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लक्ष्मण रामानुज लडीवाला
  • जयपुर rajasthan
  • India
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लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"चित्र पर सरसी छंद में सुंदर गीत रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें आ. प्रतिभा जी | सदर "
Jun 17
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"चित्र के अनुरूप अति सुंदर और सार्थक सरसी छंद रचना हुई है आदरणीय बहुत बहुत बधाई आपको "
Jun 17
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"कुंडलिया छंद को मान देने के लिए हार्दिक आभार आपका आदरणीय हार्दिक आभार आपका आ. सतीश मापत्पुरी जी | सादर नमन"
Jun 17
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"बहुत बहुत आभार आपका जनाब मोहम्मद आरिफ साहब |"
Jun 17
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"जी | टंकण त्रुटियों की ओर ध्यान दिलाने के लिये सादर आभार आपका आ.सौरभ पाण्डेय जी | कल यहाँ सीधे ही टंकित कर पोस्ट करने पर सम्पादन रह गया | इन्हें संशोधित रूप में प्रस्तुत है - तपता जर्जर वृद्ध भी, जब तक चलती साँस तपता लोहे संग में, लिये आत्म विश्वास…"
Jun 17
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत बहुत् आभार आपका श्री तस्दीक अह्मद खान साहब | "
Jun 17
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"हार्दिक आभार आपका श्रीं अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, | कल यहाँ सीधे ही छंद टंकित करने के कारण सम्पादन करने से रच गये थे | दूसरे छंद की पांचवी पंक्ति में वस्तु लेती रूप की जगह "धरे वस्तुएँ रूप,श्रमिक का फूलें सीना" करना है | संकलन में ही यह…"
Jun 17
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"चित्र से काव्य सामारोह -74 में प्रथम रचना - कुंडलिया छंद  तपता जर्जर वृद्ध भी, जब तक चलती सास तपता लोहे संग में, लिये आत्म विश्वास || लिये आत्म विश्वास, आंच में लोह तपाता फिर साँचें में ढाल, वस्तुएं खूब बनाता | वही सिखाता जाप, स्वयं जो पहले…"
Jun 16
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"चित्रं पर सार्थक भावों की सुंदर कुंडलिया छंद रचना के लिए हार्दिक बधाई श्री सतविंदर कुमार जी | दूसरी कुंडलिया छंद रचना तो लाजवाब बन पड़ी है विशेष कर दोहे को पढ़कर आनंद आ गया |"
Jun 16
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुंदर कुंडलिया छंद और सरसी छंद रचना | वाह ! ये "आहनगर"शब्द खूब स्त्माल किया है आपने वाह !  "
Jun 16
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 74 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छंद में सुंदर शुरुआत करने के लिए हार्दिक बधाई "
Jun 16
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-80
"अतिशय आभार आपका श्री लक्ष्मण धामी साहब "
Jun 10
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-80
"हार्दिक आभार आपका श्री महेंद्र कुमार जी | अब मुखड़े की प्रथम पंक्ति को संकलन के समय संशोधन कर पाऊंगा | सादर "
Jun 10
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-80
"बहुत बहुत आभार आपका जनाब तस्दीक अहमद खान साहब "
Jun 10
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-80
"अतिशय आभार आपका आ. सतविन्द्र कुमार जी "
Jun 10
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-80
"जी , मुखड़े की प्रथम पंक्ति को संकलन के समय संशोधन करने का प्रयास रहेगा | आपका हार्दिक आभार आ. योगराज भाई जी | सादर नमन "
Jun 10

Profile Information

Gender
Male
City State
JAIPUR
Native Place
India
Profession
Retired Govt service
About me
Interest in writing poems,stories and articles

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About me

 Retired Accountant from Collectorate,Jaipur and Rajasthan Vidhan Sabha,Jaipur

 now working as an Advisor of SBI Life Insurance Co. Ltd.and Investment consultant

  I had been co-editor of "AGRAMMI" monthli magazine since 1975 to 1978, and Editor

 of "Nirala-Samaj" Quarterly both are social magazines of Agrawal community.Jaipur

   Articles published in Rajasthan Patrika, and Rastradoot daily fro JAIPUR in 1970 and 

   1980 decads

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's Blog

दोहे

महिला दिवस पर रचित दोहे -



मही रूप देवी धरे, धैर्य गुणों की खान

साहस की प्रतिमूर्ति भी, नारी को ही मान | 



सृष्टि सृजनकर्ता यही,यही मही का अर्थ,

रणचण्डी भी बन सके, नारी सभी समर्थ ।



महिला से महके सदा,घर आँगन में फूल

वही सजाती घर सदा, मौसम के अनुकूल ।



जीवन के हर रूप में, नारी मन उपहार,

आलोकित जीवन करे, खुशियों के…

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Posted on March 9, 2017 at 4:30pm — 4 Comments

आस्था (लघु कथा)

संतों तक को झूठी रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार कर सरकार अच्छा नहीं कर रही | देश विदेश में लाखों अनुयायी किसी के ऐसे ही बनते | मेरे घर से अपनी बहन के साथ इनके आश्रम में 15 दिन रहकर आई है | चेलों का बड़ा ख्याल रखा जाता है | नियमित व्याखान और पूजा पाठ चलता रहता है | बहुत पहुँचे हुए संत है, मैंने भी पुष्कर में इनके प्रवचन सुने है |

