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satish mapatpuri
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satish mapatpuri's Discussions

ज्योति पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
3 Replies

ढोल-मजीरा , नाल-पखावज, शहनाई-मृदंग  राग-रागिनी, गायन-वादन , नृत्य-ताल और छंद .गीत, ग़ज़ल ,कविता सी लगती , है सबको हर बार दिवाली   नई उमंगें - नई उम्मीदें, ले आती हर बार दिवाली.        ---- सतीश…Continue

Started this discussion. Last reply by tejwani girdhar Nov 16, 2012.

जॉय मुखर्जी को श्रद्धांजलि
3 Replies

शागिर्द , लव इन टोकियो ,…Continue

Started this discussion. Last reply by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी Mar 11, 2012.

BIG BOSS
3 Replies

जरुरी नहीं कि हर विदेशी प्रोग्राम का हिंदी संस्करण हो. पोर्न स्टार के बल पर BIG BOSS की जरुरत नहीं है.मुझे याद है, जब अमिताभ बच्चन इस कार्यक्रम को HOST  कर रहे थे तो ऐसी कोई अश्लीलता नहीं…Continue

Started this discussion. Last reply by Afsos Ghazipuri Nov 27, 2011.

 

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"प्रदत्त छंद पर अति सुन्दर गीत .... बधाई आदरणीय"
17 hours ago
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"सुन्दर रचना के लिये बधाई आदरणीय सतविंद्र जी "
17 hours ago
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"कुछ भी नहीं अछूता उससे , करती है हर काम वाह .. वाह ... चित्र पर उत्तम सृजन ... बधाई आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी"
17 hours ago
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"शुक्रिया आदरणीया प्रतिभा जी .... नमन ।"
17 hours ago
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"आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया से बल मिला है आदरणीय अशोक जी .... सादर नमन"
17 hours ago
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"नमन आदरणीय"
17 hours ago
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"सादर आभार आदरणीय सतविंद्र जी"
17 hours ago
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"आपकी सराहना पाकर रचना का मान एवम मेरा हौसला बढ़ गया है आदरणीय कबीर साहेब .. सादर नमन"
17 hours ago
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"हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी "
18 hours ago
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"हौसला अफ़ज़ाई के लिये नत हूँ आदरणीय "
18 hours ago
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"राउर बतिया से छतिया जुड़ा गइल .... नेह छोह बनवले राखब ..... दसो नोह् जोड़ के परनाम ।"
18 hours ago
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"आपका सुझाव सर आँखों पर आदरणीय श्रीवास्तव साहेब ..... सराहना के लिए नमन ।"
18 hours ago
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"ज़नाब तस्दीक साहेब , आदाब , आपकीं सराहना पाकर उत्साहित हूँ .... शुक्रिया ।"
18 hours ago
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" मुहतरिम ज़नाब आरिफ साहेब , आदाब , आपकीं स्नेहिल टिप्पणी से अभिभूत हूँ .... सादर आभार ।"
18 hours ago
satish mapatpuri replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 78 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छंद बेटी अब कमजोर नहीं है , नहीं सिरस का फूल । शर्म - हया की देवी है वह , मगर वक़्त पर शूल । घर से कोसों दूर भले है , वही तमीज शऊर । कम्प्यूटर पर दीप जलाती , संस्कार भरपूर । हर भाषा औ भाव समझती , मूढ़ नहीं अब नार । समय आज हैरान देखकर , प्रतिभा…"
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satish mapatpuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"दिल से आभार आदरणीय सुरेन्द्र जी ... नमन ."
Oct 14

Profile Information

Gender
Male
City State
patna, Bihar
Native Place
Patna
Profession
Deputy Director (administration & account) at BIHAR BOARD OF OPEN SCHOOLING & EXAMINATION
About me
My Self Is Satish Mapatpuri.I am Lyricist &Writer.Having 25 years Experience In this Field.

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Satish mapatpuri's Blog

अगर पूर्वजों के सहारे न होते .

अगर रंग - बिरंगे ये नारे न होते.
तो फिर हम भी इतने बेचारे न होते .
बस बातों के मरहम से भर जाते शायद .
अगर ज़ख्म दिल के करारे न होते .
भला किसकी हिम्मत सितम ढा सके यूँ .
अगर हम जो आदत बिगाड़े न होते .
कहीं ना कहीं से तो शह मिल रहा है .
निर्भया के बसन यूँ उतारे न होते .
मिट जाती  कब की  ये रस्मोरिवाज़ें .
अगर पूर्वजों के सहारे  न होते .
  
