व मार्गदर्शक हैं। यदि कोई भूल हुई है तो क्षमा चाहता हूं।आगे से ध्यान रहेगा कि ऐसा न हो।  मैं समझता हूं कि दो-तीन शब्दों की टिप्पणी करना अच्छा नहीं होता। किंतु कईं बार शब्द नहीं मिलते किसी चीज़ का वर्णन करने के लिए। बस…"
yesterday
PHOOL SINGH commented on अजय गुप्ता's blog post ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)
"सुंदर गजल,  हार्दिक बधाई "
Thursday
अजय गुप्ता commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"अहहहा"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अजय गुप्ता's blog post ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)
"आ. भाई अजय जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई । बाकी त्रुटियों के विषय में आ. समर जी बता ही चुके हैं । शेष शुभ शुभ..."
Wednesday
अजय गुप्ता commented on अजय गुप्ता's blog post ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)
"उपरोक्त रचना #मौलिक है। अप्रकाशित नहीं। मेरी पुस्तक रंगोली में प्रकाशित हो चुकी है। ब्लॉग के लिए भी इस शर्त का मुझे पता नहीं था तो ऐसे भूलवश डाल दी। आगे से ध्यान रहेगा। इस रचना को यदि प्रबंधन चाहे तो हटा सकता है। सादर"
Wednesday
TEJ VEER SINGH commented on अजय गुप्ता's blog post ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)
"हार्दिक बधाई आदरणीय अजय गुप्ताजी।बेहतरीन गज़ल । नहीं शिकवा है साँपों से डसे जाता सपेरा है"
Wednesday
Samar kabeer commented on अजय गुप्ता's blog post ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)
"जनाब अजय गुप्ता जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । सबसे पहली बात ये कि आपने मंच के नियमानुसार मौलिक व अप्रकाशित नहीं लिखा है । ' दिखे हरसूँ अँधेरा है' इस मिसरे में 'हरसूँ' को "हरसू" कर लें…"
Tuesday
अजय गुप्ता posted a blog post

ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)

दिखे हरसूँ अँधेरा हैकहाँ जाने सवेरा है नहीं दिखता कहीं रस्ताकुहासा है घनेरा है हुनर सीखें नए कैसेगुरु बिन आज चेरा है चुराता जा रहा साँसेंसमय है या लुटेरा है बनाता है जो इंसा कोये जीवन वो ठठेरा है नहीं शिकवा है साँपों सेडसे जाता सपेरा है नहीं घर रास है मुझकोदिलों में ही बसेरा है तेरा क्या और क्या मेराचले माया का फेरा है भरे हैं रंग दुनिया मेंछिपा बैठा चितेरा हैSee More
Tuesday
अजय गुप्ता commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"भाई मनोज जी, सबसे पहले तो अच्छी ग़ज़ल और अलग अंदाज़ अशार के लिए बधाई. अब आपकी ग़ज़ल पर आते है. ///वेदना के पल कुँवारे ले चलोकुछ तो जीने के सहारे ले चलो --मतला पढने में अच्छा लग रहा है. /////दिल बहुत मायूस है परदेस मेंबस हमें अब घर हमारे ले चलो ---- घर…"
Monday
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-44 (विषय: परिणाम)
"चलो कोई बात नहीं **************** हॉस्पिटल का लेबर रूम। और उसके बाहर का बेंच और उस बेंच के ठीक ऊपर लगी एक तख़्ती। जिसपर लिखा है “लड़का-लड़की एक समान”। ये तख़्ती मैं हूँ।और मैंने देखा है लेबर रूम के अंदर के परिणाम से बाहर की प्रतिक्रिया को…"
Nov 29
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-44 (विषय: परिणाम)
"अच्छी लघुकथा अनिता जी।"
Nov 29
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-44 (विषय: परिणाम)
"वाह। इंसानियत का फर्ज सबसे बड़ा फ़र्ज़ है और उसको निभाने का परिणाम मधुर ही आता है। सुंदर संदेश"
Nov 29
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-44 (विषय: परिणाम)
"सुकुल जी। लघुकथा अच्छी हुई है। किन्तु जयप्रकाश चौकसे जी के कॉलम के अंश अक्षरशः रखने की जगह आप कुछ पतिवर्तन कर सकते थे।  आप खुद समझदार हैं।"
Nov 29
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-44 (विषय: परिणाम)
"कनक जी अच्छी लघुकथा। अन्याय को सहना भी पाप है। और सामूहिक इच्छाशक्ति से ही उसे मिटाया जा सकता है। बढ़िया संदेश"
Nov 29
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-44 (विषय: परिणाम)
"समसामयिक राजनीति और परिदृश्य में वोट का इस्तेमाल सोच समझ कर करने को प्रेरित करती लघुकथा। उत्तम"
Nov 29
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-44 (विषय: परिणाम)
"बढ़िया लघुकथा। नीतियों का परिणाम किस प्रकार कहां जा रहा है। उसपर चिंतन की आवश्यकता को बल देती ।"
Nov 29

Profile Information

Gender
Male
City State
Karnal (Haryana)
Native Place
Karnal
Profession
Business
About me
ग़ज़ल, कविता, लघुकथा लेखन में रूचि. 3 ऑनलाइन पुस्तकें प्रकाशित. एक काव्य संग्रह हरियाणा साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित. parivartaaajkal.com पर 'अजय की कलम' के शीर्षक से नियमित कॉलम

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अजय गुप्ता's Blog

ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)

दिखे हरसूँ अँधेरा है

कहाँ जाने सवेरा है

 

नहीं दिखता कहीं रस्ता

कुहासा है घनेरा है

 

हुनर सीखें नए कैसे

गुरु बिन आज चेरा है

 

चुराता जा रहा साँसें

समय है या लुटेरा है

 

बनाता है जो इंसा को

ये जीवन वो ठठेरा है

 

नहीं शिकवा है साँपों से

डसे जाता सपेरा है

 

नहीं घर रास है मुझको

दिलों में ही बसेरा है

 

तेरा क्या और क्या मेरा

चले माया का फेरा…

Continue

Posted on December 10, 2018 at 7:30pm — 5 Comments

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At 12:18pm on November 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"बहुत ही विश्लेषणात्मक, विचारोत्तेजक क्षणिका-युग्म-सृजन  हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय नादिर ख़ान…"
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"गागर में सागर! वाह! जब यह सब कुछ, तो 'सम्मान' कटघरे में! बेहतरीन सृजन हेतु हार्दिक बधाई…"
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"धन दौलत से नहीं मिले यह, न ही गँवाकर जान | न ही किसी ईश्वर से पाया , यह कोई वरदान…"
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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय वासुदेव अगवाल जी, दोहा छंद पर रचिम आपकी गज़ बहु संदर है। बधाई सवीकार करें। मुँह की खाते लोग…"
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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"अमिय पिये जो मान बिन,समझो है नादानप्रेम सहित विष पीजिए,मिले जहाँ सम्मान ll .........अति सुंदर…"
13 hours ago

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