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Mukesh Kumar Saxena replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २२
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Mukesh Kumar Saxena is now friends with SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR and मनोज कुमार सिंह 'मयंक'
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Mukesh Kumar Saxena replied to मनोज कुमार सिंह 'मयंक''s discussion धर्म एक बस अग्नि धर्म है/जो आवे सो क्षार| in the group धार्मिक साहित्यआँसू
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ .
तेरे दामन को भिगो दूं उसी में ज़ज़्ब हो जाऊ.
जन्म लूँ आँख में तेरी बहू मैं गाल पे तेरे.
तेरे होठो को छू लूँ मैं होंठ छूते ही मर जाऊ
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू
मैं बन जाऊ .
अगर मैं आँख में निकलू नज़ारे धुँधले हो जाए .
मुझे ही देख पाओ तुम तुम्हें मैं ही नज़र आऊ.
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू
मैं बन जाऊ .
कभी ऐसा भी हो निकलू मैं और पलकें बंद तुम कर लो.
अंधेरा हो घना और मैं सुख की नींद सो जाऊ .
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू
मैं बन जाऊ .
Posted on March 14, 2012 at 8:00pm 5 Comments 1 Like
मोबाइल घर
(दोस्तों हम लोगों की एक जमात से बन गयी है जहाँ एक कवि लिखता है और दूसरा पढता है मंझे हुए कवि मंझी हुई कविता सब कुछ एकदम प्रोफेशनल मगर कोई स्थिति जिसको आप ने देखा हो और आपके दिल में अन्दर तक उतर गयी हो उस विषय पर जब आप लिखते हैं तो बात कुछ और…
ContinuePosted on February 4, 2012 at 8:51pm 5 Comments 0 Likes
भरत की व्यथा
घनी अंधियारी काली रात ।
सूझता नहीं हाथ को हाथ ।
घोर सन्नाटा सा है व्याप्त ।
नहीं है वायु भी पर्याप्त ।
नहीं है काबू में अब मन ।
हुआ है जब से राम गमन ।
भटकते होंगे वन और वन ।
सोंच यह व्याकुल होता मन ।
नगर से बाहर सरयू…
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SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said… जन्म लूँ आँख में तेरी बहू मैं गाल पे तेरे.
तेरे होठो को छू लूँ मैं होंठ छूते ही मर जाऊ
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ .
मुकेश जी प्रेम में तमन्ना भी अजीब होती हैं निछावर और समर्पण की बहुत खूब ..सुन्दर प्रस्तुति ..जय श्री राधे
Admin said… आवश्यक सूचना:-
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