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SANDEEP KUMAR PATEL
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Ajay Tiwari commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post प्रिय सुनो तुम्हारी भूल नहीं
"आदरणीय संदीप जी, इस खूबसूरत गीत-प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई. नव वर्ष मंगलमय हो !  सादर "
Jan 1
SANDEEP KUMAR PATEL commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post प्रिय सुनो तुम्हारी भूल नहीं
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी सराहना हेतु ह्रदय से आभार स्नेह यूँ ही बनाये रखिये "
Dec 30, 2017
SANDEEP KUMAR PATEL replied to SANDEEP KUMAR PATEL's discussion अनुष्टुप छंद in the group धार्मिक साहित्य
"बहुत बहुत आभार आदरणीय रमेश जी सादर "
Dec 30, 2017
Mohammed Arif commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post प्रिय सुनो तुम्हारी भूल नहीं
"आदरणीय संदीप कुमार जी आदाब,                                    प्रेम की तीव्रता और उत्कंठा को प्रदर्शित करता बेहतरीन प्रेम गीत । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 30, 2017
SANDEEP KUMAR PATEL commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र -फेलुन) यह ग़ज़ल दुनिया की सबसे छोटी ग़ज़ल है। इसे "गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स" में शामिल किया गया है ।
"क्या कहूँ के बस अब मजा आ गया  ग़ज़ब ग़ज़ब ग़ज़ब  जिन्दाबाद "
Dec 29, 2017
SANDEEP KUMAR PATEL commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - जानवर कितने समझदार मिले
"ग़ज़ल हुई है या हज़ल हुई है ..................बाकमाल सिस्टम पर तंज कसती हुई इस ग़ज़ल के लिए दिली मुबराकबाद आदरणीय "
Dec 29, 2017
SANDEEP KUMAR PATEL commented on rajesh kumari's blog post आइना जब क़ुबूल कहता है (ग़ज़ल 'राज')
"बड़े दिनों के बाद आज मंच पर आया हूँ  पर आपकी ग़ज़ल पढ़ के मन खुश हो गया  दिली दाद हाजिर हैं आदरणीया ..................जिन्दाबाद "
Dec 29, 2017
SANDEEP KUMAR PATEL commented on Ajay Tiwari's blog post ग़ज़ल - अक्सर खुद से खुद ही लड़ कर, खुद से खुद ही हारे हम - अजय तिवारी
"बहुत बहुत बधाई हो आदरणीय बाकमाल ग़ज़ल कही है आपने हर अशआर पर दाद हाजिर है "
Dec 29, 2017
SANDEEP KUMAR PATEL commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल नम्बर 2,कुछ नये क़वाफ़ी के साथ ।
"ग़ज़ब कमाल बेमिशाल ..................दिली मुबारकबाद आदरणीय| मंच पर स्नेह यूँ ही बनाये रखिये "
Dec 29, 2017
SANDEEP KUMAR PATEL commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -जिंदगी में है विरल मेरे निराले न्यारे’ दोस्त -कालीपद 'प्रसाद'
"आदरणीय कुछ अशआरों का कथ्य स्पष्ट नहीं है या हो सकता है मुझे ही समझ न आ रहा हो , यह तो मंच के अग्रज आपको अवश्य बतलायेंगे || बहरहाल इस प्रयास के लिए आपको दिली मुबारकबाद "
Dec 29, 2017
SANDEEP KUMAR PATEL commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल: फूंकने को इसे बिजलियाँ आगईं
"बाकमाल ग़ज़ब की ग़ज़ल हुई है .............मुबारकबाद क़ुबूल करें "
Dec 29, 2017
SANDEEP KUMAR PATEL posted a blog post

प्रिय सुनो तुम्हारी भूल नहीं

प्रिय सुनो तुम्हारी भूल नहींअवसाद नहीं रखना मन मेंयह मौसम ही अनुकूल नहीं चुप चुप रहना कुछ न कहना कैसे होगाजब चीख रहीं होगीं लाखों जिज्ञासाएंक्यूँ है? कैसे है? और रहेगा कब तक यूँ ?बस बुरे ख्यालों के बादल घिर घिर छाएँअब ऐसा भी तो नहींके मेरे दिल में चुभता शूल नहीं मैं कहीं रहूँ इस दुनिया में रहता तो हूँपर सच कहता हूँ मन का रहता ध्यान वहीँक्या हुई भूल आखिर क्या ऐसा बोल दियाकरता रहता हूँ दिनभर अनुसंधान यहीशायद कुछ सालों से घर मेंआया गुलाब का फूल नहीं जिनसे तुमने कुछ पीड़ा दिल की बतलाईवो सब गुदाज…See More
Dec 29, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
jabalpur
Native Place
Sihora, jabalpur (M.P.)
Profession
Lecturer
About me
i m a chemical engineer

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SANDEEP KUMAR PATEL's Blog

प्रिय सुनो तुम्हारी भूल नहीं

प्रिय सुनो तुम्हारी भूल नहीं

अवसाद नहीं रखना मन में

यह मौसम ही अनुकूल नहीं

 

चुप चुप रहना कुछ न कहना कैसे होगा

जब चीख रहीं होगीं लाखों जिज्ञासाएं

क्यूँ है? कैसे है? और रहेगा कब तक यूँ ?

