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Sheikh Shahzad Usmani
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Sheikh Shahzad Usmani's Page

Latest Activity

Naveen Mani Tripathi commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'सैलाब में प्रत्याशी, मतदाता या किसान!' (लघुकथा)
"वाह वाह बहुत ही सुन्दर लिखा आपने । व्यवस्था पर करारी चोट । मुबारक हो सर ।"
4 minutes ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ताटंक छंद अभ्यास'
"ग़ज़ल पर अभ्यास करने पर हिंदी के छंदों में मात्रा गणना के समय समस्या स्वभावतः आ जाती है, इसलिए आपके इस प्रयास में भी ऐसी भूल हो गई है......कुल जमा आपनका प्रेस बहुत सराहनीय है"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

'सैलाब में प्रत्याशी, मतदाता या किसान!' (लघुकथा)

"कौन? ... कौन डूब रहा है इस सैलाब में इतने रेस्क्यू ऑपरेशंस के बावजूद?" "आम आदमी साहिब! आम मतदाता डूब रहा है, उपेक्षा के सैलाब में या फिर अहसानात के सैलाब में... इस चुनावी सैलाब में!" "रेस्कयू में हम कोई कसर नहीं छोड़ रहे ! धन, नौकरी, छोकरी, योजना, लोन-दान, वीजा-पासपोर्ट,  नये-नये बिल-क़ानून, पशु-रक्षा, धार्मिक-स्थल-मुद्दे, मीडिया-कवरेज , वाद-विवाद, पुलिस-समर्पण ... सब कुछ तो लगा दिया उनके लिए उनके हितार्थ! .. और क्या चाहिए!" "जनता इनको चुनावी-हथकंडे मान रही है, रेस्क्यू नहीं! जीवन-नैया साधने के…See More
6 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भटकना बेहतर (लघुकथा)
"शीर्षक पर भी सकारात्मकता लाई जा सकती है न?"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भटकना बेहतर (लघुकथा)
"हमेशा की तरह समसामयिक बालिका सरोकार, महिला सरोकार की बेहतरीन  सारगर्भित लघुकथा। हार्दिक बधाइयां आदरणीय डॉ. चन्द्रेश कुमार छतलानी  साहिब।  विचारोत्तेजक है। किन्तुु अंत सकारात्मक, निदानात्मक नहीं हो  सका है। सकारात्मक अंत कई…"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ताटंक छंद अभ्यास'
" आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी, यहां 'धुनाई/धुलाई/पिटाई' शब्दों को सामान्य अर्थों के बजाय मैंने हर महिला पर होने वाले "मानसिक/शारीरिक/आर्थिक"- "शोषण/अन्याय" की ओर इशारा करना चाहा है 'बिम्बों' में।"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ताटंक छंद अभ्यास'
"मेरे इस 'ताटंक छंद' अभ्यास पर  समय देकर, अपने विचार/राय सांझा कर अनुमोदन और हौसला अफ़ज़ाई हेतु तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया और ई़द-अल-अद़हा ई़दुज्जुहा/बकरीद) की अग्रिम मुबारकबाद मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब और जनाब मोह़म्मद आरिफ़…"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "उन्नति और प्रत्युत्पन्नमति" (लघुकथा)
"रचना पर समय देकर, अपने विचार/राय सांझा कर अनुमोदन और हौसला अफ़ज़ाई हेतु तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया और ई़द-अल-अद़हा ई़दुज्जुहा/बकरीद) की अग्रिम मुबारकबाद मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब और जनाब मोह़म्मद आरिफ़ साहिब। दरअसल जब मुझे लगता है कि शब्द/वाक्य कम…"
12 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ताटंक छंद अभ्यास'
"अरे वाह! हार्दिक बधाई आपको इस अभ्यास और प्रयास के लिए| हार्दिक शुभकामनाये "
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ताटंक छंद अभ्यास'
"बहुत खूब , सुझाव अनुकरणीय हैं "
yesterday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ताटंक छंद अभ्यास'
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बहुत अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । जनाब अशोक रक्ताले जी की बातों का संज्ञान लें ।"
yesterday
Neelam Upadhyaya commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ताटंक छंद अभ्यास'
" आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, नमस्कार।  ताटंक छंद के प्रयास की जितनी प्रशंसा की जाय कम है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । "
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ताटंक छंद अभ्यास'
"आदरणीय शेख़ शहजाद  उस्मानी साहब सादर, ताटंक छंद पर आपका सुंदर प्रयास हुआ है , किन्तु कहीं-कहीं मात्राओं की गणना में चूक हुई है। आपने 16 की जगह 18 मात्राएँ ले लीं हैं  । फिर हर पत्नी की धुनाई- धुलाई ...आपत्तिजनक कथ्य है । देख लें । सादर ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "उन्नति और प्रत्युत्पन्नमति" (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,                                         पश्चिम को अपनाना भी चाहते और बुराई पर आमादा भी रहते हैं ।  पश्चिमी…"
yesterday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "उन्नति और प्रत्युत्पन्नमति" (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,लघुकथा अच्छी हुई है लेकिन तवालत ज़ियादा है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ताटंक छंद अभ्यास'
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,                                   ताटंक छंद का बहुत ही लाजवाब प्रयास । इस प्रयास की जितनी प्रशंसा की जाय कम है । हार्दिक बधाई…"
yesterday

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About me
A Private School- teacher, Freelancer and a Casual Radio Announcer. Simlple living, high thinking, fond of reading and writing.

