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Sheikh Shahzad Usmani
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  • SHIVPURI M.P.
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Mirza Hafiz Baig commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'कौन बदल रहा है?' (लघुकथा)
"शहज़ाद उस्मानी साहब, आपने सटीक वार किया। मज़दूर, किसान, गरीब, बेसहारा, बेरोज़गार, विद्यार्थी वगैरह की बात करना वैसे भी आज कल साहित्य के क्षेत्र मे दुर्लभ हो चला है। आपने बात की; यह अपने आप मे आपका बड़प्पन है। शुक्रिया और बधाई। "
14 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"वाह। ओबीओ लाइव तरही मुशायरे की हीरक वर्षगांठ/जयंती पर बेहतरीन दिलचस्प पेशकश। हार्दिक बधाई आदरणीय अशफ़ाक़ अली/गुलशन 'ख़ैराबादी' साहिब।"
22 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"बहुत बढ़िया मक़ते, सबक़ और अहसासों के साथ बेहतरीन भावपूर्ण ग़ज़ल हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया अंजली गुप्ता 'सिफ़र' साहिबा।"
22 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"सकारात्मक अहसासों की बेहतरीन अभिव्यक्ति। हार्दिक बधाई आदरणीया मनजीत कौर साहिबा।"
22 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"वाह दो टूक बात कहती बढ़िया ग़ज़ल हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय अजय गुप्ता साहिब। //सीखा=सिखा//"
22 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"बेहतरीन कटाक्षपूर्ण विचारोत्तेजक ग़ज़ल हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय अजय तिवारी साहिब।"
22 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on TEJ VEER SINGH's blog post माँ  - लघुकथा -
"शीर्षक सुझाव : "नई सदी की मां""
22 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on TEJ VEER SINGH's blog post माँ  - लघुकथा -
"बेहतरीन कथानक के साथ बढ़िया रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय तेजवीर सिंह साहिब। अंतिम पंचपंक्ति हेतु सुझाव-अभ्यास : //हम मां-बेटियों की बली की ज़रूरत नहीं बिटिया! मां दुर्गा हमारे  हौसले, सशक्तिकरण और त्याग की आकांक्षा रखती हैं इस सदी में!//"
22 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदाब। बहुत ही भावपूर्ण बढ़िया ग़ज़ल हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले साहिब।"
23 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
" वाह। बेहतरीन अशआर नंबर 2-3-5-6-7-9-11 के साथ बेहतरीन ग़जल के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और इस तरह मार्गदर्शन हेतु हार्दिक आभार मुहतरम जनाब राणा प्रताप सिंह साहिब।"
23 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"(तीसरी कोशिश) : पेड़ माफ़िक बना गया है मुझे,त्याग करना बता गया है मुझे। (1) खाद-पानी नहीं नसीब अभी,सब्र करना तो आ गया है मुझे।(2) दिल का टुकड़ा, फ़िज़ूलख़र्चीलालूट धन, घात दे गया है मुझे।(3) ज़र, ज़मीं और जोरू वास्ते वो,काट कर, बेचने गया है…"
23 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"(तीसरी कोशिश) : पेड़ माफ़िक बना गया है मुझे,त्याग करना बता गया है मुझे। (1) खाद-पानी नहीं नसीब अभी,सब्र करना सिखा गया है मुझे।(2) दिल का टुकड़ा, फ़िज़ूलख़र्चीलालूट धन, घात दे गया है मुझे।(3) ज़र, ज़मीं और जोरू वास्ते वो,काट कर, बेचने गया है…"
23 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदाब। गंभीर कमियां इंगित करने व समय देकर हौसला अफ़ज़ाई करने के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब समर महेंद्र कुमार साहिब।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदाब। गंभीर कमियां इंगित करने व समय देकर हौसला अफ़ज़ाई करने के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब नीलेश शेवगांवकर साहिब।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदाब। जी बिल्कुल। यह मौका खोना नहीं चाहता था। हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब अफ़रोज़ 'सह्र' साहिब।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदाब। इस्लाह व समय देकर हौसला अफ़ज़ाई करने के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब शिज्जु'शकूर' साहिब।"
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
Shivpuri M.P.
Native Place
Shivpuri
Profession
Radio Announcer
About me
A Private School- teacher, Freelancer and a Casual Radio Announcer. Simlple living, high thinking, fond of reading and writing.

