For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला
  • जयपुर rajasthan
  • India
Share

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's Friends

  • seemahari sharma
  • पं. प्रेम नारायण दीक्षित "प्रेम"
  • Priyanka Pandey
  • Alok Mittal
  • CHANDRA SHEKHAR PANDEY
  • D P Mathur
  • Dr Ashutosh Vajpeyee
  • यशोदा दिग्विजय अग्रवाल
  • अशोक कत्याल   "अश्क"
  • Dr. Swaran J. Omcawr
  • ASHISH KUMAAR TRIVEDI
  • डॉ नूतन डिमरी गैरोला
  • बृजेश नीरज
  • वेदिका
  • Aarti Sharma
 

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's Page

Latest Activity

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"जी | सादर आभार श्री सुरेन्द्र नाथ जी "
yesterday
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय उनका नाम न लेकर योगी को कामन मान लिखा था | इसकी जगह अब - आज संतो की यहाँ जनता दिवानी हो गई संत बनकर घूमते कुछ की रवानी हो गयी  |  और अंतिम - बादलो को आग काबू कर बुझाना आ गया इंद्र धनुषी रौशनी से छत आसमानी हो गई | सादर "
yesterday
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"गजल - रदीफ़- हो गईं = काफिया-आनी संत योगी की यहाँ जनता दिवानी हो गई राम मंदिर दिव्य हो चर्चा सियानी हो गई |   गंदगी अब खून में रग रग समायी है यहाँ गंदगी पर खूब अब झाड़ू भवानी हो गई |   खून करके लाश विकृत कर छिपाना आम था खून कर बचते…"
yesterday
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on Sushil Sarna's blog post यादें......
"इंसान आगाज़ से अंजाम तक यादों के संग जीता है यादों के संग मर जाता है यादों के फ्रेम में वो खुद इक याद बन जाता है --- सत्य कहाँ आपने साहब | एक दिन इंसान खुद याद बन जाता है | सुंदर रचना के लिए बधाई "
Wednesday
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
" आतशय आभार आपका श्री सतविंदर कुमार जी - संशोधन प्रस्तावित देखे - कुदरत करती न्याय सदा ही, देखो सरसों फूलें   सैर करे आकर सैलानी, आना कभी न भूले |  सादर "
Mar 18
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आपका श्री समर कब्रीर साहब "
Mar 18
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"ध्यान दिलाने के लिए हार्दिक आभार श्री अरुण कुमार निगम जी | इन्हें इस प्रकार संशोधित किया जा सकता है -  कुदरत करती न्याय सदा ही, देखो सरसों फूलें   सैर करे आकर सैलानी, आना कभी न भूले |  सादर "
Mar 18
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
" कुंडलिया छंद और सार छंद दोनों अति सुंदर और सार्थक वाह "
Mar 18
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"जी | मोहम्मद आरिफ साहब | सादर आभार स्वीकारे "
Mar 18
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
" हार्दिक आभार आपका श्री सुशिल सरना जी साहब "
Mar 18
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"कुंडलिया छंद पतझर में भी सूर्य से, दिखती स्वर्णिम आस ताप मिले जब सूर्य से, रख वर्षा की आस | रख वर्षा की आस, पेड़ सम्बन्ध निभाता फूला हुआ पलाश, ह्रदय उल्लास जगाता | लक्ष्मण करे प्रयास, काम क्या कोई दूभर सर्वभोम ये सत्य, सदा ये रहे न पतझर | (२) नीला…"
Mar 18
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"अति सुंदर और सार्थक कुंडलिया छंद | वाह ! बहुत बहुत बधाई  सजते क्रम से सभी, तभी सजती है धरती - ये पंक्ति कुछ अटपटी लग रही है  शेष सभी सुंदर भाव रचित छंद है | सादर "
Mar 18
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"जीवन के पतझड़ में विजयी, खिलता पलाश हूँ मैं। ---- मुखड़े की ये पंकित्या बहुत सुंदर लगी | अच्छे दिन आने की आस लिये रचित सुंदर रचना के लित्ये हार्दिक बधाई श्री मिथिलेश वामनकर जी "
Mar 18
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"सार छंद आधारित सभी मुक्तक भावपूर्ण रचित है | हार्दिक बधाई आपको श्री सतविंदर सिघ जी "
Mar 18
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"सार छंद आधारित  गीत रचना इस मौसम में खिलता टेसू, लाल रंग महकाए आस जगाती फूली सरसों, मन में खुशियाँ  लाये ||   कुदरत करती न्याय सदा ही,सरसों फूलें खेतो में सैर करे आकर सैलानी, झरे चांदनी रेतों में | फूला देख पलाश वनों में, ठूंठ कहाँ…"
Mar 18
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"देखा टेसू के फूलों को, दिल पर मस्ती छाई, कुदरत ने दे दिया इशारा, रुत फागुन की आई | -  वाह ! सापेक्ष भाव से रचित सुंदर सार छंद रचना के लिए हार्दिक बधाई श्री समर कबीर साहब "
Mar 17

