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Tasdiq Ahmed Khan
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"आद0 तस्दीक अहमद खान जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।"
22 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"जनाब महेंद्र कुमार साहिब , ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I "
12 hours ago
Mahendra Kumar commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"लाए हैं अंजुमन में किसी अजनबी को वहदिल में न यूँ उठा मेरे कुहराम दोस्तो l ...वाह!  बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है आदरणीय तस्दीक़ जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. तीसरे शेर में तकाबुल-ए-रदीफ़ है. देख लीजिएगा. सादर."
12 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan posted a blog post

ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)

ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)(मफ ऊल _फाइ लात _मफा ईल _फाइ लुन)दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो lउसने दिया फरेबी का इल्ज़ाम दोस्तो lमैं ने खिलाफे ज़ुल्‍म जुबां अपनी खोल दीअब चाहे कुछ भी हो मेरा अंजाम दोस्तो lदिल को अलम जिगर को तड़प अश्क आँख कोमुझ को दिए ये इश्क़ ने इनआम दोस्तो lलाए हैं अंजुमन में किसी अजनबी को वहदिल में न यूँ उठा मेरे कुहराम दोस्तो lसच्चा है यार वो उसे पहचान लीजिए बद वक़्त पर जो आए सदा काम दोस्तो lजिसने किया तबाह वही मेरा यार है उसका जुबां से कैसे मैं लूँ नाम…See More
17 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब  , ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I "
Saturday
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"जनाब नादिर खान साहिब, ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I "
Jan 12
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"जनाब शेख शहज़ाद साहिब आ दाब, ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I "
Jan 12
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"जनाब महेंद्र कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I "
Jan 12
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"जनाब महेंद्र कुमार साहिब, मैं मुहतरम समर साहिब की बात से सहमत हूँ, मुफलिसी स्त्री लिंग है उसके हिसाब से ही काफिया बड़ी लिया है l"
Jan 12
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"मुह तरमा सूचि संदीप साहिबा , प्रदत्त विषय पर सुंदर ग़ज़ल हुई है, मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l "
Jan 11
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"जनाब गिरधारी सिंह साहिब, प्रदत्त विषय पर सुंदर कुंडली हुई है, मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l "
Jan 11
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"मुहतरम जनाब बासुदेव साहिब, प्रदत्त विषय पर उम्दा रचना हुई है , मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l "
Jan 11
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"जनाब पंकज साहिब , प्रदत्त विषय पर सुंदर हरि गीतिका छंद हुए हैं  , मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l "
Jan 11
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"जनाब डॉक्टर छोटे लाल साहिब , प्रदत्त विषय पर सुंदर रचना हुई है , मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l "
Jan 11
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"मुहतरम जनाब समर साहिब आ दाब, ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I "
Jan 11
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"मुहतरम जनाब बासुदेव साहिब, ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I "
Jan 11

Profile Information

Gender
Male
City State
Ajmer
Native Place
qannauj
Profession
Govt. servant
About me
i have interest in writing urdu/hindi gazal &geet etc.

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ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)

ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)

(मफ ऊल _फाइ लात _मफा ईल _फाइ लुन)

दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो l

उसने दिया फरेबी का इल्ज़ाम दोस्तो l

मैं ने खिलाफे ज़ुल्‍म जुबां अपनी खोल दी

अब चाहे कुछ भी हो मेरा अंजाम दोस्तो l

दिल को अलम जिगर को तड़प अश्क आँख को

मुझ को दिए ये इश्क़ ने इनआम दोस्तो l

लाए हैं अंजुमन में किसी अजनबी को वह

दिल में न यूँ उठा मेरे कुहराम दोस्तो l

सच्चा है यार वो उसे पहचान…

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Posted on January 17, 2019 at 3:57pm — 3 Comments

ग़ज़ल (यूँ ही धुआँ न अचानक उठा है गुलशन में)

(मफा इलुन _फ़ इ ला तुन _मफा इलुन _फ़े लुन)

