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SALIM RAZA REWA
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on SALIM RAZA REWA's blog post दामन को तीरगी से बचाते चले गए - सलीम रज़ा रीवा
"आद0 सलीम जी सादर अभिवादन, बेहतरीन और उम्दा ग़ज़ल कही आपने, शैर दर शैर बधाई देता हूँ। सादर"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on SALIM RAZA REWA's blog post दामन को तीरगी से बचाते चले गए - सलीम रज़ा रीवा
"बहुत खूब । हार्दिक बधाई ।"
Sunday
SALIM RAZA REWA commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल,,,,इशारों का साथ दो,,,,,,,
"जनाब अफरोज साहब, ग़ज़ल के तमाम अशआर ख़ूबसूरत है मुबारक़बाद क़ुबूल करें ,"
Dec 8
SALIM RAZA REWA commented on Mohammed Arif's blog post कविता--उम्मीद की कुनकुनी धूप
"जनाब आरिफ साहब, नए साल की कविता और अडवांस में नए साल की मुबारक़बाद,"
Dec 8
SALIM RAZA REWA commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल-प्रयास में असफल लोग नामुराद नहीं |-कालीपद 'प्रसाद'
"आ. ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई,"
Dec 8
SALIM RAZA REWA commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (किसी खंजर का मत अहसान लीजिए )
"वाह... जनाब तसदीक़ साहिब क्या खूब ग़ज़ल कही है, हर शेर के लिए मुबारक़बाद,"
Dec 8
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post दामन को तीरगी से बचाते चले गए - सलीम रज़ा रीवा
"काली प्रसाद जी, ग़ज़ल को सराहने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद, "
Dec 8
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post दामन को तीरगी से बचाते चले गए - सलीम रज़ा रीवा
"आरिफ साहब, महब्बत सलामत रहे, "
Dec 8
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post दामन को तीरगी से बचाते चले गए - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब अफरोज साहब, आपके ख़ुलूश और महब्बत के लिए शुक्रिया, "
Dec 8
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post दामन को तीरगी से बचाते चले गए - सलीम रज़ा रीवा
"श्याम नारायण जी ग़ज़ल पर आपकी सराहना के लिए धन्यवाद, "
Dec 8
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post दामन को तीरगी से बचाते चले गए - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहब, आपकी ग़ज़ल पर शिर्कत और आपकी महब्बत के लिए शुक्रिया, "
Dec 8
Kalipad Prasad Mandal commented on SALIM RAZA REWA's blog post दामन को तीरगी से बचाते चले गए - सलीम रज़ा रीवा
"आ सलीम रज़ा साहिब आदाब , सभी अशआर बहुत सुन्दर है बधाई स्वीकार करें "
Dec 6
Mohammed Arif commented on SALIM RAZA REWA's blog post दामन को तीरगी से बचाते चले गए - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम रज़ा साहब आदाब,                                       बहुत ही प्यारी और बेहतरीन अशआरों से सजी ग़ज़ल । हर शे'र उम्दा । दिली मुबारकबाद क़ुबूल…"
Dec 6
Afroz 'sahr' commented on SALIM RAZA REWA's blog post दामन को तीरगी से बचाते चले गए - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम रज़ा साहिब इस रचना पर बहुत बधाई आपको आपकी ग़ज़ल ने बहुत पुराने गीत,, "उनके ख़्याल आए तो आते चले गए" " दीवाना ज़िंदगी को बनाते चले गए" की यादें ताज़ा कर दीं ,,,,,"
Dec 6
Shyam Narain Verma commented on SALIM RAZA REWA's blog post दामन को तीरगी से बचाते चले गए - सलीम रज़ा रीवा
""क्या बात है ..... बहुत खूब ... बधाई आप को ""
Dec 6
Tasdiq Ahmed Khan commented on SALIM RAZA REWA's blog post दामन को तीरगी से बचाते चले गए - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब ,उम्दा ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
Dec 6

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Male
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REWA M.P.
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REWA (M.P.)
Profession
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दामन को तीरगी से बचाते चले गए - सलीम रज़ा रीवा

221 2121 1221 212 

दामन को तीरगी से बचाते चले गए

ईमाँ की रोशनी में  नहाते चले गए

 -

हम दर-बदर की ठोकरे खाते चले गए

फिर भी तराने प्यार के गाते चले गए

 -

कोशिश तो की भंवर ने डुबोने की बारहा

हम कश्ती-ए-हयात बचाते चले  गए

 -

रुसवाइओं के डर से कभी बज़्में नाज़ में

हंस-हंस के दिल का दर्द छुपाते चले गए

 -

अपना रहा ख़्याल न कुछ होश ही रहा

आँखों में उनकी हम तो समाते चले गए

 -

करता है जो सभी के मुक़द्दर का…

Continue

Posted on December 5, 2017 at 6:01pm — 14 Comments

तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा

212 1222 212 1222

तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं

रात - रात भर तेरा इंतज़ार करते हैं

-

तुमको प्यार करते थे तुमको प्यार करते हैं

जाँ निसार करते थे जाँ निसार करते हैं

-

ख़ुश रहे हमेशा तू हर ख़ुशी मुबारक हो

ये दुआ खुदा से हम बार - बार करते हैं

-

उँगलियाँ उठाते हैं लोग दोस्तों पर भी

हम तो दुश्मनों पर भी ऐतबार करते हैं

-

वादा उसका सच्चा है लौट के वो आएगा

इस उमीद पर अब भी इंतज़ार करते…

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Posted on November 22, 2017 at 8:30am — 6 Comments

छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे - सलीम रज़ा रीवा

212 212 212 212

छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे

बिन तेरे आह भर-भर के मर जाएँगे

 -

चाँद भी देख कर उनको शरमाएगा 

मेरे महबूब जिस दम संवर…

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Posted on November 20, 2017 at 10:00am — 14 Comments

चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा

2122 2122 2122 212

चांद  का टुकड़ा है या कोई  परी या हूर है 

उसके चहरे पे चमकता हर घड़ी इक नूर है

-

हुस्न पर तो नाज़ उसको ख़ूब था पहले से ही …

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Posted on November 17, 2017 at 10:30am — 13 Comments

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