For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

CHANDRA SHEKHAR PANDEY
  • Male
  • बिहार, कैमूर, वर्तमान में बीएचयू वाराणसी में शोधरत
  • India
Share

CHANDRA SHEKHAR PANDEY's Friends

  • डा. उदय मणि कौशिक
  • डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Nilesh Shevgaonkar
  • laxman dhami
  • arvind ambar
  • Kishorekant
  • शुभांगना सिद्धि
  • जितेन्द्र पस्टारिया
  • शिज्जु "शकूर"
  • किशन  कुमार "आजाद"
  • यशोदा दिग्विजय अग्रवाल
  • Ketan Parmar
  • डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा
  • ASHISH KUMAAR TRIVEDI
  • डॉ नूतन डिमरी गैरोला
 

CHANDRA SHEKHAR PANDEY's Page

Latest Activity

CHANDRA SHEKHAR PANDEY commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- नुमायाँ है तू अपनी गुफ़्तार में,
"ऐ ज़िल्ल-ए-ईलाही!! ये इन्साफ़ हो,कि चुनवा दो शैख़ू को दीवार में. नूर साहब क्या बात है, लाजवाब शेर है. वैसे किसको दीवार में चिनवा रहे हैं ?"
May 14
CHANDRA SHEKHAR PANDEY commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल -नूर- नए मिज़ाज के लोगों में तल्खियाँ हैं बहुत,
"KYAA BAAT HAI WAH WAH WAH"
May 5, 2016
ASHISH KUMAAR TRIVEDI left a comment for CHANDRA SHEKHAR PANDEY
"दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ"
Nov 11, 2015
ASHISH KUMAAR TRIVEDI and CHANDRA SHEKHAR PANDEY are now friends
Nov 11, 2015
CHANDRA SHEKHAR PANDEY and Neelkamal Vaishnaw are now friends
Aug 1, 2015
CHANDRA SHEKHAR PANDEY commented on CHANDRA SHEKHAR PANDEY's blog post ग़ज़ल - शेखर 'शम्स'
"आदरणीय मिथिलेश भाई इस सहृदयता और विशद टिप्पणी का हार्दिक आभार"
Jul 17, 2015
दिनेश कुमार commented on CHANDRA SHEKHAR PANDEY's blog post ग़ज़ल - शेखर 'शम्स'
"धधकना दिल के भी शोलों का यूं ज़रूरी है ये फ़स्ले -दर्द को इक मानसून देते हैं... क्या ग़ज़ल कही है शेखर साहब... दिल से दाद स्वीकारें।"
Jul 16, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on CHANDRA SHEKHAR PANDEY's blog post ग़ज़ल - शेखर 'शम्स'
"आदरणीय शेखर जी बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल हुई है, शेर दर शेर दाद कुबूल फरमायें. तड़पने वाले को हरगिज़ न ख़ून देते हैंये हैं वो लोग जो सबको जूनून देते हैं........... बेहतरीन मतला  ख़ुदा को देख सकें इनमें वो नज़र ही नहींबुतों को देख के दिल को सुकून देते…"
Jul 16, 2015
CHANDRA SHEKHAR PANDEY commented on CHANDRA SHEKHAR PANDEY's blog post ग़ज़ल - शेखर 'शम्स'
"आदरणीय सुशील सर बहुत बहुत धन्यवाद"
Jul 15, 2015
Sushil Sarna commented on CHANDRA SHEKHAR PANDEY's blog post ग़ज़ल - शेखर 'शम्स'
"वाह वाह और वाह ही कहेंगे इन खूबसूरत अहसासों से लबरेज़ अशआर वाली ग़ज़ल के लिए ''धधकना दिल के भी शोलों का यूं ज़रूरी हैये फ़स्ले -दर्द को इक मानसून देते हैंगज़ब के अहसास पिरोये हैं आपने … हार्दिक बधाई आदरणीय जी।"
Jul 14, 2015
CHANDRA SHEKHAR PANDEY commented on CHANDRA SHEKHAR PANDEY's blog post ग़ज़ल - शेखर 'शम्स'
"1212 1122 1212 22 भैया यह रहा वज़्न। बहुत दिनों बाद इधर आया तो भूल गया कि वज़्न भी लिखना है"
Jul 14, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on CHANDRA SHEKHAR PANDEY's blog post ग़ज़ल - शेखर 'शम्स'
"आदरणीय चन्द्र शेखर जी, आप मंच के पुराने सदस्य और मेरे अग्रज है इसलिए क्षमा सहित एक निवेदन है ग़ज़ल की बह्र या वज्न अवश्य लिख दीजिये, पाठकों को सहजता होगी. उसके बाद ही पाठक ग़ज़ल का लुत्फ़ भी ले सकेंगे और प्रतिक्रिया भी दे सकेंगे. सादर "
Jul 14, 2015
CHANDRA SHEKHAR PANDEY posted blog posts
Jul 14, 2015
CHANDRA SHEKHAR PANDEY commented on Saurabh Pandey's blog post किन्तु इनका क्या करें ? (नवगीत) // -सौरभ
"वाह वाह क्या बात है सर ज़िंदाबाद"
Jul 6, 2015
CHANDRA SHEKHAR PANDEY's blog post was featured

