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Sheikh Shahzad Usmani
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"कुछ हाइकु : 1-मान-सम्मानपाखंडी प्रतिमानछद्म गुमान 2-हवा-हवाईसम्मानित चतुरचिड़िया फुर्र3-प्रमाणपत्रस्मृति-चिन्ह, वंदनमान-बावत4-मूर्ति-स्थापनाविभूति-संकल्पनानाम जपना5-मूर्ति का मानविचार-अपमानव्यर्थ ज्ञान (मौलिक व अप्रकाशित)"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"बहुत आवश्यक सीख देती रचनाओं हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय दयाराम मेथानी साहिब। दूसरी रचना में अधिक गेयता महसूस हुई।"
13 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"बहुत ही विश्लेषणात्मक, विचारोत्तेजक क्षणिका-युग्म-सृजन  हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय नादिर ख़ान साहिब।"
13 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"गागर में सागर! वाह! जब यह सब कुछ, तो 'सम्मान' कटघरे में! बेहतरीन सृजन हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया कनक हरलल्का साहिबा।"
13 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"मान-सम्मान पाने और देने के मनोविज्ञान और परिस्थितियों को उभारती बेहतरीन रचना हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय अशोक रक्ताले साहिब।"
21 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"पते की बातें समझाती दोहा-छंदों में बढ़िया हिंदी ग़ज़ल हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय बासुदेव अग्रवाल 'नमन' साहिब।"
21 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"कड़वे सत्य बयान करते हुए समझाइश देती बढ़िया रचना हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ. टी आर शुक्ल साहिब।"
21 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"समझाइश और नैतिक शिक्षा देते बेहतरीन दोहा-छंदों हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहिब।"
21 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"सबक़, हिदायत, ताक़ीद करती बेहतरीन दोहावली हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह साहिब।"
21 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"विषयांतर्गत अहम मुद्दे पर कुछ अलग तरह से पते की बात कहती उम्दा रचना के प्रयास हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया अनीता शर्मा साहिबा।"
21 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"जोड़-तोड़, होड़-फोड़, लूट-खसोट के समसामयिक वातावरण को परिभाषित करती विषयांतर्गत विचारोत्तेजक बेहतरीन रचना हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय नादिर ख़ान साहिब।"
21 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"नसीहत, हिदायत, ताक़ीद करती विषयांतर्गत बेहतरीन ग़ज़ल हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान साहिब।"
21 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
" महत्वपूर्ण शब्दों, कर्मों और पदों-पदवियों का सम्मान संदर्भ में सामान्यीकरण या अधोपतन  और योग्यता की उपेक्षा आदि पर बेहतरीन कटाक्षिकाओं हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ साहिब।"
21 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post खामियाजा ( लघु कथा )
"कृपया "लघु कथा" को सुधार कर "लघुकथा" लिख दीजियेगा।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post खामियाजा ( लघु कथा )
"वाह। दोहरे कटाक्ष। दोहरी स्वीकारोक्ति! जैसे को तैसा। हालात-ए-हाज़रा। बेहतरीन सारगर्भित विचारोत्तेजक सबक़। हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहिब।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post दूरदृष्टि - लघुकथा
"सकारात्मकता लिए बेहतरीन समापन के साथ बढ़िया रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय वीरेंद्र वीर मेहता साहिब। इसे किसी दूसरे तरीक़े (केवल संवादात्मक आदि) से भी लिख कर देखा जा सकता है मेरे विचार से।"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Shivpuri M.P.
Native Place
Shivpuri
Profession
Radio Announcer
About me
A Private School- teacher, Freelancer and a Casual Radio Announcer. Simlple living, high thinking, fond of reading and writing.

