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विजय मिश्र
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13 Replies

प्रख्यात विद्वान एवं मूर्धन्य साहित्यकार राजेन्द्र यादव आज दिवंगत हो गए ,अब हमारे मध्य वे केवल स्मृति एवं कृति रूप में ही रहेंगे . एक साधारण दिखने वाला असाधारण व्यक्तित्व ,सुहृद व्यक्ति और जिसे अपनी…Continue

Started this discussion. Last reply by Dr Ashutosh Mishra Nov 13, 2013.

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जमशेदपुर
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साहित्य में प्राकृतिक अभिरुचि किन्तु एक सफल यांत्रिक अभियंता .

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विजय मिश्र's Blog

प्रदूषित जीवन

{विश्व पर्यावरण दिवस पर सादर प्रस्तुत ]



एक कहावत है जो हिंदी आधारित लगभग सभी आंचलिक भाषाओँ में प्रचलित है , “ जेई डाढ बैसी ,ओकरे काटी |” , जब विद्योत्तमा से परास्त विद्वानों ने एक महामूर्ख ढूंढने की चेष्टा कियी तो उन्हें सबसे मूर्ख वही लगा था जो उसी डाल को काट रहा था जिसपर बैठा था |कभी सोचा है कि हम सभी प्रदुषण की दृष्टि से कुछ इसी श्रेणी के बनते जा रहे हैं |

यह तो परिपाक है कि हमारा शरीर प्रकृति के पांच तत्वों से निर्मित है – आकाश , हवा, आग, पानी और धरती , जो हमारे पांच… Continue

Posted on June 5, 2014 at 9:51am — 25 Comments

Comment Wall (19 comments)

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At 4:42pm on September 25, 2014, savitamishra said…

सादर नमस्ते विजय भैया ! अभी आपके कहने पर हम देखे कमेन्ट बैक भी है वरना हम तो View Thread  मेंजेकजबाबदिएथेइस लिय आश्वस्त नहीं थे किजबाब  पहुंचेगा यानहीं ........सेंड मसेज में तो टॉपिक पूछरहा था ....सहीकहें भैया आप बस पढने केलिय इस्तेमाल करते हैन इसलिय और चोजो के बारे में नहीं पता इस्तेमाल जब करने लगेगे  आने ही लगेगा|

नवरात्र की ढेर  सारी  शुभकामनाएँ आपको  भी भैया ....

और सभी भाइयों -बहनों  और बुजुर्गो को भी हार्दिक बधाई !

At 10:03pm on September 24, 2014, savitamishra said…

जबाब कैसे देते है हमे यहाँ पता नहीं है ..पता नहीं आप तक यह हमारा जबाब पहुंचेगा या नहीं

At 10:02pm on September 24, 2014, savitamishra said…

सादर नमस्ते विजय भैया .......बहुत बहुत आभार .....नहीं कहेगें ...क्योकि आशीष के लिय आभार व्यक्त करना हमारी मुर्खता होगी ...आप बड़े भाई की तरह यूँ ही अपना आशीष बनाये रक्खे .....कहते है न सरस्वती कभी न कभी जिह्वा पर विराजमान होती है शायद आशीष देते वक्त आपके जिह्वा पर विराजमान थी अतः फलीभूत हो गया ...........हमारा कम्प्यूटर ख़राब होने के कारण देख नहीं पाए थे हम ......:)

At 5:05pm on June 29, 2014, PRAMOD SRIVASTAVA said…

का कहीं राउर परसंसा के काबिल हम बानी की नाही \ जउन सोझा लउके आ मन मताय लगेला बस उहे लिखा जाला

At 1:38pm on June 27, 2014, Sushil Sarna said…

mtrta ke aagrah ko sveekaar krne ka haardik aabhaar

At 6:44pm on January 30, 2014, NEERAJ KHARE said…
BAHUT..BAHUT ..DHANYVAD MISRA JI
At 5:11pm on January 6, 2014, Priyanka singh said…

आभार सर ....आशीर्वाद और स्नेह बनाये रखे ...नव वर्ष की शुभकामनायें आपको भी .....खुश रहे 

At 6:17pm on December 5, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय विजय  जी

आपका शत शत आभार i

आपको ढेर सी शुभ कामनाए  i

At 7:20pm on November 4, 2013, CHANDRA SHEKHAR PANDEY said…

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ, माननीय विजय सर।

At 2:12pm on October 8, 2013, शकील समर said…

और इस मंच पर हमसफर भी हूं आदरणीय विजय मिश्रा जी.मार्गदर्शन बनाए रखिएगा.

 
 
 

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