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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

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Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"जनाब अजय तिवारी साहिब विस्तार से बता चुके हैं,मिसरा बदलने का प्रयास करें ।"
1 hour ago
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नासिर काज़मी की ज़मीन में ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. 'अनमोल भले बेकार पड़ा' = अनमो (फ़ेलुन 22) ल भले (फ़इलुन 112) बेका(फ़ेलुन 22) र पड़ा (फ़इलुन 112) इस ग़ज़ल की बह्र बह्रे-मीर का एक परिवर्तित रूप…"
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नासिर काज़मी की ज़मीन में ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. 'अनमोल भले बेकार पड़ा' = अनमो (फ़ेलुन 22) ल भले (फ़इलुन 112) बेका(फ़ेलुन 22) र पड़ा (फ़इलुन 112) इस ग़ज़ल की बह्र यह बह्रे-मीर का एक परिवर्तित रूप…"
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नासिर काज़मी की ज़मीन में ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. 'अनमोल भले बेकार पड़ा' = अनमो (फ़ेलुन 22) ल भले (फ़इलुन 112) बेका(फ़ेलुन 22) र पड़ा (फ़इलुन 112) इस ग़ज़ल की बह्र यह बह्रे-मीर का एक परिवर्तित रूप है. इस बह्र…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"आ. भाई छोटेलाल जी, स्नेह व उत्साहवर्धन के लिए आभार ।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति से मान बढा़ने के लिए आभार । क्या इंगित पंक्ति को ऐसा करने से लयबद्ध हो रही है ? सुझाईये अनमोल मगर बेकार पड़ा "
13 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी साहब अनमोल भावों को समेटे सुंदर गजल के लिए बहुत बहुत बधाई"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद ।"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (तोड़ते भी नहीं यारी को निभाते भी नहीं)
"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सादर अभिवादन ।बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । ' अनमोल भले बेकार पड़ा' इस मिसरे की मात्राएँ पूरी हैं, लेकिन लय नहीं है,जबकि मात्रिक बह्र में लय बहुत ज़रूरी होती है,देखियेगा ।"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नवगीत- लोकतंत्र
"आ. भाई बसंत जी, लोकतंत्र को बेहतरीन ढंग से उजागर किया है । हार्दिक बधाई ।"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"बारिश तेरे साथ गयीदरिया होकर प्यासा हूँ।२। वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी वाह अद्भुत भावों की शानदार ग़ज़ल। १ से ८ तक हर शेर लाज़वाब है सर। दिल से बधाई स्वीकार करें सर।"
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)

२२ २२ २२ २पूछ न इस  रुत कैसा हूँअबतक तो बस तन्हा हूँ।१।बारिश तेरे  साथ गयीदरिया होकर प्यासा हूँ।२।आता जाता एक नहींमैं भी  कैसा  रस्ता हूँ।३।जब तन्हाई डसती हैसारी रात भटकता हूँ।४।हाथों में  चुभ  जाते हैंकाँटे जो भी चुनता हूँ।५।जाने कौन चुनेगा अबउतरन वाला कपड़ा हूँ।६।तारों सँग कट जाती हैशरद अमावस रैना हूँ।७।अनमोल भले बेकार पड़ाविधवा का  ज्यों गहना हूँ।८।मौलिक-अप्रकाशितलक्ष्मण धामी "मुसाफिर"See More
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post जीवन के दोहे :
"आ. भाई सुशील जी, जीवन से सम्बद्ध सुंदर दोहे हुये हैं ।हार्दिक बधाई ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुछ दोहे -लक्ष्मण धामी"मुसाफिर"
"आ. भाई बसंत जी, दोहो की प्रशंसा और सलाह के लिए आभार ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"आ. रक्षिता जी, सुंदर रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post तेरे आने से आये दिन सुहाने ।
"आ. भाई नवीन जी, सादर अभिवादन । सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुछ दोहे -लक्ष्मण धामी"मुसाफिर"
"बहुत सुंदर दोहे, परिमार्जन अपेक्षित , बधाई आपको  बचा कहाँ कुछ खास भी कर सकते हैं, यदि उचित लगे "
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुछ दोहे -लक्ष्मण धामी"मुसाफिर"
"आ. नीलम जी, सादर अभिवादन । दोहों की प्रशंसा कर उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुछ दोहे -लक्ष्मण धामी"मुसाफिर"
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । उपस्थिति से दोहों का मान बढ़ाने के लिए आभार । इंगित पंक्ति को इस प्रकार लें - घुट्टी में सँस्कार की, ऐसा क्या अब खास"
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)

