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Sheikh Shahzad Usmani
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Tasdiq Ahmed Khan commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post गऊ ठीक-ठाक नहीं (लघुकथा)
"जनाब शेख़ शहज़ाद उस्मानी साहिब , पति ,पत्नी रिश्तों को आइना दिखाती सुन्दर लघुकथा हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।"
8 hours ago
Sushil Sarna commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post गऊ ठीक-ठाक नहीं (लघुकथा)
"Bahut sundr srijan sir haardik badhaaèeeeeeeeeee"
10 hours ago
Sushil Sarna commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post असलियत (लघुकथा)
"Waaaaaaaah shaaaaàndar ahsaas ki sundr abhivyaktì. ..haardik badhaaèeeeeeeeeee sir"
10 hours ago
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post गऊ ठीक-ठाक नहीं (लघुकथा)
"एक झकझोरती हुई रचना के सृजन हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी साहब"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post गऊ ठीक-ठाक नहीं (लघुकथा)
"आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। बेहतरीन लघुकथा पर मेरी हार्दिक बधाई कुबूल करें। "
12 hours ago
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post गऊ ठीक-ठाक नहीं (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी आदाब,                                 स्त्री-पुरुष समानता के छद्म युग में हमेशा हार स्त्री की और जीत पुरुषों की होती है । हम लाख नारी समनता का…"
21 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

गऊ ठीक-ठाक नहीं (लघुकथा)

उसे फिर किसी की चीख़ सी सुनाई दी।  उसने सोचा कि पड़ोसी का बच्चा फिर पिट गया होगा स्कूल का होमवर्क समय पर पूरा न कर पाने की वज़ह से या किसी ज़िद की वज़ह से। तभी एक और चीख़ उसे सुनाई दी। उसने अबकी सोचा कि फिर कोई बदज़ुबान बीवी या सास पिट गई होगी या कोई शराबी पति अपनी तेज-तर्रार बीवी से!  अगली चीख से स्पष्ट हो गया था कि चीख़ किसी महिला की ही थी। "भाड़ में जाए! करना क्या है? कर भी क्या सकते हैं ? उसकी बस्ती में तो आये दिन ऐसा कुछ न कुछ होता रहता है! रात के बारह बज चुके हैं, अपना भी सोने का वक़्त…See More
23 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post पार्षद वाली गली (लघुकथा)
"//..सफाई वाली हूँ खूब समझती हूँ तुम्हारा इशारा।// ... बहुत बढ़िया प्रस्तुति। हार्दिक बधाई आदरणीया कल्पना भट्ट जी।"
yesterday
vijay nikore commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post असलियत (लघुकथा)
"लघु कथा के माध्यम कितना बड़ा सच कहा है आपने ! //  "वर्षों से वही ग़रीबी, वही मेहनत, वही पुरानी साइकल और बैग वग़ैरह "// बहुतों के पास मोबिल आ गया है, पर असली इनसान फिर भी वही है... सरल, स्नेही, मेहनतीे,सच्चे "किसान" का दिल ...…"
yesterday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post असलियत (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब, बढ़िया लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Kalipad Prasad Mandal commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post असलियत (लघुकथा)
"डिजिटल पर सुन्दर कटाक्ष आ शेख उस्मानी जी "
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post असलियत (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी। बहुत शान्दार संदेश देती और साथ ही चुटीला कटाक्ष करती लघुकथा।"
Thursday
Neelam Upadhyaya commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post असलियत (लघुकथा)
"आदरणीय उस्मानी जी, डिजिटलाइजेशन के बावजूद हमारी सामाजिक स्थिति में तो बहुत अंतर नहीं आया है । बहर लघु कथा के लिए बधाई ।"
Thursday
vijay nikore commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post ज़हनियत (लघुकथा)
"इस लघु कथा के माध्यम आपने एक गहन सोच के लिए सामयिक अवस्था प्रस्तुत की है। लघु कथा इसमें बहुत सफ़ल हुई है। हार्दिक बधाई भाई शेख शहज़ाद उस्मानी साहब ।"
Thursday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post असलियत (लघुकथा)
"हम आधुनिक हो गए पर हमारे हालात आज भी वैसे ही, बेहतरीन लघुकथा लिखा आपने शेख शहज़ाद उस्मानी साहब।सादर अभिवादन संग बहुत बहुत बधाई।"
Thursday
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post असलियत (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,                                 असली भारत ग़रीबी और संसाधनविहीन ही है । आजकल डिजीटल के नाम पर लोगों की जटिलताएँ काफी बढ़ गई है । देश में…"
Thursday

