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anwar suhail
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अनवर सुहैल

छत्तीसगढ़ के  जांजगीर में ०९ अक्टूबर १९६४ को जन्म.

  • माता उर्दू/फारसी की ज्ञाता, पिता अध्यापक.
  • छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की तहसील मनेन्द्रगढ़ के रेलवे प्राथमिक शाला में प्रायमरी शिक्षा, शाशकीय आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मनेन्द्रगढ़ में हायर सेकंडरी १९८१ में, शाशकीय पोलीटेक्निक कालेज शहडोल से खनिकर्म अभियांत्रिकी में डिप्लोमा सन १९८४ में.
  • प्रथम श्रेणी खान प्रबंधन प्रमाण-पत्र २००५ में.
  • सम्प्रति : कोल इंडिया लिमिटेड की एस ई सी एल में वरिष्ठ प्रबंधक के तौर पर बहेराबंध भूमिगत कोयला खदान के कार्यरत...ज़मीन के ६०० फिट नीचे से कोयला निकालने का काम.
  • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन से उपन्यास : पहचान

                             तीन कथा संग्रह : कुंजड-कसाई, ग्यारह सितम्बर के बाद, चहल्लुम

                             दो कविता संग्रह : और थोड़ी सी शर्म दे मौला, संतो काहे की बेचैनी

                             महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के वेबसाईट में उपन्यास पहचान

                             अनवर सुहैल : उपन्यास: पहचान : हिन्दी-समय डॉट काम

  • ब्लोग्स : http://www.anwarsuhel.blogspot.in/
  • संपादन : संकेत नामक कविता केंद्रित लघुपत्रिका
  • परिवार : नाजरा (पत्नी) हिना फिरदौस और सबा शाहीन (बेटियाँ)
  • संपर्क : टाइप ४/३, पो बिजुरी जिला अनूपपुर म प्र ४८४४४०

 

स्व. अम्मी जाहिदा इस्माइल की स्मृति को अर्पित 

अक्ल  वालों  को  अक्ल दे मौला

इल्म   वालों  को  इल्म  दे मौला

धर्म      वालों  को   धर्म दे मौला

और      थोड़ी- सी    शर्म दे मौला

           -----------अनवर सुहैल

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Profile Information

Gender
Male
City State
Sirgitti, Bilaspur CG
Native Place
manendragarh chattisgarh
Profession
retired Chief Manager
About me
kavi, kathakar, editor : sanket

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ग़ज़ल

हर कोई लालायित कितना, कैसे भी हों कालजयी

इस चक्कर में ठेला-ठाली, धक्का-मुक्की मची रही

नदी वही है, लहर वही है, और खिवईया रहे वही

लेकिन अपनी नाव अकेली बीच भंवर में फंसी रही

बार-बार समझाते उनको हम भी हैं तुम जैसे ही

बार-बार उनके भेजे में बात हमारी नहीं घुसी

छोडो तंज़-मिजाज़ी बातें, आओ बैठो गीत बुनें

खींचा-तानी करते-करते बात वहीं पे रुकी रही

(अप्रकाशित मौलिक) 