Sheikh Shahzad Usmani's Blog

'कौन बदल रहा है?' (लघुकथा)

देश के एक राजमार्ग पर एक ढाबे पर देर रात भोजन हेतु डेरा जमाये हुए यात्रियों में कोई किसान, मज़दूर, व्यापारी, शिक्षक आदि था, तो कोई बस या ट्रक का स्टाफ। भोजन करते हुए वे बड़े से डिजिटल टीवी पर समाचार भी सुन रहे थे।

"देखो रे! मेरा देश बदल रहा है!" एक शराबी ज़ोर से चिल्लाया।

"अबे! बदल नहीं रहा! बदला जा रहा है! पगला जा रहा है!" दूसरे साथी ने देसी दारू का घूंट गुटकने के बाद कहा।

"दरअसल देश बदल नहीं रहा; न ही बदला जा रहा है! शादी-विवाह में शिरक़त माफ़िक दुनिया के जश्न-ए-तरक़्क़ी में…

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Posted on October 18, 2018 at 11:57pm — 2 Comments

"केरेक्टर ढीला क्यूं?" (लघुकथा)

आज उनसे कामकाज नहीं हो पा रहा था। गुप्त मंत्रणा कर कोई कठोर निर्णय लिया जाना था।

"अब तो हद हो गई! छात्र-छात्राएं और शिक्षक तक मीडिया का अंधानुकरण करने लगे हैं। हमारी भी कोई प्रतिष्ठा है न!"

"हां भाई! ई-मेल एड्रेस से लेकर गणित और विज्ञान तक में हमारी अहमियत है! ... पर गालियों और अभद्र शब्दों में हम अपना उपयोग अब नहीं होने देंगे! हमारी ईजाद इसलिए थोड़े न की गई थी!"

"बिल्कुल सही कहा तुमने! हमारा अवमूल्यन हो रहा है। ई-मेल के @ से हैश टैग # वग़ैरह के बाद ये मीडिया हमें सांकेतिक…

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Posted on October 16, 2018 at 9:43pm — 3 Comments

'मेरी आवाज़ सुनो!' (लघुकथा)

"सुनो, किसी से चर्चा मत करना! अपने दफ़्तर का प्रोजेक्ट अधूरा भी छोड़ना पड़े, तो भी तुरंत ही अगली बस से यहां लौट आओ!"

"क्यों? क्या हुआ? घबराई हुई सी क्यों हो?"

"ऑफ़िस से लौटने पर आज तो मुझे मेरा सूटकेस ही पूरा खुला हुआ मिला.. और कपड़े बिखरे हुए!"

"कोई क़ीमती सामान चोरी तो नहीं हुआ?"

"क़ीमती ही नहीं.. हमारे जिगर का टुकड़ा भी! .. स्मिता अभी तक घर नहीं लौटी है! ... सूटकेस से मेरी कुछ मंहगी ड्रेसिज़, महंगा हेअर रिमूवर और सेनेटरी नैपकिन्ज़ वग़ैरह सब ग़ायब हैं!"

"तो क्या…

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Posted on October 13, 2018 at 6:35am — 5 Comments

बलातकार्य (छंदमुक्त कविता)

बलात हालात बलात नियंत्रण में हैं न!
देश-देशांतर तिजारात आमंत्रण में हैं न!
आचार-विहार, व्यवहार-व्यापार, प्रहार,
घात-प्रतिघात धार अभियंत्रण में हैं न!
**
बदले 'बदले के ख़्यालात' चलन में हैं न!
अगले-पिछले अहले-वतन फलन में हैं न!
बापू तुम्हारे ही देश में, देशभक्तों के वेश में
नोट-वोट, ओट-चोट-वोट अवकलन में हैं न!


(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on October 8, 2018 at 11:30pm — 8 Comments

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At 12:50am on October 5, 2018, mirza javed baig said…

आली जनाब शहज़ाद उस्मानी साहिब आदाब, 

मुझे अपनी दोस्तों की फ़ेहरिस्त में जोड़ने का शुक्रिया 

At 6:43am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय Sheikh Usmani साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 11:59am on April 12, 2018, MD SHAFIQUE ASHRAF said…

जी बहूत  बहुत शुक्रिया जनाब ... नया हूँ .... थोड़ा सीखने का मौका दीजिये  

At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

 
 
 

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