For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

2122 2122 212

दर्द को दिल में दबाना सीख लो
ज़िन्दगी में मुस्कराना सीख लो

आंख से आंसू बहाना छोड़िये
हर मुसीबत को भगाना सीख लो

ज़िन्दगी है खेल, खेलो शान से
खेल में खुद को जिताना सीख लो

फूल को दुनिया मसल कर फैंकती
खुद को कांटों सा दिखाना सीख लो

छोड़ दें अब गिड़गिड़ाना आप भी
कुछ तो कद अपना बढ़ाना सीख लो

थी जवानी जोश भी था स्वप्न भी
दिन पुराने अब भुलाना सीख लो

कौन ‘‘मेठानी’’ किसी को पूछता
तुम जमाने को झुकाना सीख लो

( मौलिक एवं अप्रकाशित )
- दयाराम मेठानी

Views: 725

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dayaram Methani on July 7, 2019 at 11:41pm

आदरणीय समर कबीर जी, अजय तिवारी जी की टिप्पणी के समय मुझे शतुर गुरबा के बाबत कुछ याद नहीं आया। इसलिए  उनसे जानकारी बाबत निवेदन किया फिर मुझे याद आया कि इस बाबत कभी चर्चा की थी तो मैने उसे ढूंढा आैर जो आपने बताया वो मुझे नोट किया हुआ मिल गया। उसे पढ़ने के बाद मुझे अहसास हुआ कि अजय तिवारी जो ने जो टिप्पणी की वह बिलुकल सही थी आैर उसके बाद मैने रचना में सुधार कर लिया है। आपका आैर अजय तिवारी जी का आभारी हूं। कृपया मार्गदर्शन करते रहें। सादर।

Comment by Samar kabeer on July 7, 2019 at 12:29pm

जनाब दयाराम जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

जनाब अजय तिवारी जी से सहमत हूँ,आपको याद हो तो कुछ दिन पहले "शुतरगुरबा" के बारे में आपको विस्तार से बता चुका हूँ ।

Comment by Dayaram Methani on July 6, 2019 at 1:08pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी,  प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार।

Comment by Dayaram Methani on July 6, 2019 at 1:06pm

आदरणीय अजय तिवारी जी, रचना पर विस्तृत समीक्षा एवं सुझाव के लिए बहुत बहुत आभार। आपने शतुर गुर्बा दोष बताया है। मुझे इसके बारे में संभवत: पूरी जानकारी नहींं है। अत: आपसे निवेदन है कि इस रचना में जहा जहां आपने यह दोष बताया हे वो कैसे उत्पन्न हुआ है इस बारे में मार्ग दर्शन करेंगे तो आपका आभारी रहूंगा। सादर।

Comment by Ajay Tiwari on July 6, 2019 at 9:53am

आदरणीय दयाराम जी, अच्छे शेर हुए हैं. हार्दिक बधाई. लेकिन कुछ शेरों को अभी और वक्त देने की ज़रुरत है. मसलन ये शेर :   

आंख से आंसू बहाना छोड़िये > शुतुर गुर्बा है. 'छोड़िये' की जगह 'छोड़ कर' रखा जा सकता है.   
हर मुसीबत को भगाना सीख लो

छोड़ दें अब गिड़गिड़ाना आप भी > शुतुर गुर्बा है. "छोड़ कर अब गिड़गिड़ाने की अदा" किया जा सकता है.
कुछ तो कद अपना बढ़ाना सीख लो

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 6, 2019 at 9:41am

आ. भाई दयाराम जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by Dayaram Methani on July 5, 2019 at 9:27pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय गिरिराज भंडारी जी।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 5, 2019 at 11:37am

अच्छी ग़ज़ल कही आदरणीय .. बधाई !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
Monday
Sushil posted blog posts
Monday
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Monday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service