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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)

​विधान – 27 मात्रा, 16,11 पर यति, चरणान्त में 21 लगा अनिवार्य l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत lह्रदय बसाये देवी सीता वन वन भटकें राम लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविरामसुन चन्दा तू नीलगगन से देख रहा संसार किस नगरी में किस कानन में खोया जीवन सार हे नदिया हे गगन,समीरा  ओ दिनकर ओ धूप तृण तृण से यूँ हाथ जोड़कर पूछ रहे सुर भूपक्या तुमने देखा है,उसका वैदेही है नाम लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविरामथा मेरे कर्मों का फल जो मिला मुझे वनवास फिर आखिर निर्दोष मैथली पर क्यों टूटा त्रास…See More
Dec 25, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सालिक गणवीर's blog post उसने आज़ाद कब किया है मुझे (ग़ज़ल)
"बढ़िया ग़ज़ल हुई आदरणीय सालिक जी..."
Dec 25, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अन्नदाता के लिए -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"बड़ी ही खूब असरदार ग़ज़ल कही आदरणीय धामी जी..."
Dec 25, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीया बधाई"
Dec 25, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)
"रचना पटल पे आपका हार्दिक अभिनन्दन एवं आभार आदरणीया अनामिका जी..."
Dec 21, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी आपका बहुत बहुत आभार..सादर"
Dec 21, 2020
Anamika singh Ana commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)
"बहुत सुंदर गीत रचा है आदरणीय , हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये ।"
Dec 19, 2020
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)
" जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आदाब, सुंदर गीत की रचना हुई है, हृदय तल से बधाईयाँ प्रस्तुत करता हूँ। सादर। "
Dec 19, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)

​विधान – 27 मात्रा, 16,11 पर यति, चरणान्त में 21 लगा अनिवार्य l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत lह्रदय बसाये देवी सीता वन वन भटकें राम लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविरामसुन चन्दा तू नीलगगन से देख रहा संसार किस नगरी में किस कानन में खोया जीवन सार हे नदिया हे गगन,समीरा  ओ दिनकर ओ धूप तृण तृण से यूँ हाथ जोड़कर पूछ रहे सुर भूपक्या तुमने देखा है,उसका वैदेही है नाम लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविरामथा मेरे कर्मों का फल जो मिला मुझे वनवास फिर आखिर निर्दोष मैथली पर क्यों टूटा त्रास…See More
Dec 18, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सालिक गणवीर's blog post सामने आ तू कभी ख़्वाब में आने वाले....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"बहुतखूब बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय..."
Dec 14, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (तू वतन की आबरू है तू वतन की शान है)
"बड़ी ही सुन्दर और भावपूर्ण ग़ज़ल कही आदरणीय.."
Dec 14, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)
"एक प्रार्थना है...अगर कमियों को इंगित करेंगे तो सुधार और सीखने में आसानी होगी..सादर"
Dec 14, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)
"आदरणीय धामी जी गीत पे आपके सुन्दर शब्दों से मन में उत्साह का नव संचार हुआ...धन्यवाद"
Dec 14, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)
"आ. भाई ब्रिजेश जी, सादर अभिवादन । गीत का प्रयास अच्छा हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 14, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)
"रचना पटल पे आपका स्वागत संग आभार आदरणीय समर जी..."
Dec 12, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Usha Awasthi's blog post सृष्टि का संगीत
"बढ़िया सुन्दर रचना आदरणीया..."
Dec 12, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)

विधान – 27 मात्रा, 16,11 पर यति, चरणान्त में 21 लगा अनिवार्य l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l

ह्रदय बसाये देवी सीता

वन वन भटकें राम

लोचन लोचन अश्रु बावरे

बहते हैं अविराम

सुन चन्दा तू नीलगगन से

देख रहा संसार

किस नगरी में किस कानन में

खोया जीवन सार

हे नदिया हे गगन,समीरा 

ओ दिनकर ओ धूप

तृण तृण से यूँ हाथ जोड़कर

पूछ रहे…

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Posted on December 10, 2020 at 7:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल-तुमसे ग़ज़ल ने कुछ नहीं बोला?

2122       2122        2122        2

चुप रहीं आँखें सजल ने कुछ नहीं  बोला

इसलिए  मनवा विकल ने कुछ नहीं बोला

भाव जितने हैं सभी को लिख दिया हमदम

क्या कहूँ! तुमसे ग़ज़ल ने कुछ नहीं बोला?

जिस  किनारे  बैठ  के  पहरों  तुम्हें  सोचूँ

उस जलाशय के कमल ने कुछ नहीं बोला?

एक  पत्थर  झील में  फेंका कि जुम्बिश हो

झील के  खामोश जल ने कुछ नहीं  बोला

साथ 'ब्रज' के रात भर पल पल रहे जलते

जुगनुओं  के नेक  दल ने…

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Posted on November 19, 2020 at 9:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल..कहीं लौकी कहीं कद्दू कहीं कटहल के ठेले हैं

मुफाईलुन*4

खरीदूँ कौन सी सब्जी बड़े लगते झमेले हैं

कहीं लौकी कहीं कद्दू कहीं कटहल के ठेले हैं

इधर भिन्डी बड़ी शर्मो हया से मुस्कुराती है

अजब नखरे टमाटर के पड़ोसी कच्चे केले हैं

तुनक में मिर्च बोली आ तुझे जलवा दिखाती हूँ

कहे धनिया हमें भी साथ ले लो हम अकेले हैं

शकरकंदी,चुकंदर ने सजाई नाज से महफ़िल

सुनाया राग आलू ने मगन बैगन,करेले हैं

घड़ी भर को जरा पहलु में लहसुन,प्याज आ बैठो

जुदाई में तुम्हारी 'ब्रज' ने…

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Posted on November 1, 2020 at 8:00pm — 7 Comments

गीत-तस्वीर तुम्हारी

सभी पंक्तियाँ 16-16 मात्राभार के क्रम में

घर के किस कोने में रख के

भूल गया तस्वीर तुम्हारी

रोज सवेरे से सिर धुनते

शाम ढले तक याद संभाली

एक सिरा न हाथ में आया

टुकड़े टुकड़े रात खंगाली

आँगन ढूढ़ा कमरा ढूढ़ा

ढूढ़ लिए दालान अटारी

घर के किस कोने में रख के

भूल गया तस्वीर तुम्हारी

देख पपीहे की अकुलाहट

आसमान में बादल आये

बुलबुल छेड़े खूब तराना

भँवरे फूलों पे मंडराये

तू भी कोयल बड़ी…

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Posted on August 18, 2020 at 11:00pm — 6 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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