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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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Anita Maurya commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल..रात भर-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"वाह, खूबसूरत ग़ज़ल"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....मेरी आँखें और जयादा नम हो जातीं हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी...स्नेह बनाये रखें..."
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....मेरी आँखें और जयादा नम हो जातीं हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"तहेदिल से शुक्रिया ज़नाब मिश्रा जी..."
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल..रात भर-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"हार्दिक अभिनन्दन है आदरणीय नीरज मिश्रा जी.."
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल..रात भर-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"बहुत बहुत आभार आदरणीय सतविंद्र जी..सादर"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....मेरी आँखें और जयादा नम हो जातीं हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आ. भाई ब्रजेश जी, सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई ।"
Tuesday
Neeraj Mishra "प्रेम" commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल..रात भर-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"क्या बात है कोई जवाब नही बहुत ही उम्दा"
Tuesday
Neeraj Mishra "प्रेम" commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....मेरी आँखें और जयादा नम हो जातीं हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"वाह वाह बहुत ही लाजवाब बृजेश कुमार जी"
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल....मेरी आँखें और जयादा नम हो जातीं हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'

22     22     22    22    22    22    2 जब भी तेरी यादें जानां कम हो जाती हैं मेरी आँखें और जियादा नम हो जाती हैंदर्द संभालूँ आहें रोकूँ दिल को समझाऊँ अश्क़ों की बरसातें बेमौसम हो जाती हैंराह तुम्हारी तकते तकते आँखें पथराईं साँसें भी चलते चलते मद्धम हो जाती हैंरफ़्ता रफ़्ता रात चली और सवेरा आया फिर ये होता है सोचें बरहम हो जाती हैंउस दर पे दम तोड़ गई हर एक सदा मेरी और सभी उम्मीदें 'ब्रज' बेदम हो जाती हैं (मौलिक एवं अप्रकाशित) बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
Feb 12
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post तुम्हारे जैसा कोई खुश नुमां नहीं मिलता
"अच्छी ग़ज़ल हुई आदरणीय..ज़नाब तस्दीक साहेब ने ठीक ही फ़रमाया है..बहुत लम्बी रचना में दिलचस्पी कम होने लगती है।"
Feb 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on somesh kumar's blog post वो छू के गई ऐसे
"अच्छी रचना है सोमेश जी..बधाई"
Feb 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (तुम्हारे ख़त जो मेरे नाम पर नहीं आते)
"वाह बेहतरीन... बदल दिए हैं हमीं ने मिजाज मौसम के भिगोने अब्र हमें बाम पर नहीं आते...सादर बधाई"
Feb 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....मेरी आँखें और जयादा नम हो जातीं हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"उचित है आदरणीय तस्दीक जी सुधार करता हूँ...सादर"
Feb 11
Tasdiq Ahmed Khan commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....मेरी आँखें और जयादा नम हो जातीं हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"जनाब ब्रजेश साहिब , हैं का इस्तेमाल करके जाती है सही है जातीं नहीं। आपके मिसरे में लय बाधित हो रही है , और मिसरों से मिलकर पढ़ें ,पता चल जाएगा ।"
Feb 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....मेरी आँखें और जयादा नम हो जातीं हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय तस्दीक जी आपकी सार्थक समीक्षा के लिए सादर धन्यवाद..चूँकि बहुवचन की बात हो रही है इसलिए जातीं हैं रखा..मैं अभी भी असमंजस में हूँ क्या ये सही नहीं है?ज्यादा को आपके बताये अनुसार सही करता हूँ।लेकिन चौथा शेर बे बह्र है ये समझ नही आ रहा है!! रात…"
Feb 10
Tasdiq Ahmed Khan commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....मेरी आँखें और जयादा नम हो जातीं हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"जनाब ब्रजेश कुमार साहिब , ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है ,मुबारकबाद कुबूल फरमायें ।  शब्द जातीं को जाती और जयादा  को ज़ियादा करलें ।शेर4 उला बह्र में नहीं , यूँ कर सकते हैं "रफ्ता रफ्ता शब जाती और आता सवेरा है ।"
Feb 10

Profile Information

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Male
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noida
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jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल....मेरी आँखें और जयादा नम हो जातीं हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'

22     22     22    22    22    22    2

जब भी तेरी यादें जानां कम हो जाती हैं

मेरी आँखें और जियादा नम हो जाती हैं

दर्द संभालूँ आहें रोकूँ दिल को समझाऊँ

अश्क़ों की बरसातें बेमौसम हो जाती हैं

राह तुम्हारी तकते तकते आँखें पथराईं

साँसें भी चलते चलते मद्धम हो जाती हैं

रफ़्ता रफ़्ता रात चली और सवेरा आया

फिर ये होता है सोचें बरहम हो जाती हैं

उस दर पे दम तोड़ गई हर एक सदा मेरी

और सभी उम्मीदें 'ब्रज' बेदम हो जाती…

Continue

Posted on February 8, 2018 at 7:30pm — 14 Comments

ग़ज़ल...धूल की परतें-बृजेश कुमार 'ब्रज

1222 1222 1222 1222

गुलाबों से किताबों तक समाईं धूल की परतें

जरा देखो तो अब माथे पे आईं धूल की परतें!!

ये किस आगोश ने सारे शहर को घेर के रक्खा

घना है कोहरा या फिर हैं छाईं धूल की परतें?

गया इक वक़्त वो आया न तो सन्देश ही आया

हमीं ने रिश्ते नातों पर चढ़ाईं धूल की परतें

गिला इस बात का उनसे करें भी तो करें कैसे

गमे दिल ने मेरे लब पर सजाईं धूल की परतें

बड़े ही फख्र से छोड़ी थीं अपने गाँव की गलियां

मगर 'ब्रज'…

Continue

Posted on January 21, 2018 at 7:00pm — 24 Comments

ग़ज़ल..रात भर-बृजेश कुमार 'ब्रज'

मुतदारिक सालिम मुसम्मन बहर

212 212 212 212

आँख आँसू बहाती रही रात भर

दर्द का गीत गाती रही रात भर

आसमां के तले भाव जलते रहे

बेबसी खिलखिलाती रही रात भर

बाम पे चाँदनी थरथराने लगी

हर ख़ुशी चोट खाती रही रात भर

रूह के ज़ख्म भी आह भरने लगे

आरजू छटपटाती रही रात भर

प्यार की राह में लड़खड़ाये कदम

आशकी कसमसाती रही रात भर

आह भरते हुये राह तकते रहे

राह भी मुँह चिढ़ाती रही रात भर …

Continue

Posted on January 6, 2018 at 5:30pm — 29 Comments

ग़ज़ल...तुम्हारी याद का मौसम--बृजेश कुमार 'ब्रज'

1222 1222 1222 1222

हमें जब आज़माता है तुम्हारी याद का मौसम

सुकूँ भी साथ लाता है तुम्हारी याद का मौसम

ग़मों ने कोशिशें तो लाख कीं पलकें भिंगोने की

लबों पर मुस्कुराता है तुम्हारी याद का मौसम

हमारे रूबरू ठहरो कभी पल भर तो समझाएं

हमें कितना सताता है तुम्हारी याद का मौसम

इसे मैं छोड़ आता हूँ कहीं सुनसान सहरा में

मगर फिर लौट आता है तुम्हारी याद का मौसम

वहाँ तुम हो तुम्हारी पुरकशिश कमसिन अदाएं हैं

यहाँ 'ब्रज'…

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Posted on December 18, 2017 at 11:00pm — 26 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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