इस समूह में भारतीय छंद शास्त्रों पर चर्चा की जा सकती है | जो भी सदस्य इस ग्रुप में चर्चा करने के इच्छुक हों वह सबसे पहले इस ग्रुप को कृपया ज्वाइन कर लें !
Location: ओपन बुक्स ऑनलाइन
Members: 41
Latest Activity: May 20
साथियों !
इस समूह में भारतीय छंद पर व्यापक चर्चा की जायेगी, साथ में छंदों का नियम विधान आदि पर भी जानकारी साझा की जायेगी |
Started by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी May 8. 0 Replies 0 Likes
रोला छन्द से सम्बंधित संक्षिप्त जानकारी साझा कर रहा हूं।छन्द के आदरणीय विद्वज्जन से सुझाव व चर्चा सादर आमंत्रित है।रोला छंद एक अर्द्धसम मात्रिक छंद है।इस छंद के चार चरण होते हैं।प्रथम व द्वितीय चरण में 24 तथा तृतीय व चतुर्थ चरण में भी 24 मात्रायें होती हैं।प्रथम एवं तृतीय चरण में 11वीं तथा द्वितीय एवं चतुर्थ चरण में 13वीं मात्रा पर यति (विराम) होती है।प्रथम एवं तृतीय चरण के अंत में गुरु लघु या 2 1 होना चाहिए।कुछ छंदकार इसके द्वितीय एवं चतुर्थ चरण में गुरु आवश्यक मानते हैं किन्तु बहुधा छंदकारों…Continue
Started by arunendra mishra. Last reply by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA May 10. 7 Replies 3 Likes
छन्द मात्रा या वर्ण को सूत्र में पिरोकर की गयी वाक्य रचना को छन्द कहते है , जैसे व्याकरण द्वारा गद्य का अनुशासन होता है , वैसे ही छन्द द्वारा पद्य का . छन्द शास्त्र के आदि प्रणेता पिंगल नाम के ऋषि थे अतः छन्द को पिंगल के नाम से भी जाना जाता है . छन्द की परिभाषा निम्न प्रकार से की जा सकती है सामान्यत: वर्णों और मात्राओं की गेयव्यवस्था को छंद कहा जाता है [१]या तुक , मात्रा , लय, विराम , वर्ण आदि के नियमो से आबद्ध पंक्तिया छन्द कहलाती है . छन्द के अंग १. वर्ण - वर्ण दो प्रकार के होते है - लघु…Continue
Started by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी. Last reply by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी Apr 17. 7 Replies 0 Likes
उल्लाला सम मात्रिक छन्द है।इसके प्रत्येक चरण में 13-13 मात्राओं के हिसाब से 26 मात्रायें तथा 15-13 के हिसाब से 28 मात्रायें होती हैं।इस तरह उल्लाला के दो भेद होते है।तथापि 13 मात्राओं वाला छन्द ही विशेष प्रचलन में है।इस छन्द में लघु-गुरु का कोई विशेष नियम नहीं है लेकिन 11वीं मात्रा लघु ही होती है।15 मात्राओं वाले उल्लाला छन्द में 13 वीं मात्रा लघु होती है। 13 मात्राओं वाले उल्लाला के सन्दर्भ में एक दिलचस्प तथ्य यह है कि यह बिल्कुल दोहे की तरह होता है,बस दूसरे चरण में केवल दो मात्रायें बढ़ जाती…Continue
Started by SHAILENDRA KUMAR SINGH 'MRIDU' Apr 4. 0 Replies 1 Like
गतिउच्चरित ध्वनि के प्रवाह को लय कहते हैं लय एक संयत व्यवस्था है जो स्वर के चढ़ाव उतार से जन्म लेती है. स्वर या तो धीरे से उच्चारण करते हैं या जोर से इसी कम ज्यादा चढ़ाव उतार को लय कहते हैं.यही लय छंद की जान है यही छंद की गति है,इस गति की रक्षा काव्य की प्रथम कसौटी है गति का भंग होना कवि की असफलता की निशानी है गति भंग एक ऐसा दोष है जिससे काव्य पाठ का सारा मजा किरकिरा हो जाता है.यतिइसी गति की रक्षा के लिए यति का विधान किया गया है छोटे छोटे छंदों में यति की आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि इन छंदों की…Continue
Started by SHAILENDRA KUMAR SINGH 'MRIDU' Mar 23. 0 Replies 1 Like
********************************************************************************************************************* मै यहाँ पर कुछ घनाक्षरी छंद लिखने के नियम साझा कर रहा हूँ इन्हें समझने के लिए मैंने कुछ रचनाकारों की कृतियाँ उदाहरण के रूप में ली हैं जिनसे नियम समझने में सहायता होगी . उदाहरण में नियम लागू करने के लिए कंही कहीं पर मै केवल दो चरण ही लिख रहा हूँ वैसे घनाक्षरी प्रायः चार चरण की होती है…Continue
Started by Ambarish Srivastava. Last reply by JAWAHAR LAL SINGH Mar 29. 1 Reply 1 Like
