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C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"
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C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s Page

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C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post आएँगे जी आएँगे, अच्छे दिन यूँ आएँगे ...गीत / शून्य आकांक्षी
"आदरणीय  Mohammed Arif जी,गीत पर सार्थक टिप्पणी करने और बधाई देने के लिए आपका हार्दिक आभार | इसी प्रकार प्रेम बनाए रखिएगा | "
Aug 14
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post आएँगे जी आएँगे, अच्छे दिन यूँ आएँगे ...गीत / शून्य आकांक्षी
"आदरणीय Samar kabeer साहब,आपकी सराहना पाकर मेरे गीत का लेखन सफल हुआ | आपका हार्दिक आभार | "
Aug 14
Ravi Shukla commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post आएँगे जी आएँगे, अच्छे दिन यूँ आएँगे ...गीत / शून्य आकांक्षी
"आदरणीय चंद्र मोहन जी बहुत बहुत बधाई इस सुंदर गीत के लिये । अतुकांत के आगे गीतो में भी आपकी कलम चलते देख कर खुशी हुई जितना भी साथ रहा आपके अतुकांत से ही परिचय हो पाया था । सादर"
Aug 14
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल नम्बर 2
"आदरणीय  Samar kabeer साहब,यूँ तो पूरी ग़ज़ल ही बहुत शानदार है पर इस शेर का तो जवाब ही नहीं :"अब तक भरी हुई थी जो तेरे दिमाग़ मेंफैलाई है वो तूने ग़िलाज़त कहाँ कहाँ"दिली मुबारकबाद स्वीकार करिएगा | "
Aug 14
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post आएँगे जी आएँगे, अच्छे दिन यूँ आएँगे ...गीत / शून्य आकांक्षी
"आदरणीय  Niraj Kumar जी,आपकी बेहतरीन, सार्थक और मेरे लेखन को प्रोत्साहित करती टिप्पणी पाकर मन प्रसन्न हो गया | आपका बहुत-बहुत शुक्रिया | इसी प्रकार प्रेम बनाए रखिएगा | "
Aug 14
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा---सोच
"नर-नारी समानता के अधिकार और हमारी सुरक्षा व्यवस्था पर एक अच्छी लघुकथा पढ़ने को मिली | आपको हार्दिक बधाई |  "
Aug 14
Mohammed Arif commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post आएँगे जी आएँगे, अच्छे दिन यूँ आएँगे ...गीत / शून्य आकांक्षी
"आदरणीय सी.एम.उपाध्याय जी आदाब, अच्छे दिन पर करारा व्यंग्यपूर्ण गीत की सौगात ।अच्छे दिन का झुनझुना ख़ूब बजाया प्रधान सेवक जी मगर जनता से संवाद कब करते हैं ,किसानों की ख़ुदकुशी पर चुप रहते हैं ,नफ़रत की हिंसा और लक्षित हिंसा पर बोलने के बजाय विदेशों की…"
Aug 13
Samar kabeer commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post आएँगे जी आएँगे, अच्छे दिन यूँ आएँगे ...गीत / शून्य आकांक्षी
"जनाब उपाध्याय जी आदाब,बहुत अच्छा लगा आपका गीत,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 13
Niraj Kumar commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post आएँगे जी आएँगे, अच्छे दिन यूँ आएँगे ...गीत / शून्य आकांक्षी
"आदरणीय शून्य आकांक्षी जी, बहुत अच्छा गीत ! मारक व्यंग ! साहसपूर्ण ! जितनी दाद दी जाय कम है. इस गीत से पता चलता है कि साहित्यकार को सत्ता का शाश्वत प्रतिपक्ष क्यों कहते हैं . सादर "
Aug 13
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on Ravi Shukla's blog post गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत
" Ravi Shukla जी,देशभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत शानदार गीत के लिए बधाई स्वीकार करें | यूँ तो पूरा गीत ही भावों  और सधे शिल्प का संगम है पर रेल सेवा में कार्य करने और अभी भी ट्रेड यूनियन गतिविधियों में सक्रिय रहने के…"
Aug 11
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on rajesh kumari's blog post ये जो इंसान आज वाले हैं (एक ही रदीफ़ पर दो गज़लें ---'राज')
"आदरणीया  rajesh kumari जी,बेहतरीन व्यंग्य, हकीकत बयां करतीं शानदार ग़ज़लों के लिए बधाई स्वीकार कीजिएगा |  "
Aug 11
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" posted a blog post