Sheikh Shahzad Usmani's Blog

'सैलाब में प्रत्याशी, मतदाता या किसान!' (लघुकथा)

"कौन? ... कौन डूब रहा है इस सैलाब में इतने रेस्क्यू ऑपरेशंस के बावजूद?"

"आम आदमी साहिब! आम मतदाता डूब रहा है, उपेक्षा के सैलाब में या फिर अहसानात के सैलाब में... इस चुनावी सैलाब में!"

"रेस्कयू में हम कोई कसर नहीं छोड़ रहे ! धन, नौकरी, छोकरी, योजना, लोन-दान, वीजा-पासपोर्ट,  नये-नये बिल-क़ानून, पशु-रक्षा, धार्मिक-स्थल-मुद्दे, मीडिया-कवरेज , वाद-विवाद, पुलिस-समर्पण ... सब कुछ तो लगा दिया उनके लिए उनके हितार्थ! .. और क्या चाहिए!"

"जनता इनको चुनावी-हथकंडे मान रही है, रेस्क्यू नहीं!…

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Posted on August 22, 2018 at 12:30am — 1 Comment

'ताटंक छंद अभ्यास'

[विषम चरण 16 मात्राएँ + यति+ सम चरण 14 मात्राएँ तुकांत पर तीन गुरु (222) सहित]

ओ री सखी नदी तुम भी हो, हुई न तुम वैसी गंदी।

हम सब पर तुम मर मिटती हो, सहकर भी सब पाबंदी।।

धुनाई-धुलाई हर पत्नी की, करते पति बस वस्त्रों सी।

मैल दिखाकर अपने मन का, पिटाई करते जब बच्चों सी।।

*

ताक-झांक बच्चे करते पीछे, दिखे आज बदले पापा।

झाग-दाग़ रिश्तों के छूटे, हृदय 'नदी' का जब नापा।।

दिन छुट्टी का अब ग़ज़ब हुआ, नदी से 'नदी' को जाना।

समय का अजब यह फेर हुआ, मां…

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Posted on August 20, 2018 at 4:00am — 10 Comments

"उन्नति और प्रत्युत्पन्नमति" (लघुकथा)

महिमा दिखने में अतिसुंदर किंतु मासूम थी। उच्च शिक्षा के बाद उच्च स्तरीय नौकरी हासिल करना उस मध्यमवर्गीय के लिए न तो आसानी से संभव था, न ही असंभव। जब दूसरे सक्षम लोग उसको नियंत्रित या 'स्टिअर' कर मनचाही दिशा देने की कोशिश करते तो उसे लगता कि वह पश्चिमी आधुनिकता की चपेट में आ रही है, कुछ समझौते कर कठपुतली सी बनायी या बनवाई जा रही है। आज वह लैपटॉप पर चैटिंग कर आभासी दुनिया के मशविरे लेने को विवश थी; पिता को सच बताने से डरती थी, किंतु 'सहेली सी' मां को भी तो सब कुछ उसने नहीं बताया था! हालांकि…

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Posted on August 19, 2018 at 2:49am — 3 Comments

"असली पहचान : नई सदी, नई मुसीबतें" (लघुकथा)

"लगता है वाक़ई बहुत गड़बड़ हो गई। कुछ ज़्यादा ही नेक साहित्य पढ़ ऊल-जलूल उसूल बना कर उलझन में डाल दिया अपनी इस शख़्सियत को!" एक मुशायरे में शामिल होने के लिए मिर्ज़ा साहिब सूटकेस जमाते हुए पिछले अनुभवों से 'सबक़' सीखने की कोशिश कर रहे थे; आजकल के हालात के हिसाब से अपने कुछ फैसले वे बदलने की सोच रहे थे।

"उस दाढ़ी वाले मुल्लाजी को रोक कर ज़रा उसकी तलाशी तो लो!" उनके पिछले अनुभव की पुनरावृत्ति करते हुए देर रात ग़श्त लगाते हुए एक पुलिस वाले ने अपने साथी को निर्देश दिया था पिछली दफ़े। मिर्ज़ा जी को आवाज़…

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Posted on August 17, 2018 at 5:00pm — 1 Comment

Comment Wall (12 comments)

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At 6:43am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय Sheikh Usmani साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 11:59am on April 12, 2018, MD SHAFIQUE ASHRAF said…

जी बहूत  बहुत शुक्रिया जनाब ... नया हूँ .... थोड़ा सीखने का मौका दीजिये  

At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

At 3:47pm on October 17, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
आदरणीय Er. Ganesh Jee "Bagi" जी सूचना अनुसार वांछित जानकारी एडमिन की ई-मेल परआज प्रेषित कर दी है ।सादर सधन्यवाद
 
 
 

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