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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post राजनीति के दोहे - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"खिड़की कायर हो गयी, गूँगे - बहरे द्वार व्यर्थ यहाँ अब चीखना, राजनीति का सार... वाह सुन्दर अति सुन्दर और समर्थ दोहे आदरणीय..उपर्लिखित दोहा तो कमाल है.."
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Anita Maurya's blog post नज़्म - कहाँ जाऊँ के तेरी याद का
"वाह सुन्दर भावभरी रचना..बधाई"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on रकमिश सुल्तानपुरी's blog post ग़ज़ल-वक्त आने दो जरा फ़िर
"बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही ज़नाब रकमिश जी.."
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on V.M.''vrishty'''s blog post जलती मुस्कुराहटें
"बढ़िया बहुत बढ़िया कविता आ.वृष्टि जी.."
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post युग द्रष्टा कलाम
"वाह अच्छी रचना आदरणीय डॉ साहब.."
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दुख बयानी है गजल - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"वाह बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीय..सभी शेर लाजबाब"
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...लाज की मारी न रोये द्रोपदी
"नमन संग आभार स्वीकार करें आदरणीय लक्ष्मण धामी जी...सादर"
Oct 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...लाज की मारी न रोये द्रोपदी
"आदरणीय सुरेन्द्र जी बहुत बहुत आभार स्वीकार करें..सादर"
Oct 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post सत्यव्रत (लघुकथा)
"आदरणीय चंद्रेश जी बधाई...बहुत ही खूबसूरती से एक सामाजिक विद्रूपता को शब्दों में ढाला है...अंतिम तीन पंक्तियों में लघु कथा अपने विराट रूप में निखर के आई..लेकिन मुझे लगता है कि अंतिम पंक्ति न भी हो तब भी लघु कथा बेहतर थी..क्योंकि तब एक टीस सी रह…"
Oct 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६२
"वाह क्या कहने आदरणीय बेहतरीन ग़ज़ल.. 6 शेर को लेकर एक संशय है "मेरा ख़ाक" या मेरी ख़ाक..."
Oct 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६१
"बहुतखूब आदरणीय राज साहब बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है..."
Oct 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"बहुत ही उत्तम रचना आदरणीय..."
Oct 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on V.M.''vrishty'''s blog post मौत की उम्मीद पर (ग़ज़ल)
"आदरणीया वृष्टि जी बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने..ग़ज़ल पढ़ के ये बिलकुल नहीं लगता कि आपको बह्र की जानकारी नहीं है।बहुत बहुत बधाई..."
Oct 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरी हर निशानी मिटाने से पहले
"खूबसूरत ग़ज़ल आदरणीय त्रिपाठी जी.."
Oct 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पढ़ो तो इसको’ फाड़ो मत- गजल
"आदरणीय शर्मा जी बहुत ही खूब ग़ज़ल कही है..बधाई"
Oct 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...लाज की मारी न रोये द्रोपदी
"आ. भाई बृजेश जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Oct 14

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल...लाज की मारी न रोये द्रोपदी

इस ग़ज़ल के साथ ओबीओ परिवार को नवरात्री की शुभकामनाएं.. जय माता की

फाइलातुन फाइलातुन फाइलातुन

हर कली में देवियों का वास हो

पत्थरों को दर्द का अहसास हो

फिर कोई अवतार आये भूमि पे

निश्चरों को मृत्यु का आभास हो

लाज की  मारी न रोये  द्रोपदी

अब नहीं वैदेही को वनवास हो

पीर की तासीर जाओगे समझ

लुट चुका कोई तुम्हारा खास हो

बात इतनी सी समझते क्यों नहीं

घात मिलती है जहाँ बिस्वास हो

(मौलिक एवं…

Continue

Posted on October 11, 2018 at 12:30pm — 17 Comments

गीत-इसलिये हैं नैन घायल आँसुओं से तर-ब-तर-बृजेश कुमार 'ब्रज'

किसलिये हैं नैन घायल

आँसुओं से तर-ब-तर?

फिर किसी सुनसान कोने

चीख कोई जो उठी

रात की खामोशियों में

रातरानी रो उठी

दानवी अट्टाहसों में

आह तड़पी घुट गई

टूटती साँसें समेटे

लड़खड़ाती वो उठी

इस कदर बरपी क़यामत

बन गई मातम सहर

इसलिये हैं नैन घायल

आँसुओं से तर-ब-तर

है नहीं जग में ठिकाना

आँख जाए नीर का

मोल कोई दे सकेगा

वेदना का पीर का

जिस नज़र पे था भरोसा

घात भी उससे मिली

हाथ…

Continue

Posted on October 4, 2018 at 6:00pm — 20 Comments

गीत...तितलियाँ अब मौन हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'

शोर भौरों का सुनोगे

तितलियाँ अब मौन हैं

रक्त रंजित हो उठा मन

रोज के अख़बार से

हर कली सहमी हुई है

आह अत्याचार से

इस चमन में भेड़ियों से

आदमी ये कौन हैं

शोर भौरों का सुनोगे

तितलियाँ अब मौन हैं

प्रीत का संगीत गुमसुम

भाव के व्यापार में

सत्य का उपहास करता

छल कपट संसार में

प्रेम है अनुबंध जैसा

प्रेम परिणय गौण है

शोर भौरों का सुनोगे

तितलियाँ अब मौन हैं

(मौलिक एवं…

Continue

Posted on September 17, 2018 at 6:00pm — 17 Comments

ग़ज़ल...यादों के सरमाये-बृजेश कुमार 'ब्रज'

बह्र-ए-मीर पर आधारित ग़ज़ल

कमबख्त कहाँ से आये इतनी रात गये

उनकी यादों के साये इतनी रात गये

आज उभर के आया है इक दर्द पुराना

बेलौस हवा सहलाये इतनी रात गये

कश्ती कागज की गहरे यादों के दरिया

अब नींद कहाँ से आये इतनी रात गये

गीली मिटटी की सौंधी सौंधी सी खुशबू

अंतस में आग लगाये इतनी रात गये

किस प्रियतम के लिए हुआ बैचैन पपीहा

जो घड़ी घड़ी चिल्लाये इतनी रात गये

दूर उफ़क़ से आती हैं ग़मगीन…

Continue

Posted on July 1, 2018 at 4:30pm — 8 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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