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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई दण्डपाणि जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई राजनवादवी जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई दण्डपाणि जी हार्दिक धन्यवाद ।"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, हार्दिक आभार ।"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई राज नवादवी जी, सादर अभिवादन । गजल की प्रशंसा के लिए आभार । मंच पर लम्बे अंतराल के बाद आपकी उपस्थिति सुखद है ।"
Mar 28
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कोरोनामय दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, कोरोना पर अच्छे दोहे लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।  द्वार'घर के बाहर आ मगर, करो नहीं सत्कार' इस पंक्ति में एक वचन,बहुवचन दोष देख लें । 'कोरोना पर  वार  को, यही सफल …"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई अनीस जी, हार्दिक आभार ।"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. अंजलि जी, हार्दिक धन्यवाद।"
Mar 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति, प्रशंसा व मार्गदर्शन के लिए आभार ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई गुलशन जी, इस प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई अनीस जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. अंजलि जी, उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई गलशन जी, सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन । सुंदर गिरह के साथ बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"बात जायज है के कोरोना का डर बनता हैहाथ पर हाथ  रखे  छुपना किधर बनता है।१।**सिर्फ सरकार भरोसे तो न होगा कुछ भीकीजिए खूब जो सहयोग अगर बनता है।२।**घर में टिकना भी तो महफूज रखेगा हमकोसोचिये आप  न  इस  वक्त  सफर बनता…"
Mar 27
Dr Ashutosh Mishra commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कोरोनामय दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह शानदार भाई लक्ष्मणजी हार्दिक बधाई आपको"
Mar 26
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post किसी आजाद पन्छी को न थी मन्जूर पाबन्दी -गजल
"रचना को फीचर्ड करने के लिए सम्पादक मण्डल का हार्दिक आभार ।"
Mar 24
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

कोरोनामय दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

कोरोनामय जग हुआ, फीका पड़ा बसन्तमाँगे खुद की खैर अब, राजा, रंक, महन्त।१।**जन्मा चाहे चीन में, लाये अपने लोगजिससे सारे देश में, फैल रहा यह रोग।२।**विकट घड़ी में आपदा, आयी सबके द्वारघर के बाहर आ मगर, करो नहीं सत्कार।३।**घर में बैठो चन्द दिन, ढककर खिड़की द्वारकोरोना पर  वार  को, यही सफल  हथियार।४।**आज चिकित्सक का कहा, थोड़ा मानव मानघर  में  चुपके  बैठ  कर, होगा  रोग  निदान।५।**करो नमस्ते दूर से , नहीं मिलाओ हाथवरना झट से आएगा, कोरोना भी साथ।६।**सजग नागरिक बन करो, शासन का सहयोगफिर  पहुँचेगा  अन्त  को,  यह  कोरोना  रोग।७।**कोरोना  के  अन्त  तक, रहें  भीड़  से  दूरदिनभर जितना हो सके, तरल पियें भरपूर।८।** दूरी अपने - गैर से, रखने  का  औचित्यजीवन तेरा जो बचा, खूब मिलेगा नित्य।९। **कोरोना से  भय  नहीं, जिन  लोगों  को यारज्ञानी उनको मत समझ, वो जग पर हैं भार।१०।**मौलिक-अप्रकाशितSee More
Mar 24
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post was featured

किसी आजाद पन्छी को न थी मन्जूर पाबन्दी -गजल

१२२२ /१२२२/ १२२२ /१२२२/* कभी कतरों में बँटकर  तो  कभी सारा गिरा कोई मिला जो माँ का आँचल तो थका हारा गिरा कोई।१।* कि होगी कामना  पूरी किसी  की लोग कहते हैं फलक से आज फिर टूटा हुआ तारा गिरा कोई।२।* गमों की मार से लाखों सँभल पाये नहीं  लेकिन सुना हमने यहाँ  खुशियों  का भी मारा गिरा कोई।३।* किसी आजाद पन्छी को न थी मन्जूर पाबन्दी उसी की फड़फड़ाहट से वहाँ कारा गिरा कोई।४।* पतित कर आचरण को नित धरासायी उजाले हैं सुना अबतक मगर यारो न अँधियारा गिरा कोई।५।*मौलिक.अप्रकाशित लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'See More
Mar 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