बैठ गया

दहाने-ज़ख्म में वो कील कर के बैठ गयावफ़ा की खुश्बुओं की झील कर के बैठ गया।न कर सका जो अपने ख़्वाब की तरफदारीवो अपनी अक़्ल को वकील कर के बैठ गयानशा चढ़ा है सुर्खियों का इस क़दर उसकोकि अपने आप को जलील कर के बैठ गया।फिर आज दिल ने मुझ को कू ए यार में टोकाफिर आज उससे मैं दलील कर के बैठ गया।तुम्हारे बाद हिज़्र की हमारी हर शब कोफ़लक कुछ और ही तवील कर के बैठ गया।वफा की राह तो थी दश्ते-कर्बला 'शेखर'वो हक़ की चाह को सबील कर के बैठ गया।शेखरमौलिक व अप्रकाशितSee More
Dec 3, 2014

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on CHANDRA SHEKHAR PANDEY's blog post रौशनी बारूद से होती नहीं है दोस्तो
"इस लाजवाब, उम्दा ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई "
Dec 2, 2014

Profile Information

Gender
Male
City State
VARANASI
Native Place
लहुरीबारी, मोहनियां जिला कैमूर बिहार
Profession
Teacher Educator, M.Ed,M.B.A, UGC-NET(Education), PhD Pursuing from B.H.U Varanasi.
About me
मूलस्थान- कैमूर बिहार। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी, से बीए, बीएड, एम एड(2002-07) करने के बाद राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा,2007 में शिक्षाशास्त्र विषय से उत्तीर्ण की और फिर यूनिवर्सिटी आफ एलाहाबाद से एमबीए 2008-10 किया। एक वर्ष तक 2010-11 एक राष्ट्रीय स्तर की नान प्राफिट संस्था न्यू एजुकेशन ग्रुप फाउंडेशन फार इन्नोवेशन एंड रिसर्च, इन एजुकेशन दिल्ली आधारित, में बतौर जिला समन्वयक, उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में समाज सेवा की। एक वर्ष 2011-12 श्रीराम कालेज आफ मैनेजमेंट (मुजफ्फरनगर) में अध्यापन किया। वर्तमान में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में शिक्षा संकाय में अंतर्नुशासनात्मक अनुसंधान में संलग्न हूं। नवीनतम शैक्षिक उपलब्धि में प्रबंधशास्त्र में यूजीसी नेट उत्तीर्ण किया (जून 2013)

CHANDRA SHEKHAR PANDEY's Photos

Loading…
  • Add Photos
  • View All

CHANDRA SHEKHAR PANDEY's Blog

ग़ज़ल - शेखर 'शम्स'

1212 1122 1212 22

तड़पने वाले को हरगिज़ न ख़ून देते हैं

ये हैं वो लोग जो सबको जूनून देते हैं

ख़ुदा को देख सकें इनमें वो नज़र ही नहीं

बुतों को देख के दिल को सुकून देते हैं

जो दम लिया तो फ़लक गिर न जाएगा नीचे

हमारे हौसले इसको सुतून देते हैं

धधकना दिल के भी शोलों का यूं ज़रूरी है

ये फ़स्ले -दर्द को इक मानसून देते हैं

बढ़ा है शाम को दर्दे जिगर कुछ ऐसे 'शम्स'

सितारे मर्ग़ का हमको शुगून देते…

Continue

Posted on July 14, 2015 at 11:00am — 7 Comments

बैठ गया

दहाने-ज़ख्म में वो कील कर के बैठ गया

वफ़ा की खुश्बुओं की झील कर के बैठ गया।



न कर सका जो अपने ख़्वाब की तरफदारी

वो अपनी अक़्ल को वकील कर के बैठ गया



नशा चढ़ा है सुर्खियों का इस क़दर उसको

कि अपने आप को जलील कर के बैठ गया।



फिर आज दिल ने मुझ को कू ए यार में टोका

फिर आज उससे मैं दलील कर के बैठ गया।



तुम्हारे बाद हिज़्र की हमारी हर शब को

फ़लक कुछ और ही तवील कर के बैठ गया।



वफा की राह तो थी दश्ते-कर्बला 'शेखर'

