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Tasdiq Ahmed Khan
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Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरम जनाब .अजीत आकाश . साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है , शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ---- शेर 5 में रदीफ़ का मेल सही नहीं लग रहा है , देख लीजिएगा ----"
5 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरम जनाब महेन्द्र . साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है , शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ----"
6 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरम जनाब सत्विन्दर साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है , शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ---- शेर 2 ,4 , 5 , में रदीफ़ का मेल नहीं हो सका , देख लीजिएगा ---"
6 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरम जनाब मुनीश साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है , शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ----"
6 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरम जनाब नवीन मणि साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है , शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ----"
6 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरम जनाब गोपाल नारायण साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है , मगर आपने रदीफ़ को अच्छी तरह नहीं निभा पाए , शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ----"
6 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरम जनाब आशुतोष साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है , शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ---- शेर 1 के उला और शेर 5 के सानी मिसरे में रदीफ़ का सही मेल नहीं , आखरी शेर का उला मिसरा बह्र में नहीं , बात भी मुकम्मल नहीं लगती , देख लीजिएगा ---"
6 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरम जनाब मिथिलेश साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है , शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ----"
6 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरम अनुराग साहिब , ग़ज़ल का अच्छा प्रयास किया है , मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ---ज़्यादातर मिसरे बह्र में नहीं हैं , देख लीजिएगा ----"
6 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरमा सीमा साहिबा , ग़ज़ल का अच्छा प्रयास किया है , मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ---मत्ले का सानी मिसरा बह्र में नहीं है , आखरी शेर के उला मिसरे में बात मुकम्मल नहीं , देख लीजिएगा ----"
6 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरम जनाब हेमंत . साहिब , ग़ज़ल का अच्छा प्रयास किया है , बस रदीफ़और बह्र के हिसाब से थोड़ा वक़्त देने की ज़रूरत है , मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ---"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरम जनाब गुमनाम . साहिब , ग़ज़ल का अच्छा प्रयास किया है , बस रदीफ़ के हिसाब से थोड़ा वक़्त देने की ज़रूरत है , मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ---"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरम जनाब दयाराम मेठानी . साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई , शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ----शेर 1 ,4 ,5 में रदीफ़ का मेल सही नहीं हो पाया है ,शेर3 का उला मिसरा बह्र में नहीं , नज़रे सानी कर लीजिएगा ---सादर"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरम जनाब नादिर . साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई , शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ----शेर 2 में रदीफ़ का मेल सही नहीं हो पाया है , नज़रे सानी कर लीजिएगा ---सादर"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुह्तरमा राजेश कुमारी . साहिबा , अच्छी ग़ज़ल हुई , शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ----कई शेर में रदीफ़ का मेल सही नहीं हो पाया है , नज़रे सानी कर लीजिएगा ---सादर"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"मुहतरम जनाब महेन्द्र कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---"
7 hours ago

Profile Information

Gender
Male
City State
Ajmer
Native Place
qannauj
Profession
Govt. servant
About me
i have interest in writing urdu/hindi gazal &geet etc.

Tasdiq Ahmed Khan's Blog

ग़ज़ल (दोस्तों की महरबानी हो गई )

ग़ज़ल (दोस्तों की महरबानी हो गई )

----------------------------------------------

फ़ाईलातुन--फ़ाईलातुन --फाइलुन

यूँ न उनको बदगुमानी हो गई |

दोस्तों की महरबानी हो गई |

भूल बचपन के गये वादे सभी

उनको हासिल क्या जवानी हो गई |

नुकताची को क्या दिखाया आइना

उसकी फ़ितरत पानी पानी हो गई |

यूँ नहीं डूबा है मुफ़लिस फ़िक्र में

उसकी बेटी भी सियानी हो गई |

अजनबी के साथ क्या कोई गया

ख़त्म उलफत की कहानी…

Continue

Posted on March 18, 2017 at 8:48pm — 6 Comments

ग़ज़ल (निगाहों से आँसू निकलते रहे )

ग़ज़ल

-------

(फऊलन -फऊलन -फऊलन -फअल )

क़ियामत की वो चाल चलते रहे |

निगाहें मिलाकर बदलते रहे |

दिखा कर गया इक झलक क्या कोई

मुसलसल ही हम आँख मलते रहे |

यही तो है गम प्यार के नाम पर

हमें ज़िंदगी भर वो छलते रहे |

मिली हार उलफत के आगे उन्हें

जो ज़हरे तअस्सुब उगलते रहे |

तअस्सुब की आँधी है हैरां न यूँ

वफ़ा के दिए सारे जलते रहे |

असर होगा उनपर यही सोच कर

निगाहों से आँसू…

Continue

Posted on March 15, 2017 at 8:51pm — 18 Comments

ग़ज़ल (हसीनों में मुहब्बत ढूंढता है )

(मफ़ाईलुन-मफ़ाईलुन-फऊलॅन)

हसीनों में मुहब्बत ढूंढता है |

ज़मीं पर कोई जन्नत ढूंढता है |

दगा फ़ितरत हसीनों की है लेकिन

कोई इन में मुरव्वत ढूंढता है |

समुंदर से भी गहरी हैं वो आँखें

जहाँ तू अपनी चाहत ढूंढता है |

मिलेगा तुझको असली लुत्फ़ गम में

फरह में क्यूँ लताफत ढूंढता है |

हैं काग़ज़ के मगर हैं खूबसूरत

तू जिन फूलों में नकहत ढूंढता है |

सियासी लोग होते हैं…

Continue

Posted on March 4, 2017 at 9:00pm — 10 Comments

ग़ज़ल( किया है अपनों ने जब किनारा ) --------

ग़ज़ल

--------

(मफ़ाइलातुन--मफ़ाइलातुन)

किया है अपनों ने जब किनारा |

दिया है अग्यार ने सहारा |

करम हुआ दोस्तों का जब से

वफ़ा का गर्दिश में है सितारा |

अगर गिला है तो सिर्फ़ है यह

न दे सके साथ वो हमारा |

हुआ है दीदार जब से उनका

लगे न मंज़र कोई भी प्यारा |

हसीन रुख़ में ज़रूर कुछ है

जो देखे हो जाए वो तुम्हारा |

हो और मज़बूत अपनी यारी

कहाँ ज़माने को है गवारा…

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Posted on February 4, 2017 at 9:42pm — 6 Comments

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At 3:51pm on February 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी,माह के सक्रिय सदस्य के रूप में ओ बी ओ द्वारा चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई। 

At 11:43pm on February 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तस्दीक अहमद खान जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:11pm on October 22, 2015, Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' said…
आपका इस बज्म में तहेदिल से इस्तक़बाल है......|
At 6:28pm on October 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

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"सभी अशआर बस मन को भा गए. और बाबा जुकर वाले शेर का तो बस... बधाई हो आदरणीय..."
5 hours ago
भुवन निस्तेज replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"वर्तमान के प्रति आपकी चिन्ता इस ग़ज़ल में बखूबी झलक रही है आ० राजेश दीदी. कृप्या दाद कबूल करें ."
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"बहुत आभार नादिर भाई !!!"
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"Like.... bhaai !!!  "
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"जी, सर.... आप सामने आये, मैं होश में आ गया.... अत्यन्त आभार आपका आदरणीय समर साहब.... बरसी में…"
5 hours ago
Anuraag Vashishth replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आ. मिथिलेश बहुत अच्छी ग़ज़ल है बधाई हो."
5 hours ago

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