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पीयूष द्विवेदी भारत
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पीयूष द्विवेदी भारत's Discussions

समस्यापूर्ति ?
16 Replies

समस्यापूर्ति का नाम पिछले कुछ दिनों से, तमाम लोगों द्वारा काफी सुनने को मिला ! इस दौरान मुझे सिर्फ इतना पता चल पाया था कि समस्यापूर्ति साहित्य से जुड़ी हुई कोई क्रिया है ! थोड़ी खोजबीन किया तो एक…Continue

Tags: समस्यापूर्ति

Started this discussion. Last reply by पीयूष द्विवेदी भारत Dec 6, 2012.

 

Welcome, पीयूष द्विवेदी भारत

Profile Information

Gender
Male
City State
नोएडा
Native Place
देवरिया .सजाँव
Profession
छात्र और लेखक
About me
हम एगो छात्र बानी! स्वतंत्र रूप से लेखन के काम भी करेलीं! हमरा खातिर पहिले भारत बा, फेर कुछ अऊर!

पीयूष द्विवेदी भारत's Blog

सफर में चलते रहना ही हमारी कामयाबी है (गज़ल)

अरकान : १२२२/ १२२२/ १२२२/ १२२२

गिरें  तो  फिर  सम्हलना  ही  हमारी  कामयाबी है !

सफर  में  चलते  रहना  ही  हमारी  कामयाबी  है !

 

नही  ये कामयाबी  है  कि  मंजिल  पा  लिया हमने…

Continue

Posted on September 24, 2013 at 8:24am — 26 Comments

लघुकथा : आंधी

एक गाँव था ! वहां बहुत सारे पापी रहते थे ! पाप करते और पानी से धो लेते ! धोते-धोते एकदिन सारा पानी खत्म हो गया ! पानी खत्म होने पर उन पापियों के पाप से गाँव तपने लगा ! उस तपन को पापियों ने नज़रंदाज़ कर दिया और पहले की ही तरह पाप करते रहे ! तपते-तपते आखिर एकदिन बड़ी भयानक आग उठी और उन पापियों को जलाने के लिए बढ़ने लगी ! पानी तो था नही,  इसलिए पापियों ने आग से बचने के लिए उसपर खूब सारी मिटटी डाल दी ! आग दबने लगी, पापी खुश होने लगे कि तभी बड़ी जोर से आंधी आई और सारी मिट्टी उड़ गई ! अब हवा से परवाज…

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Posted on August 7, 2013 at 7:04pm — 10 Comments

तुम मेरी कौन हो

अनंत मनोभाव जब,

शब्द से क्यों मौन हो ?

तुम मेरी कौन हो ?

 

किंचित मुझे भी ज्ञान है,

किंचित जो तुमसे ज्ञात हो,

अनुत्तरित सा प्रश्न ये,

उत्तरित हो जाय, कि

आभास से समीपता,

पर दृष्टि से क्यों गौण हो ?

 

लगता मुझे कि ब्रह्म-सी,

नेत्र-शक्ति से परे,

अनुभवीय मात्र हो !

आत्मदर्शनीय, किन्तु

बाह्य हींन गात्र हो !

 

सत्य क्या ? पता नही,

किन्तु, कुछ अनुमान है…

Continue

Posted on July 31, 2013 at 4:04pm — 4 Comments

गज़ल

शैक्षिक व्यस्तताओं तथा गाँव यात्रा के कारण काफी समय तक ओबीओ से दूर रहना पड़ा ! इतने दिनों में काफी याद आया अपना ये ओबीओ परिवार ! लगभग पाँच महीने बाद आज पुनः ओबीओ पर लौटा हूँ ! सर्वप्रथम सभी आदरणीय मित्रों को नमस्कार, तत्पश्चात ये एक छोटी-सी गज़ल नज़र कर रहा हू ! इसके गुणों-दोषों पर प्रकाश डालकर, मुझ अकिंचन को कृतार्थ करें ! सादर आभार !

अरकान : २१२२/२१२२

जिन्दगी की क्या कहानी !

गर नही आँखों में पानी !

भ्रष्टता…

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Posted on July 20, 2013 at 4:30pm — 24 Comments

Comment Wall (3 comments)

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At 11:32pm on August 11, 2013, mrs manjari pandey said…

    आदरणीय पीयूष द्विवेदी जी धन्यवाद एकदम मन से  !

At 11:51pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 10:57am on December 3, 2012, mrs manjari pandey said…

piush ji aapki rachnayen dekhin acch lagin. maine abhi new hi join kiya hai. hindi me likhne ki prakriya samajh nahi paa rahi hoon. abhi out of country hoon jan.2013 me aa kar ek bar kisi sesamajh kar phir kuch judne ka prayas karoongi.

 
 
 

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