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Dayaram Methani
  • Male
  • Bhilwara - rajsthan
  • India
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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय डा. छोटे लाल सिंह जी सुंदर एवं सकारात्मक सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई।"
Jun 14
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"दूर देश में भेज दिए हैं, खुद ही अपने बच्चे, विषम काल में काम न आते, बच्चे अच्छे सच्चे, अंत कर्म भी करें पडोसी, ऐसे भी हैं किस्से, अब बतलाये क्या आया है, अपना अपने हिस्से ।।...............अति सुंदर एवं सामयिक सृजन के लिए बधाई स्वीकार करें आदरणीय अशोक…"
Jun 14
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"हर कूचे में खोज करें सब, ढूंढें अपने प्यारे लोग।धौंस जमाएं फिर दूजों पर, कह हम और हमारे लोग।।....................अति सुंदर सृजन हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा जी।"
Jun 14
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी, सुंदर सृजन के लिए हार्दिक बधाई।"
Jun 14
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"परिवर्तन की जिज्ञासा हो तो दर्पण साफ करें सब अपना।स्वार्थ सिद्धि की राह छोड़कर परहित मंत्र करें सब जपना।।.......अति सुंदर सृजन।"
Jun 14
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"अति सुंदर सृजन आदरणीय डा. प्राची सिंह जी।"
Jun 14
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"प्रदत्त विषय पर सुंदर व सार्थक सृजन के लिए बधाई स्वीकार करें आदरणीय गंगाधर शर्मा जी।"
Jun 14
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"गज़ल....हम और हमारे का माना कि जमाना हैपर फ़र्ज हमारा अब कोरोना भगाना है....हालात वतन के ये हमने ही बिगाड़े हैअब हमको ही खुशियों की सौगात भी लाना है....कोरोना महामारी है ढीठ बहुत यारोंचुपचाप नहीं बैठे हम इसको झुकाना है ....बिन प्यार यहां जीना मुश्किल…"
Jun 14
Dayaram Methani commented on Sushil Sarna's blog post दोहा गज़ल एक प्रयास :
"आदरणीय सुशील सरना जी,  दोहा छंद आधारित गज़ल का प्रयास बहुत सुंदर लगा। बधाई स्वीकार करें।"
Jun 10
Dayaram Methani commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post कहीं दिल टूटना देखा कहीं दिलदारी देखी है(१०८ )
"नशा देखा कभी ज़र का कभी नादारी देखी हैकभी मस्ती कभी हमने मुसीबत भारी देखी है------ अति सुंदर सृजन के लिए बधाई स्वीकार करें आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत जी।"
Jun 10
Dayaram Methani commented on Dimple Sharma's blog post कहीं नायाब पत्थर है , कहीं मन्दिर मदीना है
" आदरणीय डिंपल शर्मा जी सुंदर गज़ल सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई आपको। कोई मन्दिर पे सर टेके, कोई काबा को माने है मैं हर पत्थर पे सर टेकूं जहाँ नेकी क़रीना है........अत सुंदर।"
Jun 6
Dayaram Methani commented on Sushil Sarna's blog post उल्फ़त पर दोहे :
" आदरणीय सुशील सरना जी, अति सुंदर दोहा सृजन के लिए बधाई स्वीकार करें।"
Jun 6
Dayaram Methani commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"इन्किलाब की याद दिलाने के लिए राम अवध जी बहुत बहुत धन्यवाद एवं बधाई।"
Jun 6
Dayaram Methani commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post राजन तुम्हें पता - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"हालत वतन के पेट की कब से खराब हैदेते नहीं जुलाब क्यों राजन तुम्हें पता --------अति सुंदर।  सुंदर गज़ल के लिए ल्क्षमण धामी जी बधाई स्वीकार करें।"
Jun 6
Dayaram Methani commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल- हर कोई अनजान सी परछाइयों में क़ैद है
"पूजना ही है अगर तो पूजिये माँ बाप कोबुतपरस्ती फालतू के दायरों में क़ैद है।।--------अति सुंदर। सुंदर सृजन के लिए सरेन्द्र नाथ जी बहुत बहुत बधाई।"
Jun 6
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय दण्ड पानी नाहक जी प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार।"
May 23

Profile Information

Gender
Male
City State
BHILWARA
Native Place
BHILWARA
Profession
journlist and writer
About me
I like to read and write kavita, gazal, short stories and artical.

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ग़ज़ल

 2122 2122 2122 212

नाव है मझधार में नाविक नशे में चूर है

सांझ है होने लगी मंजिल नज़र से दूर है

संकटों से आदमी क्या देव भी बचते नहीं

वक्त के आगे सभी होते यहां मजबूर है

जिन्दगी की कशमकश में जीना’ जिसको आ गया

यों समझ लो हौसलों से वो बहुत भरपूर है

दोष है अपना समय के साथ चल पाये नहीं

बंद मुट्ठी से फिसलना वक्त का दस्तूर है

हाल ‘‘मेठानी’’ बतायंे क्या किसी को अब यहां

आदमी सुनता नहीं अब हो गया मगरूर…

Continue

Posted on August 27, 2019 at 10:00pm — 2 Comments

गज़ल सीख लो

2122 2122 212

दर्द को दिल में दबाना सीख लो

ज़िन्दगी में मुस्कराना सीख लो

आंख से आंसू बहाना छोड़िये

हर मुसीबत को भगाना सीख लो

ज़िन्दगी है खेल, खेलो शान से

खेल में खुद को जिताना सीख लो

फूल को दुनिया मसल कर फैंकती

खुद को कांटों सा दिखाना सीख लो

छोड़ दें अब गिड़गिड़ाना आप भी

कुछ तो कद अपना बढ़ाना सीख लो

थी जवानी जोश भी था स्वप्न भी

दिन पुराने अब भुलाना सीख लो

कौन…

Continue

Posted on July 4, 2019 at 9:30pm — 8 Comments

झूठ का व्यापार - ग़ज़ल

मापनी: 2122 2122 2122 212

झूठ का व्यापार बढ़ता जा रहा है आजकल,

और हर इक पर नशा ये छा रहा है आजकल

है लड़ाई का नजारा हर तरफ देखें जिधर,

आदमी ही आदमी को खा रहा है आजकल

इस प्रगति के नाम पर ही मिट रहे संस्कार सब

झूठ को हर आदमी अपना रहा है आजकल

बाँटकर भगवान को नेता खुशी से झूमकर

काबा’ तेरा काशी’ मेरी गा रहा है आजकल

जाग ‘मेठानी’ बचायें आग से अपना चमन

नित नया जालिम जलाने आ रहा है…

Continue

Posted on April 8, 2019 at 2:01pm — 7 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल

मापनी: 2122 2122 2122 212

आंख से आंसू कभी यों ही बहाया ना करो

दर्द दिल का भी जमाने को बताया ना करो

हर किसी को मुफ्त में कोई खुशी मिलती नहीं

मेहनत से आप अपना जी चुराया ना करो

जिन्दगी ले जब परीक्षा हौसलों से काम लो

आपदा के सामने खुद को झुकाया ना करो

हैं सफलता और नाकामी समय का खेल ही 

लक्ष्य से अपनी नजर को तो हटाया ना करो

जीत लेंगे जिन्दगी की जंग ’मेठानी‘ सुनो

तुम निराशा को कभी मन में बसाया ना…

Continue

Posted on March 15, 2019 at 1:14pm — 5 Comments

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At 10:09pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय दयाराम मेथानि जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया जनाब
 
 
 

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