वो हक़ की चाह को… Continue

Posted on November 27, 2014 at 10:24pm — 6 Comments

ग़ज़ल

फेसबुक पर ग़ज़लसराई की
हद है आखिर ये ख़ुदनुमाई की


क्या कहें इनकी पारसाई की
नस्ल पूछे है भाई भाई की

चंद खुशियाँ अगर नहीं बाँटीं
ज़िन्दगी भर में क्या कमाई की

रास्तों ने मेरी खिलाफ़त में
मंज़िलों से बहुत बुराई की।

इस जहाँ में न जीते जी पूछा
बाद मेरे बहुत बड़ाई की।

है सियासत भी दीन की महमाँ
हैसियत इसकी घर-जमाई की

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on November 24, 2014 at 10:30am — 4 Comments

ग़ज़ल

मुहब्बत में कोई रिश्ता नहीं देखा
परिंदा क़ैद में उड़ता नहीं देखा।

वफ़ा को क़ैद कहना है ख़िरदमंदी
ख़िरदमंदों को कुछ जँचता नहीं देखा।

सुनो फ़ितरत तो कुदरत ही बनाती है
शरीफों को कभी गिरता नहीं देखा।

ये आशिक़ सब के सब जैसे ज़नाना हैं
इन्हें हर बात पे रोता नहीं देखा?

बनाए रास्तों पर क्या चलें शेखर
फ़लक पे मैंने तो रस्ता नहीं देखा!

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on November 23, 2014 at 6:16am — 7 Comments

Comment Wall (6 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 12:40pm on November 11, 2015, ASHISH KUMAAR TRIVEDI said…

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

At 9:50am on November 20, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

आपकी मित्रता स्वीकार करते हुए ख़ुशी हो रही है श्री बृजेश नीरज जी | आशा है हम

मिलकर साहित्य वृद्धि  में अपना अधिक योगदान दे पायेंगे |

At 2:41pm on November 19, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

मित्र 

आपका हृदयं  से स्वागत है   i 

सस्नेह  i

At 9:56am on September 27, 2013, Abhinav Arun said…

सफल समर्थ सशक्त शिखर हों ..बहुत शुभकामनायें श्री शेखर जी !!

At 11:12am on August 18, 2013, डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा said…

शुभकामना और उफनती सुन्दर रचनाओं के लिए बधाई.

At 1:38pm on August 11, 2013, mrs manjari pandey said…

  धन्यवाद चन्द्रशेखर जी ! आपको रचना सरस लगी !

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post बस यूँ ही दशरथ माँझी... / किशोर करीब
"प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
24 minutes ago
Samar kabeer replied to Saurabh Pandey's discussion दोहा छंद में शुद्धता की आवश्यकता // --सौरभ in the group भारतीय छंद विधान
"जनाब सौरभ पाण्डेय साहिब आदाब,बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी के लिये आपका धन्यवाद । सरसी छन्द की मिसाल…"
28 minutes ago
Samar kabeer joined Admin's group
Thumbnail

भारतीय छंद विधान

इस समूह में भारतीय छंद शास्त्रों पर चर्चा की जा सकती है | जो भी सदस्य इस ग्रुप में चर्चा करने के…See More
28 minutes ago
BS Gauniya updated their profile
1 hour ago
KALPANA BHATT replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-२ में स्वीकृत सभी लघुकथाएँ
"आज इन कथाओं को पढ़कर अच्छा लगा | पहले संकलन में शामिल रचनाये मिल नहीं रही है पर कुछ कथाये पढ़ी उसकी…"
1 hour ago
Gurpreet Singh posted a blog post

ग़ज़ल --इस्लाह के लिए

      (122-122-122-12)रहे हम तो नादां ये क्या कर चले कि दौर ए जफ़ा में वफ़ा कर चले।वो तूफ़ान के जैसे आ…See More
1 hour ago
Sushil Sarna posted a blog post

नज़र की हदों से .....

नज़र की हदों से .....अग़र तेरे बिम्ब ने मेरे स्मृति पृष्ठ पर दस्तक न दी होती मैं कब का तेरी नज़र…See More
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post नज़र की हदों से .....
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।"
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post नज़र की हदों से .....
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब, आदाब, सृजन को अपने स्नेह से प्रोत्साहित करने का हार्दिक आभार।"
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post नज़र की हदों से .....
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब, सृजन के मर्म को अपनी स्नेहिल प्रशंसा से अलंकृत करने का दिल से आभार।…"
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post नज़र की हदों से .....
"आदरणीय रवि शुक्ला जी सृजन के भावों को अपनी स्नेहाशीष से उत्साहित करने का हार्दिक आभार। "
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post नज़र की हदों से .....
"आदरणीय नरेंद्र सिंह चौहान जी सृजन को मान देने का हार्दिक आभार।"
1 hour ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service