आएँगे जी आएँगे, अच्छे दिन यूँ आएँगे ...गीत / शून्य आकांक्षी

आएँगे  जी   आएँगे, अच्छे  दिन  यूँ  आएँगे |जाएँगे  जी  जाएँगे, भद्दे  दिन  भग  जाएँगे ||  योगासन    प्रारम्भ    करो | आँख, कान, मुँह बन्द करो | पेट   भींचकर   भीतर   को ,साँसों   को   पाबन्द   करो |  उदर-पीठ दोनों हों एक, तब उनको हम भाएँगे | आएँगे  जी   आएँगे, अच्छे  दिन  यूँ  आएँगे ||  क्यों  मेहनत तुम करते हो | दिन - भर  खटते रहते  हो | करो    राजनैतिक    खेती ,भूख, प्यास क्यों  सहते हो |  मंत्री  बन पूँजीपति भी, तलवे तब सहलाएँगे | आएँगे  जी   आएँगे, अच्छे  दिन यूँ  आएँगे ||  तेरी   पेंशन  …See More
Aug 11
Samar kabeer commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post दोहे
"मेरे कहे को मान देने के लिये धन्यवाद मुहतरम ।"
Aug 8
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
"श्री  बसंत कुमार शर्मा जी,बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है | सभी शेर बहुत उम्दा हैं | निम्न शेर के लिए विशेष मुबारकबाद भाई :" बढती बेलें देख के’ अपनी होतीं  हैं    गर्वीली  आँखें"  सप्रेम…"
Aug 8
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post दोहे
"आदरणीय  Samar kabeer साहब,सादर प्रणाम | यह उक्त दोहों की खुशकिस्मती है कि ये आपको पसंद आए | दोहों की प्रशंसा और बधाई देने के लिए आपका हार्दिक आभार | आपका सुझाव सिर आँखों पर | तदानुसार दोहे में मैंने संशोधन कर दिया है |…"
Aug 8
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" posted a blog post

दोहे

दोहे राजनीति   दलदल   यहाँ, मिट्टी  हुई पलीद। मजहब  मजहब लड़ रहे, कहाँ  दिवाली ईद।।1।। कहने   को  करवा  रहे,  ये  रोजा   इफ्तार। मगर  दृष्टि  में  तैरता, वोटों  का  व्यापार।।2।। बादल  अब  बरसे वहाँ, जहाँ बहुत सा नीर। सूखी भू  तरसे  कृषक, बढ़ी  जा  रही  पीर।।3।। सरकारी घन छा गए, रिमझिम पड़े फुहार। झुलस रहा  भूखा  उदर, तर  होता  बाजार।।4।। कर्णधार  सुख  भोगते, भ्रष्टाचार  निहाल। राजनीति  यह  देखकर, हुई  शर्म से लाल।।5।। "मौलिक और अप्रकाशित"See More
Aug 8

Profile Information

Gender
Male
City State
Kota, Rajasthan
Native Place
Mathura
Profession
Retired from Indian Railways
About me
Reading & Writing Literature.

C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s Blog

आएँगे जी आएँगे, अच्छे दिन यूँ आएँगे ...गीत / शून्य आकांक्षी

आएँगे  जी   आएँगे, अच्छे  दिन  यूँ  आएँगे |
जाएँगे  जी  जाएँगे, भद्दे  दिन  भग  जाएँगे || 
 
योगासन    प्रारम्भ    करो | 
आँख, कान, मुँह बन्द करो | 
पेट   भींचकर   भीतर   को ,
साँसों   को   पाबन्द   करो | 
 
उदर-पीठ दोनों हों एक, तब उनको हम भाएँगे | 
आएँगे  जी   आएँगे, अच्छे  दिन  यूँ  आएँगे || 
 
क्यों  मेहनत तुम करते हो | 
दिन - भर  खटते रहते  हो…
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Posted on August 11, 2017 at 1:00am — 7 Comments

दोहे

दोहे 
राजनीति   दलदल   यहाँ, मिट्टी  हुई पलीद।

मजहब  मजहब लड़ रहे, कहाँ  दिवाली ईद।।1।।



कहने   को  करवा  रहे,  ये  रोजा   इफ्तार।

मगर  दृष्टि  में  तैरता, वोटों  का  व्यापार।।2।।



बादल  अब  बरसे वहाँ, जहाँ बहुत सा नीर।

सूखी भू  तरसे  कृषक, बढ़ी  जा  रही  पीर।।3।।



सरकारी घन छा गए, रिमझिम पड़े…
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Posted on August 1, 2017 at 1:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल

उजाड़े हैं हमारे घर, चले शकुनी के पासे हैं . 
तुम्हारे हाथ में हंटर, हुकुम हम तो बजाते  हैं . 
 
हमारी बेटियाँ, बहिनें तुम्हें जायदाद लगती हैं,
हमारा लुट रहा सब कुछ, मगर हम ही लजाते हैं . 
 
इधर जयघोष शंकर का, उधर अल्लाह-ओ-अकबर,
सुना दोनों तरफ दागी, तुम्हारी ही कृपा से  हैं . 
 
अँधेरा हँस रहा रौशन अनाचारी, दुराचारी,
निशा उपभोग करते हैं, दिवस जी भर सताते  हैं…
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Posted on September 23, 2016 at 11:30pm — 2 Comments

दोहे

लिखो किसी भी शिल्प में, मोटा लिखो महीन । 
कलम चले पर इस  तरह, पीड़ित  करे यकीन ॥01॥  
  
रिश्तों   के   पर्वत  किए,  हरियाली   से  हीन । 
चाह   रहा   शीतल  हवा,  कैसा   मूरख  दीन ॥02॥  
 
बंधन   तो  था  जनम  का, हुआ बीच में भंग । 
कैसे   चलता   दूर   तक, धुंध - धूप का  संग ॥03॥   
 
पश्चिम  की आँधी  चली,  भूले  पनघट  गीत । 
गमलों…
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Posted on September 24, 2014 at 9:00pm — 12 Comments

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At 3:49pm on March 14, 2014, Omprakash Kshatriya said…

शून्य आकांक्षी जी जोरदार दोहों के लिए मेरी बधाई स्वीकार करे 

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

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