Open Books से सम्बंधित किसी प्रकार का सुझाव या शिकायत यहाँ लिख सकते है , आप के सुझाव और शिकायत पर Team Admin जरूर विचार करेगी .....
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Latest Activity: 1 hour ago

Started by Dr.Prachi Singh. Last reply by Abhinav Arun 16 hours ago. 6 Replies 1 Like
आदरणीय एडमिन महोदय,मंच पर हर माह छंदोत्सव का आयोजन होता है, जिसका उद्देश्य ही सभी रचनाकारों का परस्पर सनातनी छंद सीखना और सिखाना है... जिसे सभी सदस्य एक साहित्यिक कार्यशाला की तरह लेते हैं..आदरणीय, लेकिन इस कार्यशाला का उद्देश्य तभी सार्थकता पायेगा,…Continue
Started by vijay nikore. Last reply by बृजेश नीरज Apr 25. 2 Replies 0 Likes
Dear friends:As many of us have noticed, usually there is not much responseto the discussions at various Groups. This is true with English poems,as well, and one feels like a loner walking at night in the darknessin a big city with no street…Continue
Started by Admin. Last reply by बृजेश नीरज Feb 25. 8 Replies 1 Like
श्री सतीश मापतपुरी जी लिखते है कि..... OBO पर साहित्य की कई विधाएं, जैसे -गीत,कविता,ग़ज़ल, मुक्तक, लघुकथा आदि मौजूद है, कहानी भी एक सशक्त विधा है. धारावाहिक रूप…Continue
Started by vijay nikore. Last reply by बृजेश नीरज Feb 25. 1 Reply 0 Likes
Dear Admin:I respect OBO's rules regarding the poems/articles to be previously unpublished, and there is a good reason for it. However, with this we, the readers, can be missing out on enjoying some good "reading" as well. Would OBO consider having…Continue
Started by vijay nikore. Last reply by Raj Kumar Rohilla Feb 4. 14 Replies 6 Likes
आध्यात्मिक चिंतनDear Admin in-charge:Hari ॐ.A very interesting informative chat with Prachi ji yesterdayresulted in a suggestion that it would be beneficial to createa new group for "आध्यात्मिक चिंतन"।The aim of this exclusive group will be to…Continue
Started by वीनस केसरी. Last reply by वीनस केसरी Dec 17, 2012. 16 Replies 3 Likes
प्रबंधन समिति,एक सुझाव है कि प्रतिदिन ब्लोग पोस्ट्स की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रति सदस्य एक दिन में ब्लॉग द्वारा रचना पोस्ट करने की संख्या निर्धारित कर दी जानी चाहिए क्योकि एक दिन में एक सदस्य द्वारा ४- ५ पोस्ट करने पर स्तरीयता कम होने का खतरा…Continue
Started by Dr.Prachi Singh. Last reply by Dr.Prachi Singh Nov 28, 2012. 2 Replies 0 Likes
आदरणीय एडमिन महोदय ,एक सुझाव रखना चाहती हूँ, शायद उचित लगे!जिस तरह से लेटेस्ट ब्लॉगस में सारी ब्लॉग पोस्ट मुख्य पृष्ठ से ही पता चल जाती हैं और हर पृष्ठ पर देख कर पाठक उन्हें सहजता से पढ़ सकते हैं, उसी तरह से सभी समूहों में पोस्ट की गयी प्रविष्टियों…Continue
Started by Dr.Prachi Singh. Last reply by कुमार गौरव अजीतेन्दु Oct 19, 2012. 4 Replies 2 Likes
छंदों को गेय उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करनें के सन्दर्भ में आदरणीय एडमिन महोदय,एक सुझाव देना चाहती हूँ जो भी सनातनी छंद हैं , जैसे दोहा, रोला, चौपाई, सवैया, सोरठा, रूपमाला... इन सबकी एक निश्चित गेयता होती है, पर यदि गेयता ही न मालूम हो कई…Continue