Profile Information

Gender
Male
City State
JAIPUR
Native Place
India
Profession
Retired Govt service
About me
Interest in writing poems,stories and articles

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's Photos

Loading…
  • Add Photos
  • View All

About me

 Retired Accountant from Collectorate,Jaipur and Rajasthan Vidhan Sabha,Jaipur

 now working as an Advisor of SBI Life Insurance Co. Ltd.and Investment consultant

  I had been co-editor of "AGRAMMI" monthli magazine since 1975 to 1978, and Editor

 of "Nirala-Samaj" Quarterly both are social magazines of Agrawal community.Jaipur

   Articles published in Rajasthan Patrika, and Rastradoot daily fro JAIPUR in 1970 and 

   1980 decads

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's Blog

दोहे

महिला दिवस पर रचित दोहे -



मही रूप देवी धरे, धैर्य गुणों की खान

साहस की प्रतिमूर्ति भी, नारी को ही मान | 



सृष्टि सृजनकर्ता यही,यही मही का अर्थ,

रणचण्डी भी बन सके, नारी सभी समर्थ ।



महिला से महके सदा,घर आँगन में फूल

वही सजाती घर सदा, मौसम के अनुकूल ।



जीवन के हर रूप में, नारी मन उपहार,

आलोकित जीवन करे, खुशियों के…

Continue

Posted on March 9, 2017 at 4:30pm — 4 Comments

आस्था (लघु कथा)

संतों तक को झूठी रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार कर सरकार अच्छा नहीं कर रही | देश विदेश में लाखों अनुयायी किसी के ऐसे ही बनते | मेरे घर से अपनी बहन के साथ इनके आश्रम में 15 दिन रहकर आई है | चेलों का बड़ा ख्याल रखा जाता है | नियमित व्याखान और पूजा पाठ चलता रहता है | बहुत पहुँचे हुए संत है, मैंने भी पुष्कर में इनके प्रवचन सुने है |

पाठक जी बोले - ये सब तो ठीक है ओझा जी, पर इनके खिलाफ अश्लील कारनामे और महिलाओं के साथ लिप्त पाए जाने के पुख्ता सबूत के आधार पर ही गिरफ्तार किया है | कई शहरों में…

Continue

Posted on February 21, 2017 at 12:22pm — 10 Comments

कुण्डलिया छंद - लक्ष्मण रामानुज

कुंडलिया छंद 

=========

सुख-सुविधा से काटते, जीवन उसके साथ,

जब सजनी के काम में, आप बँटाते हाथ। | 

आप बँटाते साथ, ह्रदय में प्रेम बरसता 

करे सभी सहयोग, उसी के घर समरसता 

रहे सभी जब साथ, फिर न जीवन में दुविधा 

पुत्र बहूँ औ पौत्र, मिलें सबको सुख-सुविधा |

(2)

जीवन के संग्राम में, करते जो संघर्ष,

सुगम रह उसकी बने, जीवन हो उत्कर्ष ।

जीवन हो उत्कर्ष, राह में आगे बढ़ता

करे सत्य ही बात,अकारण कभी न अड़ता

स्वार्थ भावना…

Continue

Posted on December 6, 2016 at 3:50pm — 4 Comments

कुण्डलिया छंद - लक्ष्मण रामानुज

कुण्डलिया छंद 
=========
तिल हो गोरे गाल पर, निखरे गोरे गाल,
अला बला फटकें नहीं, किसकी गलती दाल
किसकी गलती दाल, पस्त हो सबकी हिम्मत 
रखें फटें में पाँव, कौन की खोटी किस्मत | 
चन्दा के भी दाग, सिन्धु में प्रेम सलिल हो 
सुन्दरता का चिन्ह, अगर गौरी के तिल हो |

- लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला

Posted on December 1, 2016 at 3:30pm — 10 Comments

कुण्डलिया छंद - लक्ष्मण रामानुज

सौतेली माँ हो रही, सभी जगह बदनाम

राज त्याग वन को गये,त्रेता में श्री राम।।

त्रेता में श्री राम, हुए शिकार सब जाने

कोख से रहे लगाव, सुने फिर सबके ताने

कैसे बदले भाव, आज भी बनी पहेली

दशरथ को अघात,आज भी दे सौतेली |

 