यूँ ही धुआँ न अचानक उठा है गुलशन में l

लगी है आग यक़ी नन किसी नशे मन में l

मुझे है ग़म यही उन पर शबाब आते ही

मिलें न वैसे वो मिलते थे जैसे बचपन में l

न मैं सुकून से हूँ और न चैन से हो तुम

ये कैसी खींच ली दीवार हम ने आँगन में l

सितम भी ढाए तो वो मुस्कुरा के ही ढाए

यही तो ख़ास है फितरत हमारे दुश्मन में l

रखें या तोड़ दें बोलें ही सच हमेशा ये

मिले ये…

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Posted on January 5, 2019 at 1:00pm — 12 Comments

ग़ज़ल (रब से कीजिए दुआएं नए साल में)

ग़ज़ल (रब से कीजिए दुआएं नए साल में)

(फाइ लुन _फाइ लुन _फाइ लुन _फाइ लुन _)

रब से कीजिए दुआएं नए साल में l

अच्छे दिन लौट आएँ नए साल में l

पास आएं न आएं नए साल में l

पर न हम को भुलाएं नए साल में l

जिन अज़ी ज़ों ने उनको किया बद गुमां

उनको मत मुँह लगाएँ नए साल में l

उस पे फिरक़ा परस्तों की है बद नजर

भाई चारा बचाएँ नए साल में l

इम्तहाने वफ़ा तो बहुत हो चुके

और मत आज़मा एँ नए साल में…

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Posted on January 1, 2019 at 12:28pm — 10 Comments

ग़ज़ल (प्यार का हर दस्तूर निभाना पड़ता है)

ग़ज़ल (प्यार का हर दस्तूर निभाना पड़ता है)

(फ्अल_फ ऊलन _फ्अल _फ ऊलन _फ़ेलुन _फा)

प्यार का हर दस्तूर निभाना पड़ता है l

यार का हर ग़म हँस के उठाना पड़ता है l

बाज़ कहाँ वो यूँ आता है महफ़िल में

शीशा नुक्ता चीं को दिखाना पड़ता है l

यूँ ही मुसाफ़िर मिटती नहीं है तारीकी

रस्ते में इक दीप जलाना पड़ता है l

उलफत की मंज़िल आसान नहीं इतनी

धोका हर इक मोड़ पे खाना पड़ता है l

रह पाता है कोई सदा कब दुनिया…

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Posted on December 11, 2018 at 11:22am — 9 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 5:33pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब आदाब
मैं बहुत आभारी हूँ कि आपने मेरी ग़ज़ल पढ़ी शुक्रिया
मुझमें अभी बहुत कमी है मैं जानता हूँ लेकिन आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में कुछ सीख पाउँगा ऐसी आशा करता हूँ आपका बहुत बहुत आभार और शुक्रिया
At 9:21pm on September 3, 2017, SALIM RAZA REWA said…
जनाब तस्दीक साहब अपना मोबाइल नंबर देने की मेहरबानी करें
At 3:51pm on February 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी,माह के सक्रिय सदस्य के रूप में ओ बी ओ द्वारा चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई। 

At 11:43pm on February 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तस्दीक अहमद खान जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:11pm on October 22, 2015, Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' said…
आपका इस बज्म में तहेदिल से इस्तक़बाल है......|
At 6:28pm on October 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

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"आद0 तस्दीक अहमद खान जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।"
22 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post दुर्मिल सवैया
"आद0 फूल सिंह जी सादर अभिवादन। रचना पसंद करने के लिए कोटिश आभार"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो
"आ. भाई महेंद्र जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post जागो उठो हे लाल तुम (मधुमालती छंद)
"आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन। प्रतिक्रिया से नवाजने के लिए आभारी हूँ।"
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Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"जनाब महेंद्र कुमार साहिब , ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया…"
12 hours ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो
"हृदय से आभारी हूँ आदरणीय तेज वीर सिंह जी. बहुत-बहुत शुक्रिया. सादर."
12 hours ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"लिखना सार्थक रहा आदरणीय अजय जी. बहुत-बहुत शुक्रिया. हार्दिक आभार. सादर."
12 hours ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तेज वीर सिंह जी. हृदय से आभारी हूँ. सादर."
12 hours ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"सादर आदाब आदरणीय समर कबीर सर. इस प्रयास की सराहना के लिए हृदय से आभारी हूँ. यदि आप यह भी इंगित कर…"
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