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धार्मिक साहित्य

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धार्मिक साहित्य

इस ग्रुप मे धार्मिक साहित्य और धर्म से सम्बंधित बाते लिखी जा सकती है,

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Members: 109
Latest Activity: May 31

Discussion Forum

जपत रटत राम नाम, तरना है दुनिया

(छंद-उड़ियाना पद, विधान- उड़ियाना-12, 10 अंत में एक गुरू, उड़ियाना पद 12,12,12,10 अंत में एक गुरू)जपत रटत राम नाम, तरना है दुनियाजपत रटत राम नाम, तरना है दुनियाकर्म करत एक घ्येय, एक लक्ष्य एक गेह,भक्ति शक्ति मान रखे, भक्त बड़ा गुनिया ।।स्वार्थ मोह राग…Continue

Started by रमेश कुमार चौहान May 31.

हरो बाधा सभी हनुमन........

हरो बाधा सभी हनुमन.....विधाता छंद हरो बाधा सभी हनुमन.........शरण मैं आपकी आया। करो मुझपर कृपा ऐसी,....विमल हो बुद्धि मन काया।। नमन करता सदा भजता,.........हृदय से केशरी नंदन। द्रवित हों अंजनी लाला, पवन सुत सुन विनय वंदन।१। सिया के राम लगते…Continue

Tags: छंद, विधाता

Started by Satyanarayan Singh Apr 1.

मौसे कह गयो थो कान्हा (कविता)

मौसे कह गयो थो कान्हाबेगी ही आ जावेगोसलौनी सन्ध्या हो चली हैजाने कब वो आवेगोमाखन देखो सूख गयो हैधूप में कान्हा जब से गयो हैहाय हाय अब मैं का करूँमेरो कान्हा खो गयो है ।देखो ग्वाल सब आये गए हैमाय माय कह बुलाये रहए हैसब के ललना आये गए हैंकान्हा कू…Continue

Started by KALPANA BHATT ('रौनक़') Oct 12, 2017.

राधा राधा नाम रटे

राधा राधा नाम रटे, सारे बन्धन तुरंत कटे।आप तरे भवसागर से, युक्त रहे नटनागर से।।नाम धन जो लूटेगा,  चौरासी से छूटेगा।।गाएंगे जो प्रेम से,  हरि नाम को नेम से।।जो उनसे प्रीत लगाएगा, वो उनका ही हो जाएगा।राधा राधा नाम रटे, सारे बन्धन तुरंत कटे।आप तरे…Continue

Tags: प्रेम, राधा

Started by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा Aug 29, 2017.

कान्हा को नाच नचा गयी राधा 2 Replies

बैरिन बंशी चुराने चली जब तो पहले सकुचा गयी राधा चोरी से चुपके से हौले से धीरे से कान्हा की आँख बचा गयी राधा पूछा किये मुरलीधर श्याम तो लीला अनेक रचा गयी राधा नाच नचाते हैं जो सबको उन्हीं कान्हा को नाच नचा गयी राधामौलिक एवं अप्रकाशितआलोक रावत Continue

Started by Alok Rawat. Last reply by Alok Rawat Aug 29, 2017.

शक्ति के रूप 2 Replies

शक्ति के रूप  (मौलिक एवं अप्रकाशित )हिमालय की लाली मां, हैं बैल पर सवार |दिव्य रूप हाथ त्रिशूल, सुशोभित पद्म सार || सत्व सत्ता प्रकृति रूप, शिखरों पर हैं धाम |सती यज्ञ से दुर्गा का, ‘ शैलपुत्री ’ है नाम एक हाथ में जप माला, दूजे कमण्डल नीर |तपाचार की…Continue

Started by VINOD GUPTA. Last reply by VINOD GUPTA Sep 6, 2017.

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो 2 Replies

मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो ,मो कहूँ आवत नाही कबहू -२ना मुख चंद्र दिखायो ,मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे तड़पायो।बहुत सुनिन्ह है तोरे बतिया ,तुम बिन गुजरे ना दिन रतिया ,राधा के ओ मोहन प्यारे -२मोको बहुत सतायो ,मेरो किशन कन्हाई काहे मोहे…Continue

Started by Mohit mishra (mukt). Last reply by Mohit mishra (mukt) Aug 30, 2017.

तुम्ही हो खेवइयाँ सबकी 1 Reply

दरबार सजा भक्तो से माँ, दर्शन आस जगाऊ मै।तेरे बिन माँ कौन सहारा, तुझमे आश्रय पाऊ मै।डूब रही पतवार हमारी, माया के भवसागर में।मोह पाश में जकड़ गया हूँ, कैसे पार लगाऊ मै।।पाप धरा पर घेर लिया है, मन में है संताप भरादेख जगत का दुःख माँ तेरे, फिर कैसे…Continue

Started by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'. Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Aug 28, 2017.

श्रीकृष्ण-स्तुति-गीत(आधार छंद-चौपाई) 1 Reply

मोर-मुकुटधारी-अवतारी।हे नट-नर्तक -कृष्ण-मुरारी।।नयन-कंज तन नीलनलिन नव।वक्ष वृहद उर करुणा-गृह तव।।कानों मे मकराकृत कुंडल।अधर सुधा-मुरली की हर पल।।जय जय जय पीताम्बरधारी।हे नट-नर्तक-कृष्ण-मुरारी।।तुम जग का नित पालन करते।सुर-नर-मुनि सबके दुख…Continue

Started by रामबली गुप्ता. Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Aug 28, 2017.

भजन 1 Reply

भजन .....बरसो रे घनश्यामतुम चाहो तो अपने आँसू करूं तुम्हारे नामबरसो रे घनश्याम......मन उपवन में अभिलाषा की सूख गयी है क्यारीजित देखूं मैं उत आशा की टूट गयी है डालीदरशन दो बिन दरशन मेरो जीवन है निष्कामबरसो रे घनश्याम.......पंथ निहारे और निहारे गोपी…Continue

Started by Abha saxena. Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Aug 28, 2017.

 
 
 

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