माँ की ममता कोख से, जग जाने यह बात, 

सौतेली सहती रहे, पुत्रों  से  आघात ।

पुत्रों से  आघात, बड़ा ही पहने पगडी

ह्रदय झेलता शोक, चोट जो लगती तगड़ी 

प्रभु करें उद्धार, भाव में आये समता

ह्रदय भरे सद्भाव, सभी में माँ…

Continue

Posted on October 27, 2016 at 2:04pm — 2 Comments

हमें बढ़ाना मान (दोहे)

हिंदी दिवस की शुभ कामनाओं के साथ  कुछ दोहे -

हमें बढ़ाना मान (दोहे)

=================

हिंदी में साहित्य का, बढ़ा खूब भण्डार 

हम संस्कृति का देखते, शब्दों में श्रृंगार |

कविता दोहा छंद में, सप्त सुरों का राग 

गीत गीतिका छंद में, भरें प्रेम अनुराग…

Continue

Posted on September 14, 2016 at 11:30am — 12 Comments

Comment Wall (59 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 3:25pm on November 19, 2015, pratibha pande said…

 जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ आपको आदरणीय लडीवाला जी  

At 4:56pm on November 19, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय लडीवाला जी

आपको जन्मदिवस के अवसर पर ढेरो शुभ कामनाये i आप चिरायु हो और स्वस्थ रहें i

At 11:03am on October 2, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय लक्ष्मण भाई , आपका बहुत्बहुत आभार !!

At 9:56pm on September 23, 2013, SANDEEP KUMAR PATEL said…

आदरणीय लक्षमण सर जी सादर धन्यवाद आपका स्नेह और आशीष यूँ ही बनाये रखिये

At 8:53am on September 2, 2013, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

लक्ष्मण भाई- सप्रेम राधे- राधे । सही सलाह एवं गीत को दिल से पसंद करने के लिए हार्दिक् धन्यवाद ॥

At 8:30am on August 15, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय लडीवाला सर  प्रणाम , रचना पसंद करने के लिए आपका तहेदिल से आभार और धन्यवाद !

At 1:34pm on August 11, 2013, mrs manjari pandey said…

आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी हार्दिक आभार.

At 4:57pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

abhar laxman ji

At 8:15pm on July 23, 2013, Albela Khatri said…

aapke prem ke liye aabhari hun bahut bahut aabhaar evm dhnyavaad आपका स्नेह, दुलार, आशीष एवं आत्मीयता की सुगंध का झोंका मेरे जीवन में नया उजाला लाएगा ...ऐसा मुझे भरोसा है ........आपकी कृपादृष्टि के लिए कृतज्ञ हूँ

सादर

At 12:30pm on July 18, 2013, राज़ नवादवी said…

आदरणीय लक्ष्मण जी, हांलाकि मुझे दोहों का कुछ ख़ास ज्ञान नहीं है मगर क्या खूब कहा है आपने-

'बहका बहका दिख रहा, खुद का ही व्यवहार

जैसे सब कुछ ख़त्म है, मन मेरा लाचार | '

बधाई हो!

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Anuraag Vashishth replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 81 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीय राणा प्रताप सिंह जी,  'लोकतंत्र की बातें अब किस्सा कहानी हो गईं' की जगह…"
3 hours ago
Anuraag Vashishth replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 81 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीय राणा प्रताप सिंह जी, इस त्वरित प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.    "
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh posted a discussion

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 81 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

परम आत्मीय स्वजन 81वें तरही मुशायरे का संकलन हाज़िर कर रहा हूँ| मिसरों को दो रंगों में चिन्हित किया…See More
4 hours ago
भुवन निस्तेज replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय गुमनाम भाई ग़जल बेशक अच्छी हुई है, पर गिरह का शेर भी नदारद है और रदीफ़ की क्रिया भी एक वचन हो…"
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय भाई.... कृपया मेरी बात को हल्की-फुल्की टिप्पणी के रूप में लीजिए !!!"
5 hours ago
Anuraag Vashishth replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आ. आकाश जी. क्या खूब कहा है ! ज़ालिमों ने बन्द कर दी सारे सूबे में शराब किस क़दर मुश्किल हमें शामें…"
5 hours ago
भुवन निस्तेज replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"सभी अशआर बस मन को भा गए. और बाबा जुकर वाले शेर का तो बस... बधाई हो आदरणीय..."
5 hours ago
भुवन निस्तेज replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"वर्तमान के प्रति आपकी चिन्ता इस ग़ज़ल में बखूबी झलक रही है आ० राजेश दीदी. कृप्या दाद कबूल करें ."
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"बहुत आभार नादिर भाई !!!"
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"Like.... bhaai !!!  "
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"जी, सर.... आप सामने आये, मैं होश में आ गया.... अत्यन्त आभार आपका आदरणीय समर साहब.... बरसी में…"
5 hours ago
Anuraag Vashishth replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आ. मिथिलेश बहुत अच्छी ग़ज़ल है बधाई हो."
5 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service