Posted on February 22, 2016 at 8:30pm

खनिकर्मी का जीवन

कोयला खदान की 

काली अँधेरी सुरंगों में 

निचुड़े तन-मन वाले खनिकर्मी के 

कैप लैम्प की पीली रौशनी के घेरे से 

कभी नहीं झांकेगा कोई सूरज 

नहीं दीखेगा नीला आकाश 

एक अँधेरे कोने से निकलकर 

दूसरे अँधेरे कोने में दुबका रहेगा ता-उम्र वह

पता नहीं किसने, कब बताया ये इलाज 

कि फेफड़ों में जमते जाते कोयला धूल की परत को 

काट सकती है सिर्फ दारु 

और ये दारू ही है जो एक-दिन नागा…

Continue

Posted on January 1, 2016 at 3:30pm — 3 Comments

टुकड़खोर सेवादार

अइसई नहीं मिलता 

सेवादारी का ओहदा 

बड़ी कठिन परीक्षा है 

निभा ले जाना ड्यूटी सेवादारी की

हाकिम-हुक्काम तो 

कोई भी बन सकता है 

सेवादार बनना बहुत कठिन है 

सेवादार को होना चाहिए 

भाव-निरपेक्ष...संवेदनहीन 

अपने ड्यूटी-काल में 

और उसके अलावा भी 

जाने कौन सा राज़ 

कब किस हालत में फूट जाए 

और लेने के देने पड़ जाएँ 

हाकिम बना रहे 

हाकिम बचा रहे 

हुकुम सलामत रहे 

तो रोज़ी-रोटी की है गारंटी 

इतनी…

Continue

Posted on December 15, 2015 at 5:53pm — 2 Comments

बाज़ार और साम्प्रदायिकता के बीच

बाज़ार रहें आबाद

बढ़ता रहे निवेश

इसलिए वे नहीं हो सकते दुश्मन

भले से वे रहे हों

आतताई, साम्राज्यवादी, विशुद्ध विदेशी...

अपने मुल्क की रौनक बढाने के लिए

भले से किया हो शोषण, उत्पीड़न

वे तब भी नहीं थे वैसे दुश्मन

जैसे कि ये सारे हैं

कोढ़ में खाज से

दल रहे छाती पे मूंग

और जाने कब तक सहना है इन्हें

जाते भी नहीं छोड़कर

जबकि आधे से ज्यादा जा चुके

अपने बनाये स्वप्न-देश में

और अब तक बने…

Continue

Posted on November 14, 2015 at 9:00pm — 3 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 9:35am on November 12, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

सुहैल जी

आपकी मित्रता का तहेदिल से स्वागत है

वैसे  ओपन बुक्स ऑन  लाइन के सभी सदस्य एक ही परिवार के हैं  सभी मेरे लिए मित्र जैसे ही हैं

आपकी रचनाये अच्छी होती हैं

जब भी  ब्लॉग पर दिखेगी मैं अवश्य सराहुंगा

मैं नया सदस्य हूँ अभी तौर तरीके  सीख रहा हूँ  इसीलिये उत्तर में बिलम्ब हुआ  कृपया छमा  करे  I  

At 10:35am on October 9, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाए " परवरदिगार आपको दायित्व की ताकत दे | आपका हामार स्नेह 

बना रहे |-लक्ष्मण लडीवाला,जयपुर 

At 11:19am on September 5, 2013, Meena Pathak said…

बहुत बहुत बहुत स्वागत आप का आदरणीय

At 9:45pm on September 4, 2013, annapurna bajpai said…

आदरणीय अनवर सुहैल जी ,आपका हमारी मित्र मंडली मे स्वागत है । 

At 11:06pm on May 3, 2013, Dr. Rama Shankar Shukla said…

Apne mitr banaya, ham abhari hain.

At 5:14pm on April 22, 2013,
सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh
said…

मेरे प्रोफाइल से इंस्पिरेशन... मैं क्या कहूँ आपने यह कह मुझे निःशब्द कर दिया है....इस सद्भाव के लिए और मान के लिए आपकी हृदय से आभारी हूँ आदरणीय अनवर जी.

आपकी शुभकामनाओं के लिए शुक्रिया 

आपकी दोनों बेटियों को ढेर सारा स्नेहाशीष और सद्कामनाएं.

सादर.

At 3:20pm on April 7, 2013, Abhinav Arun said…

आदरणीय श्री अनवर सुहैल जी आपकी रचना "मांगना"को "महीने की सर्वश्रेष्ट रचना पुरस्कार" प्रदान किये जाने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !!

At 12:12pm on April 6, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अनवर सुहैल जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की रचना "मांगना" को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना पुरस्कार के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको पुरस्कार राशि रु 1100 /- और प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस नामित कृपया आप अपना नाम (चेक / ड्राफ्ट निर्गत हेतु), तथा पत्राचार का पता व् फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |


शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 

ओपन बुक्स ऑनलाइन 

 
 
 

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