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Sheikh Shahzad Usmani
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Dr. Vijai Shanker commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post बावले (लघुकथा)
"कथा में दम है और दमदार सन्देश भी है। पर कितने ध्यान देते हैं , प्रश्न यह है। प्रयास कठिन था , इस लिए बहुत सराहनीय है। आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी , बधाई , सादर।"
17 hours ago
Dr Ashutosh Mishra commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post बावले (लघुकथा)
"आदरणीय आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ मैं शिल्प का बिशेस जानकार नहीं हूँ लेकिन यह रचना तो मेरे दिमाग में घूम रही है।बहुत ही ज्यादा पसंद आयी रचना पर हार्दिक बधाई सादर"
yesterday
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post बावले (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब, बहुत ही तीक्ष्ण कटाक्ष । बेहतरीन संवाद और पात्रानुकूल संवाद ।आज की सबसे बड़ी समस्या बेरोज़गारी है । नौजवानों को आज कोई समझने के लिए तैयार नहीं है ।डिग्रीधारी बनकर दर-दर की ठोकरे खाने पर विवश है । अच्छा ध्यानाकर्षण है…"
yesterday
Dr Ashutosh Mishra commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post कहीं दीप जले, कहीं दिल (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी बहुत ही शानदार कटाक्ष किया है आपने कोई भी अपनी चाल में सफल नहीं होगा। इतिहास बदलने का तो सवाल ही नहीं । ये लोग अपने निर्णय थोपना चाहते हैं । ये कुछ भी कर ले ताजमहल को जब भी देखा जाएगा जेहन में सिर्फ गूंजेगा मुहब्बत…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

बावले (लघुकथा)

"अरे, इसे रोको तो ज़रा! कौन है यह? इस तरह कहां और क्यों दौड़ा चला जा रहा है ? कहीं यह वही 'विकास' तो नहीं?""नहीं!""तो क्या यह भी कोई 'राम' नामधारी है?""नहीं!""तो फिर कौन है यह? किसी 'राधा' का मीत?""नहीं, वह भी नहीं!""तो क्या 'गंगा' का सेवक?""नहीं भाई!""तो क्या तथाकथित 'सेवक'; जेहादी, हिन्दुत्व-प्रचारक, इस्लाम या ईसाइयत-प्रचारक?""नहीं, हरग़िज़ नहीं!""तो फिर कोई भ्रष्टाचारी, आतंकी या सब कुछ जीतने का इच्छुक कोई नया 'हिटलर'?""वैसा भी कोई नहीं!""तो फिर कौन है यह अपना साजो-सामान सा लिए हुए? कोई…See More
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post डूबता जहाज
"बहुत बढ़िया विचारोत्तेजक रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ. आशुतोष मिश्रा साहब। वाक्य संरचनाओं को थोड़ा छोटा/सरल किया जा सकता है, रुचिकर प्रवाह के लिए। सादर।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मधु-मीतों का व्यक्तिवाद (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पर समय देकर अनुमोदन , समीक्षात्मक टिप्पणी और हौसला अफज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब डॉ. आशुतोष मिश्रा साहब।"
yesterday
Dr Ashutosh Mishra commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मधु-मीतों का व्यक्तिवाद (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी आपकी इस रचना में चिंतन जा पूरा साजो सामान है जागरूक करती उस शानदार रचना के साथ दिवाली के इस पर्व पर समाज में ब्याप्त अँधेरे को मिटाने का प्रयास करती इस रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर।।।"
yesterday
Afroz 'sahr' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post कहीं दीप जले, कहीं दिल (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"वाह वाहहहहहह क्या बात है उस्मानी साहब सफल लघु कथा । ख़ूबसूरत तंज़ ,,,मेंरी और से बहुत बधाई आपको,,,"
Thursday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post कहीं दीप जले, कहीं दिल (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Thursday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post फटी आंखें (लघुकथा) / शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर समय देकर अनुमोदन व हौसला अफज़ाई के लिए सादर हार्दिक आभार आदरणीय अर्चना गंगवार जी व आदरणीय महेंद्र कुमार जी।"
Thursday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post फटी आंखें (लघुकथा) / शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पर समय देकर अपनी राय से अवगत कराने के लिए सादर हार्दिक आभार आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी। कृपया अपने सुझाव से मार्गदर्शन भी प्रदान कीजिए।"
Thursday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post पॉकिटमेन (लघुकथा) / शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पर समय देकर अनुमोदन व हौसला अफज़ाई के लिए सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीया राजेश कुमारी जी।"
Thursday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post पेइंग-गेस्ट और ब्लैकमेलर (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पर समय देकर अनुमोदन व समीक्षात्मक टिप्पणी और हौसला अफज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया नीता कसार जी और आदरणीय सुरेन्द्र इंसान जी।"
Thursday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post हसरतें, फ़ितरतें और तिजारतें (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पर समय देकर अनुमोदन, समीक्षात्मक टिप्पणी और हौसला अफज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब राज़ नवादवी साहब।"
Thursday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सिसकते बल्ब (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस ब्लॉग पोस्ट पर वक़्त देकर अनुमोदन व हौसला अफज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब समर कबीर साहब, जनाब सलीम रज़ा रीवा साहब और आदरणिया कल्पना भट्ट जी।"
Thursday

Profile Information

Gender
Male
City State
Shivpuri M.P.
Native Place
Shivpuri
Profession
Radio Announcer
About me
A Private School- teacher, Freelancer and a Casual Radio Announcer. Simlple living, high thinking, fond of reading and writing.