पाठक जी बोले - ये सब तो ठीक है ओझा जी, पर इनके खिलाफ अश्लील कारनामे और महिलाओं के साथ लिप्त पाए जाने के पुख्ता सबूत के आधार पर ही गिरफ्तार किया है | कई शहरों में…

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Posted on February 21, 2017 at 12:22pm — 10 Comments

कुण्डलिया छंद - लक्ष्मण रामानुज

कुंडलिया छंद 

=========

सुख-सुविधा से काटते, जीवन उसके साथ,

जब सजनी के काम में, आप बँटाते हाथ। | 

आप बँटाते साथ, ह्रदय में प्रेम बरसता 

करे सभी सहयोग, उसी के घर समरसता 

रहे सभी जब साथ, फिर न जीवन में दुविधा 

पुत्र बहूँ औ पौत्र, मिलें सबको सुख-सुविधा |

(2)

जीवन के संग्राम में, करते जो संघर्ष,

सुगम रह उसकी बने, जीवन हो उत्कर्ष ।

जीवन हो उत्कर्ष, राह में आगे बढ़ता

करे सत्य ही बात,अकारण कभी न अड़ता

स्वार्थ भावना…

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Posted on December 6, 2016 at 3:50pm — 4 Comments

कुण्डलिया छंद - लक्ष्मण रामानुज

कुण्डलिया छंद 
=========
तिल हो गोरे गाल पर, निखरे गोरे गाल,
अला बला फटकें नहीं, किसकी गलती दाल
किसकी गलती दाल, पस्त हो सबकी हिम्मत 
रखें फटें में पाँव, कौन की खोटी किस्मत | 
चन्दा के भी दाग, सिन्धु में प्रेम सलिल हो 
सुन्दरता का चिन्ह, अगर गौरी के तिल हो |

- लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला

Posted on December 1, 2016 at 3:30pm — 10 Comments

कुण्डलिया छंद - लक्ष्मण रामानुज

सौतेली माँ हो रही, सभी जगह बदनाम

राज त्याग वन को गये,त्रेता में श्री राम।।

त्रेता में श्री राम, हुए शिकार सब जाने

कोख से रहे लगाव, सुने फिर सबके ताने

कैसे बदले भाव, आज भी बनी पहेली

दशरथ को अघात,आज भी दे सौतेली |

 

माँ की ममता कोख से, जग जाने यह बात, 

सौतेली सहती रहे, पुत्रों  से  आघात ।

पुत्रों से  आघात, बड़ा ही पहने पगडी

ह्रदय झेलता शोक, चोट जो लगती तगड़ी 

प्रभु करें उद्धार, भाव में आये समता

ह्रदय भरे सद्भाव, सभी में माँ…

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Posted on October 27, 2016 at 2:04pm — 2 Comments

हमें बढ़ाना मान (दोहे)

हिंदी दिवस की शुभ कामनाओं के साथ  कुछ दोहे -

हमें बढ़ाना मान (दोहे)

=================

हिंदी में साहित्य का, बढ़ा खूब भण्डार 

हम संस्कृति का देखते, शब्दों में श्रृंगार |

कविता दोहा छंद में, सप्त सुरों का राग 

गीत गीतिका छंद में, भरें प्रेम अनुराग…

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Posted on September 14, 2016 at 11:30am — 12 Comments

Comment Wall (59 comments)

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At 3:25pm on November 19, 2015, pratibha pande said…

 जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ आपको आदरणीय लडीवाला जी  

At 4:56pm on November 19, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय लडीवाला जी

आपको जन्मदिवस के अवसर पर ढेरो शुभ कामनाये i आप चिरायु हो और स्वस्थ रहें i

At 11:03am on October 2, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय लक्ष्मण भाई , आपका बहुत्बहुत आभार !!

At 9:56pm on September 23, 2013, SANDEEP KUMAR PATEL said…

आदरणीय लक्षमण सर जी सादर धन्यवाद आपका स्नेह और आशीष यूँ ही बनाये रखिये

At 8:53am on September 2, 2013, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

लक्ष्मण भाई- सप्रेम राधे- राधे । सही सलाह एवं गीत को दिल से पसंद करने के लिए हार्दिक् धन्यवाद ॥

At 8:30am on August 15, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय लडीवाला सर  प्रणाम , रचना पसंद करने के लिए आपका तहेदिल से आभार और धन्यवाद !

At 1:34pm on August 11, 2013, mrs manjari pandey said…

आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी हार्दिक आभार.

At 4:57pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

abhar laxman ji

At 8:15pm on July 23, 2013, Albela Khatri said…

aapke prem ke liye aabhari hun bahut bahut aabhaar evm dhnyavaad आपका स्नेह, दुलार, आशीष एवं आत्मीयता की सुगंध का झोंका मेरे जीवन में नया उजाला लाएगा ...ऐसा मुझे भरोसा है ........आपकी कृपादृष्टि के लिए कृतज्ञ हूँ

सादर

At 12:30pm on July 18, 2013, राज़ नवादवी said…

आदरणीय लक्ष्मण जी, हांलाकि मुझे दोहों का कुछ ख़ास ज्ञान नहीं है मगर क्या खूब कहा है आपने-

'बहका बहका दिख रहा, खुद का ही व्यवहार

जैसे सब कुछ ख़त्म है, मन मेरा लाचार | '

बधाई हो!

 
 
 

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