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Tasdiq Ahmed Khan
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MANINDER SINGH commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल--खुदा की कसम शायरी हो न पाई
"बहुत सुन्दर ग़ज़ल कही आप ने सर........मेरा एक सवाल है सर आप से....मैंने ग़ज़ल थोड़ी बहुत जो सीखी है वो पूछ पूछ कर ही आप जैसे गुणीजनों से पूछी है......इसलिए आप मेरी बात का बुरा मत मानियेगा.....सर आप के पहले मिसरे में ये को वजन वजन गिरा कर लिखा है....पर…"
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan posted a blog post

ग़ज़ल--खुदा की कसम शायरी हो न पाई

ग़ज़लफ ऊलन -फ ऊलन- फ ऊलन- फ ऊलन .ये हसरत मुकम्मल कभी हो न पाई।मिले वह मगर दोस्ती हो न  पाई ।मुलाक़ात का सिलसिला तो है जारीमगर इब्तदा प्यार की हो न पाई ।त अज्जुब है बदले हैं महबूब कितनेमगर काम रां आशिक़ी हो न पाई।गए वह तसव्वुर से जब से निकल कर खुदा की क़सम शायरी हो न पाई ।करें नफ़रतें भूल कर सब मुहब्बतअभी तक ये जादूगरी हो न पाई ।मुसलसल वो करते रहे बे वफाई मगर हम से यह दिल लगी हो न पाई।फ़क़त गम ये तस्दीक़ है जाते जाते मुलाक़ात उनसे मेरी हो न पाई।(मौलिक व अप्रकाशित )See More
3 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"ग़ज़ल ==== तुम्हें अहसासे फुरक़त है,नहीं तो |मेरी तुम को ज़रूरत है ,नहीं तो | मेरी जाँ यह हक़ीक़त है ,नहीं तो |तुम्हें मुझ से मुहब्बत है , नहीं तो | ग़लत फ़हमी में फुरक़त हो गई है मिलन की कोई सूरत है ,नहीं तो | निगाहें फेर लीं अपनों ने मुझ से ये…"
8 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan's blog post was featured

ग़ज़ल(दिल बचाया तो तेरा जिगर जाएगा )

फाइलुन -फाइलुन-फाइलुन-फाइलुनवक़्ते तन्हाई मेरा गुज़र जाएगा | तू अगर साथ शब भर ठहर जाएगा |मुझको इज़ने तबस्सुम अगऱ मिल गई तेरा मगरूर चेहरा उतर जाएगा |मालो दौलत नहीं सिर्फ़ आमाल हैं हश्र में जिनको लेकर बशर जाएगा |उसके वादों पे कोई न करना यक़ी वो सियासी बशर है मुकर जाएगा |देखिए तो मिलाकर किसी से नज़र खुद बखुद ही निकल दिल से डर जाएगा |आप खंजर का एहसान लेते है क्यूँमुस्कराहट से दीवाना मर जाएगा |.तीर तस्दीक़ तिरछी निगाहों का हैदिल बचाया तो तेरा जिगर जाएगा |(मौलिक व अप्रकाशित )See More
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ ’चित्र से काव्य तक’ छंदोत्सव" अंक- 72 की समस्त रचनाएँ चिह्नित in the group चित्र से काव्य तक
"मुहतरम जनाब सौरभ साहिब,ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव अंक-72 के त्वरित संकलन और कामयाब संचालन के लिए मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें "
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post कितने अच्छे थे मेरा ऐब बताने वाले
"मुहतरम जनाब शकूर साहिब, अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें --मतले के सांनी मिसरे में लगता है कोई लफ्ज़ छूट गया है"
Tuesday
Tasdiq Ahmed Khan commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - दुश्मनी घुट के मर न जाये कहीं - ( गिरिराज )
"मुहतरम जनाब गिरि राज साहिब, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
Monday
Tasdiq Ahmed Khan commented on rajesh kumari's blog post “किन्नर” (लघु कथा 'राज')
"मुहतर्मा राजेश कुमारी साहिबा, सीख देती हुई सुन्दर लघु कथा हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
Monday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(दिल बचाया तो तेरा जिगर जाएगा )
"जनाब नीलेश साहिब,मश्वरे का बहुत बहुत शुक्रिया ---"
Monday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(दिल बचाया तो तेरा जिगर जाएगा )
"जनाब अनुराग साहिब,ग़ज़ल में आपकी शिरकत, हौसला अफजाई और मश्वरे का बहुत बहुत शुक्रिया----"
Monday
Nilesh Shevgaonkar commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(दिल बचाया तो तेरा जिगर जाएगा )
"आ. तस्दीक़ साहब...मैंने  मिसरा नहीं दिया है.... एक  तरकीब सुझाई है ...जैसेदेखिये तो खाकर कहने की जगह खाकर तो देखिये अधिक आग्रही और ग्राह्य होता है ....बाक़ी आपकी ग़ज़ल है..जैसा आप उचित मानें सादर "
Monday
Anuraag Vashishth commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(दिल बचाया तो तेरा जिगर जाएगा )
"आ. तस्दीक साहब, आपकी ग़ज़ल की रवानी प्रभावित करने वाली है. बधाई हो. आ. समर साहब द्वारा 'इज्ने तबस्सुम' पर की गई लिंग सम्बन्धी आपत्ति जायज है. 'इज्न' का मतलब 'इजाजत' जरूर स्त्रीलिंग है लेकिन इसकी वजह से उसे पुल्लिंग की तरह…"
Monday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(दिल बचाया तो तेरा जिगर जाएगा )
"जनाब नीलेश साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया शब्द "वक़्त "(अरबी ),तन्हाई (फ़ारसी ), बद (फ़ारसी ),फ़ज़ीलत(अरबी )के हैं ,फ़िरोज़ूल्लुगात में वक़्ते बद और वक़्ते फ़ज़ीलत , इस्तेमाल किए गये हैं , नार्वा की कोई…"
Sunday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(दिल बचाया तो तेरा जिगर जाएगा )
"जनाब रवि  साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया  "
Sunday
Nilesh Shevgaonkar commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(दिल बचाया तो तेरा जिगर जाएगा )
"आ. तस्दीक़ साहब... बहुत शानदार ग़ज़ल के लिये बधाई ..शब्द   अगर एक ही भाषा के हैं (या अरबी-या फ़ारसी) तो ही इज़ाफ़त स्वीकार्य है...वक़्त   और तन्हाई का त साथ आने से भी नारवा प्रतीत होता है ..(हालाँकि कोई मानता नहीं है अब इसे).मालो दौलत नहीं सिर्फ़…"
Sunday
Ravi Prabhakar commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(दिल बचाया तो तेरा जिगर जाएगा )
"टेक्‍नीकलिटी तो भई गुणीजन ही जाने पर ग़ज़ल पढ़ मुझे बहुत अच्‍छा लगा। विशेषकर - आप खंजर का एहसान लेते है क्यूँ मुस्कराहट से दीवाना मर जाएगा | हार्दिक शुभकामनाएं स्‍वीकारें ।"
Sunday

