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Mukesh Kumar Saxena's Page

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Mukesh Kumar Saxena commented on Shubhranshu Pandey's blog post और मैं कवि बन गया (हास्य) / शुभ्रांशु
"BHAI EK SHABD ME KAHU TO LAZABAAB."
May 6
Mukesh Kumar Saxena and Kumar Gaurav Ajeetendu are now friends
May 5
Kumar Gaurav Ajeetendu commented on Mukesh Kumar Saxena's blog post परिदृश्य
"मुकेश जी सादर प्रणाम ! आज के लोगों की मानसिकता को दर्शाती रचना. बधाई."
May 5
Mukesh Kumar Saxena commented on Kumar Gaurav Ajeetendu's blog post शोषित है तू...
"bhai ji dil ko chhoo lene bali rachna hai. Badhai"
May 4
Mukesh Kumar Saxena liked Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
May 4
Mukesh Kumar Saxena commented on SHAILENDRA KUMAR SINGH 'MRIDU''s blog post निष्काम कर्म
"कर्म में यह भावना हो तो कोई बात बने । निष्काम हर कामना हो तो कोई बात बने ।"
Apr 30
Mukesh Kumar Saxena left a comment for SHAILENDRA KUMAR SINGH 'MRIDU'
"धन्य बाद मृदु जी । दोस्त तो वहुत मुश्किल से मिलते है "
Apr 30
Mukesh Kumar Saxena and SHAILENDRA KUMAR SINGH 'MRIDU' are now friends
Apr 30
Mukesh Kumar Saxena replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २२
"जिसके लिए मेरा यह दिलो-जां निसार है । मै जानता हूँ उनको भी मुझसे ही प्यार है । देने बाले की नज़रें शर्म से झुकी हुई, है शान से वो चल रहे जो कर्ज़दार है । नज़रे चुरा के जा रहे जो ख़ास यार है । यह हाल तब से है जबसे दिया उधार…"
Apr 30
Mukesh Kumar Saxena commented on Admin's group सुझाव एवं शिकायत
"sir why my blog post is not approoved .post MACHCHHRALAAP SINCE 2045 HRS. DT. 20 APR .2012."
Apr 22
Mukesh Kumar Saxena commented on Admin's group सुझाव एवं शिकायत
"sir why my blog post is not approoved .post MACHCHHRALAAP SINCE 2045 HRS. DT. 20 APR .2012."
Apr 22
Mukesh Kumar Saxena commented on Rohit Sharma's blog post मुठभेड़
"kadva sach yahi to hai"
Apr 21
Mukesh Kumar Saxena is now friends with SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR and मनोज कुमार सिंह 'मयंक'
Apr 21
Mukesh Kumar Saxena left a comment for SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR
"BHRAMAR JI.NYOCHABAR HONE KI TAMANNA YADI DONO OR SE NA HO TO SHOSHAN KA SIKAAR BANNA PADTA HAI .aapki sarahna ke liye dhanyabad."
Apr 10
Mukesh Kumar Saxena left a comment for मनोज कुमार सिंह 'मयंक'
"manoj mayank ji mai dharm par apki pritkriya ka intzaar kar raha hun kyu ki dharmik charcha se oorja milti hai. Muje karna nahi aata is liye mujhe frnd req kariye"
Apr 10
Mukesh Kumar Saxena replied to मनोज कुमार सिंह 'मयंक''s discussion धर्म एक बस अग्नि धर्म है/जो आवे सो क्षार| in the group धार्मिक साहित्य
"प्रिय मयंक जी , सर्व प्रथम मै आपके ज्ञान के अध्यन को नमन करता हूँ की आपने इस उम्र में इतना ज्ञान अर्जन किया है फिर मै आपके लेख के अनुसार कुछ बातों में अपनी व्याख्य देना चाहता हूँ की :-  मनुष्य जन्म के लिए देवता भी तरसते…"
Apr 9

Profile Information

Gender
Male
City State
Jammu
Native Place
Haridwar
Profession
govt Job

आँसू

आँसू

तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ .
                              तेरे दामन को भिगो दूं उसी में ज़ज़्ब हो जाऊ.

जन्म लूँ आँख में तेरी बहू मैं गाल पे तेरे.

तेरे होठो को छू लूँ मैं होंठ छूते ही मर जाऊ
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू
मैं बन जाऊ .

अगर मैं आँख में निकलू नज़ारे धुँधले हो जाए .
मुझे ही देख पाओ तुम तुम्हें मैं ही नज़र आऊ.
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू
मैं बन जाऊ .

कभी ऐसा भी हो निकलू मैं और पलकें बंद तुम कर लो.
अंधेरा हो घना और मैं सुख की नींद सो जाऊ .

तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू
मैं बन जाऊ .

Mukesh Kumar Saxena's Blog

परिदृश्य

Posted on April 6, 2012 at 1:00pm 8 Comments

परिदृश्य

  

(1)

फर्क 

दो लड़कियां दोनों ही सुन्दर , 

उम्र थी सत्रह से…

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मोबाइल घर

Posted on March 14, 2012 at 8:00pm 5 Comments

मोबाइल घर

(दोस्तों हम लोगों की एक जमात से बन गयी है जहाँ एक कवि लिखता है और दूसरा पढता है मंझे हुए कवि मंझी हुई कविता  सब कुछ एकदम प्रोफेशनल मगर कोई स्थिति जिसको आप ने देखा हो और आपके दिल में अन्दर तक उतर गयी हो उस विषय पर जब आप लिखते हैं तो बात कुछ और…

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भरत की व्यथा

Posted on February 4, 2012 at 8:51pm 5 Comments

            

भरत की व्यथा 

घनी अंधियारी  काली रात ।

सूझता नहीं हाथ को हाथ ।

घोर सन्नाटा सा है व्याप्त ।

नहीं है वायु भी पर्याप्त ।



नहीं है काबू में अब मन ।

हुआ है  जब से राम गमन ।

भटकते होंगे वन और वन ।

सोंच यह व्याकुल होता मन ।



नगर से बाहर सरयू…

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आँसू

Posted on January 28, 2012 at 7:30pm 3 Comments

आँसू



तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ .

तेरे दामन को भिगो दूं उसी में ज़ज़्ब हो जाऊ.



जन्म लूँ आँख में तेरी बहू मैं गाल पे तेरे.

तेरे होठो को छू लूँ मैं होंठ छूते ही मर जाऊ

तमन्ना है तुम्हारी…
Continue

Comment Wall (2 comments)

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At 12:23am on April 9, 2012, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जन्म लूँ आँख में तेरी बहू मैं गाल पे तेरे. 
तेरे होठो को छू लूँ मैं होंठ छूते ही मर जाऊ 
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ . 

मुकेश जी प्रेम में तमन्ना भी अजीब होती हैं निछावर और समर्पण की बहुत खूब ..सुन्दर प्रस्तुति  ..जय श्री राधे 

भ्रमर ५ 


At 9:05pm on December 24, 2011, Admin said…

 
 
 

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