बस बुरे ख्यालों के बादल घिर घिर छाएँ

अब ऐसा भी तो नहीं

के मेरे दिल में चुभता शूल नहीं

 

मैं कहीं रहूँ इस दुनिया में रहता तो हूँ

पर सच कहता हूँ मन का रहता ध्यान वहीँ

क्या हुई भूल आखिर क्या ऐसा बोल दिया

करता रहता…

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Posted on December 29, 2017 at 6:17pm — 3 Comments

आज यों निर्लज्जता सरिता सी बहती जा रही है

आज यों निर्लज्जता सरिता सी बहती जा रही है  

द्वेष इर्षा और घृणा ले साथ बढती जा रही है

 

बिन परों के आसमाँ की सैर के सपने संजोते

पा रहे पंछी नए आयाम सब कुछ खोते खोते

 

लालसा भी कोयले पर स्वर्ण मढ़ती जा रही है

 

दिन गए वो खेल के जब खेलते थे सोते सोते  

अब गुजरता है लडकपन पुस्तकों का बोझ ढोते  

 

दौड़ है बस होड़ की जो क्या क्या गढ़ती जा रही है

 

काश के पंछी ही होते लौट आते शाम होते

कोसते भगवान् को…

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Posted on July 28, 2014 at 1:00am — 3 Comments

चिर निद्रा से जाग युवा कब तक सोएगा

चिर निद्रा से जाग युवा कब तक सोएगा



देख हताशा की मिट्टी मन में लिपटी है

स्वार्थ सिद्धि में लिप्त भावना भी सिमटी है

ले आओ तूफान के मिट्टी ये उड़ जाए

मन का दिव्य प्रकाश देख तम भी घबराए



कब तक अनुमानों के दुनिया मे खोएगा

चिर निद्रा से जाग युवा कब तक सोएगा





स्वाभिमान खो गया तुम्हारा क्यूँ ये बोलो

तनमन से नंगे होकर तुम जग भर डोलो  

संस्कार मर्यादाओं का भान नहीं है

यकीं मुझे आया के तू इंसान नहीं है

   

जन्म…

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Posted on December 15, 2013 at 8:45pm — 4 Comments

हूँ प्यासा इक महीने से /ग़ज़ल/ संदीप पटेल "दीप"

हजज मुरब्बा सालिम

१२२२/१२२२

हूँ प्यासा इक महीने से

मुझे रोको न पीने से



पिला साकी  सदा आई

शराबी के दफीने से  



पिला बेहोश होने तक

हटे कुछ बोझ सीने से 



न लाना होश में यारो

नहीं अब रब्त जीने से 

 

उतर जाने दो रग रग में 

उड़े खुशबू पसीने से

जिसे हो डूबने का डर 

रखे दूरी सफीने से



हुनर आता है जीने का

है क्या लेना करीने से  



गिरा न अश्क उल्फत में

ये…

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Posted on December 15, 2013 at 11:30am — 14 Comments

Comment Wall (27 comments)

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At 9:13pm on November 28, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

पटेल जी

आपके विचारो का  स्वागत है  i  मैंने  और भी ऐसे छंद लिखे है पर सब अतुकांत ही लिखे पर आपकी अभिलाषा जरूर पूरी करूंगा यदि माँ सरस्वती की कृपा रही i  क्योंकि ऐसे कठिन  छंदों  में वे ही मार्ग दिखाती  है i माँ शारदे को प्रणाम i  आपका आभार i

At 9:09pm on September 23, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 1:42pm on September 23, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिवस की हार्दिक मंगल कामनाए भाई श्री संदीप कुमार पटेल जी | प्रभु आपको निरंतर प्रगति की और अग्रसर होने में मदद करे | आपका और हाम्रारा स्नेह बना रहे | शुभ शुभ 

At 1:06am on September 23, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…

" जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें " आदरणीय संदीप जी

At 2:38am on August 16, 2013, vijay nikore said…

प्रिय मित्र संदीप जी:

आपका हार्दिक धन्यवाद।

आपके परिवार के लिए शुभकामनाओं सहित।

सादर और सस्नेह,

विजय निकोर

At 9:02pm on July 23, 2013, Albela Khatri said…

aapke prem ke liye aabhari hun bahut bahut aabhaar evm dhnyavaad आपका स्नेह, दुलार, आशीष एवं आत्मीयता की सुगंध का झोंका मेरे जीवन में नया उजाला लाएगा ...ऐसा मुझे भरोसा है ........आपकी कृपादृष्टि के लिए कृतज्ञ हूँ

सादर

At 7:38pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 9:23am on April 19, 2013, डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा said…

संदीपजी,

कभी कभी सुझाव भी दिया करिये, मार्ग दर्शन होता रहे तो मुझे आसानी होगी. वैसे सोने के काजल की कल्पना ही बेतुकी लगती है, पर कर ली. सन्दर्भ था स्वतन्त्रता की स्वर्ण जयंती- उस समय लिखी रचना  पुनरन्कित कर प्रस्तुत की है.

At 4:43pm on April 16, 2013, annapurna bajpai said…

संदीप जी आपकी सभी कवितायें बहुत अच्छी एवं सुरुचि पूर्ण है मन को प्रसन्न करने वाली

At 7:56am on January 6, 2013, Abhinav Arun said…

श्री संदीप जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका !

 
 
 

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हिमगिरी की आँखे नम हैं(कविता)

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