कोरोनामय दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

कोरोनामय जग हुआ, फीका पड़ा बसन्त

माँगे खुद की खैर अब, राजा, रंक, महन्त।१।

**

जन्मा चाहे चीन में, लाये अपने लोग

जिससे सारे देश में, फैल रहा यह रोग।२।

**

विकट घड़ी में आपदा, आयी सबके द्वार

घर के बाहर आ मगर, करो नहीं सत्कार।३।

**

घर में बैठो चन्द दिन, ढककर खिड़की द्वार

कोरोना पर  वार  को, यही सफल  हथियार।४।

**

आज चिकित्सक का कहा, थोड़ा मानव मान

घर  में  चुपके  बैठ  कर, होगा  रोग  निदान।५।

**

करो नमस्ते दूर से , नहीं मिलाओ…

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Posted on March 24, 2020 at 8:04pm — 2 Comments

किसी आजाद पन्छी को न थी मन्जूर पाबन्दी -गजल

१२२२ /१२२२/ १२२२ /१२२२/

*

कभी कतरों में बँटकर  तो  कभी सारा गिरा कोई

मिला जो माँ का आँचल तो थका हारा गिरा कोई।१।

*

कि होगी कामना  पूरी किसी  की लोग कहते हैं

फलक से आज फिर टूटा हुआ तारा गिरा कोई।२।

*

गमों की मार से लाखों सँभल पाये नहीं  लेकिन

सुना हमने यहाँ  खुशियों  का भी मारा गिरा कोई।३।

*

किसी आजाद पन्छी को न थी मन्जूर…

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Posted on March 18, 2020 at 6:17am — 3 Comments

रंगों के घन खूब उड़ायें - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२२२२/२२२२/२२२२/२२२

***

आओ नाचें,  झूमें, गायें  फिर  से अब के होली में

इक-दूजे को खूब लुभायें फिर से अब के होली में।१।

**

देख के जिसको मन ललचाये ज़न्नत के वाशिन्दों का

रंगों के  घन  खूब  उड़ायें  फिर  से  अब के होली में।२।

**

जीवन में  रंगत  हो  सब  के  संदेश  हमें देे होली 

रोते जन को यार हँसायें फिर से अब के  होली में।३।

**

आग सियासत चाहे कितनी यार लगाये नफरत की

प्रेम…

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Posted on March 10, 2020 at 7:30am — 8 Comments

रक्खो भुजंग जैसा चन्दन में आदमी को - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२२१/२१२२/२२१/२१२२

*

फूलों की क्या जरूरत उपवन में आदमी को

भाने  लगे  हैं  काँटे  जीवन  में  आदमी  को।१।

**

क्या क्या मिला हो चाहे मन्थन में आदमी को

विष की तलब रही  पर  जीवन में आदमी को।२।

**

आजाद जब है  रहता उत्पात करता बेढब

लगता है खूब अच्छा बन्धन में आदमी को।३।

**

आता बुढ़ापा जब है रूहों की करता चिन्ता

तन की ही भूख केवल यौवन में आदमी को।४।

**

कितना हरेगा विष ये चाहे पता नहीं पर

रक्खो भुजंग जैसा चन्दन में आदमी…

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Posted on March 5, 2020 at 4:21pm — 2 Comments

Comment Wall (15 comments)

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At 10:58am on October 18, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत शुक्रिया
At 2:30pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर' जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला अफ़जाई का आपने समय निकाला मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 10:47am on August 24, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्षमण धामी जी
At 10:03pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने के लिए!
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
At 5:20pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शुक्रिया लक्ष्मण जी
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

At 4:26pm on April 2, 2015, gumnaam pithoragarhi said…
लक्ष्मण धामी जी नमस्कार शुक्रिया आपने मुझे ये सम्मान दिया क्या मैं आपसे बात कर सकता हूँ यदि आप चाहें तो ................ मेरा नंबर ये है ,,,,,,,,,,7579 100213.........क्या आप अपना नंबर देंगे ?
At 10:37pm on February 17, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई लक्ष्मण धामीजी, यदि संभव हो तो 18 फरवरी को भी भेंट हो सकती है. मैं 18 फरवरी को भी प्रगति मैदान के पुस्तक मेले में उपस्थित रहूँगा.
शुभ-शुभ

 
 
 

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