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Ajmer
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qannauj
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Govt. servant
About me
i have interest in writing urdu/hindi gazal &geet etc.

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ग़ज़ल--खुदा की कसम शायरी हो न पाई

ग़ज़ल

फ ऊलन -फ ऊलन- फ ऊलन- फ ऊलन 

.

ये हसरत मुकम्मल कभी हो न पाई।

मिले वह मगर दोस्ती हो न  पाई ।

मुलाक़ात का सिलसिला तो है जारी

मगर इब्तदा प्यार की हो न पाई ।

त अज्जुब है बदले हैं महबूब कितने

मगर काम रां आशिक़ी हो न पाई।

गए वह तसव्वुर से जब से निकल कर 

खुदा की क़सम शायरी हो न पाई ।

करें नफ़रतें भूल कर सब मुहब्बत

अभी तक ये जादूगरी हो न पाई ।

मुसलसल वो करते रहे बे…

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Posted on April 26, 2017 at 7:30pm — 1 Comment

ग़ज़ल(दिल बचाया तो तेरा जिगर जाएगा )

फाइलुन -फाइलुन-फाइलुन-फाइलुन

वक़्ते तन्हाई मेरा गुज़र जाएगा |

तू अगर साथ शब भर ठहर जाएगा |

मुझको इज़ने तबस्सुम अगऱ मिल गई

तेरा मगरूर चेहरा उतर जाएगा |

मालो दौलत नहीं सिर्फ़ आमाल हैं

हश्र में जिनको लेकर बशर जाएगा |

उसके वादों पे कोई न करना यक़ी

वो सियासी बशर है मुकर जाएगा |

देखिए तो मिलाकर किसी से नज़र

खुद बखुद ही निकल दिल से डर जाएगा |

आप खंजर का एहसान लेते है…

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Posted on April 22, 2017 at 12:00pm — 14 Comments

ग़ज़ल (मुहब्बत ही निभाई दोस्तों ) -

ग़ज़ल (मुहब्बत ही निभाई दोस्तों )

------------------------------------------

2122 -2122 -2122 -212

आँख उसने जब भी नफ़रत की दिखाई दोस्तों |

मैं ने बदले में मुहब्बत ही निभाई दोस्तों |

रुख़ तअस्सुब की हवा का भी अचानक मुड़ गया

जिस घड़ी शमए वफ़ा हम ने जलाई दोस्तों |

गम है यह इल्ज़ाम साबित हो नहीं पाया मगर

आज़माइश फिर भी क़िस्मत में है आई दोस्तों |

बन गया दुश्मन अमीरे शह्र मेरा इस लिए

हक़ की खातिर ही क़लम मैं ने…

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Posted on April 2, 2017 at 12:07pm — 15 Comments

ग़ज़ल (दोस्तों की महरबानी हो गई )

ग़ज़ल (दोस्तों की महरबानी हो गई )

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फ़ाईलातुन--फ़ाईलातुन --फाइलुन

यूँ न उनको बदगुमानी हो गई |

दोस्तों की महरबानी हो गई |

भूल बचपन के गये वादे सभी

उनको हासिल क्या जवानी हो गई |

नुकताची को क्या दिखाया आइना

उसकी फ़ितरत पानी पानी हो गई |

यूँ नहीं डूबा है मुफ़लिस फ़िक्र में

उसकी बेटी भी सियानी हो गई |

अजनबी के साथ क्या कोई गया

ख़त्म उलफत की कहानी…

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Posted on March 18, 2017 at 8:48pm — 6 Comments

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At 3:51pm on February 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी,माह के सक्रिय सदस्य के रूप में ओ बी ओ द्वारा चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई। 

At 11:43pm on February 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तस्दीक अहमद खान जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:11pm on October 22, 2015, Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' said…
आपका इस बज्म में तहेदिल से इस्तक़बाल है......|
At 6:28pm on October 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

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