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चाहे  दुनिया में कहीं और चले जाएंगे  - सलीम रज़ा

2122 1122 1122 22

चाहे  दुनिया में कहीं और चले जाएंगे            

चाह कर भी वो मुझे भूल नहीं पाएंगें             

 

उनके एल्बम में है तस्वीर पुरानी मेरी        

अब वो देखेंगे तो पहचान नहीं पाएंगे

 

मेरे महबूब को गुलशन  में ज़रा आने दो          

फूल जितने है वो क़दमों में बिखर जाएंगे

 

उनको फलदार ज़रा और अभी होने दो

शाख़ की मिस्ल अभी और लचक जाएंगे

 

उम्र भर साथ निभाने का जो वादा कर लो

छोड़कर सब को तेरे पास चले आएंगे

"मौलिक व अप्रकाशित"

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