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गऊ ठीक-ठाक नहीं (लघुकथा)

उसे फिर किसी की चीख़ सी सुनाई दी।  उसने सोचा कि पड़ोसी का बच्चा फिर पिट गया होगा स्कूल का होमवर्क समय पर पूरा न कर पाने की वज़ह से या किसी ज़िद की वज़ह से। तभी एक और चीख़ उसे सुनाई दी। उसने अबकी सोचा कि फिर कोई बदज़ुबान बीवी या सास पिट गई होगी या कोई शराबी पति अपनी तेज-तर्रार बीवी से!  अगली चीख से स्पष्ट हो गया था कि चीख़ किसी महिला की ही थी। 

"भाड़ में जाए! करना क्या है? कर भी क्या सकते हैं ? उसकी बस्ती में तो आये दिन ऐसा कुछ न कुछ होता रहता है! रात के बारह बज चुके हैं, अपना भी सोने…

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Posted on December 16, 2017 at 11:28pm — 5 Comments

असलियत (लघुकथा)

"पंडित जी, अब ज़रा गायत्री बिटिया को बुला लो, डाक पावती की इंट्री वग़ैरह करवा दो हमारे मोबाइल में!" कड़क चाय की आख़री घूंट हलक़ में डालते हुए पोस्टमेन नज़ीर भाई ने कहा।

"इस उम्र में तुम्हारा काम भी मॉडर्न हो गया, भाईजान!" पंडित जी ने चुटकी लेते हुए बिटिया को पुकारा और कहा, "इनको तो बहुत टाइम लगेगा! गायत्री तुम ही कर दो इन्ट्री!"

डाक-विभाग के मोबाइल पर डाक के विवरण भरवाने के साथ ही मंदिर का प्रसाद लेकर नज़ीर भाई विदा लेते हुए साइकल तक पहुंचे ही थे कि पंडित जी की घूरती…

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Posted on December 14, 2017 at 3:30am — 8 Comments

ज़हनियत (लघुकथा)

"फाइनली ख़ुदकुशी करने का इरादा है क्या? सुसाइड नोट लिखने जा रही हो?"

"मैं! मैं ऐसी बेवक़ूफी करूंगी! कभी नहीं!"

"तो फिर सोशल मीडिया के ज़माने में काग़ज़ पर क्या लिखना चाहती हो?" कोई कविता, शे'अर या कथा?"

"वैसी वाली मूरख भी नहीं रही अब मैं! जो मुझे चैन से जीने नहीं देते, उन्हें भी चैन से जीने नहीं दूंगी अब मैं!"

"तो क्या एक और फ़र्ज़ी ख़त लिख रही हो अपने मायके और वकील मित्रों को झूठे ज़ुल्मो-सितम बयां करके!"

"कुछ तो इंतज़ाम करना पड़ेगा न! पता नहीं मेरा शौहर कब तलाक़ दे दे…

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Posted on December 9, 2017 at 7:32pm — 9 Comments

गणितज्ञ (लघुकथा)

तमाम अटकलों के बीच आयुषी की आकस्मिक मौत मीडिया, पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए रोमांचक और रोमांटिक विषय बन चुकी थी। छान-बीन में जब उसकी ख़ास सहेली तसनीम का ख़ास ख़त खोजियों के हाथ लगा तो वह भी मीडिया में वायरल हो कर सार्वजनिक हुआ :



अज़ीज़म आयुषी,



हर बार किसी न किसी इशारे से आत्महत्या के इरादे ज़ाहिर करती हो। दुःख होता है तुम जैसी होनहार सहेली की ऐसी नकारात्मक सोच पर, इसलिए सोचा कि मैं अपनी आपबीती सुनाकर काश तुम्हें इस घोर अवसाद से बाहर ला सकूं।

मर्द जाति के 'उस'… Continue

Posted on December 4, 2017 at 1:30pm — 5 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

At 3:47pm on October 17, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
आदरणीय Er. Ganesh Jee "Bagi" जी सूचना अनुसार वांछित जानकारी एडमिन की ई-मेल परआज प्रेषित कर दी है ।सादर सधन्यवाद
At 11:17pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "मुखाग्नि" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:22pm on August 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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