मौलिक और अप्रकाशित
सतीश मापतपुरी

Posted on September 20, 2015 at 10:00pm — 3 Comments

गुरुवर तुम्हें नमन है ( शिक्षक दिवस पर विशेष )

 

जिसने बताया हमको , लिखना हमारा नाम .

जिसने सिखाया हमको , कविता ,ग़ज़ल -कलाम .

समझाया जिसने हमको , दीने -धरम ,ईमान .

जिसने कहा कि एक है ,कह लो रहीम - राम .

भगवान से भी पहले ,करता नमन उन्हीं को .

मानों तो हैं  खुदा वो , ना मानों तो हैं आम .…

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Posted on September 5, 2012 at 3:46am — 18 Comments

गुनाहगार बनाया क्यों ?

 

ऐ मालिक ! बता दे तू , कि बहार बनाया क्यों ?

गर बहार बना था , तो उजाड़ बनाया क्यों ?

चमन में खिलती हैं कलियाँ , कली से नेह भौरों को .

पर भंवरे काँप उठे उस वक़्त , आखिर खार बनाया क्यों ?

जुदाई प्यार की मंजिल , तड़पना दिल को पड़ता है .

दिवाना कहती है दुनिया , तो फिर यह  प्यार बनाया क्यों ?

मिलन की चाह होती है , मिलन होता मुकद्दर से .

तो मिलकर क्यों बिछड़ते हैं , आखिर दीदार बनाया क्यों ?

अगर मापतपुरी जालिम  , तो उस पे कर करम मौला .

ख़ता…

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Posted on August 31, 2012 at 2:15am — 4 Comments

कबीरा खड़ा बाजार में

 [ एक ]

कठपुतली भी हँस रही, देख मनुज का हाल.

सबसे बड़ा मदारी वो , लिखे जो सबका भाल.

कौन नचाता है किसे, क्या इसका परमान.

सबकी डोर पे पकड़ जिसे, कहते कृपानिधान.

 जिस उर में लालच बसे ,वहाँ कहाँ ईमान .

देय वस्तु पर नेह जिसे , सबसे बड़ा नादान.

जीवन गगरी माटी की , जिसका करम कोंहार .

सरग - नरक येही ठौर है , जिसका जस व्यवहार .

देने वाले ने दिया , एक सूर्य और सोम .

किन्तु मनुज ने बाँट ली , धरती नदियाँ व्योम .

कहत अभागा नियति का , नीयत नियत…

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Posted on August 3, 2012 at 1:27am — 6 Comments

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At 11:42pm on May 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

At 1:57pm on May 18, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिवस की मंगलमय हार्दिक शुभकामनाए 

At 11:02am on September 10, 2012, SANDEEP KUMAR PATEL said…

आदरणीया satish sir ji  सादर प्रणाम
ग़ज़ल को पसंद करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सहित सादर आभार

At 3:26am on May 19, 2012,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

राउर जनमदिन के हमरा ओरि से ढेरम्ढेर मुबारकबादी, भाईजी.. . 

दुका ना दुका में अतना अझुराइल रहुईं, ए भइया, जे कुबेरा भऽ गइल. ओबिओ पर हमार हेने लकम से ना आवल अतना बुझवा देले रहे जे हमार सतीश भाई पिपिताइल होइहें. भाई, पित्ता-पित्ती फरिका, पहिले दिल के कोरी आ भावना का ओरी से बड़हन बधाई.. . 

सादर

At 11:12pm on May 18, 2012, CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' said…
जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं सर जी
At 11:52am on May 18, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 7:07pm on April 12, 2012, Sarita Sinha said…

satish ji namaskar, 

kavita ki sarahna ke liye aap ka dhanyvad.....

At 8:58pm on January 2, 2012, Mukesh Kumar Saxena said…

मै आपका बहुत ही आभारी हूँ की आपने मेरी कविता की सराहना करके मेरा उत्साह वर्धन किया

At 9:30am on August 2, 2011, Abhinav Arun said…

माह की श्रेष्ठ रचना चयन पर हार्दिक बधाई स्वीकारें सतीश जी !

At 1:56pm on July 7, 2011, Rash Bihari Ravi said…
आपकी रचना मानसरोवर-१ को महीने का सर्व्श्रेस्थ रचना चुने जाने पर बहुत बहुत बधाई...
 
 
 

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