Sheikh Shahzad Usmani's Blog

'नव जागृति' (लघुकथा)

ट्रेन की बोगी में वह बालक न तो ख़ुश बैठा हुआ था और न ही दुखी। सजे-धजे किन्नरों से भरी बोगी में, पैसे गिनते हुए एक बुज़ुर्ग किन्नर को वह देख ही रहा था कि एक फेरी वाला मूंगफली बेचता हुआ वहां आया और दो-चार सवारियों को मूंगफलियां बेच कर,पैसे गिन कर उन्हें बाक़ी पैसे लौटाने लगा।

"अरे देखो, यह लंगड़ा और दोनों आंखों से अंधा है, फ़िर भी पैसों का सही हिसाब कर रहा है !" वह बालक बगल में बैठे उस किन्नर से बोल पड़ा, जो उसे समझा-बुझाकर उसके घर से अपने दल में शामिल करने के लिए लाया था उसके…

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Posted on December 3, 2018 at 4:00pm — 5 Comments

'लुभावने या डरावने दिन?' (लघुकथा)

"हम तो अपनी सरकारी नौकरी से मज़े में हैं! तुम सुनाओ, कैसी चल रही है तुम्हारी प्राइवेट टीचरी?"

"बढ़िया! मेरे ख़्याल से तुमसे भी बेहतर चल रहा है सब कुछ!"

"वो कैसे?"

"तुम्हारी नौकरी में तुम केवल सरकार और जनता को उल्लू बनाते हो या चूना लगाते हो! ... हम तो अपनी नौकरी में मैनेजमेंट को और माता-पिता-पालकों को और छात्रों को भी, क्योंकि वे हमें उल्लू बनाते हैं या चूना लगाते हैं! 'टिट-फॉर-टेट' और 'टेक इट ईज़ी' का ज़माना है न!"

"कुछ समझ में नहीं आया! हमने तो सुना है कि प्राइवेट…

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Posted on November 30, 2018 at 12:30am

'डस्ट-मून्ज़' (लघुकथा)

"देखो, हम सेलिब्रिटीज़ की ज़िन्दगी के साथ मीडिया ऐसे ही बर्ताव करता रहता है! टेंशन मत लो!"

"सब कुछ मेंशन हो चुका है! तुम तो सिर्फ़ यह बता दो कि मैं तुम्हारा पहला चांद हूं या दूसरा या फिर तीसरे नंबर का?"

"क्या मतलब?"

"देखो अर्थ! अब ज़्यादा मत इतराओ! मैंने भी तुम्हारी उन दोनों लैलाओं के बयान सुन लिए हैं टेलीविज़न पर!"

"देखो शशि! मुझ पर और तुम स्वयं पर विश्वास रखो! तुम्हीं मेरा पहला और आख़री चांद हो, तुम्हीं इंदु, विधु और तुम्हीं मेरी चंदा हो डार्लिंग!"

"फ़िर वे दोनों…

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Posted on November 8, 2018 at 9:00am — 4 Comments

"आहरण या चीर-हरण" (लघुकथा)

"आज न छोड़ेंगे, सोते हुओं को चेतायेंगे!"

"घोर अन्धकार है महाराज! सुझावों, चेतावनियों, प्रतिबंधों और घोषणाओं को चुनौती देकर पटाखों, आतिशबाज़ियों और वैद्युत-सजावटों से ही इनका राष्ट्र दहक रहा है, चमक रहा है! इतना तो आपके दहन-आयोजन के आडंबर मेंं भी नहीं होता!"

"...'आडंबर'..! मत कहो मेरे नई सदी के 'सक्रीय अस्तित्व' और 'सांकेतिक स्मरण' को 'आडंबर'..! मेरे दशानन की बदलती भूमिकाएं नहीं मालूम क्या तुम्हें?" नई सदी के नवीन दस मुखौटों वाले विशाल शरीर में अपनी आत्मा लिए दीपावली पर भारत-भ्रमण…

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Posted on November 7, 2018 at 9:30am

Comment Wall (13 comments)

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At 12:50am on October 5, 2018, mirza javed baig said…

आली जनाब शहज़ाद उस्मानी साहिब आदाब, 

मुझे अपनी दोस्तों की फ़ेहरिस्त में जोड़ने का शुक्रिया 

At 6:43am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय Sheikh Usmani साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 11:59am on April 12, 2018, MD SHAFIQUE ASHRAF said…

जी बहूत  बहुत शुक्रिया जनाब ... नया हूँ .... थोड़ा सीखने का मौका दीजिये  

At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

 
 
 

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