rajesh kumari commented on Albela Khatri's blog post धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई
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Yogi Saraswat commented on rajesh kumari's blog post द्वन्द
rajesh kumari commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post तेरी निगाह की जादूगरी मैं कैसे लिखूं
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योगराज प्रभाकर commented on rajesh kumari's blog post द्वन्दPosted on May 25, 2012 at 3:00pm 22 Comments 1 Like
चश्मे तो हमने राह में पाये हैं बेशुमार
तेरी ही तिश्नगी में आये हैं बार- बार
प्यार से बिठाया और खुशियाँ लूट ली
धोखे यूँ जिंदगी में खाये हैं कई हजार
सीमाएं मेरे दर्द की वो नाप के गए
अश्क जब काँधे पे बहाये हैं ज़ार-ज़ार
बता गमजदा दिल अब कैसे ढकें बदन
खुशियों के पैरहन कर लाये हैं तार-तार
वादियों में बुलबुलें अब चहकती नहीं
जब दर्द…
ContinuePosted on May 19, 2012 at 6:21pm 22 Comments 1 Like
जिंदगी रूठ के मुझसे कहीं खोई होगी
तकिये में मुंह छिपाकर रोई होगी
जल गई थी जो अरमानों की फसल
यंकी नहीं कि फिर से बोई होगी
बढ़ गई होंगी जब दिल की बेताबियाँ
टूटी मेरी तस्वीर फिर संजोई होगी
मैं जानता हूँ हाल इस वक़्त भी उसका
शबनम ओढ़ के पलकों पे सोई होगी
*****
Ganesh Jee "Bagi" said… आदरणीया श्रीमती राजेश कुमारी जी
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करे |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका प्यार इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
neeraj said… आप सभी का कोटि सा आभार ....आप की सराहना ही संजीवनी है मेरी दम तोडती रचनाओ के लिए आपका .........................नीरज
neeraj said… aapka swagat hai mam hardik dhanybad ..............neeraj
neeraj said… sarahana ki liye bahut bahut dhanyabad.................neeraj
Mukesh Kumar Saxena said… धन्याबाद आपके द्वारा किया गया उत्साहवर्धन ही मुझे लिखने की प्रेरणा देता है.
Admin said… प्रिय सदस्य / सदस्या
आपकी रचना अनुमोदन हेतु प्राप्त है, किन्तु यह रचना पूर्व प्रकाशित होने के कारण अनुमोदित नहीं किया जा सकता, ओपन बुक्स ऑनलाइन के नियमानुसार केवल अप्रकाशित रचनाओं का ही अनुमोदन किया जाता है, अधिक जानकारी हेतु नीचे दिए गए लिंक पर ओ बी ओ नियम देखे |
http://www.openbooksonline.com/page/5170231:Page:12658
आपका
एडमिन
ओपन बुक्स ऑनलाइन
Vinay Kull said… जी, मुझे कोई आपत्ति नहीं है.
Admin said… आवश्यक सूचना:-
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिककर आमंत्रण भेजे |
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