Started by विवेक मिश्र. Last reply by Saurabh Pandey Oct 5, 2012. 1 Reply 0 Likes
पिछले साल तक, ओबीओ के मुख्य पृष्ठ पर "गीत भूले बिसरे" नाम से एक कॉलम शुरू किया गया था, जिसमे कई महीनों तक पुराने और बेहतरीन गीतों की श्रृंखला शुरू की गयी थी. क्या उसे पुनः आरम्भ करने किए जाने की कोई संभावना है? व्यक्तिगत रूप से मेरा ऐसा मानना है कि…Continue
Started by Vipul Kumar. Last reply by Arun Srivastava Jul 4, 2012. 30 Replies 1 Like
नमस्कार अहबाब, मेरा सुझाव ये है तरही मुशायरे में ग़ज़लों की संख्या १ (या २) की जानी चाहिए.मैं समझता हूँ कि ग़ज़लों की संख्या बढाने के लिए ये नियम रखा गया होगा. लेकिन मेरी नज़र में ये नियम नए लिखने वालों की आदत बिगाड़ रहा है. वो २-३ दिन में ३ ग़ज़लें…Continue
Comment

//एमा रिसियाय वाली बात न बा। कउनो हम सबे भोजपुरी क विरोध थौरो करत बानी।//
हमरा मालूम बा ए भाई, जे रउआ सभे भोजपुरी के बिरोध ना आयोजन के बिस्तार चाहत बानी. .. :-)))
//इस आशा से निवेदन किया गया कि यहां बात सुनी जाती है। जो आयोजन है अति उत्तम है। आगे प्रयास होगा कि इसमें सम्मिलित हों। इस आयोजन को भी देखें, समझें।//
आप प्रारम्भ भी देखिये न कि कैसे और किस नींव पर हुआ है. आदरणीया मंजरी पाण्डेय जी, जिनकी रचना पुरस्कृत श्रेणी में सम्मिलित है उसकी भोजपुरी का कौन सा रूप है. ! भोजपुरी भाषा के किस स्वरूप को मान्यता मिली है. इसी का निवेदन मैं बार बार कर रहा हूँ
//जैसे अन्य समूह हैं वैसे ही आंचलिक भाषाओं का भी समूह हो। उसमें लोग अपनी आंचलिक भाषा की रचनायें पोस्ट करें और अन्य आंचलिक भाषाओं की रचनाओं पर भी टिप्पणी करें।//
देव ! .. .हाथ में कन्गना त आरसी के कवन खोइया ?.. दीपक तरे अन्हरिया ????
हे होता, आप समूह टैब को कभी क्लिक कर भी देखें.. . आह्याऽऽहि.... :-((((
हुज़ूर.. !!.

आदरणीय अरुण भाईजी, आपने सही ही विन्दुवत बातें की हैं.
लेकिन मेरा साग्रह अनुरोध है कि आप अबतक सम्पन्न दोनों आयोजन-सह-प्रतियोगिताओं के पृष्ठ एक बारी एक-एक कर पढ़ जायें. आदरणीय अशोक रक्ताले साहब, आदरणीया राजेश कुमारीजी, डॉ. प्राची आदि ने उन रचनाओं का आनन्द लिया है, जबकि इनमें से किसी को भोजपुरी का आदि ज्ञान भी नहीं है. रचनाएँ शब्दार्थ के साथ पोस्ट हुई हैं..
खैर सारी बातें बाद में. इससे पहले कि ऐडमिन का कोई यथोचित जवाब आये आप उन दोनों आयोजनों के पृष्ठ देख जायँ, आपको सहज मालूम होगा कि मेरा निेवेदन निरर्थक नहीं है.
सादर
पीएस: रउआ भोजपुरी में एक आदर सूचक सम्बोधन है जो हिन्दी के आप के समकक्ष है.
Comment by बृजेश नीरज 1 hour ago आदरणीय अरूण जी जैसे हम हिन्दी में ‘सभी लोग’ कहते हैं संभवतः उसी को भोजपुरी में ‘रउआ’ कहते हैं।
आदरणीय सौरभ जी एमा रिसियाय वाली बात न बा। कउनो हम सबे भोजपुरी क विरोध थौरो करत बानी।
एक संभावना दिखती है यहां। इस आशा से निवेदन किया गया कि यहां बात सुनी जाती है। जो आयोजन है अति उत्तम है। आगे प्रयास होगा कि इसमें सम्मिलित हों। इस आयोजन को भी देखें, समझें।
निवेदन को मैं विस्तार देना चाहता हूं। सर्वप्रथम मैं यह आग्रह करना चाहूंगा कि जैसे अन्य समूह हैं वैसे ही आंचलिक भाषाओं का भी समूह हो। उसमें लोग अपनी आंचलिक भाषा की रचनायें पोस्ट करें और अन्य आंचलिक भाषाओं की रचनाओं पर भी टिप्पणी करें।
आगे पूर्व में प्रस्तुत निवेदन उस रूप में स्वीकार्य योग्य है जैसा आदरणीय प्राची जी का सुझाव है।
सादर!