२२ २२ २२ २



पूछ न इस  रुत कैसा हूँ

अबतक तो बस तन्हा हूँ।१।



बारिश तेरे  साथ गयी

दरिया होकर प्यासा हूँ।२।



आता जाता एक नहीं

मैं भी  कैसा  रस्ता हूँ।३।



जब तन्हाई डसती है

सारी रात भटकता हूँ।४।



हाथों में  चुभ  जाते हैं

काँटे जो भी चुनता हूँ।५।



जाने कौन चुनेगा अब

उतरन वाला कपड़ा हूँ।६।



तारों सँग कट जाती है

शरद अमावस रैना हूँ।७।



अनमोल भले बेकार…

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Posted on August 21, 2018 at 11:57am — 8 Comments

कुछ दोहे -लक्ष्मण धामी"मुसाफिर"

सुखिया को संसार में, सब कुछ मिलता मोल

पर दुखिया  के  वास्ते, सकल  जिन्दगी झोल।१।

हर देहरी  पर  चाह  ले, आँगन बैठे लोग

भूखों को दुत्कार नित, मंदिर मंदिर भोग।२।



पाले  कैसी  लालसा, हर  मानव मजबूर

हुआ पड़ोसी पास अब, सगा सहोदर दूर।३।



बिकने को कोई बिके, पर ये दुख का योग

औने-पौने  बिक  रहे, ऊँचे  कद  के  लोग।४।



घुट्टी में सँस्कार की, अब क्या क्या खास

रिश्तों से आने लगी, अब जो खट्टी बास।५।

मौलिक व…

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Posted on August 19, 2018 at 5:28pm — 10 Comments

होती नहीं  है भोर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१ २१२१ २२२  १२१२



कहते  नहीं  हैं  आपसे  रस्ता  सुझाइये

राहों में  यूँ  न   देश  की  रोड़ा लगाइये।१।



आता है भेड़िया तो कुछ हरकत दिखाइये

कमजोर गर  ये  हाथ  हैं  हल्ला  मचाइये।२।



कहते हो दूसरों की  है  सूरत अगर मगर

खुद को भी रोशनी में ये दर्पण दिखाइये।३।



होती नहीं  है भोर इक सूरज उगे से ही

गर देखनी हो भोर तो खुद को जगाइये।४।



बातों को दिल की रोज  ही ऐ …

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Posted on July 7, 2018 at 12:00pm — 13 Comments

रहमत में हरम मागा- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१ १२२२ २२१ १२२२



जितना भी सनम माँगा यूँ हमने है कम माँगा

मरने की नहीं हिम्मत जीने का ही दम माँगा।१।



होते ही सवेरा  नित  साया  भी डराता है

घबरा के उजाले से यूँ रात का तम माँगा।२।



सुनते हैं सभी कहते कम अक्ल हमें लेकिन

खुशियों में अकेले थे इस बात से गम माँगा।३।



चौपाल से बढ़ शायद महफूज लगा हो कुछ

ऐसे  ही  नहीं  उसने  रहमत  में  हरम माँगा।४।



ऐसे ही  नहीं  शबनम  पड़  जाती है रातों को

धरती का रह इक कोना…

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Posted on July 5, 2018 at 6:30am — 16 Comments

Comment Wall (11 comments)

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At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
At 5:20pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शुक्रिया लक्ष्मण जी
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

At 4:26pm on April 2, 2015, gumnaam pithoragarhi said…
लक्ष्मण धामी जी नमस्कार शुक्रिया आपने मुझे ये सम्मान दिया क्या मैं आपसे बात कर सकता हूँ यदि आप चाहें तो ................ मेरा नंबर ये है ,,,,,,,,,,7579 100213.........क्या आप अपना नंबर देंगे ?
At 10:37pm on February 17, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई लक्ष्मण धामीजी, यदि संभव हो तो 18 फरवरी को भी भेंट हो सकती है. मैं 18 फरवरी को भी प्रगति मैदान के पुस्तक मेले में उपस्थित रहूँगा.
शुभ-शुभ

At 6:34am on July 9, 2014, gumnaam pithoragarhi said…
माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना
sir main pithoragarh se hoon achchha laga ki aap bhi dharchula se hain ............................... ek baar fir badhai ,,,,,,,,,
At 2:53pm on July 8, 2014, Sushil Sarna said…

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना 

At 2:27pm on July 8, 2014, Nilesh Shevgaonkar said…

बधाई 

At 2:21pm on July 8, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
 
 
 

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