Sheikh Shahzad Usmani's Blog

बावले (लघुकथा)

"अरे, इसे रोको तो ज़रा! कौन है यह? इस तरह कहां और क्यों दौड़ा चला जा रहा है ? कहीं यह वही 'विकास' तो नहीं?"

"नहीं!"

"तो क्या यह भी कोई 'राम' नामधारी है?"

"नहीं!"

"तो फिर कौन है यह? किसी 'राधा' का मीत?"

"नहीं, वह भी नहीं!"

"तो क्या 'गंगा' का सेवक?"

"नहीं भाई!"

"तो क्या तथाकथित 'सेवक'; जेहादी, हिन्दुत्व-प्रचारक, इस्लाम या ईसाइयत-प्रचारक?"

"नहीं, हरग़िज़ नहीं!"

"तो फिर कोई भ्रष्टाचारी, आतंकी या सब कुछ जीतने का इच्छुक कोई नया 'हिटलर'?"

"वैसा भी… Continue

Posted on October 20, 2017 at 11:00am — 3 Comments

कहीं दीप जले, कहीं दिल (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी

"चलो दिल बहलाने के लिए अब शतरंज खेलते हैं!"

"ठीक है, लेकिन जीतोगी तो तुम ही!"

"ऐसा मत कहो, दिल बहुत भारी है, कोई भी जीते!"

"सच कहती हो, जीत और हार तो अब इस ताजमहल के इतिहास और हक़ीक़त की होनी है, मुमताज़!"

"आज मुझे अर्जुमंद ही कहो, मुमताज़ नहीं, मेरे ख़ुर्रम! ये इक्कीसवीं सदी का हिन्दुस्तान है, डार्लिंग! कुछ देर आज के लवर्स की तरह बातचीत कर लो न! कल यहां क्या हो, किसने जाना!"

"सही कहा तुमने! सुना है यहां का इतिहास बदलने की धमकियां दी जा रही हैं! तुम्हारा ये ताजमहल अब… Continue

Posted on October 19, 2017 at 5:00am — 5 Comments

मधु-मीतों का व्यक्तिवाद (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी

"धर्मों, महात्माओं की गरिमा की तो धज्जियां उड़ रही हैं! कितने पवित्र नाम कैसी-कैसी मानसिकताओं के साथ जुड़ गए!"

"नयी पीढ़ी है, उसकी अपनी सोच विकसित हुई है वैश्वीकरण और इंटरनेट के दौर में!"

"क्या यही है जीवन जीने की कला? यह कैसा विकृत रूप है धर्मों, धर्मावलंबियों और विपश्यना जैसी साधनाओं का?!"

"बाबाओं ने पाश्चात्य रंग दे डाले हैं... और कट्टरपंथियों ने आतंक के!"

घटनाओं और हालात पर कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी बेबाक चर्चा कर रहे थे। अधिकतर उनकी बुराई कर रहे थे, जबकि उनमें से कुछ… Continue

Posted on October 17, 2017 at 12:43pm — 8 Comments

तू गांधी की लाठी ले ले (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी

"सभ्यता की तरह तुम भी इतिहास और गांधी जैसे महापुरुषों की लाठियों के सहारे को हमारा सहारा मानने की भूल कर रही हो!" नयी पीढ़ी ने अपने देश की संस्कृति से कहा।

"भूल तो तुम कर रही हो, वैश्वीकरण के दौर में बिक रहे मुल्कों , उनके स्वार्थी नेताओं और बिके हुए बुद्धिजीवियों के बयानों और साजिशों में फंसकर!" संस्कृति ने अपने हाथों में थामी हुई लाठी चूमते हुए कहा - मसलन ये देखो, गांधी जी की लाठी! ये लाठी मेरे लिए उनके अनुभवों, विचारों और दर्शन की सुगठित प्रतीक है। किताबों, काग़ज़ों, चरखों, कलैंडरों से,… Continue

Posted on October 13, 2017 at 4:57pm — 13 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

At 3:47pm on October 17, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
आदरणीय Er. Ganesh Jee "Bagi" जी सूचना अनुसार वांछित जानकारी एडमिन की ई-मेल परआज प्रेषित कर दी है ।सादर सधन्यवाद
At 11:17pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "मुखाग्नि" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:22pm on August 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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