Comment by arun kumar nigam 2 hours ago आदरणीय सौरभ भाई जी, सुझाव देने के प्रति आशय मात्र इतना है कि
1.अपने अंचल की भाषा/बोली से सबको प्यार होता है. कौन भला इसे क्षेत्र की सीमाओं से परे नहीं ले जाना चाहेगा ?
2. माटी चाहे उत्तर की हो या दक्षिण की, पूरब की हो या पश्चिम की, इस पर जब बरखा की बूँदें पडती हैं तो सोंधी खुश्बू एक जैसी ही होती है.
3. अन्य अंचल की बोली/ भाषा सीखने का प्रयास सहज ही होगा.
4. ठेठ शब्दों के शब्दार्थ अवश्य ही दिये जाने चाहिये. अन्य भाषा/बोली का 90 प्रतिशत अक्सर समझ में आ जाता है.यथा..."
भोजपुरी साहित्य प्रेमी लोगन के सादर प्रणाम,
जइसन कि रउआ लोगन के खूब मालूम बा, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार अपना सुरुआते से साहित्य-समर्थन आ साहित्य-लेखन के प्रोत्साहित कर रहल बा ।
एही कड़ी में भोजपुरी साहित्य-लेखन विशेष क के काव्य-लेखन के प्रोत्साहित करे के उद्येश्य से रउआ सभ के सोझा एगो अनूठा आ अंतरजाल प भोजपुरी-साहित्य के क्षेत्र में अपना तरहा के एकलउता लाइव कार्यक्रम ले के आ रहल बा जवना के नाम बा "ओबीओ भोजपुरी काव्य प्रतियोगिता"
तीन दिन चले वाली ई ऑनलाइन प्रतियोगिता तिमाही होले, जवना खातिर एगो विषय भा शीर्षक दिहल जाला । एही आधार प भोजपुरी भाषा में पद्य-रचना करे के बा । एह काव्य प्रतियोगिता में रउआ सभे अंतरजाल के माध्यम से ऑनलाइन भाग ले सकत बानी अउर आपन भोजपुरी पद्य-रचना के लाइव प्रस्तुत क सकत बानी । साथहीं, प्रतिभागियन के रचना पर आपन मंतव्य दे सकत बानीं भा निकहा सार्थक टिप्पणी क सकत बानी |" इस पैरा में रउआ शब्द के अलावा सब कुछ समझ में आ रहा है. यदि रउआ मात्र का अर्थ पता चल जाए तो शत प्रतिशत समझ में आ जाएगा.
5.आदरेया प्राची जी का विकल्प भी स्वागतेय है, आभार.
6. आंचलिक पर कलम अपेक्षाकृत बहुत ही कम चल पाती है, इस बहाने उस पर भी रचनायें लिखने की आदत डल जाएगी.
7.सभी भाषा/बोली का संगम रहेगा तो हम हर अंचल की भाषा/बोली के काफी नजदीक आ पायेंगे.
8.भाई बृजेश नीरज जी की तरह भोजपुरी नहीं आने के कारण मैंने भी इस आयोजन को नहीं देखा.
9.//अभी तक सम्पन्न सभी भोजपुरी आयोजनों के सभी पन्ने /रचनाएँ/ टिप्पणियाँ किसने-किसने देखी/ पढ़ी है.? आयोजन में भोजपुरी का कौन सा स्वरूप अपनाया गया है इस पर कौन बोलेगा ? //
यदि अन्य भाषा/ बोली भी यहाँ हो तो सभी को पढ़ने के प्रति अपने आप ही रुचि जागेगी क्योंकि अन्य भाषा/ बोली की रचनाओं पर प्रतिक्रिया भी तो लिखनी पड़ेंगी.
सादर....
