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अजय गुप्ता
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कैलेंडर

नौ तारीख तक कैलेंडर न आने से असुविधा होती है। यदि पहले से निर्धारित हो और 1-2 तारीख तक कैलेंडर आ जाए तो आसानी हो जाये।उम्मीद है आयोजक इस और ध्यान देंगेContinue

Started Apr 9, 2018

 

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अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"बहुत बहुत आभार आदरणीय योगराज जी।"
Nov 30
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"बहुत बहुत आभार तेजवीर जी। वाक़ई मैंने ध्यान नहीं दिया कि टंकण में इतनी त्रुटियां आ गई हैं। आगे से ध्यान रखूंगा"
Nov 30
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"धन्यवाद लक्ष्मण भाई"
Nov 30
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"शुक्रिया उस्मानी साहब।"
Nov 30
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"बहुत बढ़िया लघु कथा भाई शेख शहजाद उस्मानी जी प्रकृति विरासत संस्कृति संस्कार व क्या शानदार सामंजस्य बिठाया अपने शब्दों का"
Nov 29
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"बेहद उम्दा तरीके से रची गई अत्यंत प्रभावशाली रचना भाई मनन कुमार सिंहजी सिंह जी"
Nov 29
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"सबक **** वो जैसे ही आज घर में आया उसे माहौल रोज़ से कुछ बदला-बदला से लगा। पत्नी खाना ले आई। फिर रोज़मर्रा की बातें कर-करा कर बोली: - सुनिये जी, एक बात कहनी है -बोलो -देखिए एकदम गुस्सा मत करिएगा। थोड़ा समझा-बुझा कर देख लेंगें। फिर जो आप कहेंगें मान…"
Nov 29
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
" धन्यवाद लक्ष्मण भाई"
Nov 23
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
" धन्यवाद अमित भाई"
Nov 23
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"बहुत उम्दा अशआर हैं अंजली जी। विशेष तौर पर मक़्ता बहुत पसंद आया।"
Nov 22
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"अच्छी ग़ज़ल हुई है सुरेंद्र जी। बधाई आपको"
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अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"शुक्रिया अनीस भाई"
Nov 22
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"शुक्रिया तसदीक़ साहब"
Nov 22
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"शुक्रिया सुरेंद्र जी"
Nov 22
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"शुक्रिया अंजली जी"
Nov 22
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-113
"आदरणीय समर साहब, दिल बाग़-बाग़ हो गया आपसे ऐसी प्रतिक्रिया पाकर। लगता है कि मेहनत सफल हुई। और ये सब आप की स्पष्ट और निष्पक्ष इस्लाहों और सभी साथियों के प्यार, प्रेरणा और सुझावों से ही संभव हुआ है। अपना मार्गदर्शन बनाये रखियेगा। सादर।"
Nov 22

Profile Information

Gender
Male
City State
Karnal (Haryana)
Native Place
Karnal
Profession
Business
About me
ग़ज़ल, कविता, लघुकथा लेखन में रूचि, तीन स्वतंत्र काव्य संग्रह प्रकाशित, 3 ऑनलाइन पुस्तकें प्रकाशित. एक काव्य संग्रह हरियाणा साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित. parivartaaajkal.com पर 'अजय की कलम' के शीर्षक से नियमित कॉलम

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अजय गुप्ता's Blog

एक ग़ज़ल (वैलेंटाइन डे स्पेशल)

एक ग़ज़ल।

**********

बँध गई हैं एक दिन से प्रेम की अनुभूतियाँ

बिक रही रैपर लपेटे प्रेम की अनुभूतियाँ

शाश्वत से हो गई नश्वर विदेशी चाल में

भूल बैठी स्वयं को ऐसे प्रेम की अनुभूतियाँ

प्रेम पथ पर अब विकल्पों के बिना जीवन नहीं

आज मुझ से, कल किसी से, प्रेम की अनुभूतियाँ

पाप से और पुण्य से हो कर पृथक ये सोचिए

लज्जा में लिपटी हैं क्यों ये प्रेम की अनुभूतियाँ

परवरिश बंधन में हो तो दोष किसको दीजिये

कैसे पहचानेंगे…

Continue

Posted on February 14, 2019 at 1:54pm — 4 Comments

एक ग़ज़ल (हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया)

हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया

लेकिन चुप है, शायद गूँगा है साया

कहने में तो है अच्छा हमराही पर

सिर्फ़ उजालों में सँग होता है साया

सूरज सर पर हो तो बिछता पाँवों में

आड़ में मेरी धूप से बचता है साया

असमंजस में हूँ मैं तुमसे ये सुनकर

अँधियारे में तुमने देखा…

Continue

Posted on February 7, 2019 at 12:38pm — 3 Comments

ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)

दिखे हरसूँ अँधेरा है

कहाँ जाने सवेरा है

 

नहीं दिखता कहीं रस्ता

कुहासा है घनेरा है

 

हुनर सीखें नए कैसे

गुरु बिन आज चेरा है

 

चुराता जा रहा साँसें

समय है या लुटेरा है

 

बनाता है जो इंसा को

ये जीवन वो ठठेरा है

 

नहीं शिकवा है साँपों से

डसे जाता सपेरा है

 

नहीं घर रास है मुझको

दिलों में ही बसेरा है

 

तेरा क्या और क्या मेरा

चले माया का फेरा…

Continue

Posted on December 10, 2018 at 7:30pm — 5 Comments

Comment Wall (4 comments)

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At 7:49pm on September 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का ग़ज़ल पसंद आयी तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ आपका
At 7:46pm on August 31, 2019, dandpani nahak said…
बहुत बहुत धन्यवाद् भाई साहब अजय गुप्ता जी समय निकाल कर आपने जो मेरा हौसला बढ़ाया है बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 12:56pm on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब आपने मेरी ग़ज़ल पढ़ी उसे सराहा उसके लिए बहुत शुक्रिया
At 12:18pm on November 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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