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Tasdiq Ahmed Khan
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Tasdiq Ahmed Khan commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"जनाब दिनेश कुमार साहिब ,सुन्दर गज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
30 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"जनाब दिनेश कुमार साहिब ,आपकी गज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
34 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"जनाब महेन्द्र कुमार साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया"
35 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ।मश्वरे का शुक्रिया"
36 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan posted blog posts
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"जनाब आशुतोष साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया   "
12 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 76 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"जनाब राणा साहिब , ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक -76 के संकलन के लिए मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ "
12 hours ago
दिनेश कुमार commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"उम्दा ग़ज़ल हुई जनाब तस्दीक़ साहब। वाह वाह। सभी अशआर अच्छे लगे।"
14 hours ago
Mahendra Kumar commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"अच्छी ग़ज़ल है आ. तस्दीक़ जी. ये शेर विशेष रूप से पसन्द आये : इतना मजबूर भी मुझको न खुदा कर देना अपने घर बार को इज़्ज़त से चला भी न सकूँ | वो सितमगर सही तस्दीक़ मगर है दिलबरउस की फ़ितरत मैं ज़माने को बता भी न सकूँ | हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.…"
15 hours ago
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । चौथे शैर के ऊला मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखिये 'महब्बत तो'"
16 hours ago
Dr Ashutosh Mishra commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"आदरणीय तस्दीक जी इतना मजबूर भी मुझको न खुदा कर देना अपने घर बार को इज़्ज़त से चला भी न सकूँ | अश्क जो हैं मेरी आँखों में दिए दिलबर ने मैं अगर चाहूं गिराना तो गिरा भी न सकूँ |इन शेरो के लिए बिशेष रूप से बधाई स्वीकर करें सादर"
17 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"मुहतरम जनाब आरिफ साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
20 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र -फेलुन) यह ग़ज़ल दुनिया की सबसे छोटी ग़ज़ल है। इसे "गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स" में शामिल किया गया है ।
"मुहतरम जनाब आरिफ साहिब ,इस अदभुत ग़ज़ल के कारनामे के लिए मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं"
20 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post ग़ज़ल (2)
"मुहतर्मा कल्पना रौनक़ साहिबा ,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । शेर2 उला मिसरे में तुमको की जगह तुझको और जान की जगह जाँ कर लीजिए ,शेर3 उला मिसरा यूँ करलें --फूलों जैसा जीवन गुलशन में मेरा , सादर"
20 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"जनाब सलीम रज़ा साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
21 hours ago
Mohammed Arif commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब, बहुत बेहतरीन प्रयास । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
21 hours ago

Profile Information

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Male
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Ajmer
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qannauj
Profession
Govt. servant
About me
i have interest in writing urdu/hindi gazal &geet etc.

Tasdiq Ahmed Khan's Blog

ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )

(फाइलातुन -फइलातुन -फइलातुन -फइलुन /फेलुन)

आ गया हूँ वहाँ जिस जा से मैं जा भी न सकूँ |

मा सिवा उनके कहीं दिल को लगा भी न सकूँ |

इस तरह बैठे हैं वो फेर के आँखें मुझ से

उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ |

मेरी महफ़िल में किसी ग़ैर को लाने वाले

दिल से मजबूर हूँ मैं तुझको जला भी न सकूँ |

फितरते तर्के महब्बत है तेरी यार मगर 

तेरी इस राय को मैं अपना बना भी न सकूँ |

इतना मजबूर भी मुझको न खुदा कर देना…

Continue

Posted on September 24, 2017 at 9:00am — 12 Comments

ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )

ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )

-----------------------------------------------------

(फ़ाइलुन -फ़ाइलुन -फ़ाइलुन -फ़ाइलुन)

 

अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम |

उनके कुचे से वापस न जाएँगे हम |

 

ज़ुल्म कितने भी ढा ले सितमगार तू

ग़म के हर दौर में मुस्कराएँगे हम |

 

आपको तो अज़ीज़ों से फ़ुर्सत नहीं

किस तरह हाल दिल का सुनाएँगे हम |

 

जब भी मिलता है देता है वो ज़ख़्मे नौ

दस्त उलफत का कब तक मिलाएँगे…

Continue

Posted on September 14, 2017 at 10:23pm — 14 Comments

ग़ज़ल ( हाए वो शख़्स निकलता है सितमगर यारो )

ग़ज़ल ( हाए वो शख़्स निकलता है सितमगर यारो )

-------------------------------------------------------------------



(फाइलातुन -फइलातुन -फइलातुन -फेलुन )



मुन्तखिब करता है दिल जिसको भी दिलबर यारो |

हाए वो शख़्स निकलता है सितम गर यारो |

उनके चहरे से नज़र हटती नहीं है मेरी

किस तरह देखूं ज़माने के मैं मंज़र यारो |

कूचए यार से जाएँ तो भला जाएँ कहाँ

राहे उलफत में लुटा बैठे हैं हम घर यारो |

आस्तीनों में जो रखते हैं…

Continue

Posted on September 5, 2017 at 6:14pm — 17 Comments

ग़ज़ल (दिल से बाहर ही न निकले दिलरुबा तेरा ख़याल )

(फाइलातुन -फाइलातुन -फाइलातुन - फाइलुन /फाइलात )

शाम होते ही सितम ढाए सदा तेरा ख़याल |

दिल से बाहर ही न निकले दिलरुबा तेरा ख़याल |

देखता हूँ जब भी मैं नाकाम दीवाना कोई

यक बयक आता है मुझको बे वफ़ा तेरा ख़याल |

उम्र भर कैसे निभेगा साथ मुश्किल है यही

है अलग मेरा तसव्वुर और जुदा तेरा ख़याल |

हो न हो तुझको यकीं लेकिन है सच्चाई यही

किस ने आख़िर है किया मेरे सिवा तेरा ख़याल |

ढोंग तू फिरक़ा परस्ती को…

Continue

Posted on August 17, 2017 at 8:30pm — 10 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 9:21pm on September 3, 2017, SALIM RAZA REWA said…
जनाब तस्दीक साहब अपना मोबाइल नंबर देने की मेहरबानी करें
At 3:51pm on February 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी,माह के सक्रिय सदस्य के रूप में ओ बी ओ द्वारा चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई। 

At 11:43pm on February 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तस्दीक अहमद खान जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:11pm on October 22, 2015, Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' said…
आपका इस बज्म में तहेदिल से इस्तक़बाल है......|
At 6:28pm on October 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

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