Comment by बृजेश नीरज 16 hours ago मैं यह स्वीकार करता हूं कि सभी आयोजनों की प्रविष्टियों को मैंने नहीं देखा। उसके पीछे कारण शायद यही था कि प्रतियोगिता भोजपुरी में थी और भोजपुरी मुझे आती नहीं।

पुनः, अभी तक सम्पन्न सभी भोजपुरी आयोजनों के सभी पन्ने /रचनाएँ/ टिप्पणियाँ किसने-किसने देखी/ पढ़ी है.? आयोजन में भोजपुरी का कौन सा स्वरूप अपनाया गया है इस पर कौन बोलेगा ?
मेरे उपरोक्त प्रश्न अभी तक अनुत्तरित हैं.
इसके दो अर्थ हैं, या तो इस प्रश्न का अभीष्ट ही स्पष्ट नहीं है, या, अभी तक सम्पन्न दोनों आयोजन-सह-प्रतियोगिताओं को इस चर्चा से जुड़े किसी पाठक ने निकट से नहीं देखा है. क्योंकि उक्त आयोजन-सह-प्रतियोगिता भोजपुरी में है.
अब ऐडमिन से अनुरोध है कि तथ्य-समृद्ध बातें हों जिसकी शुरुआत आदरणीया प्राचीजी ने की है.
सादर
Comment by vijay nikore yesterday आदरणीय एडमिन महोदय,
मेरे दिए हुए कल के निम्न comment में मैंने practicality के विषय पर ध्यान नहीं दिया था,
अत: मैं आदरणीया प्राची जी के कथन से सहमत हूँ कि यह सलाह //" प्रैक्टिकली एप्लीकेबल नहीं हो सकती"//
सादर,
विजय निकोर

आदरणीय एडमिन महोदय,
आदरणीय अरुण निगम जी की सलाह //ओबीओ भोजपुरी काव्य प्रतियोगिता को "ओबीओ भोजपुरी एवम् आंचलिक काव्य प्रतियोगिता" कर देने से अन्य अंचल के रचनाकार भी लाभान्वित होंगे और प्रतियोगिता अखिल भारतीय स्तर की हो जाएगी.// प्रथम दृष्टया तो बहुत सुन्दर और स्वागत योग्य प्रतीत हो रही है, पर यह प्रैक्टिकली एप्लीकेबल नहीं हो सकती...एक तो आँचलिक भाषाएँ अनगिन हैं..फिर हरियाणवी, जोधपुरी, कुमाऊंनी , कश्मीरी, गढ़वाली...आदि आदि सभी भाषाओं को एक ही आयोजन में सामान्य पाठक तो समझ भी तो नहीं सकते...तो उनमें कोई प्रतियोगिता तो संभव ही नहीं.
मेरे विचार से आँचलिक भाषाओं में लेखन को प्रोत्साहन देने के लिए एक उत्सव ज़रूर आयोजित किया जा सकता है.
सादर.
Comment by Kewal Prasad yesterday सम्मानीय एडमिन सर जी, सुप्रभात व सादर प्रणाम स्वीकार करें! सर जी, आज भोजपुरी ने पूरे भारत में अपनी एक अलग पहचान सरसता, सहजता और मधुरता के रूप में स्थापित कर लिया है। इसलिए भी आदरणीय अरून सर जी की बात को गंभीरता से लिए जाने का एक सुनहरा अवसर प्रतीत होता है।
मैं भी अरून निगम सर जी से सहमत हूं और उनके निम्न कथन का समर्थन करता हूं। कृपया मेरी सलाह पर विचार करेंगे,
१-ओबीओ भोजपुरी काव्य प्रतियोगिता को ’ओबीओ भोजपुरी एवम् आंचलिक काव्य प्रतियोगिता’ कर देने से अन्य अंचल के रचनाकार भी लाभान्वित होंगे और प्रतियोगिता अखिल भारतीय स्तर की हो जाएगी।
२-पुरस्कार प्रमाणपत्र के रूप में प्रदान किए जाने चाहिए।
आदर एवं सद्भावनाओं सहित। सादर,
Comment by वीनस केसरी on Monday मेरे विचार में आयोजन को समुचित विस्तार देने के लिए उचित निवेदन किया गया है
अरुण निगम जी का सुझाव सुन्दर है
सादर
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