कुंडलिया कुंडलिया छंद से सम्बंधित जानकारी साझा कर रहा हूँ आशा है कि इसकी सहायता से आदरणीय विद्वजन अपनी कुंडलिया में अपेक्षित लाभ उठा सकेंगे | कवि गिरधर व कुंडलिया एक दुसरे के पर्याय माने जाते हैं |“छः चरणों से युक्त कुंडलिया के प्रत्येक चरण में चौबीस मात्राएँ होती हैं यह छंद एक दोहा(१३+११ मात्रा) व रोला (११+१३ मात्रा) के संयोग से निर्मित होता है | जिस शब्द से यह प्रारंभ होता है उसी से इसका समापन भी किया जाता है चूँकि रोले का समापन दीर्घ से होता है अतः कुंडलिया के प्रारंभिक शब्द के अंत में में…Continue
Started by Ambarish Srivastava. Last reply by Ambarish Srivastava Mar 20. 4 Replies 0 Likes
तोमर छंद(परिभाषा )तोमर छंद एक मात्रिक छन्द है जिसके प्रत्येक चरण में १२ मात्राएँ होती हैं | पहले और दुसरे चरण के अन्त में तुक होता है, और तीसरे और चौथे चरण के अन्त में भी तुक होता है | इसके अंत में एक गुरु व एक लघु अनिवार्य होता है | श्रीराम चरित मानस में तीन स्थानों पर आठ-आठ (कुल २४) तोमर छन्दों का प्रयोग है |ये तीन स्थान हैं……..…Continue
Started by Ambarish Srivastava. Last reply by Saurabh Pandey May 18. 3 Replies 1 Like
हरिगीतिका:हरिगीतिका चार चरण वाला एक सम मात्रिक छंद है इसके प्रत्येक चरण में १६ व १२ के विराम से २८ मात्रायें होती हैं तथा अंत में लघु गुरू आना अनिवार्य है | अधिकतर पर यह छंद ईश-वंदना में प्रयोग किया जाता है | मम मातृभूमिः भारतं धनधान्यपूर्णं स्यात् सदा । नग्नो न क्षुधितो कोऽपि स्यादिह वर्धतां सुख-सन्ततिः । स्युर्ज्ञानिनो गुणशालिनो ह्युपकार-निरता मानवः,…Continue
Started by Saurabh Pandey. Last reply by Sanjay Mishra 'Habib' Feb 26. 1 Reply 2 Likes
सद्यः समाप्त हुए ’चित्र से काव्य तक’ प्रतियोगिता-सह-आयोजन (अंक - १०) में अनुष्टुप छंद पर भी प्रविष्टि आयी. ऐडमिन के सुझाव के अनुसार उक्त प्रविष्टि के साथ छंद पर लिखे फुट-नोट को पाठकों की सुविधा के लिये इस ग्रुप में डाला जा रहा है.**********यह संस्कृत भाषा का एक अत्यंत ही प्रसिद्ध वार्णिक छंद है. श्रीमद्भग्वद्गीता, श्रीसुक्तम, गायत्री कवचम्, विष्णु सहस्रनाम आदि-आदि की रचना इसी छंद में हुई है.इस छंद के चार चरण होते हैं, प्रत्येक चरण में आठ-आठ वर्ण होते हैं, घनक्षरी की प्रथम पंक्ति के दोनों चरणों…Continue
Started by Ambarish Srivastava. Last reply by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' Apr 8. 14 Replies 4 Likes
साथियों! "भारतीय छंद विधान" समूह में आप सभी का हार्दिक स्वागत है| इस पर आयोजित प्रथम चर्चा के अंतर्गत आज हम सब यहाँ पर "दोहा" छंद पर चर्चा करते हुए इससे सम्बंधित जानकारी एक दूसरे से साझा करेंगें! गुरु गोविन्द दोऊ खड़े. काको लागूं पायं।बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय।। जैसा भोजन खाइये, तैसा ही मन होय| जैसा पानी पीजिये, तैसी…Continue
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Comment by Arun Srivastava on March 23, 2012 at 1:02pm अब कुछ ठीक है ! आभार !
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on February 21, 2012 at 7:03am आवश्यक सूचना:-
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Rohit Dubey "योद्धा " commented on Rohit Dubey "योद्धा "'s blog post कोशिशों के समंदर© 2012 Created by Admin.
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